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Punjab : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की नशे के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत, पंजाब को नशा मुक्त बनाने का निर्देश।

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चंडीगढ़। नशे के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पुलिस कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और एसएसपी को तीन महीने के भीतर Punjab को नशा मुक्त राज्य बनाने का निर्देश दिया।

आज Punjab भवन में पुलिस कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और एसएसपी के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि राज्य सरकार ने नशे के प्रति कोई भी सहानुभूति न रखने की नीति अपनाई है और इस गंभीर समस्या के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि Punjab पुलिस का कानून-व्यवस्था बनाए रखने में एक लंबा और शानदार इतिहास रहा है, और उन्हें पूरा यकीन है कि पुलिस अपनी इस परंपरा को जारी रखते हुए आम जनता के सहयोग से राज्य को पूरी तरह से नशा मुक्त बना देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नशे से संबंधित मामलों की शीघ्र सुनवाई और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करेगी। इसके अलावा, पुलिस और सिविल प्रशासन को इस अभियान में पूरा समर्थन और सहयोग मिलेगा।

उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में नशे की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही, ताकि हमारे युवा इसके प्रभाव में न आएं। इसके साथ ही उन्होंने नशे की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से खत्म करने और नशा बेचने वालों को कड़ी सजा देने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि नशा तस्करों और उनके परिवारों को बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं पर कोई सब्सिडी न दी जाए, ताकि अपराधियों से सख्ती से निपटा जा सके।

उन्होंने कहा कि अगर नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी मिसाल स्थापित करने के लिए एनडीपीएस एक्ट में किसी संशोधन की जरूरत पड़ी, तो वे इसे केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई एक जन और सामाजिक आंदोलन में बदलनी चाहिए, जिसके लिए अधिकारियों को व्यापक कार्रवाई के लिए एक ठोस योजना तैयार करनी चाहिए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नारंगवाल गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि गुरुवार शाम को नशा तस्कर की अवैध संपत्ति को नष्ट कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जहां यह अवैध निर्माण हुआ था, वहां अब एक लाइब्रेरी बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस स्थान से नशे का कारोबार किया जाता था, उसे अब ‘ज्ञान का केंद्र’ में बदला जाएगा, ताकि युवाओं को नशे की समस्या के बारे में जागरूक किया जा सके।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने फील्ड अधिकारियों को आश्वासन दिया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई करते समय किसी भी अधिकारी को कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब ने पहले आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीत दर्ज की थी, और अब नशे की समस्या को भी जड़ से समाप्त करने में अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई को जमीनी स्तर पर ठोस योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के द्वारा जीता जाएगा, जिसके लिए अधिकारियों को सक्रिय रूप से भाग लेना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

भगवंत सिंह मान ने यह स्पष्ट किया कि यह एक असाधारण लड़ाई है, और सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर अधिकारी पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर नए और प्रभावी कदम उठाए।

मुख्यमंत्री ने पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी से यह कहा कि उनके क्षेत्र में अगले तीन महीनों के भीतर नशे की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। एक महीने बाद, हर एसएसपी को जिले में नशा विरोधी अभियानों की प्रगति का मूल्यांकन करना होगा, और जिनमें परिणाम नहीं दिखेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएं, और इसके लिए एएनटीएफ द्वारा पहले ही सूची उपलब्ध कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह आग्रह किया कि बड़े और मध्यम स्तर पर नशे की बरामदगी के मामलों में दोषियों की जमानत रद्द करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।

मुख्यमंत्री ने एनडीपीएस मामलों में समय पर चार्जशीट दाखिल करने पर जोर दिया और इन मामलों में कैमिकल रिपोर्ट भी समय पर पेश करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिलों में नशे की ओवरडोज के सभी मामलों की गहन जांच और कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि नशे की आपूर्ति को रोकने के लिए वाहनों की सख्त जांच रात-दिन की जानी चाहिए।

एक अन्य मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने नशे की खपत या नशे के प्रचार में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त और उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई करने का आदेश दिया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि नशा तस्करी के दोषियों की संपत्ति को तुरंत जब्त किया जाए, और व्यावसायिक मात्रा में नशे की बरामदगी के मामलों में संपत्ति को पूरी तरह से जब्त कर लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि व्यावसायिक नशे के मामलों में अवैध संपत्तियों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पुलिस कमिश्नरों और एसएसपीज से यह कहा कि नशे से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की गहरी पहचान की जाए, और हर पखवाड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा इन प्रभावित क्षेत्रों में तथा हर सप्ताह जेलों में घेराबंदी और तलाशी अभियान (सीएएसओ) चलाए जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात व्यापक और सख्त अभियान चलाया जाए, जिसका मुख्य ध्यान नशीले पदार्थों की बरामदगी पर हो।

भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि यदि कोई नशा तस्कर पुलिस के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो उसके साथ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नरों, पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी से नशे की रोकथाम और नशा छुड़ाने की रणनीतियों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम करने का अनुरोध किया। उन्होंने डिप्टी कमिश्नरों से यह भी कहा कि वे सरकारी और निजी दोनों प्रकार के नशा छुड़ाने और पुनर्वास केंद्रों, साथ ही ओओएटी केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण करें। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इन केंद्रों में आवश्यक मानव संसाधन (मनोचिकित्सक, काउंसलर आदि), परीक्षण किट, दवाइयां, सुरक्षा (सुरक्षा कर्मी/सीसीटीवी), सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

भगवंत सिंह मान ने कहा कि डिप्टी कमिश्नरों को मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर आने वाली आवश्यकताओं के लिए तैयार रहना चाहिए, और साथ ही केमिस्ट दुकानों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नरों से यह भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि एसडीएम और फील्ड अधिकारी, खासकर नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों के मामलों में, पीड़ितों के घर जाएं ताकि इस समस्या का समाधान किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने स्कूल पाठ्यक्रम में नशे की समस्या के खिलाफ एक पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की, और इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। भगवंत सिंह मान ने डिप्टी कमिश्नरों से यह भी कहा कि नशे की ओवरडोज से हुई मौतों के प्रत्येक मामले में मुख्यमंत्री राहत कोष से उचित सहायता प्रदान की जाए।

मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नरों को यह निर्देश दिया कि वे नशे के आदी व्यक्तियों के परिवारों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करें। इसके अलावा, उन्होंने डिप्टी कमिश्नरों से व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचने और जन संपर्क कार्यक्रमों की शुरुआत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नशे की समस्या से पूरी तरह निजात पाने के लिए जिला स्तर पर स्कूल शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, रोजगार और कौशल विकास विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाए।

डिप्टी कमिश्नरों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि वे हर महीने सार्वजनिक बैठकों, शिविरों, सेमिनारों, साइकिल रैलियों, मानव श्रृंखलाओं, खेल आयोजनों और कौशल विकास कार्यक्रमों के रूप में जन संपर्क कार्यक्रम आयोजित करें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा, डॉ. बलबीर सिंह, तरुणप्रीत सिंह सौंद और लालजीत सिंह भुल्लर भी मौजूद थे।

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‘बेअदबी’ पार्टी (अकाली दल) अपनी प्रतिष्ठा खो चुकी है, अब वह राजनीति में वापसी के लिए भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रही है: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शनिवार को कहा कि बेअदबी पार्टी (अकाली दल) और उसके प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राजनीतिक फायदे के लिए बार-बार अपने राजनीतिक स्टैंड से समझौता किया है और अब वे भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं।

सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “आज सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं कि वह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए जा रहे कुछ बिलों से पूरी तरह सहमत हैं। लेकिन पंजाब के लोगों को अच्छी तरह याद है कि जब कृषि कानून लाए गए थे, तो पूरा बादल परिवार उन कानूनों के पक्ष में वीडियो बनाता हुआ नजर आया था।”

बलतेज पन्नू ने कहा कि बड़े स्तर पर लोगों के गुस्से का सामना करने के बाद ही बादलों ने अपना रुख बदला और खुद को किसानों का हमदर्द दिखाने की कोशिश में कृषि कानूनों के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।

अकाली दल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “‘बेअदबी’ अकाली दल पंजाब के लोगों के दिलों से पूरी तरह गायब हो चुका है। अब वह भाजपा के साथ समझौता करके अपनी राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।”

सुखबीर बादल के भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के बारे में पहले दिए गए बयान को याद करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “मैं सुखबीर सिंह बादल को उनकी ही बातें याद दिलाना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि जो लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि किसी को अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए, लेकिन जब सुखबीर बादल ने खुद यह बयान दिया, तो आज इसका जिक्र करना बनता है।”

उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बार-बार लिए गए यू-टर्न ने अकाली दल की राजनीति का असली चेहरा सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग उन लोगों के बीच साफ फर्क समझ सकते हैं जो अपने उसूलों पर अड़े रहते हैं और जो राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अपना रुख बदलते हैं।

बलतेज पन्नू ने दावा किया कि पंजाब के लोग पहले ही अकाली दल की राजनीति को नकार चुके हैं और भाजपा के साथ राजनीतिक समझौता करने की उसकी नई कोशिशों से गुमराह नहीं होंगे।

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मुक्तसर की तियां में पहुंचीं डॉ. गुरप्रीत कौर मान, महिलाओं ने चुनाव की तारीख पूछनी शुरू कर दी

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मुक्तसर विधानसभा में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं के उत्साह से सराबोर तियां का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुक्तसर की बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। बातचीत में मावा दीया योजना को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि उनके खातों में ₹4,500 और ₹3,000 की राशि पहुंचने से उन्हें काफी राहत और खुशी मिली है।

महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान सरकार की योजनाओं को लेकर उनका उत्साह इतना स्पष्ट था कि बात सिर्फ योजना के लाभ तक सीमित नहीं रही—महिलाएं चुनाव की तारीख और अगला चुनाव कब होगा, यह पूछने लगीं।

माहौल ऐसा था कि मान साहब से ज्यादा अब पंजाब की इन माताओं-बहनों को चुनाव की जल्दी दिखाई दी, क्योंकि उनका कहना था कि वे जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं, ताकि उन्हें एक बार फिर भगवंत मान जी को अपना समर्थन देकर पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने का मौका मिले।

मुक्तसर की तियां में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं की खुशियों के साथ-साथ महिलाओं के मन की राजनीतिक इच्छा भी खुलकर सामने आई—उन्हें अब चुनाव का इंतजार है।

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‘गैंगस्टरां ते वार’ ने ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता सिद्ध की; गैंगस्टरों के लिए कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं : DGP गौरव यादव

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पंजाब पुलिस का प्रमुख एंटी-गैंगस्टर अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ संगठित अपराध के विरुद्ध राज्य में चलाए जा रहे सबसे व्यापक और निरंतर अभियानों में से एक के रूप में उभरते हुए अपने 200 दिन पूरे कर चुका है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने पूरे पंजाब में 1,09,087 छापेमारियाँ कीं, 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को गिरफ़्तार किया, 58,212 अपराधियों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई की, भारी मात्रा में अवैध हथियार और मादक पदार्थ बरामद किए तथा संगठित आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के मार्गदर्शन में शुरू किया गया ‘गैंगस्टरां ते वार’ एक ख़ुफ़िया सूचना-आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य लक्षित कार्रवाई, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, वित्तीय जाँच तथा तकनीक-आधारित पुलिसिंग के माध्यम से संगठित अपराध गिरोहों का पूरी तरह सफाया करना है।

इस अवसर पर, डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि यह अभियान अब बहुआयामी कार्रवाई का रूप ले चुका है, जो केवल गैंगस्टरों ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को भी निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, “‘गैंगस्टरां ते वार’ के पहले 200 दिनों ने निरंतर और ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। हमारी रणनीति केवल गिरफ़्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध को सक्षम बनाने वाले पूरे नेटवर्क—सहयोगियों, वित्तीय स्रोतों, रसद व्यवस्था, संचार माध्यमों और विदेशों में मौजूद संपर्कों—को ध्वस्त करने पर केंद्रित है। पंजाब पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश के भीतर या बाहर कहीं भी संचालित होने वाले गैंगस्टरों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना न बचे।”

इन 200 दिनों के दौरान 1,532 घोषित अपराधियों (पीओ) को गिरफ़्तार किया गया, जबकि 58,212 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिनमें 853 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 57,359 वांछित अपराधी शामिल हैं।

निवारक पुलिसिंग के तहत 28,201 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 577 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 27,624 वांछित अपराधी शामिल थे; वहीं 18,514 व्यक्तियों का वेरिफिकेशन कर उन्हें बाद में रिहा किया गया, जिनमें 1,529 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 16,985 वांछित अपराधी शामिल थे। कुल मिलाकर अभियान के दौरान 1,04,927 व्यक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई के दायरे में आए जिनमें 2,959 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 1,01,968 वांछित अपराधी शामिल हैं।

गिरफ़्तारियों के अतिरिक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों की हथियारों, मादक पदार्थों, वित्तीय संसाधनों और रसद व्यवस्था तक पहुँच को समाप्त कर उनकी अपराध करने की क्षमता को कमज़ोर करना भी रहा।

इस अभियान ने संगठित अपराध गिरोहों की मारक क्षमता को भी बड़ा झटका दिया।अभियान के दौरान पंजाब पुलिस ने 990 अवैध हथियार, 242 धारदार हथियार, 2,739 कारतूस, 315 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और 15 हैंड ग्रेनेड बरामद किए, जिससे आपराधिक गिरोहों की मारक क्षमता को गंभीर रूप से कमज़ोर किया गया।

साथ ही, पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध और नशा तस्करी के गठजोड़ के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ करते हुए 774.38 किलोग्राम हेरोइन, 480.23 किलोग्राम अफीम, 7,266.26 किलोग्राम पोस्त भूसी तथा 26,91,455 नशीली गोलियाँ बरामद कीं। पुलिस ने 1,73,41,965 रुपये की ड्रग मनी, 1,80,54,446 रुपये नकद तथा 413.85 ग्राम सोना भी ज़ब्त किया, जिससे संगठित अपराध और मादक पदार्थों के कारोबार को वित्तीय सहायता देने वाले स्रोतों पर प्रभावी प्रहार हुआ।

एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस प्रमोद बान ने कहा कि अब अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। उन्होंने कहा, “आज का संगठित अपराध वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल संचार और विदेशों में बैठे संचालकों के माध्यम से संचालित होता है। इसी कारण हमारी जाँच में फील्ड ऑपरेशन के साथ-साथ वित्तीय ट्रैकिंग, डिजिटल इंटेलिजेंस तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय शामिल है। इसी रणनीति के कारण पंजाब पुलिस रंगदारी गिरोहों का पर्दाफाश करने, विदेशों में बैठे संचालकों की पहचान करने तथा वांछित अपराधियों के निर्वासन (डीपोर्टेशन) और प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल रही है। साथ ही यह अभियान युवाओं को यह संदेश भी देता है कि गैंगस्टर संस्कृति का तथाकथित आकर्षण केवल एक भ्रम है, जिसका अंत अपराध और विनाश में होता है।”

अभियान को पड़ोसी राज्यों तथा केंद्रीय जाँच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय का भी भरपूर सहयोग मिला, जिससे सूचनाओं के तुरंत आदान-प्रदान और संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त अभियानों को गति मिली।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में से एक फरार गैंगस्टर भुवनेश चोपड़ा उर्फ आशीष चोपड़ा, पुत्र हीरा लाल, निवासी मकान नंबर 15, अंदरूनी दिल्ली गेट, फिरोज़पुर, को मध्य एशिया से तथा गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को जकार्ता (इंडोनेशिया) से सफलतापूर्वक भारत वापस लाना रहा। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने ओएफटीईसी पंजाब तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे यह सिद्ध हुआ कि पंजाब पुलिस अब राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर भी वांछित अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम है।

गैंगस्टरों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई के अतिरिक्त अभियान के दौरान 64,402.77 लीटर अवैध शराब, 34,840 बोतलें तथा 926 पेटियाँ बरामद कर नष्ट की गईं। इसके अलावा अपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 4,978 मोबाइल फोन, 1,781 वाहन और 61 ड्रोन भी ज़ब्त किए गए। इन कार्रवाइयों ने आपराधिक ढाँचे को कमज़ोर करने, संगठित अपराध के नेटवर्क को बाधित करने और पूरे पंजाब में सार्वजनिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 93946-93946 नंबर पर एक समर्पित टिपलाइन भी शुरू की है, जिसके माध्यम से लोग वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और उनसे संबंधित आपराधिक गतिविधियों की जानकारी गोपनीय और गुमनाम रूप से साझा कर सकते हैं। इस पहल के ज़रिए लोग अपनी पहचान उजागर होने के डर के बिना गोपनीय रूप से महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे एजीटीएफ को गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों का जल्द पता लगाकर उन्हें गिरफ़्तार करने में मदद मिलेगी।

जनसहभागिता को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एजीटीएफ ने एक इनाम नीति भी लागू की है, जिसके तहत वांछित गैंगस्टरों और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में सहायक विश्वसनीय सूचना देने वालों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा तथा उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इस पहल से पंजाब में संगठित अपराध के विरुद्ध ख़ुफ़िया-आधारित अभियानों को और अधिक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

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