Punjab
Punjab News: पंजाब में AAP का कांग्रेस के खिलाफ जमकर प्रदर्शन, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन
Punjab News: पंजाब (Punjab) की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल पंजाब में कांग्रेसियों की बयानबाजी के खिलाफ AAP नेता द्वारा जमकर प्रदर्शन किया जा रहा है।
दरअसल बीते दिन कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा (Partap Singh Bajwa) ने कहा कि हरभजन ईटीओ बैंड बजाता था, लेकिन अब वह पंजाब का बैंड बजा रहा है। इसके बाद कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग ने सीधे मंत्री की गर्दन मरोड़ने की बात कह दी।

AAP नेता का चंडीगढ़ में प्रदर्शन
राजा वड़िंग ने कहा कि सिर्फ 3 मिनट लगते हैं। राहुल गांधी ने हमें सिखाया है कि डरना नहीं है। वहीं इसको लेकर AAP भड़की हुई है। कांग्रेसियों की बयानबाजी के खिलाफ AAP नेता चंडीगढ़ में प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने बैंड बाजे बताए।
यह भी पढ़ें: जालंधर में सुपर क्रीमिका स्वीट्स और Zomato को लीगल नोटिस जारी

इसी बयानों को लेकर कांग्रेस भड़क गई और उनके द्वारा कांग्रेस के खिलाफ चंडीगढ़ में जमकर प्रदर्शन किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने बैंड बाजे भी बजाए। आप नेताओं का कहना है कि यह टिप्पणी न केवल अमर्यादित है, बल्कि मेहनत-मजदूरी करके रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों का अपमान भी है।
प्रदर्शन के दौरान आप नेताओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की। बैंड बाजा के साथ किए गए इस प्रदर्शन को प्रतीकात्मक विरोध बताया गया। नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन विपक्ष के नेता को यह संदेश देने के लिए है कि श्रमिकों और दलित समाज के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

वहीं पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए वाटर कैनन तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही MLA हॉस्टल के बाहर बैरिकेडिंग की गई है। लेकिन कार्यकर्ता प्रताप सिंह बाजवा के घर का घेराव करने के लिए आगे बढ़ रह हैं। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं में टकरावा हो गया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन से पानी की बौछारें मारीं। इस दौरान कुछ की पगड़ियां उतर गईं।
Punjab
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर UNODC और पंजाब जेल विभाग ने नशा, HIV और जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य पर किया विचार-विमर्श
जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने शुक्रवार को लुधियाना में ‘नशा, एचआईवी और जेलों में कैदियों का स्वास्थ्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। यह कार्यक्रम यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) द्वारा पंजाब जेल विभाग तथा गैर-सरकारी संस्था ‘टर्न योर कंसर्न इंटू एक्शन’ (टीवाईसीआईए) के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।
एक दिवसीय बैठक में राज्य सरकार, जेल विभाग तथा पंजाब सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान जेलों में कैदियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “हमारे प्रमुख कदमों में से एक नशे की लत को अपराध की श्रेणी से अलग मानना है। मरीज और तस्कर में स्पष्ट अंतर है। पिछले एक वर्ष और तीन महीनों में 10,000 से अधिक नशा पीड़ितों, जिन्हें अन्यथा जेल में होना पड़ता, को नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है। हमने 25,000 कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी तथा नशे से संबंधित जांच भी करवाई है। हमारा मानना है कि जेलें केवल सुधार गृह नहीं, बल्कि उपचार, पुनर्वास और स्वस्थ जीवन की ओर वापसी के केंद्र भी होनी चाहिए। पंजाब की जेलों में पहले से ही ओओएटी क्लीनिकों का नेटवर्क कार्यरत है, जो कैदियों को नशे से उबरने में सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त कौशल विकास के लिए आईटीआई पाठ्यक्रम, मनोचिकित्सक और काउंसलर भी उपलब्ध हैं।”
राज्यभर के जेल अधिकारियों को संबोधित करते हुए जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा, “नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषसिद्धि के मामलों में पंजाब देश में अग्रणी है। इसी प्रकार सुधारात्मक न्याय के क्षेत्र में भी हमें उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। मान सरकार के लिए समाज से नशे का खात्मा करना और प्रत्येक नशा पीड़ित तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समान रूप से महत्वपूर्ण है।”
कार्यक्रम की शुरुआत जेलों में उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा से हुई, जिसके बाद आईजी जेल एवं आईएएस अधिकारी मुहम्मद तैयब ने विशेष प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान जेलों की विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान पर कई सत्र आयोजित किए गए, जिनमें नशा एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम, महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं, दिव्यांगता, नशा तथा जेलों में कैदियों के जीवन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
यूएनओडीसी के विशेषज्ञों ने जेल स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है तथा जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी कैदियों को उपचार एवं मनोसामाजिक सहायता निरंतर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इस अवसर पर दक्षिण एशिया के लिए यूएनओडीसी क्षेत्रीय कार्यालय की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने कहा, “इस वर्ष की थीम ‘वर्ल्ड ड्रग प्रॉब्लम: पर्सिस्टिंग इश्यूज़, न्यू चैलेंजेज़, इनोवेटिव रिस्पॉन्सेज़’ हमें याद दिलाती है कि चुनौतियां बदल रही हैं, इसलिए हमारे समाधान भी समय के साथ विकसित होने चाहिए। आज का दिन केवल नशे के प्रभाव को स्वीकार करने का नहीं, बल्कि समाधान, साझेदारी और आशा को प्रोत्साहित करने का भी है। जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य, नशा उपचार और एचआईवी सेवाओं को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो लोगों के पुनर्वास और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापन के साथ-साथ सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देता है।”
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने स्क्रीनिंग प्रणाली, नशा छोड़ने के दौरान उपचार, ओपिओइड आधारित उपचार, मानसिक एवं सामाजिक सहयोग तथा उपचार की निरंतरता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। जागरूकता और साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए नशा और एचआईवी पर आधारित शैक्षणिक उपकरण भी प्रस्तुत किए गए।
बैठक में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा नशे से प्रभावित महिलाओं को जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी निरंतर उपचार एवं देखभाल उपलब्ध कराने पर विशेष चर्चा की गई।
अंत में सभी विभागों ने मिलकर कार्य करने तथा जेलों में नशे की समस्या से निपटने के लिए मानवाधिकार आधारित, समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का संकल्प लिया।
Punjab
नशा मुक्त राज्य बनने की ओर बढ़ रहा पंजाब, CM भगवंत सिंह मान ने नशा छोड़ चुके नौजवानों को ‘सूरमे’ के रूप में किया सम्मानित
पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज अपनी सरकार की ‘युद्ध नशियाँ विरुद्ध’ मुहिम को अगले पड़ाव पर ले जाते हुए ‘सूरमा’ मुहिम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नशा मुक्त हुए नौजवानों को विशेष तौर पर तैयार की गई ‘सूरमा’ छाप (रिंग) और टी-शर्ट से सम्मानित किया।
इसे सूबे की नशा विरोधी मुहिम का अगला पड़ाव बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपराले का उद्देश्य नशा छोड़ चुके नौजवानों को ‘उम्मीद के दूत’ के रूप में पेश करना है, जो जमीनी स्तर पर नशों के खिलाफ जंग की अगवानी करेंगे। दो साल से अधिक समय से नशा मुक्त रहने वाले व्यक्तियों का सम्मान करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ये नौजवान न सिर्फ दूसरों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे, बल्कि राज्य सरकार की ओर से उन्हें रोजगार के मौके भी मुहैया करवाए जाएंगे।
खेलों को नशों की बीमारी के खिलाफ सबसे कारगर हथियार बताते हुए उन्होंने ऐलान किया कि 15 जुलाई तक पंजाब भर में करीब 3,100 गांवों के खेल मैदान और 3,000 जिम चालू कर दिए जाएंगे ताकि नौजवानों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार की ओर से मानक शिक्षा, सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, खेलों के बुनियादी ढांचे और पुनर्वास पर एक साथ ध्यान दिया जा रहा है जो नशा-मुक्त और रंगला पंजाब की नींव रख रहा है।
कुछ मुख्य नुक्ते साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आज हमने ‘सूरमा मुहिम’ की शुरुआत की है और उन नौजवानों को सम्मानित किया है जो नशों के चंगुल में से निकलकर नई जिंदगी की शुरुआत कर चुके हैं। दूसरों के लिए रोल मॉडल बने इन प्रेरणादायक नौजवानों को पंजाब सरकार की ओर से रोजगार के मौके भी दिए जाएंगे। 15 जुलाई तक पंजाब भर के नौजवानों के लिए 3,100 नए खेल मैदान और 3,000 जिम तैयार हो जाएंगे। आज पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में पहले नंबर पर है और 47 लाख परिवारों को मुफ्त इलाज के लिए 10 लाख रुपये के ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना कार्ड’ मिल चुके हैं।
सड़क सुरक्षा फोर्स (एस.एस.एफ.) ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को 50 फीसदी तक कम कर दिया है, जिससे हर साल करीब 2,700 कीमती जानें बच रही हैं। जब नीयत साफ हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। आओ सब मिलकर रंगला पंजाब बनाएं।” इकट्ठ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि समागम में मौजूद नौजवानों ने नशों की वजह से सब कुछ गंवाने के बाद इस दलदल में से बाहर निकलकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि आज इनका सम्मान इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सामाजिक बदनामी के बावजूद इन्होंने नशे को हराने का असाधारण साहस दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “नशे की लत एक सामाजिक कलंक है। जब लोगों को पता चलता है कि कोई नशा करता है तो वे उस शख्स से बात करना भी बंद कर देते हैं। इन नौजवानों ने उस दर्द और मानसिक पीड़ा को झेला है, लेकिन आज वे नई शुरुआत करने और समाज की सेवा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “ये नौजवान नशे की बीमारी पर जीत हासिल कर चुके हैं और अब अपने तजुर्बे साझा करके दूसरों की मदद कर सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार नशा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए लगातार कोशिशें कर रही है और राज्य भर में आधुनिक सुविधाओं से लैस विश्व स्तरीय पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे ऐलान किया कि 15 जुलाई तक पंजाब भर में करीब 3,100 गांवों के खेल मैदान और 3,000 जिम चालू हो जाएंगे ताकि नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में बदला जा सके। समागम में मौजूद नशा मुक्त हुए सभी नौजवानों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दुखद अतीत को पीछे छोड़कर सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार इस नेक मिशन में उन्हें हर संभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा, “रंगला पंजाब के सपने को पूरा करने के लिए अब सिर्फ एक ही रंग बाकी रह गया है और वह भी जल्द ही भर दिया जाएगा क्योंकि पंजाब जल्द ही पूरी तरह नशा मुक्त हो जाएगा।”
राज्य की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में मानक शिक्षा यकीनी बनाकर शिक्षा के क्षेत्र का काया-कल्प किया है, जिसके कारण पंजाब, केरल और कई अन्य सूबों को पछाड़कर 27वें नंबर से पहले नंबर पर आया है। उन्होंने कहा कि गरीबी को खत्म करने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। “हमारे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कल ऊंचे अधिकारी बनेंगे और अपने परिवारों को गरीबी में से निकालने में मदद करेंगे। सिर्फ कार्ड या मुफ्त की सुविधाएं गरीबी खत्म नहीं कर सकतीं, लेकिन शिक्षा में ऐसा करने की ताकत और समर्थता जरूर है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों में से 17.47 लाख परिवारों को पहले ही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड’ मिल चुके हैं, जिससे वे मुफ्त इलाज का फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को अब तक करीब 650 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज मुहैया करवाया जा चुका है। राज्य सरकार की अन्य उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब अब सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग कर रहा है, किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, सड़क सुरक्षा बल (एसएसएफ) ने अब तक सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 3,000 लोगों की जान बचाई है, लगभग 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और कई अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों को बड़ा लाभ पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समारोह में उन लोगों को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने नशे की लत पर सफलतापूर्वक काबू पाया है और दो वर्षों से अधिक समय से नशा मुक्त (संयमित) जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति वास्तविक ‘सूरमा’ हैं क्योंकि इन्होंने साहस और दृढ़ संकल्प के साथ नशे पर विजय प्राप्त की है। आज का यह समारोह पंजाब की नशों के विरुद्ध चल रही लड़ाई में एक नए अध्याय की शुरुआत है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये सूरमा अब ‘एम्बेसडर ऑफ रिकवरी’ के रूप में सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे, जो अन्य लोगों को नशे की लत से छुटकारा पाने और अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरमा कार्यक्रम की शुरुआत पूरे पंजाब में व्यापक पुनर्वास कार्यक्रमों और मजबूत सामाजिक सहायता प्रणालियों के सकारात्मक प्रभाव का एक बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत में गहराई से रचा-बसा ‘सूरमा’ शब्द अदम्य साहस का प्रतीक है, जो इन व्यक्तियों द्वारा अपनी अटूट इच्छाशक्ति के बल पर अपने जीवन को पुनः संवारने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार नशों के खात्मे के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित कर रही है कि नशे से प्रभावित प्रत्येक परिवार को उपचार के लिए आवश्यक सहायता मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह केवल इन व्यक्तियों की रिकवरी का नहीं, बल्कि उनके नए जीवन को समर्पित है। उन्होंने कहा, “ये सूरमा अपने परिवारों और समाज के लिए आशा की किरण हैं। इनकी यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, पारिवारिक सहयोग और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच के माध्यम से नशे से मुक्ति संभव है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आप सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को उचित उपचार मिले और वह समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सूरमा इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि समय पर सहायता मिलने से उन जीवनों को फिर से संवारा जा सकता है, जो शायद नशे के कारण बर्बाद हो सकते थे। उन्होंने कहा, “स्वस्थ हो चुके व्यक्तियों को विशेष रूप से तैयार की गई ‘प्रॉमिस रिंग्स’ (छल्लों) और बाज के प्रतीक वाली वर्दियों से सम्मानित किया गया है, जो नशा मुक्त पंजाब के मिशन में साहस, शक्ति और पंजाबियत के प्रतीक हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सूरमा पहल पंजाब सरकार की नशों के खात्मे के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसने पिछले कई वर्षों से राज्य में तबाही मचा रखी थी। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ की वास्तविक भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी कड़ी मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प रंगला पंजाब के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम हैं।”

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक सूरमा को सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे अब दूसरों को नशे की लत से छुटकारा दिलाने में मदद करके आशा के दूत बनेंगे। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार नशा मुक्ति केंद्रों, कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश करना जारी रखेगी और नशे की लत से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए प्रयासरत रहेगी, ताकि प्रत्येक स्वस्थ हो चुका व्यक्ति बेहतर रोजगार के अवसरों के साथ सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह भी दोहराया कि जहां सरकार नशों के माध्यम से पंजाब को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी, वहीं सहायता मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पूरा सहयोग देना भी जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “यही ‘युद्ध नशों विरुद्ध चरण-2’ का वास्तविक उद्देश्य है।”
मुख्यमंत्री ने नशों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को समर्पित एक प्रेरणादायक गीत भी लॉन्च किया और घोषणा की कि सूरमा कार्यक्रम अब पंजाब के प्रत्येक जिले और गांव तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों ने नशा मुक्ति उपचार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और कम से कम दो वर्षों से नशे से दूर हैं, वे व्हाट्सएप पर 9779142200 पर “Soorma” संदेश भेजकर इस कार्यक्रम के लिए स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पात्र व्यक्तियों को उनके अद्वितीय साहस के लिए सम्मानित किया जाएगा और वे पंजाब की नशों के विरुद्ध चल रही लड़ाई में चैंपियन के रूप में सेवा देंगे। उन्होंने कहा, “सूरमा पहल के माध्यम से पंजाब सरकार एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर रही है, जो नशे के कारण फैली निराशा को चुनौती देते हुए पीड़ितों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने और उनका सम्मान बहाल करने में मदद करेगा।”
उन्होंने कहा कि लगभग एक वर्ष तीन महीने पहले ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ की शुरुआत से लेकर अब तक पंजाब ने अपने नशा विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में आधुनिक उपचार सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और फॉलो-अप सहायता से लैस अत्याधुनिक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ‘सूरमा रिकग्निशन प्रोग्राम’ नशे और रिकवरी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर कर इन उपलब्धियों को और मजबूत करता है तथा ऐसा सहयोगी नेटवर्क तैयार करता है, जो नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे अन्य लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करेगा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह तथा अनेक अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
public
बेअदबी के दोषियों को 15 साल तक शरण देने वालों को संगत कभी माफ नहीं कर सकती-CM भगवंत सिंह मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज स्पष्ट रूप से कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के दोषियों को 15 साल तक शरण देने वालों को संगत कभी माफ नहीं कर सकती। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस घिनौने अपराध के जिम्मेदार लोग जल्द ही जेल की सलाखों के पीछे होंगे।
पटियाला जिले के विधानसभा क्षेत्र समाणा के गांव गाजेवास में ‘लोक मिलनी’ के दौरान मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ बेअदबी करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कठोर से कठोर सजा का प्रावधान करेगा।
मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के जन-पक्षीय शासन का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों पर खर्च किया जा रहा है, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और 68,000 से अधिक युवाओं ने बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के सरकारी नौकरियां हासिल की हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा: “आज समाणा विधानसभा क्षेत्र के गांव गाजेवास में ‘लोक मिलनी’ के दौरान लोगों से संपर्क स्थापित किया। लोगों की ओर से भरपूर समर्थन और अपार प्यार मिला। गांव गाजेवास के विकास के लिए गांव के सरपंच को 51 लाख रुपये की अनुदान राशि का चेक सौंपा। महिलाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं और हर गांव में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना हमारी मुख्य प्राथमिकता है।”
पोस्ट के अंत में लिखा, “हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर घर को बेहतर सुविधाएं मिलें और पंजाब को हर क्षेत्र में नंबर एक राज्य बनाया जा सके। लोगों के आशीर्वाद और सहयोग से हम एक बार फिर रंगला पंजाब बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। इंकलाब जिंदाबाद।”
लोक मिलनी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन अपराधियों को सिख पंथ और गुरु साहिबान के साथ की गई गद्दारी के लिए कभी माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “बादलों के राज के दौरान बेअदबी की सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं, लेकिन किसी को भी सजा नहीं दी गई। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय निर्दोष सिख संगत पर गोली चलाने के आदेश दिए गए। बादलों के बाद सत्ता में आए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस घिनौने अपराध के दोषियों को सजा देकर सिख संगत की भावनाओं को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया।”
उन्होंने कहा कि असल में ये लोग मानवता के खिलाफ अक्षम्य अपराध करने वाले समाज विरोधी तत्वों से मिले हुए थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यही कारण है कि ये लोग और इनके कठपुतलियाँ हुए अब ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि वे अपने पापों के लिए कानून की कटघरे में बेनकाब हो जाएंगे। इन नेताओं को अपने पापों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और वे जल्द ही जेल की सलाखों के पीछे होंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल को सत्ता में आने के सपने देखने बंद कर देने चाहिए, क्योंकि अब सिख कौम के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उनकी जेल जाने की बारी है। उन्होंने कहा, “मैं ईश्वर का आभारी हूं जिन्होंने मुझे ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ बनाने का अवसर प्रदान किया। जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, करोड़ों लोगों की मानसिकता को गहरा आघात पहुंचा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ईश्वर ने उन्हें कानूनी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद यह विधेयक लाने की बुद्धि और शक्ति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने इस विधेयक को बहुत सावधानी से तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या कमियां इसे कमजोर न कर सकें। यह विधेयक समाज विरोधी तत्वों के लिए भविष्य में ऐसा कोई भी पाप करने से रोकने का काम करेगा और कोई भी कभी भी इस तरह का घिनौना अपराध करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा। पहले लोग यह कहकर फांसी के फंदे से बच जाते थे कि ‘उनका दिमाग खराब है’ या ‘वह मानसिक रूप से बीमार है’, और आरोपी आजाद घूमते थे।”
हालांकि, मुख्यमंत्री ने सवाल किया, “अगर कोई वास्तव में मानसिक रूप से ठीक नहीं है तो वह सिर्फ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही निशाना क्यों बनाता है? वह किसी रेल इंजन से क्यों नहीं टकराता या बिजली की नंगी तारों को हाथ क्यों नहीं लगाता? सच्चाई यह है कि ऐसी हरकतें अक्सर जानबूझकर और साजिश के तहत की जाती थीं। इसलिए हमने कानून में एक धारा जोड़ी है कि अगर किसी को चिकित्सकीय रूप से मानसिक रोगी घोषित किया जाता है, तो उनके संरक्षक, माता-पिता, अभिभावक या देखभाल करने वालों को भी आपराधिक मामलों का सामना करना पड़ेगा।”
अकालियों पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब वे सत्ता में थे तो वे कभी भी ऐसा कानून बनाने के लिए इच्छुक नहीं थे। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि उनकी नीयत में खोट थी। अकालियों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए बेअदबी की घटनाएं होने दीं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली दल अब ननद-भाभी की पार्टी बनकर रह गया है क्योंकि ननद सांसद है और भाभी विधायक है। उन्होंने कहा, “सुखबीर बादल साल 2022 की हार के सदमे से अभी तक बाहर नहीं आ सके। पूर्व उप मुख्यमंत्री कहते हैं कि उन्होंने अपने सभी विधायकों को विधानसभा में न जाने के निर्देश दिए हैं, वे यह भूल गए हैं कि शिरोमणि अकाली दल का सिर्फ एक ही विधायक बचा है और वह भी उनका करीबी रिश्तेदार है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा यह अच्छी तरह जानते हैं कि वे राजनीतिक रूप से उनका मुकाबला नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने फर्जी (नकली) वीडियो के जरिए धार्मिक आधार पर उनकी छवि खराब करने के लिए गठजोड़ कर लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेताओं ने अपने लंबे और दमनकारी शासनकाल के दौरान पंजाब को बेरहमी से लूटा तथा आम लोगों पर अनेक अक्षम्य अत्याचार किए। उन्होंने कहा, “उन्होंने पंजाबियों के दिलों को गहरे घाव दिए और राज्य को बर्बाद करने के लिए माफिया को संरक्षण दिया। अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह राज्य की कई पीढ़ियों के भविष्य को बर्बाद करने का जिम्मेदार है। उनके संरक्षण में नशे का कारोबार फला-फूला और उनके लंबे कुशासन के दौरान यह पूरे प्रदेश में फैल गया।”
सुखबीर बादल पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व जनता के बीच अपना आधार खो चुका है और अब अपनी रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए पैसे देकर लोगों को लाया जाता है। उन्होंने कहा, “अकाली दल की हर रैली में वही लोग दिखाई देते हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक राजनीतिक दल लगातार किसी न किसी आरोप के माध्यम से उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारों के बाहर मेरे बहिष्कार के पोस्टर लगाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जब अकाली दल और सुखबीर बादल ने बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी, तब उनके खिलाफ ऐसे पोस्टर क्यों नहीं लगाए गए?”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सवाल किया, “2 दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष सुखबीर बादल ने अपने गुनाह स्वीकार किए, गलत कार्यों को माना, गोलीबारी की घटनाओं की जिम्मेदारी ली और यह भी माना कि संगत के खिलाफ आदेश दिए गए थे। क्या उस समय किसी ने गुरुद्वारों के बाहर उनके बहिष्कार के पोस्टर लगाए थे?”
मुख्यमंत्री ने कहा कि संगत समझदार है और जनता सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “ये लोग अहंकार में काम कर रहे हैं क्योंकि उनके पास मेरे खिलाफ उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है। जब मैं गांवों, सामाजिक कार्यक्रमों और जनसभाओं में जाता हूं तो भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। विपक्ष इस जनसमर्थन को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। इसी हताशा में पारंपरिक राजनीतिक दल मेरे खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाकर बेहद निम्न स्तर की राजनीति कर रहे हैं, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने अंतिम दौर में है और बहुत जल्द समाप्त हो जाएगी क्योंकि उसके पास न तो जनता के लिए कोई दृष्टि है और न ही पंजाब के विकास का कोई स्पष्ट विजन। उन्होंने कहा, “इनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल कर पंजाब के खजाने को लूटना है, लेकिन उनके ये सपने कभी पूरे नहीं होंगे।”

सत्ता हासिल करने के सपने देखने वाले कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि कांग्रेस एक बिखरा हुआ घर बन चुकी है, जो अपनी अंदरूनी कलह के कारण स्वयं ढह जाएगी। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन्हें एकजुट करने आने वाले शीर्ष कांग्रेस नेताओं को इनके नामों का सही उच्चारण तक नहीं आता।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी खजाने के प्रत्येक पैसे का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ जनता के कल्याण के लिए कर रही है। उन्होंने कहा, “राज्य के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जनता के टैक्स का पैसा जनता का है और हम उसे विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण पर खर्च कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनता के हित में अनेक ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। इनमें घरों को मुफ्त बिजली, 68,000 से अधिक युवाओं को बिना भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियां, बेहतर सड़कें, टोल प्लाजा बंद कर प्रतिदिन लगभग 70 लाख रुपये की बचत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं तथा मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा, “जब हमारी सरकार बनी थी, तब सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था, जो आज बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। गांवों के विकास के लिए भी लगातार अनुदान दिए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि पंजाब ऐसा व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस योजना के तहत अब तक लोग 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज करा चुके हैं।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘मावां धीयां सतिकार योजना’ के तहत 1 जुलाई से 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला लाभार्थियों को वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह तथा अन्य सभी वर्गों की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसकी जानकारी लाभार्थियों को उनके मोबाइल फोन पर भेजी जाएगी। उन्होंने कहा, “राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। जो महिलाएं पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही हैं, वे भी इस योजना की पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है और इसके लिए राज्य सरकार ने 9,300 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।”
-
Religious3 years agoकब है तुलसी विवाह? इस दिन तुलसी माता का विवाह करने से मिलेगा लाभ
-
Religious3 years agoजानिए गोवर्धन पूजा का महत्व, कौनसा समय रहेगा पूजा के लिए सही
-
Religious3 years agoआखिर क्यों लिखा जाता है घर के बाहर शुभ लाभ, जानिए क्या है इन चिह्न का मतलब
-
Religious3 years agoपैरों के निशान, बनावट, रंग, साइज से पता लागए की आप कितने है भागयशाली
-
Punjab2 years agoपंजाब में अमरूद के बगीचे के मुआवजे के घोटाले में ED ने 26 स्थानों पर छापे मारे
-
Chandigarh2 years agoChandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?
-
Punjab2 years agoLudhiana में पुलिस स्टेशन के पास शव मिला। एक आदमी सड़क के बीच में पड़ा था; पास में कपड़ों से भरा एक बोरे भी मिला था, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी
-
Religious3 years agoजानिए दीपावली में वाले दिन आखिर कितने जलाने चाहिए दीये ? और क्यों जलाने चाहिए दिये |