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पंजाब शिक्षा क्रांति: सरकारी स्कूलों के 59 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस परीक्षा पास की; आईआईटी क्वालीफायरों में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज

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शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि “पंजाब शिक्षा क्रांति” पहल की सफलता की सजीव तस्वीर पेश करते हुए प्रदेश के सरकारी स्कूलों के 59 विद्यार्थियों ने भारत की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस्ड 2026 पास कर ली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 44 क्वालीफायरों की तुलना में इस बार 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने 59 सफल विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी, जिनकी मेहनत और लगन से यह सफलता हासिल हुई है।

जिला-वार आंकड़े साझा करते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि पटियाला जिला 11 क्वालीफायरों के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद संगरूर 7 विद्यार्थियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। लुधियाना, फिरोजपुर और एसएएस नगर से 6-6 विद्यार्थी चयनित हुए। फतेहगढ़ साहिब से 5, अमृतसर और जालंधर से 4-4, बठिंडा और गुरदासपुर से 3-3, फाजिल्का से 2 तथा रूपनगर और होशियारपुर से 1-1 विद्यार्थी जेईई एडवांस्ड पास करने में सफल रहे।

इस उपलब्धि को सरकारी स्कूल शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर बताते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “यह कोई अचानक हुआ चमत्कार नहीं है, बल्कि हम एक साल में 44 से 59 तक पहुंच गए हैं।” उन्होंने कहा कि अब गांव का बच्चा भी अगर हिम्मत रखता है तो मुश्किलों को पार कर सकता है और लाखों रुपये की कोचिंग खर्च किए बिना भारत की सबसे कठिन परीक्षा पास कर सकता है।

पंजाब शिक्षा क्रांति की यही सच्चाई है जो अब साकार होती दिख रही है। हमारे विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़कर जेईई एडवांस्ड पास कर रहे हैं, एसी कोचिंग सेंटर्स से नहीं। यही असली क्रांति है।

स. बैंस ने कहा, “यह नतीजा उस भ्रम को भी दूर करता है कि आईआईटी में केवल बड़े-बड़े प्राइवेट कोचिंग हब से पढ़े छात्र ही जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब शिक्षा क्रांति का असली लक्ष्य आधारभूत हस्तक्षेप और योग्य शिक्षकों की सही मार्गदर्शन के माध्यम से सरकारी स्कूलों को उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग कौशल पैदा करने वाला बनाना है। अब पंजाब का हर बच्चा बड़े सपने देख सकता है और देश की सबसे कठिन परीक्षाएं पास कर सकता है।

इस उपलब्धि का श्रेय व्यवस्थागत सुधारों को देते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह सफलता मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की ‘पंजाब शिक्षा क्रांति’ के लक्षित कार्यों का नतीजा है। यह पहल सरकारी स्कूलों में जेईई और नीट की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, बेहतर बुनियादी ढांचा और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि विपक्षी नेताओं ने पहले सरकार के कोचिंग कार्यक्रमों को ‘चुनावी जुमला’ बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन जेईई और नीट क्वालीफायरों में साल-दर-साल लगातार वृद्धि असली सच दिखाती है, क्योंकि आंकड़े झूठ नहीं बोलते। हमारे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब देश के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों के साथ मुकाबला करने के योग्य बन रहे हैं।

स. बैंस ने कहा कि हर सफल विद्यार्थी के पीछे दृढ़ इरादा, त्याग और मेहनत की कहानी छिपी होती है। उन्होंने कहा कि जेईई एडवांस्ड में पंजाब के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की सफलता केवल एक परीक्षा का नतीजा नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिले शैक्षणिक अवसर जीवन कैसे बदल सकते हैं।

स. बैंस ने होशियारपुर के स्कूल ऑफ एमिनेंस भगपुर सटौर की प्रिया भारद्वाज की कहानी का जिक्र करते हुए बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी एकल मां ने निजी कंपनी में काम करके मात्र 1.44 लाख रुपये की सालाना आय से बेटी को पाला और परिवार का गुजारा चलाया। आर्थिक तंगी के बावजूद प्रिया अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर और प्रतिबद्ध रही तथा पंजाब सरकार की कोचिंग और मार्गदर्शन से जेईई एडवांस्ड पास किया। वह अब इंजीनियर बनकर अपने स्वर्गीय पिता के सपने को पूरा करना चाहती है।

सफल विद्यार्थियों में एसएएस नगर के स्कूल ऑफ एमिनेंस मुल्लांपुर के प्रभजोत सिंह भी शामिल हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और मां गृहिणी हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले प्रभजोत को पंजाब सरकार द्वारा दी गई अकादमिक सहायता, शिक्षकों और प्रिंसिपल से लगातार हौसला मिला। वह इंजीनियर बनकर अपने परिवार का जीवन स्तर ऊंचा उठाना चाहते हैं।

इसी प्रकार फतेहगढ़ साहिब के स्कूल ऑफ एमिनेंस अमलोह के हर्ष माधव ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा दी गई निःशुल्क कोचिंग, मॉक टेस्ट और मार्गदर्शन ने उन्हें जेईई एडवांस्ड की तैयारी में मदद की। उनके पिता निजी कंपनी में 18,000 रुपये प्रतिमाह कमाते हैं और परिवार निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकता था। वह अब आईआईटी मुंबई में दाखिला लेकर अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने की इच्छा रखते हैं।

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अमन अरोड़ा ने शाहकोट हलके में नौकरियों के मामले में कांग्रेसी विधायक लाडी को घेरा

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पंजाब विधान सभा में विपक्ष को घेरते हुए पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं और 1,83,837 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में 6,36,636 नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं।

आज सदन में विधायक स. कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा रोजगार के अवसरों के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने सदन को बताया कि इस बड़े निवेश प्रवाह ने सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र में 6.36 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने जापान की प्रमुख स्टील कंपनी आइची स्टील का उदाहरण दिया, जिसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की सुविधाओं और कारोबार को आसान बनाने वाली नीतियों से प्रभावित होकर अपने नियोजित निवेश को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया है।

कांग्रेस के विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया द्वारा उनके शाहकोट विधानसभा हलके में किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी न मिलने के आरोप पर श्री अमन अरोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने शाहकोट हलके में सभा रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ”मैं आऊंगा और हम लोगों से पूछेंगे, क्या उन्हें नौकरियां मिली हैं। अगर मैं गलत हुआ, तो मैं मंत्री पद और विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दूंगा। अगर मैं सही हुआ तो लाडी को इस्तीफा देना होगा।” कांग्रेसी विधायक लाडी ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की और चर्चा छोड़कर बैठ गए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल योग्यता के आधार पर दी हैं।

श्री अमन अरोड़ा ने कौशल विकास के लिए राज्य सरकार के रिकॉर्ड प्रयासों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के बजट में 75 सालों में पहली बार कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 10 करोड़ रुपये थे। उन्होंने दावा किया कि 22 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार में प्लेसमेंट कैंपों और हैंडहोल्डिंग अभ्यासों के माध्यम से सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि सुनाम में हाल ही में आयोजित एक मेगा रोजगार मेले में, 61 कंपनियों ने भाग लिया और लगभग 700 नौजवानों को मौके पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए।

रोजगार सृजन मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से संगरूर जिले में विश्व स्तरीय संत अतर सिंह महाराज आर्म्ड फोर्सेज प्रेपरेटरी इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। यह विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है, जहां सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी स्तर के पदों के लिए वार्षिक 500 नौजवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि 15-29 साल आयु वर्ग में पंजाब की बेरोजगारी दर वर्ष 2022 की 19.1 प्रतिशत से घटकर 2025 में 17 प्रतिशत हो गई है। मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अब पंजाब बेहतर रोजगार मैट्रिक्स वाले राज्यों में शामिल है।

वैश्विक स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत की जीडीपी चीन से थोड़ी अधिक थी। उन्होंने कहा, ”चीन ने अपने प्रत्येक व्यक्ति को काम पर लगाया और दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनकर उभरा। चीन निकट भविष्य में अमेरिका को पछाड़ सकता है। हमारे पास वही क्षमता है, लेकिन सही वातावरण की कमी थी। पर अब हम इसे ठीक कर रहे हैं।”

कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार प्रत्येक नागरिक को नौकरी देने की गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का असल कर्तव्य उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा, ”हम यहां केवल आंकड़े पेश करने के लिए नहीं हैं। हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां हर नौजवान अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”

विपक्ष द्वारा नौकरियों के बारे में व्हाइट पेपर जारी करने की मांग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छा, सस्ता और टिकाऊ व्हाइट पेपर लोगों से सीधे तौर पर पूछना है। आरटीआई दायर करो या लोगों के साथ मीटिंग करो। लोग खुद बताने देंगे कि उन्हें नौकरियां मिली हैं या नहीं।”

श्री अमन अरोड़ा ने पिछली कांग्रेस सरकार के ‘हर घर नौकरी’ वादे पर कटाक्ष करते हुए इसे पंजाब के नौजवानों के साथ ‘सबसे बड़ा धोखा’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना किसी रिश्वत के पारदर्शी तरीके से 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब को ‘कारोबार करने में आसानी’ के लिए एक मॉडल राज्य बनाना और सम्मानजनक, कौशल-आधारित रोजगार पैदा करना है।

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सियाम ने भी माना, ई-20 में ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण खराब हो रही गाड़ियां- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 को लेकर सियाम की सौंपी गई रिपोर्ट को वापस कराने पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सियाम (सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि ई-20 में बहुत ज्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे आपकी गाड़ियां ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने सियाम पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापस करवा दी। क्यों? जब विज्ञान और इंजीनियरिंग कह रहे हैं कि ई-20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 को लेकर सियाम की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सियाम ने रिसर्च की और ऑटोमोबाइल के सभी मैन्युफैक्चरर्स ने मिलकर यह पाया कि क्लोराइड और मॉइस्चर ज्यादा होने की वजह से ई-20 गाड़ियों को खराब कर रहा है। सियाम ने 28 जुलाई को मोदी सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी थी। 4 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सियाम पर जबरदस्ती करके वह रिपोर्ट वापस करा दी। रिपोर्ट वापस करने के बाद सियाम की तरफ से कहा गया कि शायद उनकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी है और कुछ तथ्यों को दोबारा चेक करने की जरूरत है। एक तरह से मोदी सरकार जबरदस्ती करके पूरे देश पर ई-20 थोप रही है, लेकिन क्यों?

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यह सिर्फ एक सड़क प्रोजेक्ट नहीं है, यह लाखों श्रद्धालुओं, किसानों, व्यापारियों और रोजाना यात्रियों के लिए एक लाइफलाइन है: कंग

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श्री आनंदपुर साहिब से आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की और बंगा–गढ़शंकर–श्री आनंदपुर साहिब–नैना देवी मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की लंबे समय से लटकती आ रही मांग को जोरदार तरीके से दोहराया। मुलाकात के दौरान कंग ने इस सड़क की सामरिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व पर चर्चा की और केंद्र सरकार से इस प्रोजेक्ट में तेजी लाने की अपील की।

कंग ने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ एक सड़क बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए एक लाइफलाइन है। उन्होंने बताया कि यह सड़क सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक श्री आनंदपुर साहिब, जहाँ 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, को हिमाचल प्रदेश स्थित माता नैना देवी जी के मंदिर से जोड़ती है। हर साल लाखों श्रद्धालु, संगतें और पर्यटक इस मार्ग से यात्रा करते हैं।

‘आप’ सांसद ने आगे कहा कि यह सड़क पंजाब को हिमाचल प्रदेश से जोड़ने के साथ-साथ हजारों रोजाना यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की भी सेवा करती है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने से संपर्क में बड़ा सुधार होगा, यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम होगी, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार और कारोबार मजबूत होगा और पूरे क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

कंग ने कहा कि पहले मंजूरियों और घोषणाओं (जिनमें 2019 में रखा गया शिलान्यास भी शामिल है) के बावजूद, पिछले वर्षों में इस प्रोजेक्ट में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करके और समय पर विकास एवं रख-रखाव के लिए इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधीन लाकर अपनी प्रतिबद्धता पूरी की जाए।

मुलाकात पर संतोष व्यक्त करते हुए कंग ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सकारात्मक भरोसा दिया है और इस लंबे समय से लटकती आ रही मांग के महत्व को स्वीकार किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा क्षेत्र के लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कंग ने कहा कि वे तब तक इस मुद्दे को उठाते रहेंगे जब तक कि इस क्षेत्र को आधुनिक सड़क बुनियादी ढांचा नहीं मिल जाता, जिसका यह हकदार है। उन्होंने कहा, “बेहतर संपर्क ही विकास की नींव है, और जब तक यह महत्वपूर्ण मांग पूरी नहीं हो जाती, मैं लोगों की आवाज बुलंद करता रहूंगा।”

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