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Punjab

पंजाब पहुंचे PM मोदी, आदमपुर एयरबेस पर जवानों से की मुलाकात; बोले- साहसी योद्धाओं से मिलना खास अनुभव।

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भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह अचानक पंजाब के जालंधर स्थित आदमपुर एयरबेस पहुंचे। यहां उन्होंने वायुसेना के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की और ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी साझा की। PM मोदी ने सफल एयर स्ट्राइक के लिए जवानों को बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री ने सुबह 7 बजे दिल्ली के पालम एयरपोर्ट से उड़ान भरी और इसके बाद आदमपुर एयरबेस पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग एक घंटे का समय बिताया। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाते हुए नुकसान पहुँचाया है। PM मोदी के दौरे की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

जवानों से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आज सुबह मैं वायुसेना स्टेशन आदमपुर गया और हमारे बहादुर वायु योद्धाओं व सैनिकों से मिला। उनके साहस, दृढ़ संकल्प और निडरता ने मुझे प्रेरित किया। देश को अपने सशस्त्र बलों पर गर्व है, जो राष्ट्र के लिए हर संभव त्याग करते हैं।”

इससे पहले सोमवार को PM मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान पर की गई एयरस्ट्राइक और संघर्षविराम की पूरी जानकारी साझा की थी।

सीजफायर के 51 घंटे बाद PM ने दिया था 22 मिनट का भाषण

पाकिस्तान के साथ सीजफायर के 51 घंटे बाद PM मोदी ने सोमवार रात 8 बजे देश को संबोधित किया था। अपने 22 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, सीजफायर, आतंकवाद, सिंधु जल समझौते और PoK पर बात की थी।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि जिन आतंकियों ने हमारी मां-बहनों का सिंदूर मिटाया, हमने उन्हें मिटा दिया। हमारे ऑपरेशन में 100 से ज्यादा खूंखार आतंकवादी मारे गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की गुहार पर भारत ने संघर्ष रोकने की सहमति दी है। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन को केवल स्थगित किया है। पाकिस्तान का रवैया देखकर आगे का एक्शन तय करेंगे। हम पाकिस्तान से आतंकवाद और पीओके पर ही बात करेंगे।

पहलगाम हमला: आतंकवादियों की बर्बरता ने दुनिया को झकझोर दिया

22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने जो बर्बरता दिखाई थी, उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था। छुट्टियां मना रहे निर्दोष मासूमों को उनके परिवार के सामने, बच्चों के सामने बेरहमी से मार डालना ये आतंक का बहुत वीभत्स चेहरा है। यह देश के सद्भाव को तोड़ने की घिनौनी कोशिश भी थी। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से ये पीड़ा बहुत बड़ी थी। इस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र हर नागरिक हर समाज हर वर्ग हर राजनीतिक दल एक स्वर में आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठ खड़ा हुआ।

ऑपरेशन सिंदूर: आतंकी जान चुके हैं, बेटियों के माथे से सिंदूर हटाने का अंजाम

हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी। आज हर आतंकी और आतंक का हर संगठन जान चुका है कि हमारी बहनों बेटियों के माथे से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ नाम नहीं, देश के कोटि-कोटि लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है। 6 मई की देर रात और 7 मई की सुबह पूरी दुनिया ने इस प्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है।

भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, ट्रेनिंग सेंटर पर सटीक प्रहार किया। आतंकवादियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है। जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमला बोला, भारत के ड्रोंस ने हमला बोला तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं, हौसला भी थर्रा गया।

ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में तीन लकीरें खींच दी हैं-

पहला: आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। अपने तरीके से अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे, हर उस जगह जाकर कठोर कार्रवाई करेंगे, जहां से आतंकी जड़ें निकलती हैं।

दूसरा: कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। उसकी आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
तीसरा: हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपेरशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने पाकिस्तान का घिनौना सच देखा है जब मारे गए आतंकियों को विदाई देना पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सर आतंकवाद का ये बड़ा सबूत है। हम भारत और नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।

युद्ध के मैदान पर हमने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। ऑपरेशन सिंदूर ने नया आयाम जोड़ा है। हमने न्यू एज वारफेयर में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इस ऑपरेशन के दौरान हमारे मेड इन इंडिया हथियारों की प्रामाणिकता सिद्ध हुई। दुनिया देख रही है कि 21वीं सदी के वारफेयर में मेड इन इंडिया डिफेंस इक्विपमेंट का समय आ चुका है।

आतंकवाद: दुनियाभर में हुए आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े

बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकाने एक प्रकार से ग्लोबल टेररिज्म की यूनिवर्सिटीज रही हैं। दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं चाहे 9/11हो चाहे लंदन ट्यूब बॉम्बिंग हो या फिर भारत में बड़े आतंकी हमले हों, उन सबके तार इन्हीं आतंक के ठिकानों से जुड़ते रहे हैं।

आतंकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा था, इसलिए भारत ने आतंक के ये हेडक्वार्टर्स उजाड़ दिए। इन हमलों में 100 से ज्यादा खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा गया है। आतंक के बहुत सारे आका बीते ढाई तीन दशकों से खुलेआम पाकिस्तान में घूम रहे थे। जो भारत के खिलाफ साजिशें करते थे। उन्हें भारत ने एक झटके में खत्म कर दिया।

साथियों भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान घोर निराशा में घिर गया था। हताशा में घिर गया था। बौखला गया था। इसी बौखलाहट में उसने एक और दुस्साहस किया, आतंक पर भारत की कार्रवाई का साथ देने की बजाय पाकिस्तान ने भारत पर ही हमला करना शुरू कर दिया।

पाकिस्तान ने हमारे गुरुद्वारों, घरों, मंदिरों और स्कूलों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया लेकिन इसमें भी पाकिस्तान खुद बेनकाब हो गया। दुनिया ने देखा कैसे पाकिस्तान के ड्रोन, मिसाइलें भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया।

पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोंस, मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिस पर बहुत घमंड था। पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था।

हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ हम सभी का एकजुट रहना, हमारी एकता सबसे बड़ी शक्ति है। निश्चित तौर पर ये युग युद्ध का नहीं है, लेकिन ये युद्ध आतंकवाद का भी नहीं है। टेररिज्म के खिलाफ जीरो टॉलरेंस एक बेहतर दुनिया की गारंटी है। पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार जिस तरह आतंकवाद को खाद पानी दे रहे हैं, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा।

पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टेरर इन्फ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा, इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है।

सीजफायर: पाकिस्तान ने पिटने के बाद दुनियाभर में सीजफायर की गुहार लगाई

भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा, पाकिस्तान दुनियाभर में तनाव कम करने के लिए गुहार लगा रहा था और बुरी तरह पिटने के बाद किसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे डीजीएमओ को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था, आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था।

जब पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई, जब ये कहा गया कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा, जब भारत ने उस पर विचार किया। मैं फिर दोहरा रहा हूं हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों को जवाबी कार्रवाई को सिर्फ स्थगित किया है, आने वाले दिनों में हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे कि वो आगे क्या रवैया अपनाता है।

भारत की एयरफोर्स, आर्मी और नौसेना, बीएसएफ, अर्धसैनिक बल अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक के बाद ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति है।

सिंधु जल समझौता और PoK: खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा

भारत का मत एकदम स्पष्ट है- टेरर और टॉक एकसाथ नहीं हो सकते हैं, टेरर और ट्रेड एक साथ नहीं चल सकते। पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता। विश्व समुदाय से भी कहूंगा हमारी घोषित नीति रही है कि अगर पाकिस्तान से बात होगी तो टेररिज्म पर ही होगी, अगर बात होगी तो PoK पर ही होगी।

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Punjab की सबसे कम उम्र की लाभार्थी: 1 साल की बच्ची को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मिला जीवनरक्षक इलाज!

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मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत नवजात और छोटे बच्चों के इलाज के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर स्थिति में मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।

श्री मुक्तसर साहिब में 1 साल की बच्ची ख्वाहिश को निमोनिया होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसे तत्काल इलाज की जरूरत थी। पहले ऐसे मामलों में परिवारों को इलाज शुरू होने से पहले पैसे जुटाने, दस्तावेज पूरे करने और मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया है।

बच्ची का स्वास्थ्य कार्ड पहले से बना होने के कारण दीप अस्पताल में डॉ. मोनिका गर्ग की देखरेख में बिना किसी अग्रिम भुगतान के तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया। परिवार को न तो पैसों की चिंता करनी पड़ी और न ही किसी तरह की औपचारिकता में समय गंवाना पड़ा। समय पर इलाज मिलने से बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई।

इसी तरह के कई मामले संगरूर और मानसा जिलों से भी सामने आए हैं, जहां कम वजन और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजात बच्चों को भी बिना किसी आर्थिक बाधा के इलाज मिल रहा है। यह दर्शाता है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो गई है।

योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी मरीज का इलाज पैसे या प्रक्रिया की वजह से न रुके। खासकर बच्चों के मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है और यह योजना उस जोखिम को खत्म करती है।

यह योजना प्रति परिवार सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है, जिसके तहत सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है। अब तक 26 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं और मरीज 900 से ज्यादा अस्पतालों में 2300 से अधिक मेडिकल पैकेजों के तहत इलाज करवा रहे हैं।

योजना के तहत बढ़ते बाल चिकित्सा मामलों से यह साफ है कि पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत हो रहा है, जहां बिना किसी आर्थिक बोझ के तुरंत इलाज संभव हो रहा है। सरकार लोगों को लगातार प्रेरित कर रही है कि वे इस योजना का लाभ लेने के लिए स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज प्राप्त करें।

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Art & Culture

Punjab में ‘खेल क्रांति’ से बड़ा बदलाव: International Hockey Tournament की मेजबानी के साथ राज्य बना Sports Hub

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘शानदार चार साल, भगवंत मान दे नाल’ कार्यक्रम के तहत खेल विभाग का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कहा कि उनकी सरकार की “खेल क्रांति” ने राज्य की खेल व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है और पंजाब को अंतरराष्ट्रीय खेल नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि पहली बार पंजाब को हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी मिली है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और चीन जैसी शीर्ष छह टीमें हिस्सा लेंगी। यह टूर्नामेंट अक्टूबर-नवंबर में मोहाली के बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम और जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में आयोजित होगा, जहां मैचों के साथ-साथ पंजाबी संस्कृति को दर्शाने के लिए भांगड़ा और गिद्धा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी में शानदार इतिहास होने के बावजूद पंजाब को पहले कभी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं मिली थी, इसलिए यह उपलब्धि राज्य के लिए बेहद खास है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लगभग 40 वर्षों बाद पंजाब को राष्ट्रीय बैडमिंटन अंडर-13 चैंपियनशिप की मेजबानी भी मिली है, जो जालंधर में आयोजित होगी और इससे राज्य में खेलों को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने खेलों के क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने खेल बजट को 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1791 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है, जो देश में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि कोचों की संख्या 500 से बढ़ाकर 2458 कर दी गई है और नए कोचों की भर्ती की गई है, जिनमें कई पूर्व खिलाड़ी भी शामिल हैं। खिलाड़ियों को ओलंपिक की तैयारी के लिए 15 लाख रुपये और एशियाई खेलों के लिए 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है, जबकि ओलंपिक, पैरा-ओलंपिक और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को एक-एक करोड़ रुपये तक का इनाम दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में करीब 100 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जा चुकी है और कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां भी दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ‘खेड़ां वतन पंजाब दीयां’ योजना के तहत खेलों को जमीनी स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें खिलाड़ियों की संख्या डेढ़ लाख से बढ़कर पांच लाख तक पहुंच चुकी है और हर साल हजारों खिलाड़ियों को पदक व नकद पुरस्कार दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में 3100 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं, 3000 जिम आधुनिक उपकरणों से लैस किए जा रहे हैं और खिलाड़ियों को 17,000 खेल किट वितरित की गई हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए डाइट अलाउंस बढ़ाकर 480 रुपये किया गया है और 13 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बेहतर पोषण सुविधाएं दी जा रही हैं। खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए मोहाली, बठिंडा और लुधियाना में हॉकी एस्ट्रोटर्फ बदले गए हैं और मोहाली में नया सिंथेटिक ट्रैक भी बनाया गया है। स्पोर्ट्स मेडिसिन को बढ़ावा देने के लिए 113 पद सृजित किए गए हैं, जिनमें डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट को प्रमुख शहरों में तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री ने पंजाब की समृद्ध खेल विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने हरमनप्रीत सिंह, शुभमन गिल, हरमनप्रीत कौर, गुरप्रीत सिंह संधू और अर्शदीप सिंह जैसे कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं और पंजाबी खिलाड़ियों के बिना भारतीय हॉकी की कल्पना अधूरी है। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक पंजाबी खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं और कई खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की कप्तानी की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर साल चार देशों का हॉकी टूर्नामेंट आयोजित करने की योजना पर भी काम कर रही है, जिससे राज्य में खेलों का स्तर और ऊंचा होगा। उन्होंने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले खेल संस्कृति को नजरअंदाज किया गया, लेकिन अब उनकी सरकार इसे फिर से पटरी पर ला रही है। अंत में उन्होंने कहा कि खेल नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेलों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, इसलिए सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि पंजाब देश का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बन सके।

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वित्तीय बिल 2026 पर मलविंदर कंग का हमला: “खोखले दावे, जमीनी हकीकत चिंताजनक”

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद Malvinder Singh Kang ने वित्तीय बिल 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों और विकास के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

कंग ने कहा कि जहां एक ओर सरकार देश को “टॉप 5 अर्थव्यवस्था” बताने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रति व्यक्ति आय 142वें स्थान पर पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई अपने चरम पर है, रुपया लगातार गिर रहा है और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कंग ने कहा कि “आय दोगुनी” करने का वादा पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है—खाद, कीटनाशक और डीजल सभी महंगे हो गए हैं—जिससे किसानों की हालत और खराब हुई है।

कॉर्पोरेट नीतियों पर सवाल उठाते हुए कंग ने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज एनपीए घोषित कर माफ किए गए, जबकि किसान अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि सरकार की प्राथमिकता किसके साथ है। कंग ने Agniveer Scheme की भी कड़ी आलोचना की और इसे युवाओं के भविष्य के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा रही है और युवाओं को गलत रास्तों की ओर धकेल रही है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुद्दे पर कंग ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की डील्स से देश के किसानों—खासकर हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के उत्पादकों—की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सीमा पार व्यापार को लेकर भी बड़ा मुद्दा उठाया। कंग ने कहा कि जहां मुंबई-कराची रूट से बड़े पैमाने पर व्यापार जारी है, वहीं अमृतसर-लाहौर (वाघा बॉर्डर) व्यापार मार्ग बंद पड़ा है। उन्होंने मांग की कि इस रूट को खोला जाए, जिससे उत्तर भारत के किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर बोलते हुए कंग ने कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करना गरीब और मजदूर वर्ग के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने में सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए। अपने संबोधन के अंत में कंग ने कहा कि “मनरेगा को कमजोर करना मजदूरों पर हमला है, अग्निवीर योजना युवाओं पर हमला है और गलत व्यापार नीतियां किसानों पर हमला हैं। देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब किसान, मजदूर और युवा सुरक्षित और मजबूत हों।”

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