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पंजाब सरकार ने लोगों से किए सभी चुनावी वादे पूरे – CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा पूरा कर दिया है, जिसके तहत पूरे पंजाब की महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू की गई है। इस योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित महिलाओं को 1,500 रुपये मिलेंगे। इसके लिए बजट में 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसे महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आप’ सरकार का ‘सारी गारंटियां पूरी’ बजट चुनावी वादों को पूरा करने के प्रति आम आदमी पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही बजट में राज्य भर की महिलाओं को सशक्त बनाने और हर पंजाबी परिवार को समर्थन देने के लिए मुफ्त बस यात्रा, मुफ्त बिजली और नकद रहित स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मीडिया से बातचीत में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब की माताओं, बेटियों और बहनों को बधाई देते हुए प्रार्थना की कि वे हमेशा हर क्षेत्र में सफलता की नई कहानियां लिखती रहें। उन्होंने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं की भलाई को केंद्र में रखकर यह बजट पेश किया गया है, जो ‘आप’ सरकार द्वारा उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के मुख्य वादे को पूरा करता है। बजट को लोक-केंद्रित बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों को कल्याणकारी उपायों और सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से निरंतर सहायता मिलती रहे।

उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार ने लोगों से किया सबसे बड़ा चुनावी वादा पूरा किया है और राज्य की महिलाओं को अब ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत प्रतिमाह 1,000 रुपये मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि महिलाओं को इस योजना के तहत आसानी से रजिस्ट्रेशन की सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य भर में विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने साझा किया कि इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया इस बैसाखी से शुरू होगी और इसे युद्ध स्तर पर लागू किया जाएगा ताकि सभी योग्य लाभार्थियों को जल्द से जल्द कवर किया जा सके। 18 वर्ष से अधिक उम्र की हर लड़की और महिला इस योजना के तहत लाभ प्राप्त करने की हकदार होगी, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की अधिकांश महिलाएं इस योजना के दायरे में आएं।

बजट को एक मील का पत्थर करार देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह लोगों की भलाई और राज्य की प्रगति के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समाज के हर वर्ग का ध्यान रखने वाले बजट पेश करने के लिए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बजट नहीं है बल्कि राज्य की प्रगति और इसके लोगों की खुशहाली का हलफनामा है।

पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे कहा कि पहले के बजट अक्सर कागजी घोषणाओं तक सीमित रहते थे, जबकि लोगों को वास्तविक अर्थों में इनका कोई खास लाभ नहीं होता था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान पेश किए गए बजट नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए ठोस नीतियां लाने की बजाय हमेशा बयानबाजी और काव्यात्मक हवाले तक सीमित रहे।

‘आप’ सरकार की व्यापक कल्याणकारी पहलों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनमें मुफ्त बस यात्रा, मुफ्त बिजली और मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत नकद रहित इलाज शामिल है। उन्होंने कहा कि नकद रहित इलाज, मुफ्त बस यात्रा, मुफ्त बिजली, प्रतिमाह 1,000 रुपये और ऐसी कई अन्य पहलें महिलाओं को सशक्त बनाते हुए समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत करेंगी।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि सरकार के पास अपने कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उचित वित्तीय संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है क्योंकि हमारे इरादे स्पष्ट और ईमानदार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में सुधार करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि सार्वजनिक फंड का उपयोग लोगों की भलाई और विकास के लिए हो।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार ईमानदारी से काम कर रही है, जिसके कारण शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में बड़े सुधार देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम ईमानदारी से काम कर रहे हैं जिसके चलते पूरे राज्य में स्कूल, अस्पताल, सड़कें और आम आदमी क्लिनिक बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि सरकार ने बिजली आपूर्ति में सुधार, सिंचाई प्रणालियों को मजबूत करने और किसानों को निर्बाध और आवश्यक बिजली प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्देश्यों के लिए थर्मल पावर प्लांट खरीदे जा रहे हैं, नहरी पानी टेलों पर बसे किसानों तक पहुंच रहा है और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए बिजली दरों को तर्कसंगत बनाया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने लोगों से किए वादों के अनुसार सारी गारंटियां पूरी करने के साथ-साथ इससे अधिक कई काम किए हैं जिनमें आम लोगों पर बोझ डाल रहे टोल प्लाजों को बंद करना आदि शामिल है। ये कदम सरकार की यह सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि लोगों को सुचारू शासन के माध्यम से हर संभव लाभ मिले।

शिक्षा और खेल में निवेश के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साझा किया कि बजट में शिक्षा के लिए आवंटन में सात प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि राज्य भर में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए 1,791 करोड़ रुपये रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि खेलों को प्रोत्साहित करना युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है।

उन्होंने कहा कि खेलों को प्रोत्साहित करते हुए युवाओं की असीम ऊर्जा को खेलों में लगाकर उन्हें और सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो युवा खेलों की ओर जा रहे हैं, उनके पास नशों की ओर देखने तक का समय नहीं है क्योंकि वे अपनी सारी ऊर्जा अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने की ओर लगा रहे हैं। खेलों को प्रोत्साहित करने से राज्य सरकार को नशों के खिलाफ लड़ाई में बड़ी मदद मिल रही है और युवाओं को खुद के लिए स्वस्थ और रचनात्मक भविष्य की सृष्टि की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के विकास और लोगों की भलाई के लिए लोगों के हर एक पैसे का पूर्ण विवेकपूर्ण उपयोग कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि सिस्टम में लीकेज़ या रिश्वतखोरी जैसी समस्याओं को प्रभावी ढंग से रोका गया है और बचाए गए संसाधन अब उन योजनाओं में निवेश किए जा रहे हैं जिनका सीधा लाभ आम आदमी को हो रहा है और आगे होगा। उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार का एकमात्र उद्देश्य राज्य की प्रगति और खुशहाली को सुनिश्चित बनाना है।

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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।

अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।

अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।

पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।

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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”

पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”

सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”

पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”

यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।

यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।

इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।

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