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Punjab बना देश का पहला state जिसने 3 साल में youth को दी 55 हज़ार से ज़्यादा government jobs – CM Mann बोले – “यह युवाओं का हक़ है, कोई एहसान नहीं”

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पंजाब के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने अपने कार्यकाल के सिर्फ़ तीन सालों में ही 55,000 से ज़्यादा सरकारी नौकरियां देकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। यह उपलब्धि “Mission Rozgar” का हिस्सा है, जिसके ज़रिए पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने इतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां दी हों।

सीएम मान ने कहा कि पिछली सरकारें अपने कार्यकाल के आखिरी वक्त में कुछ नौकरियां देकर सिर्फ़ औपचारिकता निभाती थीं, लेकिन उनकी सरकार ने पहले दिन से ही नौकरियां देना शुरू किया।

युवाओं को अपॉइंटमेंट लेटर

इस मौके पर सीएम मान ने एक समारोह में 271 युवाओं को अलग-अलग विभागों में अपॉइंटमेंट लेटर सौंपे। उन्होंने कहा कि यह युवा अब पंजाब की सामाजिक और आर्थिक तरक्की में सीधा योगदान देंगे।
सीएम ने साफ किया कि सारी भर्तियां पूरी तरह Merit और Transparency के आधार पर हुई हैं, बिना किसी सिफारिश या दबाव के।

CM मान का युवाओं को संदेश

मुख्यमंत्री ने नए भर्ती युवाओं से अपील की कि वे अपनी नौकरी को सिर्फ़ रोजगार न समझें बल्कि Missionary Spirit के साथ जनता की सेवा करें। उन्होंने कहा –
आप अपनी कलम का इस्तेमाल ग़रीब और पिछड़े वर्ग की मदद के लिए करें। जनता की भलाई ही असली मकसद होना चाहिए।”

शिक्षा सुधार और उपलब्धियां

समारोह में सीएम ने शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने सरकारी स्कूलों की हालत बिगाड़ दी थी। बड़े नेताओं के बच्चे Convent Schools में पढ़ते थे, इसलिए सरकारी स्कूल सिर्फ़ Mid Day Meal Centres बनकर रह गए थे।

लेकिन मौजूदा सरकार ने स्कूलों को “School of Eminence” के रूप में अपग्रेड करना शुरू किया है।

  • राष्ट्रीय Achievement Survey में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया।
  • सरकारी स्कूलों के 848 बच्चों ने NEET क्वालिफाई किया।
  • 265 ने JEE Mains पास किया।
  • और 45 छात्रों ने JEE Advanced भी क्लियर की।

सीएम मान ने कहा कि गरीबी और समाज की बुराइयाँ किसी Freebies या Subsidy से खत्म नहीं होंगी। असली बदलाव सिर्फ़ Education से ही आएगा।

पिछली सरकारों पर हमला

सीएम ने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब और यहां की जनता के हितों से समझौता किया और सिर्फ़ अपने निजी फायदे देखे। जनता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया और अब नई सोच वाले लोग राजनीति में आए हैं।

मान ने कहा कि उन्होंने राजनीति में आने का सपना कभी नहीं देखा था लेकिन पिछली सरकारों की लूट और भ्रष्टाचार ने उन्हें मजबूर किया। अब वे और उनकी टीम पंजाब के विकास के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं और जनता से सीधा Feedback लेकर फैसले ले रहे हैं।

पंजाब का नया दौर

सीएम मान ने दावा किया कि पंजाब अब एक नई विकास यात्रा की शुरुआत कर चुका है।

  • शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और रोजगार समेत कई क्षेत्रों में पिछले तीन सालों में अभूतपूर्व विकास हुआ है।
  • सरकार का मकसद सिर्फ़ जनता की भलाई और युवाओं को Empower करना है।
  • युवाओं को रोजगार देना ही सरकार का पहला और सबसे अहम एजेंडा है।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी

इस मौके पर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, स्थानीय सरकार मंत्री डॉ. रवजोत सिंह, Additional Chief Secretary तेजवीर सिंह, Secretary Education अनिंदिता मित्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


तीन साल में 55,000 से ज़्यादा सरकारी नौकरियां देकर पंजाब सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि यह कोई एहसान नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत और काबिलियत का नतीजा है। शिक्षा सुधार से लेकर रोजगार तक, सरकार खुद को पिछली सरकारों से अलग दिखाते हुए कह रही है कि उनका मकसद सिर्फ़ पंजाब का समग्र विकास और युवाओं का सशक्तिकरण है।

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पंजाब के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होंगे; सरपंचों को आगे बढ़कर बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को ग्रामीण पंजाब के बदलाव का नेतृत्व करने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि पंजाब को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के सपने को साकार करने के लिए राज्य के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होकर उभरने चाहिए। रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने पंचायतों से अपील की कि वे सरकारी फंडों का उपयोग इस प्रकार करें, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिले, जबकि शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने गांवों के विकास और सिंचाई से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पंजाब की प्रगति एवं समृद्धि की गति को तेज करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सरपंच मिलनी की कुछ झलकियाँ एक्स पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों के साथ बैठक के दौरान पंजाब सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की गई। सभी ने पूरी तरह से मेरिट के आधार पर नौकरियाँ देने और शिक्षा के मानक को सुधारने के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। ग्रामीण विकास और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। पंजाब के विकास और प्रगति का यह सफर निरंतर जारी रहेगा।”

‘सरपंच मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि वही जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा, “सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव की सूरत बदल सकता है और लोगों की समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है। वास्तव में सरपंच वह नींव हैं, जिस पर लोकतंत्र का स्तंभ खड़ा है, जिसके कारण वे समाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के स्तर पर समस्याओं को जानने के लिए ये लोक मिलनियाँ अनूठी पहल हैं। उन्होंने कहा कि अनुदानों की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका उपयोग सही और ईमानदारी से होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आरोप किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच ही गांवों के विकास का धुरा होते हैं। पहले पिछली सरकारों का अनुदानों में हिस्सा होता था, जिसके कारण विकास कार्य प्रभावित होते थे। अब गांवों को बड़ी मात्रा में अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब इस पैसे से राज्य के गांवों की पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगी।”

सरपंचों को विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये फंड इस प्रकार खर्च किए जाने चाहिए कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों के निर्माण और सोलर लाइटें लगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उसके बाद गलियों-नालियों को, ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बहुत आवश्यक है और समय की मांग है ताकि पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गांवों की पंचायतें लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहायक रही हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार सरपंचों को हर संभव सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि वे संपूर्ण ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंचायतें और सरपंच राज्य सरकार की वास्तविक आँखें और कान हैं क्योंकि वे जमीनी स्तर पर जनता से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि उनके पास अपार शक्ति होती है और उनके फैसलों को पूरा गांव सम्मान से मानता है।”

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने सरपंचों को यह ताकत दी है और उनके हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना सरपंचों का मूल कर्तव्य है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये संस्थाएँ राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए माध्यम के रूप में काम करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतियाँ राज्य सरकार द्वारा बनाई जाती हैं और सरपंच तथा पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सरपंचों से अपील की कि वे स्वयं को विकास कार्यों के लिए पुनः समर्पित करें और विकास कार्यों तथा सेवाओं की निगरानी पूरी तनदेही से सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरपंचों को एक स्पष्ट आह्वान दिया कि वे विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अतीत में गांवों में व्यापक गुटबाजी के कारण कई काम अधूरे रह गए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरपंचों को गांवों में गुटबंदी समाप्त करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है। एक सरपंच को गांव के प्रत्येक निवासी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और निर्णय निष्पक्ष होकर लिए जाने चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कई सरपंच हैं, जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता से अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है।

सर्वसम्मति से पंचायतों का चुनाव करने वाले गांवों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा, “इन गांवों ने संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर और एक ओर गांवों में आपसी भाईचारे तथा सौहार्द की भावना को मजबूत किया है तथा दूसरी ओर सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए सर्वसम्मति से अपने सरपंच चुने हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि उनकी सरकार गांवों के समग्र विकास और प्रगति के लिए वचनबद्ध है तथा इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा, “सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक पुल हैं और उन्हें गांवों के विकास में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।”

उन्होंने सरपंचों से गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील भी की ताकि राज्य के पर्यावरण को बचाया जा सके। बैठक में महिला सरपंचों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से उत्साहित होकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन, अर्थव्यवस्था और समाज में महिलाओं की भूमिका के प्रति व्यापक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण शिक्षा, प्रतिनिधित्व और आर्थिक अवसरों में निहित है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिलाओं से निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में आगे आने और राज्य के भविष्य को नया स्वरूप देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि लड़कियां आगे आएं और शिक्षा के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा, “यह देश के व्यापक हित में है, क्योंकि जो महिलाएं घरों और परिवारों का कुशलतापूर्वक संचालन करती हैं, उन्हें देश भी चलाना चाहिए। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।”

राजनीति में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आगे आकर हिस्सा लेना चाहिए ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकें और समाज में आवश्यक परिवर्तन ला सकें।

उन्होंने कहा कि लड़कियों ने लगभग हर क्षेत्र में लड़कों को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन राजनीति अभी भी उनकी पहुंच से दूर है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “इस क्षेत्र को लंबे समय से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि महिलाएं यहां भी अपनी पहचान बनाएं। समानता आधारित समाज की स्थापना और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इससे पंजाब को एक प्रगतिशील और समृद्ध राज्य बनाने में मदद मिलेगी।”

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भाजपा नेता के बेटे की भारी मात्रा में हथियारों के साथ गिरफ्तारी भगवा पार्टी का पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने का जीता-जागता सबूत: कुलदीप धालीवाल

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप धालीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने का सीधा आरोप लगाया है। धालीवाल ने कहा कि करीब एक महीना पहले जब बम धमाके हुए थे, तब भी उन्होंने डंके की चोट पर कहा था कि भाजपा पंजाब का माहौल खराब करना चाहती है। आज उनकी वह बात 100% सच साबित हो गई है।

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए धालीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान की सरकार द्वारा पंजाब में किए जा रहे ऐतिहासिक जनहित के कामों से भाजपा बुरी तरह बौखला गई है। इसी घबराहट में पंजाब को अस्थिर करने के लिए भाजपा खतरनाक चालें चल रही है। इस मौके पर उनके साथ नव-नियुक्त शहरी अध्यक्ष सरबजोत भी मौजूद थे।

धालीवाल ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि बीती 19 जून को अजनाला के नजदीक गांव हरड़ खुर्द से बीएसएफ और स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने रोहन नाम के एक नौजवान को गिरफ्तार किया है। इस देशद्रोही के पास से एक एके-47 राइफल, एक मेड-इन-अमेरिका अत्याधुनिक बुलेटप्रूफ जैकेट, 25 पिस्तौल और 368 कारतूस बरामद हुए हैं। धालीवाल ने कहा कि यह कोई और नहीं, बल्कि अमृतसर भाजपा एससी मोर्चा के जिला अध्यक्ष शिव कुमार का बेटा है। यह वही अमृतसर शहर है जहां से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और नव-नियुक्त राज्य सभा सदस्य तरुण चुघ आते हैं। उनकी नाक के नीचे भाजपा के बड़े नेता का बेटा इतने बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी में लिप्त है।

धालीवाल ने जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि पकड़ा गया आरोपी ऑस्ट्रेलिया में बैठे अनमोल नाम के एक व्यक्ति के संपर्क में था और इससे पहले हथियारों और ड्रग्स की करीब 7 से 8 खेप पंजाब के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा चुका है। उन्होंने सीधे देश के गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर 50 किलोमीटर का इलाका सीधे तौर पर बीएसएफ और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है, तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में हथियार देश के अंदर कैसे आ रहे हैं? क्या अमित शाह का खुफिया और सुरक्षा तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है, या फिर पंजाब का माहौल खराब करने के लिए जानबूझकर ढील दी जा रही है?

‘आप’ प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई बार पत्र लिखा है और गृह मंत्री अमित शाह से बैठकें की हैं कि पंजाब की 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करने के लिए बीएसएफ को आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम दिए जाएं। हमारे बीएसएफ के जवान बहुत बहादुर हैं, लेकिन जब ड्रोन के जरिए आधुनिक हथियार और ड्रग्स फेंके जा रहे हों, तो बिना तकनीक के वे क्या करें? केंद्र की भाजपा सरकार ने आज तक पंजाब को इस काम के लिए एक धेला तक नहीं दिया। इसके उलट, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने स्तर पर 52 करोड़ रुपए खर्च करके तीन एंटी-ड्रोन सिस्टम सीमा पर लगवाए हैं। भाजपा न सिर्फ पंजाब के फंड रोकना चाहती है, हमारा पानी छीनना चाहती है, बल्कि अब हमारे नौजवानों को नशे और हथियारों की दलदल में धकेलना चाहती है।

धालीवाल ने पंजाब भाजपा के नेता सुनील जाखड़, तरुण चुघ और केवल ढिल्लों पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि क्या वे अब अपने इस अपराधी नेता के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? भाजपा की बंटवारे की राजनीति को बेनकाब करते हुए उन्होंने पटियाला की एक घटना का जिक्र किया, जहां भाजपा नेता करन कौड़ा ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। धालीवाल ने कहा कि ये लोग देश में अल्पसंख्यकों और क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करना चाहते हैं और विरोधी आवाजों को दबाने के लिए ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील करते हुए कहा कि अपने बच्चों और राज्य को बचा लो और इस जनविरोधी भाजपा को कभी मुंह न लगाओ। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में ‘आप’ और पंजाब के लोग भाजपा की इन घिनौनी हरकतों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

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नारकोटिक्स एनोनिमस पीयर-सपोर्ट प्रोग्राम ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत पंजाब के 13 ज़िलों तक फैला

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पंजाब सरकार के नशा-विरोधी अभियान के पोस्ट-ट्रीटमेंट रिहैबिलिटेशन हिस्से को और मजबूत करने के लिए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगवाई में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पंजाब के 13 ज़िलों में नारकोटिक्स एनोनिमस (NA) की मीटिंग्स आयोजित की जा रही हैं।

लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (LMHP) फेलोज के सहयोग से, नारकोटिक्स एनोनिमस अपने हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस (H&I) सेशन के माध्यम से सरकारी डि-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन केंद्रों में नियमित जागरूकता और रिकवरी सत्र आयोजित कर रहा है। यह पहल इस समय श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना, रूपनगर, मानसा सहित 13 ज़िलों में चल रही है।

इस कार्यक्रम के तहत, नारकोटिक्स एनोनिमस मीटिंग्स रिकवरी कर रहे लोगों को ऐसा माहौल प्रदान करती हैं जहाँ वे बिना किसी आलोचना के डर के अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता साझा कर सकते हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि जो व्यक्ति खुद रिकवरी से गुजर चुका है, वही दूसरे व्यक्ति की सबसे बेहतर मदद कर सकता है।

नारकोटिक्स एनोनिमस एक वैश्विक फेलोशिप है जो 12-स्टेप प्रोग्राम और पीयर-लीड मीटिंग्स के माध्यम से नशा-मुक्ति में सहायता प्रदान करती है। 1953 में स्थापित यह संस्था कई देशों में कार्यरत है और इसका मूल सिद्धांत है कि साझा अनुभव और आपसी सहयोग से रिकवरी अधिक प्रभावी होती है।

श्री मुक्तसर साहिब के एक रिकवरी में आए व्यक्ति ने बताया कि ये सत्र उन्हें नशा-मुक्त बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “आप एक हफ़्ता या एक महीना नशा-मुक्त रह सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक नशा-मुक्त जीवन बनाए रखने के लिए एन.ए. मदद करता है क्योंकि पीयर ग्रुप के अनुभव आपकी अपनी कहानी जैसे होते हैं। अगर वे नशा छोड़ सकते हैं, तो आप क्यों नहीं? नशा छोड़ने के बाद मैं अपने एक दोस्त को भी साथ लाया, जिसे मैं रिहैबिलिटेशन केंद्र में मिला था। उसे भी यह सहायता बहुत उपयोगी लगी।”

लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर में इलाज करवा रहे एक मरीज जगपाल सिंह (बदला हुआ नाम) ने कहा, “नशा छोड़ चुके अन्य साथियों के अनुभव सुनने से मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसने मेरे अंदर सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा की। जब मैंने अपनी कहानी साझा की तो मुझे सुझाव मिले और प्रेरणा मिली। मैं सुझाव देता हूँ कि इलाज के साथ-साथ एन.ए. मीटिंग्स नशा प्रभावित लोगों की रिकवरी में बहुत मदद कर सकती हैं।”

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा पीयर सपोर्ट नशा-मुक्ति के दौरान आने वाली सबसे बड़ी समस्या ‘एकाकीपन’ से निपटने में काफी मददगार होता है। कार्यक्रम से जुड़े एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “कई मरीज डि-एडिक्शन सेंटर छोड़ने के बाद अकेलापन महसूस करते हैं और फिर से नशे की ओर चले जाते हैं। एन.ए. उन्हें एक सपोर्ट नेटवर्क देता है और यह भरोसा दिलाता है कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।”

हाल ही में इन मीटिंग्स में भाग लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 13 ज़िलों में सरकारी सुविधाओं के भीतर नियमित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मानसा में जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) कोऑर्डिनेटर ने कहा कि संस्था ज़िला प्रशासन के सहयोग से मीटिंग्स आयोजित करती है।

मुक्तसर में जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) कोऑर्डिनेटर ने कहा कि संस्था ज़िला प्रशासन के सहयोग से मीटिंग्स आयोजित करती है।

उन्होंने कहा, “जब मैं पहली बार एन.ए. मीटिंग में आया तो मुझे लगा कि इस बीमारी से अकेले लड़ना मुश्किल है। इस ग्रुप ने मेरा सपोर्ट सिस्टम बनकर मुझे विश्वास दिया कि व्यक्ति नशा छोड़ सकता है। सदस्यता की एकमात्र योग्यता नशा छोड़ने की इच्छा है। सदस्यों की पहचान गोपनीय रखी जाती है, जिससे वे अपने संघर्ष और रिकवरी के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं।

मुक्तसर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में मनोचिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह ने कहा, “नारकोटिक्स एनोनिमस एक नशा प्रभावित व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा मंच है, क्योंकि पीयर ग्रुप के सदस्य नशे की समस्या से जुड़े अनुभवों को अच्छी तरह समझते हैं और वे व्यक्ति को नशा-मुक्त जीवन की ओर ले जाने में सबसे अधिक मददगार साबित होते हैं, क्योंकि उन्होंने खुद वही कठिनाइयाँ झेली होती हैं। वास्तव में, काउंसलिंग सत्रों में भी जो मरीज खुलकर बात नहीं कर पाता, वह एन.ए. के सदस्यों के साथ आसानी से खुल जाता है।”

लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर की काउंसलर अमनप्रीत कौर ने कहा, “पीयर ग्रुप अपने जीवन में नशा छोड़ने के बाद आए सकारात्मक बदलावों को साझा करते हैं और यह दूसरों को उसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है। शुरुआत में मीटिंग्स में उपस्थित होना आवश्यक होता है। यदि कोई व्यक्ति इन मीटिंग्स में नियमित रहता है तो वह डि-एडिक्शन के काफी करीब होता है। मीटिंग्स मिस करना अक्सर रिलेप्स (पुनः नशा शुरू होने) की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।”

अधिकारियों ने बताया कि कई पूर्व नशा उपयोगकर्ता, जो लंबे समय से नशे से दूर हैं, अब स्वयंसेवक बनकर मेंटर के रूप में काम कर रहे हैं और जिला प्रशासन को मीटिंग्स के लिए प्रतिभागियों को एकत्र करने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एनए (NA) नेटवर्क का विस्तार नशा-विरोधी अभियान के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को टिकाऊ बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

पंजाब नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर रहा है, और नारकोटिक्स एनोनिमस समूहों का बढ़ता नेटवर्क राज्य के प्रयासों को मजबूत कर रहा है ताकि नशा-मुक्ति केवल इलाज तक सीमित न रहे, बल्कि लोग लंबे समय तक समाज में फिर से जुड़ सकें और नशा-मुक्त जीवन जी सकें।

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