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पंजाब- महिलाओं को ₹1000 महीना, रजिस्ट्रेशन शुरू:CM बोले- पहले 9 हलकों में शुरुआत; अकाली दल ने चुन्नियों में घोटाला किया
पंजाब में मंगलवार (14 अप्रैल) से ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ के लिए रजिस्ट्रेशन की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर में इसका शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम ने पात्र महिला दीक्षा कौर, सिमरन, अमरजीत कौर, हरबंस कौर, नीशा को सर्टिफिकेट दिए गए।
सीएम ने कहा- नौ हलकों में रजिस्ट्रेशन शुरू हो रही है। यह कभी नहीं सोचना कि कार्ड लेट बना, तो पैसे कब मिलेंगे। पैसे उसी दिन से दिए जाएंगे, जब से स्कीम शुरू हो रही है। जाति सर्टिफिकेट बनाने में देरी हो रही है। रजिस्ट्रेशन करवा लो। जैसे ही जाति सर्टिफिकेट आ जाएगा, तो उनके 500 500 रुपए आना शुरू हो जाएगा।
सीएम ने महिलाओं को कहा कि एक्टिव राजनीति में आओ। अगर आपके बिना घर नहीं चल सकता है, तो देश भी आपके बिना नहीं चल सकता है। अगर ऐसा नहीं करोंगे तो हमेशा ही संघर्ष करना पड़ेगा। बाबा साहिब कहते थे विद्या शेरनी के दूध की तरह है। जो उसे पीएगा, वह दहाड़ेगा। अब शेरनियां बनने की जरूरत है।
वहीं अब 15 अप्रैल से 9 विधानसभा हलकों में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इनमें आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दीड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला देहाती शामिल हैं।
इसके बाद राज्य के बाकी 108 हलकों में 15 मई से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। योजना के तहत जुलाई महीने से जनरल वर्ग की महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए या SC वर्ग की महिलाओं 1500 रुपए की सम्मान राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए 9300 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है और इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सीएम के भाषण की बड़ी बातें…
- हमें दबे कुचले की तरह रखा गया: सीएम ने कहा -अब्दुल कलाम हमारे राष्ट्रपति थे। उन्होंने अपनी किताब में लिखा था कि सपने वह नहीं होते, जो नींद में आते हैं। सपने वह हैं, जो सोने नहीं देते हैं। हमें दबे कुचले की तरह रखा गया। जैसे हरा चारा दिखाकर भेड़ बकरियों को ले जात हैं।
- विपक्षी हमें कीड़े मकौड़े समझते: उन्होंने कहा कि वीरों इन नकली चारे वालों से बचना । कांग्रेस, अकाली, भाजपा का एक ही एजेंडा है। मैं, मेरा बेटा, जीता भतीजा और साला। हमें कीड़े मकौड़े समझते हैं। सुखबीर बादल पंजाब बचाओ रैली कर रहा है। पता नहीं किससे पंजाब बचाना है।
- यह नहीं चाहते कि हमारे बच्चे अफसर बनें: सीएम ने कहा कि वह कहता है कि युवाओं को भैंसे दूंगा। लो हमें गोबर में रखो। यह नहीं चाहते है कि हमारे बच्चे अफसर बनें। फिर कहता है कि जो टीम गांव में सीप जीतेगा, उसे दस लाख देंगे। मतलब नौकरियां नहीं देंगे। इससे पहले भी ऐसे करते रहे। पहले बड़े साहब ने कहा कि 8वीं तक कोई फेल नहीं करना। इसके बाद 10वीं में जब बच्चे हुए। कुछ के 35 प्रतिशत नंबर आए, तो फेल जैसे थे। उनका लक्ष्य था कि आटा दाल तक ही रहे।
- उनकी गिनती सौ से आगे शुरू होती: सीएम ने कहा कि हमारी स्टेजों पर आपके विकास कार्य, सड़कों, इलाज, एजुकेशन, नौकरियां और अन्य चीजों की बात होती है। जबकि अकाली दल की स्टेज पर डायनासोर के गले में संगल डालने की। भगवंत मान के रस्से से खींचने की, मुख्यमंत्री की कुर्सी को हथियाने की। उनके एजेंडे से लोग गायब हैं। वह धरती पर कभी आए नहीं हैं। उन्हें पता नहीं नहीं गरीबी क्या होती है। उनकी गिनती सौ से आगे शुरू होती है।
- सोने के चमच्च लेकर पैदा हुए: सीएम ने कहा कि यह सोने के बिस्कुट और सोने के चमच्च लेकर पैदा हुए हैं। यह कहते हैं कि 1000 और 1500 रुपए से क्या होगा। इससे कुछ नहीं होता है। इनके लिए कुछ नहीं होता है, जबकि एक परिवार के पास जब पांच रुपए आएगा तो उसका फायदा होगा। वह तो एक दिन होटल में जाकर दस हजार की रोटी खा जाते हैं।
- फिंगर आने पर फोटो से खाते खोलने के आदेश: सीएम ने कहा कि जब स्कीम शुरू हुई, तो खाता खुलवाने गई महिलाओं के फिंगर प्रिंट का आधार कार्ड से मैच नहीं हो रहा था। पता लगा कि महिलाओं के बर्तन या पौचे लगाकर हाथ घिस गए। उसी दिन मैंने कहा कि हम उंगलियों के निशान नहीं लेंगे। फोटो के आधार पर खाता खोलने के लिए आदेश दिए। किसी की गरीबी का मजाक नहीं होगा। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत दस लाख का इलाज सभी को दिया जा रहा है।
- अकाली वाले चुन्नियों में घोटाला कर गए: सीएम ने कहा कि यह तो मौसम का नाम भी मेरे नाम लगा देते है। नन्हीं छा ( सांसद हरसिमरत कौर) कह रही थी कि रात को बठिंडा में ठहरा, वहां ओले गिरे। अब होटल, बस, ठेके सब छिन गए। नन्हीं छा चुनाव के दिनों में चुन्नियां बदलती हैं। यह चुन्नियों में घोटाला कर गए। मुझे माताओं ने बताया कि हमने सोचा बड़े घर की बहू है। हम 700-700 की चुन्नी ले आए। जबकि यह पॉपलीन की 50 50 रुपए चुन्नी दे गए। पेड़ पर अकाली दल लिख दे, तो दो महीने वह सूख जाता है। बेअदबी पर कानून बन रहा था। लेकिन कल अकाली दल की एमएलए गनीब कौर विधानसभा में नहीं आईं। जलियां वाले बाग हत्याकांड के दिन इनके घर ही जनरल डायर ने डिनर किया था।
- सिद्धू शादी वाले सूट की तरह: कांग्रेस के वालंटियर कम हो गए, मुख्यमंत्री ज्यादा हो गए। अब आठ नौ घूमते हैं। मेरे खिलाफ बयान देने हो तो वह तू=तू मैं मैं चली जाती है। यह इनकी हालत है। राजा वड़िंग की बाजवा से नहीं बनती, बाजवा की सुखजिंर सिंह रंधावा से नहीं बनती, रंधावा की चन्नी से नहीं बनती, चन्नी की सिद्धू की नहीं बनती, सिद्धू की किसी से नहीं बनती। सिद्धू शादी वाले सूट की तरह हैं। कांग्रेस से गलती से इस सूट को खोल लिया। यह कहते थे कि खजाना खाली है। खाली तो पीपा होता है। वहीं, मैं अपनी जेब से पैसा नहीं दे रहा हूं। यह आपके टैक्स का पैसा है।
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पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा
यह रेखांकित करते हुए कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है तथा कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण राज्य को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत पहले ही 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है तथा हाईकोर्ट के ताजा फैसले और उपलब्ध कानूनी उपायों का परीक्षण करते हुए सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वास्तव में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू की गई। परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को स्थगित कर दिया गया, जिससे 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी उत्पन्न हो गई।”
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन शासनकाल के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर आ गया।
‘आप’ सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक सुनियोजित निपटान योजना तैयार की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, “14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से ‘आप’ सरकार पहले ही कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। हाईकोर्ट ने इस निपटान योजना को स्वीकार कर लिया था और इसे लागू करने का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।”
वर्तमान महंगाई भत्ते (डीए) के वितरण संबंधी हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों तथा न्यायिक नज़ीरों की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।
महाराष्ट्र राज्य के मामले में वर्ष 2005 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय देश में सबसे अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, जो कई श्रेणियों में केंद्र सरकार के वेतन ढांचे से भी अधिक हैं।
विभिन्न पदों के लिए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “राज्य सरकार का कानूनी तर्क यह था कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक हो, तो कोई भी राज्य सरकार एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र की सबसे अधिक डीए दरों—दोनों को बनाए नहीं रख सकती।”
उन्होंने आगे कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने स्वयं यह निर्णय लिया था कि नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल किया जाएगा।
कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमारी कानूनी टीम ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है, न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा उपयुक्त कानूनी रास्ता तय करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।”
प्रेस वार्ता का समापन करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का योजनाबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हुई गाड़ियों की मरम्मत में ₹25,000 से ₹50,000 का खर्च आता है: हरपाल सिंह चीमा
भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएस दुनिया का 60 परसेंट इथेनॉल बनाता है जबकि भारत सिर्फ़ 5 परसेंट बनाता है। चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार पर भारतीय उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों की कीमत पर यीएस और डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया।
राज्य में इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान देते हुए, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के पास अभी 1,25,88,851 रजिस्टर्ड टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियां हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कुछ दूसरी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अभी भी चल रहा है। इतनी ज़्यादा पुरानी गाड़ियों वाले राज्यों पर ज़बरदस्ती ई-20 फ्यूल थोपना बहुत भारी पड़ रहा है।”
लोकल मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया, “इथेनॉल ब्लेंड से खराब हुई कार को ठीक करने का खर्च ₹25,000 से ₹50,000 के बीच है।”
उन्होंने पुरानी गाड़ियों वाले लोगों के लिए दूसरा इंतज़ाम न करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी बॉय और छोटे व्यापारियों की गाड़ियां हर कुछ महीनों में खराब होती रहीं, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद में माना था कि फ्यूल माइलेज में 6% की कमी आई है, जबकि असल में एफिशिएंसी का नुकसान बहुत ज़्यादा है। घरेलू वैज्ञानिकों, मैन्युफैक्चरर्स, सांसदों या आम जनता से सलाह किए बिना देश पर ऐसी पॉलिसी थोपना निंदनीय है। यह पॉलिसी देश को कॉर्पोरेट हितों के लिए बेच रही है।”
उन्होंने आगे कहा, “इथेनॉल बनाने में बहुत पानी लगता है, जो पंजाब के पहले से ही गिरते भुमिगत पानी लेवल के लिए एक गंभीर खतरा है।”
भारी जन विरोध को हाईलाइट करते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हाल ही में आप के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में ऑर्गनाइज़ किए गए एक डायलॉग का ज़िक्र किया, जिसमें 4,000 से 5,000 लोग शामिल हुए थे और 7 लाख लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा था। उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के मैकेनिक और एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया और इस बात पर अपनी आवाज़ उठाई कि यह पॉलिसी कंज्यूमर्स के लिए कितनी नुकसानदायक है, जिससे यह साबित होता है कि यह एक ज़रूरी और ज़रूरी नेशनल मुद्दा है जिस पर तुरंत दोबारा विचार करने की ज़रूरत है।”
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पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों को निपटाए जाने की संभावना है। सरकार की ओर से पंजाब रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा। इसके अलावा छह अलग-अलग विभागों की वार्षिक और प्रगति रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी।
वहीं, विपक्षी दलों ने भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में आज भी विधानसभा में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।
मानसून सत्र के पहले दिन फार्मेसी परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सदन का माहौल गर्म रहा। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और सदन से वॉकआउट किया था।
हालांकि, पंजाब सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह पेपर लीक का नहीं, बल्कि हाईटेक नकल का मामला था। सरकार का दावा है कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महज 15 मिनट के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और मामले की जांच जारी है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा का यह मानसून सत्र 10 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन में पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष विभिन्न जनहित और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
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