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Punjab में प्रो-इंकम्बेंसी, भगवंत मान सरकार से जनता बेहद खुद, फिर से सरकार बनाने को बेताब- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान के साथ दिल्ली आए पार्टी के विधायकों के साथ कपूरथला हाउस में संवाद किया। उन्होंने कहा कि चार साल बाद भी पंजाब में प्रो-इंकम्बेंसी है। भगवंत मान सरकार के कामों से लोग बेहद खुश हैं और फिर सरकार बनाने के लिए बेताब हैं। पंजाब में मुफ्त बिजली, 10 लाख का इंश्योरेंस, शानदार सड़कें, पिंडों में 3100 खेल के मैदान, खेतों तक नहरी पानी पहुंच रहा। पंजाब में पहली बार इतने काम हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा पंजाब में रोका गया था और अब भी भाजपा का विजय रथ पंजाब के लोग रोकेंगे। पंजाब के छह राज्यसभा सांसद भाजपा ने चोरी की है। पंजाब के लोग इसका बदला अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में लेंगे।
राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप कर कपूरथला हाउस पहुंचे पंजाब के ‘‘आप’’ विधायकों को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में ‘‘आप’’ की सरकार बने 4 साल हो गए हैं। अब विधानसभा चुनाव के महज 10 महीने बचे हैं। चुनाव के आखिरी साल में ऐसा बहुत कम सरकारें होती हैं कि उस राज्य के लोग अपनी सरकार की तारीफें कर रहे हों। कहा जाता है कि चार साल बाद एंटी इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) बहुत हो जाती है। लेकिन 4 साल बाद आज पंजाब के हर पिंड व मोहल्ले में एंटी इंकम्बेंसी नहीं है, बल्कि प्रो-इंकम्बेंसी है कि सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। पंजाब के लोग दिल से पंजाब सरकार की तारीफ कर रहे हैं। पंजाब में 44 हजार किलोमीटर शानदार सड़कें बन रही हैं। अब तक 9 हजार किमी सड़कें बन चुकी हैं और अगले एक-दो महीने में सारी सड़कें बन जाएंगी। इतनी शानदार सड़कें आजतक पंजाब में कभी नहीं बनीं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब के शहरों में गली-गली के अंदर सड़कें व गलियां बन रही हैं। सोमवार को सीएम भगवंत मान ने पिंडों में शानदार 250 खेल के मैदान का उद्घाटन किया है। पंजाब ने देश के सबसे अच्छे खिलाड़ी पैदा किए। अच्छे खिलाड़ी तब निकले, जब सरकारें उनकी कोई मदद नहीं करती थीं। हम मान सरकार हर पिंडों में शानदार खेल के मैदान बना रही है। पंजाब के 3100 गांवों में शानदार खेल के मैदान बनाए जाएंगे। इसके अलावा, 6 हजार गांवों के अंदर समान्य खेल के मैदान बनेंगे। इस तरह पंजाब के हर गांव के अंदर बच्चों को खेल का मैदान मिलेगा।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सभी गंदे तालाबों की सफाई करा दी गई है। हर खेत के अंदर सिंचाई का पानी भेजा जा रहा है। किसानों को खेती की जरूरत के लिए दिन में बिजली मिलने लगी है। पिछली सरकारों में रात के 3 बजे बिजली आती थी और किसान को रात में जागने के लिए मजबूर होना पड़ता था। बिजली मुफ्त हो गई, 10 लाख रुपए का इंश्योरेंस हो गया, जल्द ही महिलाओं को हजार रुपए मिलने शुरू हो जाएंगे। इतने सारे काम अब तक पंजाब में किसी भी सरकार ने नहीं किया। पिछले सरकार हमेशा कहती थी कि खजाना खाली है, लेकिन हमने कभी नहीं कहा कि खजाना खाली है, क्योंकि हमारी ईमानदार सरकार है। हम ईमानदारी से काम कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज पूरे देश में बहुत बड़ा संकट छाया हुआ है। भाजपा ने जनतंत्र को हाइजैक कर लिया है, जनतंत्र की हत्या कर दी है। पूरे देश में कोई भी पार्टी जीत कर आ जाए, इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसके बाद ये ईडी-सीबीआई और पैसे से उस पार्टी के विधायक तोड़ लेते हैं, पार्टियां तोड़ लेते हैं, जेल भेज देते हैं और सरकारें गिरा देते हैं। जीतने के लिए ये लोग वोट काट देते हैं, अपना वोट जोड़वा देते हैं। सोमवार को पश्चिम बंगाल चुनाव का आया परिणाम कोई चुनाव नहीं था। पिछले 3-4 महीने से हम देख रहे हैं कि पश्चिम बंगाल के अंदर तांडव चल रहा है। इसी तरह इन्होंने बिहार, महाराष्ट्र में किया।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब मैं जेल गया, उससे पहले नई दिल्ली विधानसभा में 1 लाख 48 हजार वोट थे। जब मैं लौट कर आया तो 1 लाख 6 हजार वोट बचे थे। इन्होंने करीब 6 महीने के अंदर 42 हजार वोट कटवा दिया। पिछली बार नई दिल्ली विधानसभा सीट से मैं 30 हजार वोट से जीता था। इन्होंने 42 हजार वोट कटवा दिए और इस बार मैं 3 हजार वोट से हार गया। विपक्ष कैसे जीत सकता है, जब उसके सारे वोट कटवा देंगे। आज पूरे देश के अंदर यही तांडव चल रहा है। आज देश के जनतंत्र के उपर संकट है। हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान कुर्बान करके हमें आजादी दिलाई थी, आज उस आजादी पर सकंट खड़ा हो गया है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मई 2014 में देश में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी थी। उस दौरान ‘मोदी जी की आंधी’ चल रही रही थी। उसके बाद हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड समेत जहां भी चुनाव हुए ये लोग जीतते चले गए। फिर फरवरी 2015 में दिल्ली का चुनाव हुआ और 70 में से सिर्फ 3 सीट भाजपा की आई। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम अयोध्या के राजा बने तो उन्होंने अपना अश्वमेघ का घोड़ा छोड़ा कि यह घोड़ा जहां जाएगा, वो भगवान राम की जमीन हो जाएगी। भगवान श्रीराम के दोनों बच्चों लव-कुश के मंदिर अमृतसर में है। जब वहां भगवान श्रीराम का घोड़ा पहुंचा, तो दोनों बच्चों ने घोड़े को रोक लिया। तब से कहा जाता है कि अश्वमेघ का घोड़ा रोकने वाले लव-कुश थे। इसी तरह, आम आदमी पार्टी और दिल्लीवालों ने 2015 में मोदी जी का अश्वमेघ घोड़ा रोका था। वरना मोदी जी का घोड़ा चलता जा रहा था।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी भी मोदी जी की आंधी चल रही है। ये लोग असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, दिल्ली जीत गए। हर तरफ जीतते जा रहे हैं, अगले साल फरवरी में पंजाब के चुनाव होंगे। पंजाब में न सिर्फ मोदी जी का अश्वमेघ घोड़ा रूकेगा, बल्कि पंजाब चुनाव के बाद मोदी सरकार गिरेगी और पंजाबी ही मोदी सरकार का अंत करेंगे। पंजाब का चुनाव मोदी जी का आखिरी चुनाव होगा। यह मेरा दिल कहता है। ये सब कैसे होगा, मुझे नहीं पता है। आम आदमी पार्टी पंजाब तो जीतेगी। लेकिन इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। घर-घर जाकर पंजाब के लोगों को बताना होगा कि भाजपा पंजाब और पंजाबियों से नफरत करती है। केंद्र की मोदी सरकार ने पंजाब के लिए एक भी काम नहीं किया है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र में इनकी सरकार है। आरडीएफ में पंजाब सरकार को डबल पैसा दे देते, लेकिन ये लोग पंजाबियों का हक भी छिन रहे हैं। ये कह रहे हैं कि पंजाब में सरकार बनी तो पंजाब का सारा पानी हरियाणा को दे देंगे। भाखड़ा नहर, चंडीगढ़, पंजाब यूनिवर्सिटी भी हरियाणा को दे देंगे। सबसे बड़ी बात, अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनी तो तीनों कृषि कानून पंजाब के अंदर लागू कर देंगे। अगर पंजाब में भाजपा की सरकार आ गई तो पूरे पंजाब को तहस नहर कर देंगे। पंजाब को रौंद डालेंगे। लेकिन इनकी इतनी भी औकात नहीं है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज तक भारत पर किसी ने भी आक्रमण किया, वह पश्चिम से आया और पंजाब ने अपन खून बहाकर उनको रोका, लेकिन इस बार देश के अंदर से एक दुश्मन पैदा हुआ है, इनको भी पंजाब के लोग अपने तन, मन, धन से रोकेंगे। हम सब को मिलकर इन्हें रोकना है और देश को अपना जनतंत्र वापस दिलाना है। बाबा साहब के संविधान को वापस लागू कराना है। यह हम सब लोगों की जिम्मेदारी है। यह पंजाब और पंजाबियों की जिम्मेदारी है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये 7 लोग जो हमें छोड़कर चले गए, भाजपा ने इनकी चोरी की है। यह 6 सीटें किसी के पिता जी की नहीं थी। यह छह सीट पंजाबियों की थी। पंजाब में भाजपा के 2 विधायक हैं और 6 राज्यसभा सदस्य हैं, ऐसा हो नही सकता। भाजपा ने पंजाब के लोगों की 6 राज्यसभा की सीट पर डाला है। पंजाब के लोग इसका बदला अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में लेंगे।
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शहरी सहकारी बैंकों को अमित शाह की बड़ी अपील, तकनीक और पारदर्शिता पर दिया जोर
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के शहरी सहकारी बैंकों से बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलने और आधुनिक तकनीक को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बैंकों के लिए तकनीकी रूप से मजबूत होना, अपने कामकाज में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच शहरी सहकारी बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा, ताकि वे प्रतिस्पर्धा के दौर में मजबूती से आगे बढ़ सकें।
मुंबई में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NUCFDC के नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि बैंकों को केवल अपने विकास पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने ग्राहकों की आर्थिक तरक्की को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बैंक से जुड़े ग्राहक आर्थिक रूप से मजबूत और खुशहाल होंगे, तो इसका सीधा फायदा बैंक के विकास को भी मिलेगा।
अमित शाह ने देश के सभी शहरी सहकारी बैंकों से एक साल के भीतर NUCFDC से जुड़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि NUCFDC देश के शहरी सहकारी बैंकों के लिए शीर्ष संस्था और स्व-नियामक संगठन के रूप में काम करती है। RBI से मंजूरी प्राप्त यह संस्था सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पूंजी, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और तरलता सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंक हैं, जिनमें से लगभग 690 बैंक पहले ही NUCFDC के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बैंकों को भी अगले एक साल के भीतर इस संस्था से जुड़ना चाहिए, ताकि शहरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
अमित शाह ने कहा कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए देश के आम लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल पूंजी बाजार के सहारे हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वरोजगार और आर्थिक अवसरों की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है और इसमें शहरी सहकारी बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के विचार पर जोर देते हुए कहा कि सहकारी बैंकिंग का उद्देश्य केवल बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत करना नहीं होना चाहिए। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बैंक से जुड़े ग्राहकों और आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की प्रगति से ही बैंकों के विकास को भी मजबूती मिलेगी।
RBI और शहरी सहकारी बैंकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि दोनों के बीच मौजूद धारणा के अंतर को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक और सहकारी बैंकों को एक-दूसरे की भूमिका, जरूरतों और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझना होगा। इससे बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
सहकारिता मंत्री के रूप में अपने पांच साल के अनुभव का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब भी सहकारी क्षेत्र ने भरोसे के साथ RBI के सामने अपनी समस्याएं और जरूरतें रखी हैं, तब केंद्रीय बैंक की ओर से सक्रिय सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी बेहतर समन्वय के जरिए सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है।
अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों से कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग देने, बैंकिंग सेवाओं को डिजिटल और सुविधाजनक बनाने तथा अपने कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को बेहतर और आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में भी लगातार सुधार करना होगा।
कुल मिलाकर, अमित शाह का संदेश साफ है कि तकनीक, पारदर्शिता और बेहतर ग्राहक सेवा आने वाले समय में शहरी सहकारी बैंकों की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। सरकार का जोर सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक बनाने के साथ-साथ इसे आम लोगों की आर्थिक तरक्की का मजबूत माध्यम बनाने पर है।
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कनाडा में भारतीयों पर बढ़ी सख्ती, 2026 के पहले 6 महीनों में 3,323 नागरिक डिपोर्ट
कनाडा से भारतीय नागरिकों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के पहले छह महीनों में कनाडा ने 3,323 भारतीय नागरिकों को देश से डिपोर्ट किया है। यह संख्या पूरे साल 2025 में डिपोर्ट किए गए 3,779 भारतीयों के करीब 88 प्रतिशत के बराबर है। ऐसे में अगर डिपोर्टेशन की यही रफ्तार आगे भी जारी रहती है, तो 2026 में पिछले साल का आंकड़ा पार होने की संभावना जताई जा रही है।
कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी यानी CBSA के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय नागरिकों की डिपोर्टेशन संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कनाडा सरकार अपनी इमिग्रेशन नीतियों को लगातार सख्त कर रही है। सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी विदेशी कामगारों और अन्य अस्थायी निवासियों की संख्या को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा से भारतीय नागरिकों को कई अलग-अलग कारणों से डिपोर्ट किया जाता है। इनमें इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन, शरण या रिफ्यूजी दावे का खारिज होना, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रहना और वीजा से संबंधित धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और डिपोर्टेशन संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही किया जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा से भारतीयों की डिपोर्टेशन संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। वर्ष 2020 में 1,424 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था। 2021 में यह संख्या घटकर 603 रही, जबकि 2022 में 786 और 2023 में 1,132 भारतीयों को कनाडा से वापस भेजा गया। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,004 हो गई और 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 3,779 तक पहुंच गई।
2026 के पहले छह महीनों के आंकड़े इस बढ़ती प्रवृत्ति को और स्पष्ट करते हैं। इस अवधि में भारतीय नागरिक कनाडा से डिपोर्ट किए जाने वाली सबसे बड़ी राष्ट्रीयता बनकर सामने आए हैं। जनवरी से जून के दौरान 1,573 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जिससे भारत ने मैक्सिको को पीछे छोड़ दिया। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा से डिपोर्ट किए जाने के मामले में मैक्सिको शीर्ष पर रहा था, जबकि भारत दूसरे स्थान पर था।
इसके अलावा, CBSA की ‘Removal in Progress Inventory’ में भी भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। इस सूची में करीब 7,669 भारतीय नागरिक रिमूवल प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि इन मामलों में कनाडा की संबंधित एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
कनाडा में किसी व्यक्ति को देश से बाहर भेजने के लिए अलग-अलग प्रकार के रिमूवल ऑर्डर जारी किए जा सकते हैं। डिपार्चर ऑर्डर के तहत व्यक्ति को निर्धारित समय, आम तौर पर 30 दिनों के भीतर, कनाडा छोड़ना होता है। अगर व्यक्ति तय समय के भीतर देश नहीं छोड़ता, तो यह मामला डिपोर्टेशन ऑर्डर में बदल सकता है। डिपोर्टेशन ऑर्डर के बाद कनाडा में दोबारा प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है और कुछ परिस्थितियों में वापस जाने के लिए सरकार से लिखित अनुमति की आवश्यकता पड़ सकती है।
कनाडा से भारतीयों की बढ़ती डिपोर्टेशन संख्या की तुलना अमेरिका से भी की जा रही है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी से 22 जुलाई 2026 तक अमेरिका से 1,273 भारतीय नागरिकों को भारत डिपोर्ट किया गया। इस लिहाज से 2026 के पहले छह महीनों में कनाडा से डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या काफी अधिक रही है।
कनाडा में बढ़ती डिपोर्टेशन और सख्त होती इमिग्रेशन नीति का असर वहां पढ़ाई और नौकरी के लिए जाने की योजना बना रहे भारतीयों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में छात्रों और कामगारों के लिए जरूरी है कि वे कनाडा के वीजा, इमिग्रेशन और रहने से जुड़े नियमों को अच्छी तरह समझें और उनकी शर्तों का पालन करें। नियमों की अनदेखी करने पर भविष्य में कानूनी कार्रवाई या देश से बाहर भेजे जाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, 2026 के शुरुआती महीनों में भारतीय नागरिकों की डिपोर्टेशन संख्या में हुई तेज बढ़ोतरी कनाडा की बदलती इमिग्रेशन नीति की ओर इशारा करती है। आने वाले महीनों में यह आंकड़ा किस स्तर तक पहुंचता है, इस पर भारतीय छात्रों, कामगारों और कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों की नजर बनी रहेगी।
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चंबा में बड़ा बस हादसा, 7 की मौत; 15 घायल
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। यहां एक निजी बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक लड़की, दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए तीसा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
जानकारी के अनुसार, निजी बस सुबह करीब 7 बजे बैरागढ़ से चंबा के लिए रवाना हुई थी। बैरागढ़ से कुछ दूरी पर चालुंज मोड़ के पास ‘शर्मा कोच’ बस अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद बस पलटते हुए दूसरी सड़क पर जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि बस के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई।
हादसे के समय बस में करीब 25 यात्री सवार बताए जा रहे हैं। बस पलटने के बाद कई यात्री उसके अंदर फंस गए, जबकि कुछ लोग एक-दूसरे के ऊपर जा गिरे। हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा। जेसीबी की मदद से बस को हटाया गया और उसके अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान जगदेव शर्मा, देसराज, तेज सिंह, जगदेई, हरदेई, नीलम और रूप सिंह के रूप में बताई गई है। हादसे के बाद इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हादसे की स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल हादसा किस वजह से हुआ, इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर बस के अनियंत्रित होकर पलटने की बात सामने आई है, लेकिन दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
फिलहाल सभी घायलों का तीसा अस्पताल में इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
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