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Punjab बनेगा देश का Semiconductor Hub: CM Bhagwant Mann

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ कर दिया है कि राज्य को देश का सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए पंजाब सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। शनिवार को चंडीगढ़ में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ हुई अहम बैठक में उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप्स की अहमियत सबसे ज्यादा है, क्योंकि ये लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का दिल होती हैं।

पंजाब सेमीकंडक्टर का नया ठिकाना

मुख्यमंत्री मान ने बताया कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री कई क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी है – जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव (वाहन उद्योग), इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, टेलीकॉम, एयरोस्पेस और डिफेंस, एनर्जी, मेडिकल डिवाइस, डेटा सेंटर्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्मार्ट डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से सेमीकंडक्टर का ग्लोबल हब बन रहा है, और पंजाब भी इस सफर में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।

इंडस्ट्री को मिलेगा पूरा सपोर्ट

CM मान ने कहा कि पंजाब में इस सेक्टर में जबरदस्त संभावनाएं हैं। राज्य सरकार इन संभावनाओं का फायदा उठाकर पंजाब को आर्थिक रूप से और मजबूत करना चाहती है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि इंडस्ट्री को पूरा सरकारी सहयोग मिलेगा – चाहे वो मोहाली और आसपास एक समर्पित सेमीकंडक्टर पार्क बनाना हो या ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना।

क्यों है पंजाब बेहतर जगह?

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में पहले से ही कई फायदे हैं –
इंडस्ट्री-फ्रेंडली माहौल
कुशल और पढ़ा-लिखा मानव संसाधन
आसान निवेश प्रक्रिया
बेहतर सुविधाएं

उन्होंने कहा, “सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री न सिर्फ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार के मौके भी देगी।”

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

इस मौके पर उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा, उद्योग सचिव के.के. यादव, इनवेस्ट पंजाब के सीईओ अमित ढाका और कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे।

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Politics

पंजाब सरकार ने हर मंच पर RDF का मुद्दा उठाया, लेकिन केंद्र अभी भी किसानों के पैसे रोके बैठा है: हरपाल सिंह चीमा

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस बयान को कि ‘पंजाब के किसी भी मंत्री ने कभी भी सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएफ) के पैसे के लिए संपर्क नहीं किया’ बहुत गैर-जिम्मेदाराना, गुमराह करने वाला और सरासर झूठ बताया है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता झूठ बोलने में माहिर हैं और जनता के सामने हर बात को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। उन्होंने साफ किया कि पंजाब सरकार ने लगातार और हर प्लेटफॉर्म पर केंद्र सरकार के सामने आरडीएफ फंड का मुद्दा उठाया है।

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए हरपाल चीमा ने आंकड़ों और मीटिंग्स की जानकारी देते हुए कहा कि 28 नवंबर 2024 को उन्होंने खुद कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारूचक के साथ केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की थी और 3 प्रतिशत आरडीएफ का पैसा जारी करने की मांग की थी। इसके अलावा 17 जुलाई को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की थी और यही मांग दोहराई थी। 10 जनवरी को वित्त मंत्री चीमा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की, जिसके बाद मुख्यमंत्री मान ने 17 जनवरी को वित्त मंत्रीअमित शाह से मुलाकात की। 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री फिर कंज्यूमर अफेयर्स और फूड मंत्री प्रहलाद जोशी से मिले और 30 जून को वित्त मंत्री चीमा ने फिर निर्मला सीतारमण से फंड जारी करने की रिक्वेस्ट की।

उन्होंने आगे बताया कि पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने भी लेटर लिखकर केंद्र सरकार को डिमांड भेजी थी। इसके अलावा, जीएसटी काउंसिल की मीटिंग्स में भी यह मुद्दा निर्मला सीतारमण के सामने उठाया गया था और अगस्त 2025 की जीएसटी काउंसिल में इस पर डिटेल में चर्चा हुई थी। हाल ही में, 14 मार्च 2026 को वित्त मंत्री चीमा ने भारत सरकार को ऑफिशियल लेटर भेजकर आरडीएफ का बकाया जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि खुद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने भरोसा दिलाया था कि वह अमित शाह और निर्मला सीतारमण से मिलकर पंजाब को उसका बनता कानूनी हक दिलाएंगे, लेकिन इसके बावजूद न तो फंड जारी किया गया और न ही कोई पॉजिटिव कदम उठाया गया।

वित्त मंत्री चीमा ने हैरानी जताते हुए कहा कि एक सीनियर केंद्रीय मंत्री, जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, पंजाब के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पंजाब का केंद्र सरकार की तरफ कुल ₹9,821 करोड़ का आरडीएफ बकाया है। भारत सरकार एमएसपी पर गेहूं और धान खरीदती है, जिस पर नियमों के मुताबिक 3 प्रतिशत आरडीएफ का पैसा दिया जाता है। केंद्र सरकार पहले पैसे के गलत इस्तेमाल की बात करती थी, जबकि सच यह है कि इसका गलत इस्तेमाल पिछली अकाली-भाजपा सरकार के दौरान हुआ था। आम आदमी पार्टी सरकार ने 2022 में रेगुलर बदलाव किए और तय किया कि आरडीएफ का पैसा सिर्फ और सिर्फ किसानों की मंडियों और गांव की सड़कों को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा।

चीमा ने कड़े शब्दों में कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने पंजाब के किसानों और आम जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। अब अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए केंद्रीय मंत्री गुमराह करने वाले प्रोपेगैंडा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग बहुत जागरूक हैं और वे अच्छी तरह जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी लगातार पंजाब और पंजाबियों के हितों के खिलाफ काम करती रही है।

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तीज के रंग में रंगा पंजाब, महिलाओं के उत्साह ने दिखाया मान सरकार के प्रति भरोसा

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पंजाब की संस्कृति, परंपरा और महिलाओं की भागीदारी का खूबसूरत संगम आज दोआबा में देखने को मिला, जहां नवांशहर और फिल्लौर में आयोजित तीज समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। पंजाब की संस्कृति के रंगों से सजे इन कार्यक्रमों में महिलाओं ने गुरप्रीत कौर मान का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया।

गुरप्रीत कौर मान ने कहा कि तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि पंजाब की बेटियों और बहनों की खुशियों, आत्मविश्वास और आपसी जुड़ाव का उत्सव है। ऐसे कार्यक्रम हमारी समृद्ध पंजाबी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब की महिलाएं आज अपने अधिकारों और सम्मान को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हैं। महिलाओं का यह उत्साह और मुख्यमंत्री भगवंत मान के प्रति उनका विश्वास इस बात का संकेत है कि मान सरकार की नीतियों और कामकाज को पंजाब की माताओं-बहनों का मजबूत समर्थन मिल रहा है।

नवांशहर में हलका इंचार्ज रॉबी कंग की अगुवाई में कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया। महिलाओं और स्थानीय लोगों में उनके हलका इंचार्ज बनाए जाने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। गुरप्रीत कौर मान ने कहा कि जनता के बीच रहकर काम करना और लोगों की आवाज को मजबूती से उठाना ही किसी भी जिम्मेदारी की असली कसौटी है।

वहीं फिल्लौर में पहली बार एक महिला चेहरे को हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर भी लोगों में उत्साह देखने को मिला। गुरप्रीत कौर मान ने कहा कि महिलाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी देना केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाना नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता पर भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि फिल्लौर की हलका इंचार्ज लगातार जनता के बीच जाकर लोगों से संवाद कर रही हैं और अपनी जिम्मेदारी को पूरी सक्रियता से निभा रही हैं।

इस दौरान गुरप्रीत कौर मान ने महिलाओं के साथ तीज की खुशियां साझा कीं और मावां-धीयां योजना समेत महिलाओं के लिए किए जा रहे सरकार के प्रयासों पर भी बातचीत की। कार्यक्रमों में पंजाबी लोक संस्कृति, पारंपरिक परिधानों और रंग-बिरंगे माहौल ने पूरे दोआबा को तीज के रंग में रंग दिया।

गुरप्रीत कौर मान ने कहा कि पंजाब की तरक्की तभी पूरी होगी, जब पंजाब की हर महिला मजबूत, सम्मानित और आत्मनिर्भर होगी। मान सरकार इसी सोच के साथ महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व की नई जिम्मेदारियां देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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इस स्वतंत्रता दिवस, स्वस्थ पंजाब: भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 6 लाख से अधिक उपचार

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जब भारत अपना 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तब आपातस्थिति में महँगी चिकित्सा के डर से मुक्ति भी जनकल्याण का एक महत्त्वपूर्ण पैमाना बनकर उभर रही है। पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है और पिछले सात महीनों में इस योजना के तहत छह लाख से अधिक उपचार दर्ज किए जा चुके हैं।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आँकड़ों के अनुसार, 69,12,697 पात्र परिवारों के मुकाबले अब तक 26,18,712 लाभार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जा चुका है। अब तक 3,02,906 मरीज़ों ने उपचार प्राप्त किया है, जिनमें 6,06,892 उपचार और 15,267 प्रक्रियाएँ शामिल हैं। योजना के तहत 880 सूचीबद्ध अस्पताल हैं, जबकि दर्ज औसत क्लेम राशि ₹14,628.04 है।

इस अवसर पर, पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “डायलिसिस से लेकर कैंसर उपचार तक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में छह लाख उपचार पूरे हो गए हैं। गंभीर और महँगी स्वास्थ्य सेवाओं में इस योजना का उपयोग विशेष रूप से देखने को मिल रहा है। क्रॉनिक हीमोडायलिसिस के 1,99,417 उपचार किए गए हैं, जबकि कैंसर के 60,504 मामले और 1,85,220 आपातकालीन मामले भी दर्ज किए गए हैं।”

इसके अतिरिक्त, हृदय संबंधी उपचार भी योजना का एक प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। आँकड़ों के अनुसार, डायग्नोस्टिक एंजियोग्राफी सहित 10,428 पीटीसीए प्रक्रियाएँ की गई हैं, जिन पर ₹100 करोड़ का ख़र्च आया है। कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग(सीएबीजी) के 611 उपचारों पर लगभग ₹8.20 करोड़ ख़र्च हुए, जबकि 507 पेसमेकर प्रक्रियाओं पर लगभग ₹6.79 करोड़ ख़र्च किए गए।

हड्डी एवं जोड़ संबंधी उपचारों में भी योजना का पर्याप्त उपयोग हुआ है। कुल 11,796 घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) किए गए, जिन पर ₹94.89 करोड़ ख़र्च हुए। योजना के तहत 1,092 कुल हिप रिप्लेसमेंट भी दर्ज किए गए, जिनकी लागत ₹10.75 करोड़ रही। इसके अलावा, फ्रैक्चर फिक्सेशन की 2,200 से अधिक प्रक्रियाएँ की गईं। कैंसर उपचार के 60,504 दर्ज मामलों पर लगभग ₹159.41 करोड़ ख़र्च हुए, जबकि 2,02,793 दर्ज डायलिसिस मामलों पर ₹33.14 करोड़ का ख़र्च हुआ।

इस योजना का लाभ सरकारी और निजी, दोनों अस्पतालों में पहुँच रहा है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों में 3,36,161 मामलों का उपचार किया गया, जबकि सरकारी अस्पतालों में 2,70,731 मामलों का उपचार हुआ। दर्ज ख़र्च क्रमशः ₹614.08 करोड़ और ₹479.85 करोड़ रहा।

ज़िला स्तर के आँकड़ों में उपचार के उपयोग के अलग-अलग पैटर्न सामने आए हैं। पटियाला में सबसे अधिक 28,977 मरीज़ों का उपचार किया गया, इसके बाद बठिंडा में 23,446, लुधियाना में 22,620 और जालंधर में 20,193 मरीज़ों का उपचार हुआ। बठिंडा में सबसे अधिक ₹200 करोड़ का खर्च दर्ज किया गया, जिसके बाद पटियाला में ₹100 करोड़, अमृतसर में ₹99.23 करोड़ और जालंधर में ₹91.30 करोड़ ख़र्च हुए।

आँकड़ों के पीछे, लाभार्थियों की कहानियाँ

आँकड़े योजना के स्तर को दर्शाते हैं, लेकिन लाभार्थियों के अनुभव यह बताते हैं कि कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच परिवारों के लिए क्या मायने रखती है। पित्ताशय(गॉल ब्लैडर) और रीढ़ संबंधी समस्याओं का उपचार करवाने वाली संदीप कौर ने कहा कि उपचार ने उन्हें बेहतर जीवन की ओर लौटने में मदद की है। उन्होंने कहा, “सफल उपचार के बाद मैं पहले से बहुत बेहतर हूँ। मैं नई उम्मीद के साथ अपना जीवन जी रही हूँ।”

स्तन कैंसर का उपचार करवा रहीं निशि गुप्ता के लिए स्वास्थ्य कार्ड ने लंबे समय तक चलने वाले उपचार से जुड़े आर्थिक दबाव को कम किया है। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मेरे स्तन कैंसर का उपचार नि:शुल्क शुरू हुआ है और बिना किसी ख़र्च के जारी है। इससे मुझे और मेरे परिवार को बहुत राहत मिली है।”

पटियाला के हाकम सिंह के लिए, यह योजना अचानक उत्पन्न हुई हृदय संबंधी आपात स्थिति के दौरान बेहद महत्त्वपूर्ण साबित हुई। अपने लक्षणों को याद करते हुए उन्होंने कहा, “अचानक मेरे सीने में दर्द होने लगा।” हृदय संबंधी बीमारी का नि:शुल्क उपचार मिलने के बाद हाकम सिंह ने सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि अब वह अधिक खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

एक अन्य लाभार्थी गुरचरण सिंह ने गंभीर बीमारी के साथ आने वाले आर्थिक डर को सीधे शब्दों में व्यक्त किया: उन्होंने कहा, “हम यह सोचते-सोचते ही मर जाते कि पैसे कहाँ से लाएँगे।”

इन लाभार्थियों के लिए, कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का महत्त्व सरकार द्वारा ख़र्च की गई राशि से कहीं अधिक है। इसका अर्थ है कि ऐसे समय में उनके परिवारों को उस धन की व्यवस्था नहीं करनी पड़ी, जब उनकी प्राथमिकता उपचार और स्वस्थ होने की थी।

जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे में पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के आँकड़े जनकल्याण को देखने का एक और दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं—सिर्फ इस आधार पर नहीं कि कितने लोगों को स्वास्थ्य कवर मिला, बल्कि इस आधार पर भी कि कितने लोग गंभीर उपचार तक पहुँच बनाने में सक्षम हुए, जब उन्हें इसकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता थी।

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