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Crime

Panipat में Police-Criminal Encounter: दो को गोली लगी, एक दबोचा; घर में Firing कर की थी लूट

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हरियाणा के पानीपत में पुलिस ने ऑपरेशन ट्रैक डाउन के तहत बड़ी कार्रवाई की है। विकास नगर में हुए लूट और फायरिंग मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा है, जिनमें से दो बदमाश मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए PGIMS रोहतक/खानपुर मेडिकल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने इनसे तीन अवैध पिस्तौल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

क्या था पूरा मामला?

13 अक्टूबर की रात विकास नगर निवासी राजवंती, पत्नी सुरेश, ने पुलिस को शिकायत दी थी कि संजीव उर्फ बाजा और उसके साथी उनके घर में घुस आए थे। उन्होंने परिवार पर फायरिंग की और घर से

  • ₹3 लाख नकद
  • सोने की चेन
  • चांदी की पायलें
    लूट ली थीं। यह मामला जमीनी विवाद से जुड़ा बताया गया।

पुलिस ने कैसे पकड़े आरोपी

पानीपत के SP भूपेंद्र सिंह ने इस केस को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश के लिए CIA वन की टीम को लगाया। इंस्पेक्टर विजय के नेतृत्व में टीम लगातार सुराग जुटा रही थी।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी जवाहरा-शाहपुर रोड से रात के समय गुजरने वाले हैं।
इस पर पुलिस ने इलाके में नाकेबंदी की।

जैसे ही पुलिस ने उन्हें रोकने का इशारा किया, बदमाशों ने पुलिस पर गोलियां चला दीं और मोटरसाइकिल से भागने की कोशिश की।

मुठभेड़ कैसे हुई

  • बदमाशों ने पुलिस पर 4 राउंड फायरिंग की
  • पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की
  • इस दौरान आरोपियों संदीप और सन्नी के पैर में गोली लगी
  • तीसरा आरोपी भागते हुए पकड़ लिया गया

फिलहाल दोनों घायलों का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

बरामदगी

मौके से पुलिस ने
3 पिस्तौल
6 जिंदा कारतूस
जब्त किए।

FIR दर्ज

  • इस लूट व फायरिंग की पहली FIR सेक्टर-29 थाने में दर्ज है।
  • मुठभेड़ और हथियार बरामदगी के मामले में नई FIR नंबर 356, दिनांक 8 नवंबर 2025, थाना इसराना में दर्ज हुई है।

SP का बयान

SP भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ऑपरेशन ट्रैक डाउन के तहत यह पुलिस की बड़ी सफलता है। आरोपियों के क्राइम रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और उनके अन्य साथियों की तलाश भी जारी है।
पुलिस ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और जिले में कानून-व्यवस्था मजबूत रखने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है।

Crime

Delhi Blast: Red Fort के पास Car explosion काCCTV Footage आया सामने, ट्रैफ़ि Traffic के बिच अचानक हुआ Car में धमाका

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दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार शाम को हुए तेज कार धमाके की शुरुआत से लेकर अब तक की पूरी जानकारी सामने आ चुकी है। इस धमाके में 12 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मामला बेहद संवेदनशील है और जांच एनआईए (National Investigation Agency) कर रही है। नीचे इस घटना से जुड़ी सारी प्रमुख बातें सरल और सीधी भाषा में दी जा रही हैं—ताकि हर पाठक आसानी से समझ सके।

घटना क्या हुई और कब हुई

  • तारीख: 10 नवंबर 2025 (सोमवार)
  • समय: लगभग शाम 6:50:52 PM (सीसीटीवी रिकॉर्डिंग पर यही समय दिखा)
  • स्थान: लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास, गेट नंबर-1 के नज़दीक, लाल किले चौराहा।
  • घटना के वक्त ट्रैफिक सिग्नल पर कई वाहन धीरे-धीरे चल रहे थे — बाइक, कार और ऑटो की लाइनें लगी हुई थीं। इसी दौरान एक आई-20 कार में अचानक जोरदार धमाका हुआ और उसमें आग लग गई। फुटपाथ और आसपास के कई वाहन भी जल गए।

सीसीटीवी फुटेज

बुधवार को पहली बार उस धमाके का CCTV फुटेज जारी हुआ। फुटेज में साफ दिखता है कि ट्रैफिक चल रहा है और अचानक कार से तेज रोशनी/आग की लपटें उठती हैं और कैमरे की फुटेज कुछ देर के लिए अंधेरी हो जाती है। यह फुटेज घटना के समय और माहौल को स्पष्ट करता है और जांच के लिए महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है।

नुकसान और घायलों की स्थिति

  • मृतक: 12 लोगों की मौत हुई।
  • घायल: 20+ लोग घायल; इनमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
  • कई वाहन और बाइक भी धमाके की चपेट में आकर जल गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और कुछ की हालत नाज़ुक है।

संदिग्ध और साजिश

  • पुलिस की शुरुआती जानकारी में कार में बैठे व्यक्ति का नाम उमर बताया जा रहा है। बताया गया है कि उमर कार में अकेला ही बैठा था, हालांकि पुलिस आयुक्त ने पहले तीन लोग होने की बात कही थी।
  • पुलिस को शक है कि यह हमला दो साल से रची जा रही साजिश का हिस्सा था। जांच में यह पता चला कि किसी नेटवर्क ने लोगों की भर्ती और फंडिंग पिछले कुछ वर्षों से की थी। यह समूह एन्क्रिप्टेड चैनलों का प्रयोग कर रहा था और कुछ कामों को धर्मार्थ या शैक्षिक आड़ में छुपाकर फंड इकट्ठा किया जा रहा था।
  • शुरुआती पड़ताल में यह भी आशंका जताई जा रही है कि उमर डर कर भागने की कोशिश में या घबराहट में विस्फोट कर बैठा — यानी फिलहाल इसे सीधे आत्मघाती हमला मानने से पहले जांच चल रही है।

विस्फोटक और फॉरेंसिक रिपोर्ट

  • घटनास्थल से दो तरह के विस्फोटकों के नमूने और दो कारतूस बरामद हुए हैं। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) इनकी जांच कर रही है।
  • प्रारंभिक विश्लेषण में एक नमूना अमोनियम नाइट्रेट जैसा दिख रहा है। दूसरा नमूना अमोनियम नाइट्रेट से भी ज्यादा शक्तिशाली बताया जा रहा है — पर अभी फाइनल रिपोर्ट आने पर ही सही निष्कर्ष मिल पाएगा।
  • अभी तक मौके से 40 से ज़्यादा सैंपल इकट्ठा किए जा चुके हैं और जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि विस्फोट में ईंधन तेल और डेटोनेटर के इस्तेमाल की भी आशंका है।

जांच एजेंसियाँ और कानूनी मामला

  • मामले की जांच फिलहाल एनआईए कर रही है। दिल्ली पुलिस ने भी तफ्तीश में सहयोग दिया है।
  • दिल्ली पुलिस ने इस घटना को यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं में दर्ज कर लिया है — जो आमतौर पर आतंकी साजिश और विस्फोटक से जुड़े मामलों के लिए लागू होते हैं।
  • पुलिस ने आसपास के सभी CCTV फुटेज खंगाले हैं और उमर की कार के 11 घंटे का रूट पुलिस ने ट्रेस कर लिया है। जांच में पाया गया कि उमर लगभग तीन घंटे सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में रुका हुआ था और वहीं उसने इंटरनेट पर फरीदाबाद में साथियों की गिरफ्तारी से जुड़ी खबरें देखीं।

सुरक्षा एजेंसियों का दावा और बड़ी साजिश को नाकाम करना

  • सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अगर विस्फोटक का पूरा प्लान के मुताबिक इस्तेमाल हुआ होता, तो नुकसान और भी बहुत बड़ा हो सकता था।
  • उन्होंने बताया कि सतर्कता और समय-सीमित कार्रवाई की वजह से बड़ी साजिश नाकाम हुई। एनसीआर और जम्मू-कश्मीर में की गई कुछ कार्रवाइयाँ भी इस नेटवर्क से जुड़ी हुई लग रही हैं — इन सबकी गहन जांच जारी है।

पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता

दिल्ली सरकार ने धमाके के पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद की घोषणा की है:

  • मृतकों के परिजनों को ₹10,00,000 (दस लाख) का अनुदान।
  • अस्थायी रूप से अक्षम लोगों को ₹5,00,000।
  • गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹2,00,000।
  • साधारण घायलों को ₹20,000 दी जाएगी।

अभी क्या जानना बाकी है

  • विस्फोटकों की फाइनल फॉरेंसिक रिपोर्ट और उनके स्रोत की पहचान अभी बाकी है।
  • नेटवर्क के और हिस्सेदारों की गिरफ्तारी और उनकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
  • घटना की पूरी न्यायिक और फॉरेंसिक प्रक्रिया के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि यह पूर्वनियोजित आत्मघाती हमला था या दुर्घटनावश विस्फोट हुआ।
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Corruption के खिलाफ Amritsar में Vigilance की बड़ी कार्रवाई, SHO के नाम पर रिश्वत लेते आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया

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भ्रष्टाचार के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अमृतसर में एक बड़ी कार्रवाई की है। विजिलेंस ने एक ऐसे शख्स को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है जो SHO (थानेदार) के नाम पर रिश्वत ले रहा था। यह कार्रवाई अमृतसर के छेहरटा इलाके में की गई।

जानकारी के मुताबिक, एक स्थानीय व्यक्ति ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि कुछ समय पहले SHO और उसकी टीम उसके घर आई थी। उन्होंने उस व्यक्ति पर नशा तस्करी (drug smuggling) के आरोप लगाए और धमकी दी कि अगर मामला सुलझाया नहीं गया तो उसके खिलाफ अपराध का केस दर्ज कर दिया जाएगा।

शिकायतकर्ता ने डर के कारण SHO के एक जानकार ललित अरोड़ा से संपर्क किया। बताया गया कि ललित अरोड़ा ने SHO की ओर से केस दर्ज न करने के बदले ₹25 लाख की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकता, जिस पर दोनों के बीच ₹5 लाख में सौदा तय हो गया।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने पूरा मामला विजिलेंस विभाग को बताया। विभाग ने पहले जांच की और फिर कार्रवाई करने का प्लान बनाया। जब ललित अरोड़ा शिकायतकर्ता से ₹5 लाख रिश्वत लेते हुए मिला, तो विजिलेंस टीम ने सरकारी गवाहों की मौजूदगी में उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ अमृतसर में केस दर्ज कर लिया गया है और अब विजिलेंस यह जांच कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में SHO या उसकी टीम के अन्य सदस्य भी शामिल थे या नहीं।

विजिलेंस के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि कोई भी व्यक्ति पुलिस या सरकारी अफसर के नाम पर जनता को धोखा न दे सके।

मुख्य बातें एक नज़र में:

  • विजिलेंस की कार्रवाई अमृतसर के छेहरटा इलाके में हुई।
  • आरोपी ललित अरोड़ा, SHO के नाम पर रिश्वत मांग रहा था।
  • रिश्वत की रकम ₹25 लाख मांगी गई, ₹5 लाख पर डील तय हुई।
  • विजिलेंस ने आरोपी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
  • केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू हो चुकी है।
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Chandigarh

पूर्व DIG Harcharan Singh Bhullar की आज पेशी: bribery और disproportionate assets के मामले में CBI मांगेगी remand

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पंजाब के पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रिश्वत लेने और आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले में फंसे भुल्लर की न्यायिक हिरासत आज पूरी हो रही है, जिसके चलते उन्हें आज CBI की अदालत में पेश किया जाएगा
CBI की तरफ से इस केस में उनका रिमांड (Remand) मांगा जाएगा ताकि आगे की पूछताछ की जा सके।

रिश्वत का मामला कैसे शुरू हुआ

यह पूरा मामला मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता की शिकायत से शुरू हुआ।
आकाश ने बताया कि भुल्लर ने एक मामले में मदद के बदले 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।
CBI ने 15 अक्टूबर को शिकायत की वेरिफिकेशन रिपोर्ट तैयार की और बिचौलिए कृष्नु को ट्रैप ऑपरेशन के दौरान रंगेहाथ पकड़ा, जब वह व्यापारी से रिश्वत ले रहा था।

CBI के मुताबिक, कृष्नु पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर की ओर से यह रिश्वत ले रहा था। इसके बाद दोनों—भुल्लर और कृष्नु—को गिरफ्तार किया गया।

CBI की छापेमारी में करोड़ों की बरामदगी

गिरफ्तारी के बाद CBI ने 16 और 17 अक्टूबर को भुल्लर के चंडीगढ़ स्थित घर (सेक्टर 40-B) पर छापेमारी की।
इस दौरान जो चीज़ें मिलीं, उन्होंने जांच एजेंसी को भी हैरान कर दिया।

CBI को उनके घर से:

  • ₹7 करोड़ 36 लाख 90 हजार रुपए नकद (जिसमें से ₹7.36 करोड़ जब्त किए गए)
  • ₹2 करोड़ 32 लाख रुपए के सोने-चांदी के गहने
  • 26 महंगी ब्रांडेड घड़ियां
  • Mercedes, Audi, Innova और Fortuner जैसी लग्जरी कारें
  • और कई प्रॉपर्टियों के कागजात मिले।

CBI ने बताया कि उनके पास चंडीगढ़ (सेक्टर 40-B और सेक्टर 39) में घर हैं, इसके अलावा मोहाली, लुधियाना और होशियारपुर में करीब 150 एकड़ जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं।
ये संपत्तियां भुल्लर, उनकी पत्नी तेजिंदर कौर, बेटे गुरप्रताप सिंह और बेटी तेजकिरण कौर के नाम पर हैं।

बैंक अकाउंट और टैक्स रिटर्न की जांच

CBI को जांच के दौरान भुल्लर और उनके परिवार के नाम पर 5 बैंक अकाउंट और 2 एफडी (Fixed Deposits) मिले हैं।
HDFC बैंक के सैलरी अकाउंट में अगस्त और सितंबर महीने में ₹4.74 लाख की सैलरी जमा हुई थी।

भुल्लर ने वित्त वर्ष 2024–25 के लिए दाखिल इनकम टैक्स रिटर्न में अपनी कुल आय ₹45.95 लाख दिखाई थी।
टैक्स देने के बाद उनकी सालाना नेट इनकम लगभग ₹32 लाख बनती है।
लेकिन उनके घर, जमीन, गहनों और बैंक बैलेंस को मिलाकर जो संपत्ति मिली है, वह कई करोड़ रुपए की है — यानी उनकी घोषित आय से कई गुना ज़्यादा।

CBI की जांच में क्या निकला

CBI के अनुसार, 1 अगस्त से 17 अक्टूबर के बीच भुल्लर की वेतन आय केवल ₹4.74 लाख थी, लेकिन इसी अवधि में उन्होंने कई करोड़ रुपए की संपत्ति जुटा ली।
एजेंसी का दावा है कि भुल्लर ने अज्ञात व्यक्तियों की मदद से अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति बनाई और अपने सरकारी पद का गलत फायदा उठाया।

CBI के अधिकारियों के मुताबिक:

“पूर्व DIG भुल्लर अपनी जब्त की गई संपत्तियों के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। यह साफ दिखाता है कि उन्होंने रिश्वत और अन्य अवैध तरीकों से खुद को अमीर बनाया।”

अब तक की जांच और आगे की कार्रवाई

  • CBI पहले ही बिचौलिए कृष्नु को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है।
  • कृष्नु से मिली जानकारियों के आधार पर अब CBI भुल्लर और दूसरे पुलिस अफसरों, व्यापारियों के बीच के संपर्कों की जांच कर रही है।
  • एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि भुल्लर ने किन-किन लोगों के नाम पर संपत्ति खरीदी या निवेश किया।

आज की पेशी में CBI भुल्लर का रिमांड बढ़ाने की मांग करेगी ताकि उनसे संपत्ति के सोर्स, बैंक डिटेल्स और रिश्वत से जुड़े मामलों पर और पूछताछ की जा सके।

कुल मिलाकर

पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ रिश्वत और Disproportionate Assets (आय से अधिक संपत्ति) का यह केस पंजाब पुलिस और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा करप्शन स्कैंडल बन गया है।
CBI के हाथ लगे करोड़ों के कैश, गहने और लग्जरी आइटम ने भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि अदालत में रिमांड मिलने के बाद CBI और क्या नए खुलासे करती है।

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