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‘Operation Rahat’ – Flood-Hit Punjab के लिए नई उम्मीद

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पंजाब में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी। कई गाँवों में पानी घुस गया, घर ढह गए, खेत बर्बाद हो गए और लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी ठप हो गई। इस मुश्किल घड़ी में पंजाब सरकार ने ऑपरेशन राहत शुरू किया है। इसका मकसद है – हर प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचाना और उन्हें दोबारा खड़ा करना।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में इस अभियान को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार सरकार के मंत्री सिर्फ़ दफ्तरों से आदेश नहीं दे रहे, बल्कि खुद मैदान में उतरकर लोगों की मदद कर रहे हैं।

मंत्री हरजोत बैंस बने लोगों का सहारा

इस पूरे ऑपरेशन में शिक्षा मंत्री सरदार हरजोत सिंह बैंस का काम सबसे ज़्यादा चर्चा में है।

  • बैंस साहिब ने न सिर्फ़ प्रशासन को तेज़ी से काम करने के लिए प्रेरित किया, बल्कि खुद भी हर दिन बाढ़ प्रभावित गाँवों का दौरा कर रहे हैं।
  • उन्होंने अपने परिवार की ओर से 5 लाख रुपये दान दिए, जिससे लगभग 50 घरों की मरम्मत करवाई गई।
  • गाँवों में फॉगिंग और दवाइयों की व्यवस्था करवाई, ताकि कोई बीमारी न फैले।
  • बाढ़ में फँसे पशुओं को टीके लगवाए और उनके लिए चारे का इंतज़ाम किया।
  • इतना ही नहीं, उन्होंने अपना घर 24 घंटे के लिए लोगों की मदद के लिए खोल दिया।

बैंस साहिब रोज़ाना अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

  • गिरदावरी रिपोर्ट – 3 दिनों में तैयार होगी।
  • बिजली और पानी की सप्लाई – 24 घंटों में बहाल की जाएगी।
  • टूटे हुए रास्ते और सड़कें – 48 घंटों में मरम्मत होंगी।

उन्होंने ये भी तय किया है कि अगले 3 दिन तक हर शाम खुद बैठक करेंगे, ताकि राहत कार्यों में कोई देरी न हो।

एंबुलेंस को रास्ता दिलाने का काम हुआ वायरल

हाल ही में एक घटना ने बैंस साहिब की इंसानियत का उदाहरण पेश किया।

  • कांग्रेस पार्टी ने श्री आनंदपुर साहिब में हाईवे जाम कर दिया था।
  • उसी समय एक एंबुलेंस फँस गई, जिसमें गंभीर मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया जा रहा था।
  • जब बैंस साहिब को यह पता चला, तो उन्होंने अपनी पायलट गाड़ी आगे भेजकर रास्ता खुलवाया, जिससे एंबुलेंस समय पर निकल गई।
  • इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
  • लोग बैंस साहिब की तारीफ करने लगे, वहीं कांग्रेस पर सवाल उठे कि संकट के समय सड़कें जाम करना लोगों की जान से खिलवाड़ है।

अन्य कैबिनेट मंत्रियों की बड़ी भूमिका

1. हरभजन सिंह ETO

  • बाढ़ प्रभावित इलाकों में सक्रियता से काम कर रहे हैं।
  • उनकी पत्नी सरदारी सुहिंदर कौर ने अजनाला हलके के निसोके गांव में राहत सामग्री और पशुओं का चारा वितरित किया।
  • हरभजन सिंह खुद दरियाओं पर जाकर बांध बनाने और प्रभावित लोगों की मदद में जुटे रहे।

2. तरुणप्रीत सिंह सोढ़ (ग्रामीण विकास मंत्री)

  • उन्होंने प्रभावित गाँवों का दौरा किया।
  • राहत सामग्री, राशन और साफ पानी लोगों तक पहुँचाया।

3. लालजीत सिंह भुल्लर

  • बाढ़ के पहले दिन से ही लोगों के साथ खड़े हैं।
  • घुल्लेवाला गांव में बांध टूटने का खतरा था।
  • उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर बांध को बचाया और तुरंत राहत सामग्री का वितरण किया।

4. बरिंदर कुमार गोयल

  • लगातार गाँवों में जाकर राहत कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं।
  • यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचे।

5. बलबीर सिंह (स्वास्थ्य मंत्री)

  • पटियाला से 16 ट्रक राहत सामग्री प्रभावित इलाकों में भेजी गई।
  • हर व्यक्ति तक दवाई, पीने का पानी और जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया।

6. हरपाल सिंह चीमा (वित्त मंत्री)

  • उन्होंने डिर्बा कार्यालय में स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत किट तैयार किए।
  • उनका फोकस यह रहा कि कोई भी परिवार मदद से पीछे न रह जाए।

सरकार की स्पष्ट योजना

पंजाब सरकार ने तय समय सीमा के भीतर राहत कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा है:

  • 3 दिन में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होगी।
  • 24 घंटे में पानी और बिजली की सप्लाई बहाल की जाएगी।
  • 48 घंटे में टूटे रास्तों और सड़कों की मरम्मत होगी।

इसके अलावा, अगले 3 दिनों तक हर शाम अधिकारी और मंत्री मिलकर राहत कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

ऑपरेशन राहतका असर

“ऑपरेशन राहत” की वजह से आज बाढ़ प्रभावित लोग खुद को अकेला महसूस नहीं कर रहे।

  • सरकार ने साबित कर दिया है कि संकट के समय में जनता के साथ खड़ा होना ही असली सेवा है।
  • पटियाला से भेजे गए 16 ट्रक राहत सामग्री और लगातार गाँव-गाँव हो रहे काम से लोगों में उम्मीद जगी है।
  • खास बात यह है कि इस बार सिर्फ सरकारी सिस्टम ही नहीं, बल्कि मंत्री भी खुद मैदान में जाकर मदद कर रहे हैं।

पंजाब सरकार का यह कदम दिखाता है कि जब सरकार और जनता साथ खड़ी हो, तो किसी भी संकट को हराया जा सकता है।
“ऑपरेशन राहत” ने साबित किया है कि सही योजना, तेज़ काम और इंसानियत की भावना से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है।
यह सिर्फ राहत अभियान नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के लिए नई शुरुआत और उम्मीद का संदेश है।

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सोना-चांदी खरीदना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी

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अगर आप आने वाले समय में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं।

सरकार के इस फैसले के बाद देश में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। विदेशों से सोना मंगवाना अब महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।

नई दरों के अनुसार सोने पर कुल आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। यूएई से तय कोटे के तहत आने वाले सोने पर भी अब बढ़ी हुई ड्यूटी लागू होगी।

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गहने खरीदने वालों पर पड़ सकता है। शादी या निवेश के लिए सोना खरीदना अब और महंगा हो जाएगा। ज्वेलर्स की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा।

इसके साथ ही निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रीसाइक्लिंग जैसे उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में कीमती धातुओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 58 बिलियन डॉलर था। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 757 टन से घटकर 721 टन रह गया।

भारत दुनिया का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है। इसके बाद यूएई और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है।

गौरतलब है कि जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए सोने पर ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। लेकिन अब बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।

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पीएम की सलाह आर्थिक इमरजेंसी की आहट?- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों को पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल का कम इस्तेमाल करने और सोने समेत अन्य कीमतीे चीजें खरीदने में कटौती करने की सलाह देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सवाल किया है कि कहीं देश भारी आर्थिक संकट में तो नहीं फंस गया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने, घूमने- फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है। साथ ही, सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह देश में आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?

उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी स्वदेशी अपनाने और विदेशी चीजें कम से कम खरीदने की सलाह पर प्रधामंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शब्दों के उस्ताद हैं, लेकिन उनको देश के सामने सच बोलना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मौजूदा समय में भारत की डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है, क्योंकि हर फैसला व्हाइट हाउस की सहमति से ही लिया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे मुद्दों में भी सीज फायर की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की ओर से की गई थी, जो देश की संप्रभुता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही देश के शासक विश्व गुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे विश्व चेला बनने की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि व्हाइट हाउस के आदेशों का आंख मूंदकर पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र तक में एफडीआई जैसे उनके कदमों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भगवंत मान ने आगाह किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

देश के युवाओं को पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं। पेपर लीक में शामिल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं। इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।

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‘एक साल तक सोना न खरीदें’ PM मोदी की बड़ी अपील

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील किए जाने के बाद देशभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। PM मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए लोगों से सोने की खरीद कम करने और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की थी।

इस बयान के बाद दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों में असमंजस और डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर सोने की बिक्री पर पड़ सकता है।

CTI के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को बड़े स्तर पर मानते हैं तो देश में सोने की मांग 800 टन से घटकर लगभग 500 टन तक आ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ज्वेलरी बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।

ज्वेलर्स ने खास तौर पर चिंता जताई है कि यह अपील ऐसे समय पर आई है जब देश में शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। भारत में शादी समारोहों के दौरान सोने की खरीद को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि ग्राहक सोने की खरीद से पीछे हटते हैं तो इसका बड़ा असर छोटे ज्वेलर्स से लेकर बड़ी ज्वेलरी कंपनियों तक सभी पर पड़ सकता है।

CTI ने यह भी कहा कि इस अपील का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता के कारण ज्वेलरी सेक्टर के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए उद्योग को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित नीतियां और स्पष्ट संदेश बेहद जरूरी हैं। अब ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारी नई रणनीतियों और ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

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