Punjab
पंजाब ट्रेडर्स कमीशन ने बुधवार को व्यापारियों की समस्याएं सुनने के लिए की 9 जिलों में बैठकें, ज़्यादातर मुद्दों का मौके पर ही किया निपटारा
Punjab Traders Commission पूरे राज्य में जिला स्तर पर बैठकें आयोजित कर व्यापारियों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों की समस्याओं को सीधे सुन रहा है। इन बैठकों का उद्देश्य संबंधित विभागों के साथ तालमेल बनाकर मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि व्यापारियों को त्वरित राहत मिल सके।
बुधवार को Sri Muktsar Sahib, Hoshiarpur, Jalandhar, Kapurthala, Shaheed Bhagat Singh Nagar, Amritsar, Gurdaspur, Pathankot और Tarn Taran में बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में ट्रेडर्स कमीशन के सदस्य, स्थानीय विधायक और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, जिससे जवाबदेही और बेहतर समन्वय के साथ मुद्दों का समाधान किया जा सके।
पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता Harpal Singh Cheema ने कहा कि पंजाब ट्रेडर्स कमीशन केवल औपचारिक बैठकें नहीं कर रहा, बल्कि एक व्यावहारिक मंच की तरह कार्य कर रहा है। यहां व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जा रहा है और अधिकांश मामलों में मौके पर ही समाधान किया जा रहा है। जिन मामलों का तुरंत निपटारा संभव नहीं होता, उन्हें उचित फॉलो-अप के लिए संबंधित विभागों को भेजा जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाकर अपना कामकाजी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। जिला स्तर की ये बैठकें उनके समय, श्रम और अनावश्यक भागदौड़ को बचाने का माध्यम बन रही हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह मान सरकार का शासन मॉडल है—लोगों की बात सुनना, समस्याओं का त्वरित समाधान करना और यह सुनिश्चित करना कि जहां विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता हो, वहां व्यापारी को भटकना न पड़े, बल्कि संबंधित अधिकारी स्वयं पहल करें।
उन्होंने कहा कि पंजाब का व्यापारी वर्ग राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और वह ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था का हकदार है जो उसके समय का सम्मान करे तथा उसके कार्य में सहयोग दे।
आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी यह सलाह-मशविरा जारी रहेगा। पंजाब ट्रेडर्स कमीशन व्यापारी वर्ग और सरकार के बीच एक मजबूत एवं प्रभावशाली सेतु के रूप में कार्य कर रहा है और राज्य के हर बड़े और छोटे बाजार को कवर करने की दिशा में बैठकें आयोजित करता रहेगा।
Punjab
Punjab : मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी बेटे की सबसे बड़ी ताकत, सरकार ने कराया कैंसर का इलाज
पटियाला के रहने वाले गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले अचानक ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गई, जहां हर रास्ता मुश्किल नजर आ रहा था। 65 साल की उनकी मां, बलजीत कौर, धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ रही थीं। एक बेटे के लिए यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि हर दिन टूटती उम्मीदों का दर्द था। पहले निजी डॉक्टरों के चक्कर लगे, फिर राजिंदरा अस्पताल, पटियाला का सहारा लिया गया। दवाइयां चलीं, टेस्ट हुए, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और गंभीर होते गए। जब रिपोर्ट आई, तो जैसे आसमान ही टूट पड़ा, मां को बच्चेदानी का कैंसर था।
गुरपिंदर के लिए यह सिर्फ एक बीमारी नहीं थी, यह उस मां की जिंदगी का सवाल था जिसने उसे जन्म दिया, पाला-पोसा। बिना देर किए वह मां को संगरूर स्थित टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल ले गए। इलाज शुरू हुआ, लेकिन पहले ही झटके में 60-65 हजार रुपये खर्च हो गए। एक ड्राइवर की सीमित कमाई के सामने यह रकम पहाड़ जैसी थी।
सरकार ने कराया इलाज
गुरपिंदर के मन में एक ही सवाल था,“मां को कैसे बचाऊं?”कर्ज लेने तक की नौबत आ चुकी थी। तभी, जैसे अंधेरे में एक रोशनी की किरण आई। अस्पताल में ही एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें मुख्यमंत्री सेहत योजना के बारे में बताया। उम्मीद की एक नई डोर थामते हुए गुरपिंदर ने वहीं रजिस्ट्रेशन करवाया। कुछ ही समय में उनके मोबाइल पर मैसेज आया और स्मार्ट कार्ड बन गया। इसके बाद जो हुआ, वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। लाखों रुपये का इलाज, जिसमें महंगे टेस्ट, बार-बार कीमोथेरेपी, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर और अस्पताल में रहने-खाने तक का खर्च शामिल था, सब कुछ सरकार ने उठाया।
आसान नहीं था कैंसर का इलाज
गुरपिंदर की आंखें भर आती हैं जब वह कहते हैं, “मां तो मां होती है, उसे हर हाल में बचाना था। पैसे नहीं थे, लेकिन भगवान ने इस योजना के रूप में रास्ता दिखा दिया।” डॉक्टरों के लिए भी यह केस चुनौतीपूर्ण था। कैंसर बच्चेदानी से बढ़कर लीवर और फेफड़ों तक पहुंच चुका था। पहले तीन बार कीमोथेरेपी दी गई, लेकिन शरीर कमजोर होने के कारण दुष्प्रभाव सामने आए। फिर धीरे-धीरे डोज कम कर नौ और कीमोथेरेपी दी गई। इलाज के बाद ट्यूमर एक जगह सिमट गया और डॉक्टरों ने करीब आठ घंटे लंबा ऑपरेशन कर उसे निकाल दिया। 35 से 40 टांकों के साथ मां ने दर्द सहा, लेकिन जिंदगी की डोर थामे रखी। ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिन आईसीयू और वेंटिलेटर पर रहीं, फिर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
इलाज में 8 लाख से ज्यादा खर्च
गुरपिंदर हर पल मां के पास बैठे रहते, कभी दवा देते, कभी सिर सहलाते। आठ दिन अस्पताल में गुजारने के बाद जब मां की हालत सुधरने लगी, तो जैसे उनकी दुनिया वापस लौट आई। यह सफर आज भी जारी है, आगे के इलाज और जांच के लिए उन्हें मुल्लांपुर स्थित अस्पताल में फॉलोअप के लिए जाना है। कुछ दवाइयां जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, उनका खर्च गुरपिंदर ने खुद उठाया, लेकिन बाकी पूरा इलाज योजना के तहत मुफ्त हुआ। अस्पताल में गायनेकोलॉजी की डॉ शिवाली ने सर्जरी के डॉक्टरों के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। टाटा मेमोरियल के डॉक्टरों के मुताबिक इस सर्जरी एवं दवा इत्यादि में 8 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च हुआ है।
सरकार ने हमें उम्मीद दी- गुरपिंदर
दो बच्चों के पिता और एक साधारण ड्राइवर गुरपिंदर के लिए यह राहत शब्दों से परे है। वह कहते हैं, “अब सुकून है कि मां बिना इलाज के नहीं मरेगी, सरकार ने हमें उम्मीद दी है।” यह सिर्फ एक इलाज की कहानी नहीं, बल्कि एक बेटे के संघर्ष, उसका मां के प्रति प्रेम और एक ऐसी योजना की कहानी है, जिसने मुश्किल वक्त में सहारा बनकर एक परिवार को टूटने से बचा लिया।
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बेअदबी पर देश का सबसे सख्त कानून मंजूर…, क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन 2026 ?
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की साजिश की या बेअदबी की तो अब दोषी को 10 वर्ष से लेकर उम्र कैद की सजा हो सकती है। क्योंकि 13 अप्रैल को पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में सर्वसम्मति से पास किया गया ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मंजूरी दे दी है।
इस संबंधी जानकारी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद दी है। नीदरलैंड दौरे पर गए मुख्यमंत्री राज्यपाल द्वारा बिल को मंजूरी देने पर धन्यवाद किया है। विधान सभा में बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गारंटी दी थी अब कोई पांचवां बिल नहीं आएगा। बता दें कि इस बिल से पहले तीन बार पहले ही बेअदबी की सजा का बिल पेश हो चुका था।
इस बिल में बेअदबी के लिए कम से कम सात साल की कैद (जिसे बढ़ाकर 20 साल तक किया जा सकता है) और 2 लाख से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान करता है। वहीं, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साज़िश के तहत की गई बेअदबी के लिए और भी कड़ी सज़ाएं तय की गई हैं, जिनमें उम्रकैद (ता-उम्र) और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था।
बिल को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं
पंजाब सरकार ने दावा किया था कि यह स्टेट बिल है। इसलिए इसे राज्यपाल को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि विपक्षीय पार्टियां इस बात की आशंका जता रही थी की राज्यपाल इस बिल को राष्ट्रपति को भेज सकते हैं।
क्या हैं संशोधन
इस संशोधन के ज़रिए प्रस्तावना के शुरुआती पैराग्राफ़ को बदला गया है। इसका मकसद इस बात पर जोर देना है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या उसके द्वारा अधिकृत किसी अन्य संस्था के अलावा, कोई भी अन्य संस्था स्वरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण, वितरण या आपूर्ति न करे।
यह सिख रहत मर्यादा (सिख आचार संहिता और रीति-रिवाजों) के अनुसार पवित्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देता है, साथ ही यह अपवित्रीकरण को परिभाषित करता है, उसके लिए दंड का प्रावधान करता है, और एक ऐसा “निवारक ढांचा” तैयार करता है।
अपवित्रता की परिभाषा
यह रिकॉर्ड को प्रिंटिंग, स्टोरेज और वितरण से संबंधित मैनुअल और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों तरह के दस्तावेज़ों के रूप में भी परिभाषित करता है। साथ ही, यह ‘अपवित्रता’ को किसी भी जान-बूझकर और सोची-समझी गई अपमानजनक कार्रवाई के रूप में विस्तार से बताता है।
जिसमें अंग को जलाने, फाड़ने या चोरी करने जैसे भौतिक नुकसान से लेकर, बोलने, लिखने, प्रतीकात्मक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की गई ऐसी हरकतें शामिल हैं जो सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हों।
एक नई धारा 3A एसजीपीसी को सभी स्वरूपों का एक केंद्रीय रजिस्टर रखने का आदेश देती है। इस रजिस्टर में हर स्वरूप को एक खास पहचान संख्या दी जाएगी और प्रिंटिंग की तारीख, आपूर्ति की जगह, स्टोरेज की जगह और संरक्षक की पहचान जैसे विवरण दर्ज किए जाएंगे।
इस रजिस्टर को भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों रूपों में रखा जाना है। अधिनियम के लागू होने के 45 दिनों के भीतर इसे एसजीपीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए, और हर महीने इसमें अनिवार्य रूप से अपडेट किए जाने चाहिए, जिन्हें किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया हो।
संरक्षकों के कर्तव्यों और दंड की परिभाषा
धारा 3B के माध्यम से, इस संशोधन ने संरक्षकों के कर्तव्यों को परिभाषित किया है। इसके तहत संरक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वरूप सुरक्षित अभिरक्षा में रहें, उनका दुरुपयोग या उन्हें नुकसान न पहुंचे, और वे ‘सिख रहत मर्यादा’ का सख्ती से पालन करें। नुकसान, गायब होने या अपवित्रता के किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत पुलिस अधिकारियों और संबंधित प्रबंधन निकाय को दी जानी चाहिए।
कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की अपवित्रता का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। इस कारावास की अवधि 7 वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन इसे बढ़ाकर 20 वर्ष तक किया जा सकता है। साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 2 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक किया जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति जो आपराधिक षड्यंत्र के तहत, शांति या सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के इरादे से, इस अधिनियम के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की अपवित्रता का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। इस कारावास की अवधि 10 वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है। साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 5 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये तक किया जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत किसी अपराध को करने में सहायता करता है, उसे उसी दंड का भागीदार माना जाएगा जो उस अपराध के लिए निर्धारित है, जिसमें उसने सहायता की है। कोई भी व्यक्ति जो इस एक्ट के तहत कोई अपराध करने की कोशिश करता है, उसे किसी भी तरह की जेल की सज़ा दी जाएगी, जो तीन साल से कम नहीं होगी, लेकिन पांच साल तक बढ़ सकती है।
उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 1 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन 3 लाख रुपये तक बढ़ सकता है। वहीं, बेअदबी करने वाला अगर मनोरोगी या मानसिक स्थिति ठीक होने की बात कहता हैं तो उसकी बाकायदा जांच होगी।
ऑफिशियल गैजेट में नोटिफिकेशन के बाद लागू होगा
यह कानून तब लागू होगा जब सरकार इसे ऑफिशियल गैजेट में नोटिफाई करेगी। 2008 के कानून को पूरी तरह से बदलने के बजाय उसमें संशोधन करके, सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की सुरक्षा, कस्टडी और पवित्रता के लिए एक ज़्यादा सख़्त और व्यवस्थित कानूनी ढांचा बनाने की कोशिश की है।
बेअदबी पर तीसरा बिल
पंजाब में पहले भी 2016 और 2018 में अपमान से जुड़े दो बिल पेश किए जा चुके हैं। 2016 के प्रस्ताव में गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए उम्रकैद और दूसरे धार्मिक ग्रंथों के लिए 10 साल की सज़ा का प्रावधान था। इसे केंद्र सरकार ने कुछ आपत्तियों के साथ वापस भेज दिया था। केंद्र का कहना था कि यह बिल अलग-अलग धर्मों में एक जैसे अपराधों के लिए अलग-अलग सज़ा का प्रावधान करता है।
2018 में, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार ने इस बिल में संशोधन करके सभी धर्मों को एक समान रूप से शामिल किया था, लेकिन राष्ट्रपति की मंज़ूरी न मिलने के कारण यह बिल पिछले आठ सालों से पेंडिंग पड़ा हुआ है।
सोमवार को पेश किया गया बिल पूरी तरह से गुरु ग्रंथ साहिब पर केंद्रित है। सरकार ने सिख धर्मशास्त्र पर आधारित अपना पक्ष रखा है, जिसके अनुसार यह पवित्र ग्रंथ ही सिखों के सजीव गुरु है। मुख्यमंत्री मान पहले ही कह चुके हैं कि यह नया बिल एक ‘राज्य कानून’ होगा और इसके लिए शायद राष्ट्रपति की मंज़ूरी की ज़रूरत न पड़े। उन्होंने कहा कि इसके लिए सिर्फ़ राज्यपाल की मंज़ूरी ही काफी होगी।
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Punjab में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लागू, राज्यपाल की मंजूरी
जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026 को राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी करने वाले को उम्र कैद की सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट डाल कर दी जानकारी दी है।
पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं।
बेअदबी गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया
इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी।
संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा।
संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।
रही है कि भविष्य में बेअदबी के मामलों में कमी आएगी और दोषियों के खिलाफ त्वरित एवं सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
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