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आप’ सरकार के अधीन पंजाब राजस्व विकास में शीर्ष 3 राज्यों में शामिल, अपना कर राजस्व बढ़कर 57,919 करोड़ रुपये हुआ: हरपाल सिंह चीमा

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पंजाब के वित्त, आबकारी और कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के नेतृत्व में, पंजाब राजस्व विकास में शानदार उपलब्धियों के लिए देश के शीर्ष तीन राज्यों में उभरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की वित्तीय कार्यप्रदर्शन संरचनात्मक सुधार, वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को दर्शाता है। यहां पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब की वित्तीय सेहत में आए इस निर्णायक बदलाव को उजागर करने के लिए विस्तृत आंकड़े पेश किए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘पंजाब के अपने कर राजस्व में भारी वृद्धि हुई है, जो कि 2021-22 में कुल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) का 6.39 प्रतिशत यानी 37,327 करोड़ रुपये था, वह बढ़कर 2024-25 में 57,919 करोड़ रुपये हो गया है, जो कि कुल राज्य घरेलू उत्पाद का 7.15 प्रतिशत बनता है।’

आबकारी प्राप्ति के आंकड़े पेश करते हुए आबकारी और कर मंत्री ने बताया कि आबकारी राजस्व में चार वर्षों से भी कम समय में 86.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, ‘अकाली-भाजपा सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान कुल आबकारी प्राप्ति 20,545 करोड़ रुपये थी, जिसकी वार्षिक औसत 4,109 करोड़ रुपये थी। बाद में कांग्रेस सरकार ने पांच वर्षों में 27,395 करोड़ रुपये इकट्ठे किए, जिसकी वार्षिक औसत 5,479 करोड़ रुपये रही। इसके बिल्कुल विपरीत, ‘आप’ सरकार ने जनवरी 2026 तक ही 37,975 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त कर लिया है, जो कि वार्षिक 9,907 करोड़ रुपये की शानदार औसत दर्शाता है। इसके अलावा, कांग्रेस सरकार के समय 2021-22 में आबकारी राजस्व 6,157 करोड़ रुपये था, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसके 11,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। राज्य के कुल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में, आबकारी राजस्व 2021-22 के 1.05 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 1.28 प्रतिशत हो गया है।’

जी.एस.टी. प्रणाली के तहत कार्यप्रदर्शन को उजागर करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जी.एस.टी. प्राप्ति में भी ऐसी ही सफलता दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, ‘पिछली कांग्रेस सरकार जी.एस.टी. मुआवजे पर बहुत अधिक निर्भर थी और टैक्स दायरे को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने में असफल रही। उनकी पांच वर्षों की कुल प्राप्ति 61,286 करोड़ रुपये थी, जिसकी वार्षिक औसत 12,257 करोड़ बनती है।’

उन्होंने आगे कहा, “आप सरकार द्वारा जनवरी 2026 तक 83,739 करोड़ रुपये प्राप्त किए गए हैं, जिससे वार्षिक औसत बढ़कर 21,845 करोड़ रुपये हो गई है। राज्य जी.एस.टी. राजस्व, जो कि 2021-22 में 15,542 करोड़ रुपये था, 2025-26 में 26,500 करोड़ को पार करने का अनुमान है। जी.एस.टी. 2.0 के तहत तर्कसंगत होने के बावजूद, राज्य ने अपने जी.एस.टी. राजस्व में 70.50 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की है।’

जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्रियों के बारे में बात करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि स्टांप ड्यूटी से राजस्व में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस के कार्यकाल 2017-22 के दौरान, पिछली अकाली दल सरकार (2012-17) की तुलना में स्टांप ड्यूटी संग्रह में 1 प्रतिशत से भी कम की वृद्धि देखने को मिली। अकाली-भाजपा सरकार ने कुल 12,387 करोड़ रुपये इकट्ठे किए जिसकी वार्षिक औसत 2,477 करोड़ रुपये थी, जबकि कांग्रेस सिर्फ 12,469 करोड़ रुपये इकट्ठे कर सकी, जिसकी वार्षिक औसत 2,494 करोड़ रुपये रही।’

उन्होंने आगे कहा, “इसके विपरीत, ‘आप’ सरकार ने जनवरी 2026 तक 19,515 करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं, जिसकी वार्षिक औसत 5,091 करोड़ रुपये है। यह दर्शाता है कि सिर्फ चार वर्षों में, आप सरकार ने पिछली सरकारों के पांच वर्षों के कार्यकालों से 60 फीसदी अधिक स्टांप ड्यूटी प्राप्त की है। इस तेज गति से, यह राजस्व 2026-27 के वित्तीय वर्ष तक कांग्रेस दौर के कुल राजस्व से दोगुना होने की उम्मीद है।’

विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि पंजाब ने पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने कहा, ‘पांच वर्षों में, अकाली-भाजपा सरकार ने 14,641 करोड़ रुपये और कांग्रेस सरकार ने पूंजीगत व्यय पर 19,356 करोड़ रुपये खर्च किए। जबकि आप सरकार 31,630 करोड़ खर्च करने जा रही है।’

विरासत में मिले कर्ज के बोझ के बारे में बोलते हुए, वित्त मंत्री ने दावा किया, “आप सरकार को विरासत में लगभग 3,00,000 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है। इस भारी ऐतिहासिक बोझ के कारण, लिए गए नए कर्जों का 35 फीसदी हिस्सा सिर्फ पिछली सरकारों द्वारा छोड़ी गई देनदारियों को चुकता करने के लिए इस्तेमाल होता है। कर्ज का और 50 फीसदी हिस्सा पुराने कर्जों पर ब्याज देने में चला जाता है। नतीजे के रूप में, उधार लिए गए फंडों का 15 फीसदी से भी कम हिस्सा वास्तव में ‘आप’ सरकार को राज्य के विकास के लिए इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध होता है।’

उन्होंने कहा कि इन हालातों के बावजूद मौजूदा सरकार ने कर्ज से कुल राज्य घरेलू उत्पाद के अनुपात को 48.25 प्रतिशत से घटाकर 44.47 प्रतिशत कर दिया है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “आप सरकार ने वेतन आयोग को लागू करने के लिए 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये रखे और 2016 से 2021 तक लंबित वेतन आयोग के 14,191 करोड़ रुपये के बकाए क्लियर किए जा रहे हैं। इसके अलावा, पनस्प, लैंड मार्टगेज बैंक, पी.एस.आई.डी.सी. और मंडी बोर्ड जैसी वित्तीय रूप से संकटग्रस्त सरकारी संस्थाओं को बचाने के लिए 2,566 करोड़ रुपये मुहैया करवाए गए।’

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा अदा न किए गए केंद्रीय योजनाओं के बकाए क्लियर करने के लिए 1,750 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। लंबे समय के वित्तीय सुरक्षा उपायों की रूपरेखा उजागर करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘आप सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक में रखे गए कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड और गारंटी रिडेम्पशन फंड में बड़ा निवेश किया है। 31 मार्च 2022 तक, राज्य के पास कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड में सिर्फ 3,027 करोड़ रुपये थे और गारंटी रिडेम्पशन फंड में कुछ भी नहीं था। दिसंबर 2025 तक, ये रिजर्व फंड बढ़कर कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड में 10,738 करोड़ रुपये और गारंटी रिडेम्पशन फंड में 982 करोड़ रुपये हो गए हैं, जिससे कुल राशि 11,720 करोड़ रुपये हो गई है।’

वित्त मंत्री ने आगे कहा, “यह 8,693 करोड़ के कुल वृद्धि को दर्शाता है, जो कि चार वर्षों से भी कम समय में 287 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। यह अग्रिम निवेश किसी भी अचानक आने वाले वित्तीय संकट के खिलाफ एक बचाव के रूप में काम करता है और राज्य के कर्ज को योजनाबद्ध ढंग से चुकाने में मदद करता है।’

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ये वित्तीय सुधार केंद्रीय सहायता में भारी गिरावट के बावजूद प्राप्त किए गए हैं। उन्होंने कहा, “2017 से 2022 के दौरान कांग्रेस सरकार को 17,740 करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान और 54,600 करोड़ रुपये जी.एस.टी. मुआवजे के रूप में मिले, जो कुल मिलाकर 72,340 करोड़ रुपये बनते हैं। इसके विपरीत, मौजूदा सरकार को जनवरी 2026 तक राजस्व घाटा अनुदान में सिर्फ 15,887 करोड़ रुपये और जी.एस.टी. मुआवजे में 11,945 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो कुल 27,832 करोड़ रुपये बनते हैं।’

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा सरकार को पिछली सरकार की तुलना में राजस्व घाटा अनुदान और जी.एस.टी. मुआवजे में 62 प्रतिशत कम राशि मिली है, और अब ये अनुदान पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की समाप्ति करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खजाने के कामकाज में पारदर्शिता और कुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने पूरी पेंशन वितरण प्रणाली को डिजिटल करने के लिए ‘पेंशन सेवा पोर्टल’ की शुरुआत की है और बैंकिंग धोखाधड़ी से निपटने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘ई-डिपॉजिट मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू किया है। उन्होंने कहा, “इसके अलावा, राज्य ने एस.एन.ए.-स्पर्श पहलकदमी के माध्यम से योजनाओं को प्रभावी ढंग से डिजिटाइज करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में 800 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त करके एक बड़ा मील पत्थर हासिल किया है।”

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PM मोदी का आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन, महिला आरक्षण बिल पर रख सकते हैं बात

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PM नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात एक बार फिर राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे. उनका संबोधन रात 8.30 बजे होगा. माना जा रहा है कि पीएम मोदी महिला आरक्षण बिल पर बोल सकते हैं और वह विपक्ष की ओर से सहयोग नहीं किए जाने को लेकर उस पर निशाना साध सकते हैं. इससे पहले 2 दिन चली बहस के बाद विपक्ष की ओर से विरोध में वोट डालने की वजह कल शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया था.

महिला आरक्षण को साल 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी बहस के बाद वोटिंग के दौरान लोकसभा में खारिज होने के अगले दिन आज शनिवार को जमकर बयानबाजी का दौर रहा. विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार की साजिश करार दिया तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला.

पक्ष-विपक्ष में बिल को लेकर घमासान

बीजेपी ने विधेयक के खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों पर महिलाओं के साथ ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया. जबकि कांग्रेस और उसके कई सहयोगियों ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को देश में तुरंत लागू किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है.

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को पूरे देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अपनी ‘विश्वसनीयता हमेशा के लिए खो दी है.’ उन्होंने कहा, “उन्हें देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा. कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक काला दाग की तरह है, जिसे वे कभी मिटा नहीं पाएंगे. यह विधेयक महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व देने के बारे में था और इसमें किसी को कैसे आपत्ति हो सकती थी?”

महिला सशक्तिकरण को कमजोर कियाः शोभा

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के कदम ने महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को कमजोर किया है. उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने फैसले से दक्षिण भारत को भी नुकसान पहुंचाया, जहां सीटों में 50 फीसदी से अधिक वृद्धि हो रही थी. महिलाओं को आरक्षण मिलने जा रहा था, लेकिन उन्हें इस सुनहरे अवसर से वंचित कर दिया गया. यह सब राहुल गांधी की अगुवाई में हुआ है.”

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर महिलाओं को धोखा देने और अपने पिछले रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया. वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है और इसके क्रियान्वयन में देरी कर रही है.

संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को मिली मातः प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था, इसका गिरना संविधान और विपक्षी एकजुटता की ऐतिहासिक जीत है. उन्होंने कहा कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल प्रभाव से इसे लागू कर सकती है, यदि वह ऐसा करती है तो पूरा विपक्ष इसका समर्थन करेगा. उन्होंने कहा कि कल जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जीत है, विपक्षी एकता के जरिए संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को हराया गया.

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति है. उन्होंने कहा, “हम महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करते हैं और हम शुक्रवार को ही विधेयक पारित करा देते. हमारी आपत्ति महिला आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर थी.”

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह ऐतिहासिक विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था. फिर इसमें संशोधन लाने की क्या जरूरत थी? जब आपके पास दो-तिहाई बहुमत ही नहीं था, तो इसे लाने का क्या मतलब था? इससे साफ है कि इसके पीछे राजनीतिक मकसद था.”

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लुधियाना में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर ED की छापेमारी खत्म, मुख्यमंत्री का केंद्र पर हमला

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जाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई छापेमारी की कार्रवाई समाप्त हो गई है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम शुक्रवार सुबह अचानक लुधियाना स्थित मंत्री के आवास पर पहुंची। टीम ने पहुंचते ही पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की गहन जांच शुरू की।

ईडी की तरफ से बयान नहीं हुआ जारी

सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की गई। हालांकि, अभी तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जांच को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

दूसरी ओर, मंत्री संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार ने कड़ा विरोध जताया है।

सीए मान लगा चुके केंद्र पर आरोप 

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की कार्रवाई से डरने वाली नहीं है।

इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। 

फिलहाल, छापेमारी समाप्त होने के बाद भी इस मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

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Waiver on Russian Oil Imports: रूसी तेल पर अमेरिका ने एक महीने की छूट बढ़ाई, जानें क्या है नया आदेश

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कुछ दिन पहले तक अमेरिका साफ कह रहा था कि वह रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा, लेकिन अब अचानक फैसला बदल गया है। अमेरिका ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर दी गई छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है।

क्या है अमेरिकी वित्त मंत्रालय का नया आदेश?

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात एक नया आदेश (जनरल लाइसेंस संख्या 134B) जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों से मिली छूट अब 16 मई 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि, इसमें एक छोटी सी शर्त है, यह छूट केवल उसी तेल पर मिलेगी जो 17 अप्रैल या उससे पहले ही समुद्र में जहाजों पर लद चुका था।

इससे पहले, अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को मार्च में विशेष छूट दी थी, जिसकी समयसीमा 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। अब इस नई मोहलत से उन देशों को राहत मिलेगी जिनके जहाज अभी रास्ते में हैं।

नया नियम क्या कहता है?

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अब जनरल लाइसेंस 134A की जगह 134B लागू किया गया है। पुराना लाइसेंस 11 अप्रैल को खत्म हो गया था, जबकि नया लाइसेंस 17 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है और 16 मई तक मान्य रहेगा।

किन पर लागू नहीं होगी यह छूट?

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यह राहत हर किसी के लिए नहीं है। ईरान, उत्तर कोरिया, क्यूबा या यूक्रेन के कुछ हिस्सों से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ होने वाले लेनदेन इस छूट के दायरे में नहीं आएंगे। यानि कुछ देशों और संस्थाओं पर पाबंदियां पहले की तरह जारी रहेंगी।

स्कॉट बेसेंट के बयान के बाद आया यू-टर्न

इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट बुधवार को आया था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ तौर पर कहा था कि अमेरिका अब रूसी या ईरानी तेल पर किसी भी तरह की छूट की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएगा। उनके इस सख्त बयान के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब तेल की सप्लाई कम होगी और दाम आसमान छुएंगे। लेकिन शुक्रवार रात आते-आते अमेरिकी सरकार ने नया लाइसेंस जारी कर सबको सरप्राइज दे दिया।

ईरान-इजरायल तनाव और तेल का खेल

अमेरिका के इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह मिडिल-ईस्ट में चल रहा तनाव है। ईरान और इजरायल के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी थीं। अगर अमेरिका रूसी तेल को बाजार में आने से पूरी तरह रोक देता, तो सप्लाई चेन ठप हो सकती थी।

आंकड़ों की मानें तो पिछली छूट की वजह से रूस का करीब 14 करोड़ बैरल तेल ग्लोबल मार्केट तक पहुंच सका। अगर यह तेल बाजार में नहीं आता, तो दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बेकाबू हो सकते थे। इसी खतरे को भांपते हुए अमेरिका ने फिलहाल एक महीने का ब्रीथिंग स्पेस दिया है।

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