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पाकिस्तानी नागरिकों को हरियाणा छोड़ने के आदेश: CM सैनी ने दिया 2 दिन का समय, मेडिकल वीजा वालों को 4 दिन की मोहलत।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आदेश के बाद, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पाकिस्तानियों को हरियाणा से निकालने के मुद्दे पर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में CM सैनी ने निर्देश दिया कि सभी पाकिस्तानी नागरिक 27 अप्रैल तक हरियाणा छोड़ दें। मेडिकल वीजा पर मौजूद लोगों को 29 अप्रैल तक की राहत दी गई है। यह निर्देश लॉन्ग टर्म वीजा, डिप्लोमैटिक वीजा और ऑफिशियल वीजा धारकों पर लागू नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के डीसी और एसपी को गृह मंत्रालय के निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के आदेश दिए। साथ ही, असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए।

जिला स्तर पर गश्त बढ़ाने, सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने वालों पर नजर और संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बनाए रखने को कहा। साथ ही राज्य की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में पढ़ रहे कश्मीरी स्टूडेंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

इससे पहले चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार की दोपहर में इमरजेंसी मीटिंग की। जिसमें किसी भी तरह के दंगे रोकने और लॉ एंड ऑर्डर बनाने को लेकर चर्चा की गई। इसमें 6 जिलों को संवेदनशील और नूंह को अति संवेदनशील मानते हुए अलर्ट रहने को कहा गया।

इस मीटिंग में होम सेक्रेटरी डॉ सुमिता मिश्रा, पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर मौजूद रहे। इसके अलावा सभी डिविजनल कमिश्नर, IGP-ADGP, पूरे प्रदेश के डिप्टी कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मीटिंग में जुड़े।

मीटिंग के बाद चीफ सेक्रेटरी की 3 अहम बातें…

पहलगाम हमले के बाद कानून व्यवस्था अहम मीटिंग में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने प्रदेश में शांति, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था कायम रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

DC और SP शांति भंग करने वालों से सख्ती से निपटें वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए रस्तोगी ने असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परस्पर सौहार्द और सामाजिक एकता को भंग करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।

हर छोटी घटना पर अधिकारी खुद नजर रखें संवेदनशील जिलों में गृह विभाग की ओर से पुलिस आयुक्तों व पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति बिगड़ने पर सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों को कहा गया है कि वे हर छोटी घटना पर नजर रखें। किसी भी समुदाय या वर्ग विशेष की भीड़ कहीं इकट्ठी नहीं हो पाए, इस तरह के प्रबंध करने को कहा है।

क्यों अलर्ट हुई सरकार

पहलगाम में हुई आतंकी वारदात के बाद हरियाणा में सरकार के अलर्ट होने की वजह है। दरअसल यहां के 6 जिले ऐसे हैं, जहां दंगे भड़कने की संभावना हमेशा बनी रहती है। पहलगाम में हुई हिंसा को लेकर लोगों में गुस्सा भी है। इन जिलों में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, झज्जर, यमुनानगर और जींद शामिल हैं।

इन जिलों में 2023 में भी नूंह में बृजमंडल यात्रा के दौरान हुए उपद्रव के बाद हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। जिसमें काफी नुकसान हुआ था। यहां हुए दंगों की हिंसा की वजह से अभी 2 पुलिसकर्मियों सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। नूंह को अति-संवेदनशील एरिया घोषित किया गया है।

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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान

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हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।

अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।

गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।

वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।

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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम

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जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।

जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।

2023 में नहीं लाया जा सका बिल

2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।

आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए

खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।

बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी

आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।

परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध

पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।

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