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Punjab के स्कूलों में ऑनलाइन ट्रैकर सिस्टम शुरू: बच्चों की गैरहाजिरी पर पेरेंट्स को आएगा मैसेज, शिक्षा मंत्री ने समर्थ प्रोजेक्ट किया लॉन्च
पंजाब सरकार की तरफ से आज से राज्य के 18,000 सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन अटेंडेंस ट्रैकर सिस्टम लागू किया गया है। जिससे अब बच्चों के स्कूल से गैरहाजिर रहने पर उनके पेरेंट्स के पास मैसेज जाएगा। अगर बच्चा तीन दिन से ज्यादा गैरहाजिर रहता है, तो स्कूल की तरफ से पेरेंट्स को कॉल की जाएगी। यदि यह सिलसिला बढ़ता है तो 15 दिन के बाद जिला व फिर मुख्यालय के अधिकारी बात करेंगे।
यह दावा पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने किया। उन्होंने बताया कि आज यह सिस्टम लॉन्च कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इससे बच्चों की सिक्योरिटी भी मजबूत होगी। इसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सारे स्टूडेंट्स कवर होंगे। सरकारी स्कूलों में 30 लाख स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। वहीं, समर्थ प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है।
प्राइवेट स्कूलों की तरह किताबें मुहैया करवाईं
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 2022 में जब वह मंत्री बने थे तो उन्हें पता चला था कि सितंबर-अक्टूबर तक किताबें स्कूलों में नहीं पहुंचती थीं और फोटोस्टेट से बच्चों को पढ़ाया जाता था। लेकिन आप सरकार के आते ही सिस्टम में सुधार किया गया। इसके लिए स्ट्रेटजी बनाकर काम किया गया है। इस बार फरवरी में किताबें स्कूलों तक पहुंचाई गईं। इसके बाद अब प्राइवेट स्कूलों की तरह किताबों के बंडल बनाकर एक अप्रैल को बच्चों को सौंपा गया है, जिससे अब पढ़ाई शुरू हो गई है।
शिक्षा क्षेत्र में नंबर एक पर
शिक्षा विभाग का दावा है कि PARAKH 2024 सर्वे में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश में नंबर एक स्थान पर रहा है। पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों के बाद अब मिशन समर्थ के अगले चरण का शुभारंभ किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, चार वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं और स्कूलों में कई नई पहल शुरू की गई हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने यह काम भी किया
पंजाब का शिक्षा बजट बढ़कर 19,279 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राज्य सरकार ने ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना के तहत 118 आधुनिक स्कूल स्थापित किए हैं। इसके अलावा, प्रिंसिपलों और शिक्षकों को सिंगापुर, फिनलैंड तथा IIM अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग दी गई है। सरकार ने 14,500 से अधिक नए शिक्षकों की नियुक्ति भी की है। NAS 2024 की रैंकिंग में पंजाब देश में शीर्ष स्थान पर रहा, जबकि सरकारी स्कूलों के रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।
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भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू का पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार सत्ता के घमंड और सिक्योरिटी फोर्स के प्रति बेइज्ज़ती दिखाता है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने धुरी में पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ भाजपा के केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के व्यवहार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बिट्टू के व्यवहार ने शराफ़त की सारी हदें पार कर दी हैं और इससे भाजपा नेता का सिक्योरिटी फोर्स के प्रति घमंड और बेइज्ज़ती पूरी तरह से सबके सामने आ गई है।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पन्नू ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू ने कैमरों के सामने पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ खुलेआम बदतमीज़ी की और अधिकारियों के लिए ‘दलाल’ जैसे अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री का ऐसा व्यवहार पूरी तरह से बर्दाश्त के बाहर और गैर-ज़िम्मेदाराना है।
बलतेज पन्नू ने कहा कि चाहे पंजाब पुलिस हो, सेंट्रल आर्म्ड फोर्स हो या इंडियन आर्मी, हर सिक्योरिटी फोर्स इज्ज़त की हकदार है क्योंकि वे नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक ड्रामा के लिए पूरी फोर्स को टारगेट करना और उनका हौसला तोड़ने की कोशिश करना बहुत खतरनाक है। सिक्योरिटी वाले लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं और उनका इस तरह अपमान कभी नहीं होना चाहिए।
रवनीत सिंह बिट्टू के उस बयान पर कड़ा एतराज़ जताते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि जब भी चेकपॉइंट लगाए जाते हैं, पंजाबी पुलिस वालों के साथ गाली-गलौज की जाती है, पन्नू ने कहा कि यह बयान न सिर्फ़ पंजाब पुलिस का बल्कि पंजाब के लोगों का भी बहुत बड़ा अपमान है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब पुलिस के जवानों, खासकर युवा अधिकारियों ने जनता के साथ व्यवहार करने का तरीका बदल दिया है और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रोफेशनल तरीके से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।
रोड सेफ्टी फोर्स (एसएसएफ) के काम का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब पुलिस के जवानों की लगातार कोशिशों की वजह से आज एक्सीडेंट के शिकार लोगों को मिनटों में तुरंत मदद मिल जाती है। उन्होंने कहा कि जब भी लोगों को चोरी, हमला, एक्सीडेंट या कोई इमरजेंसी होती है, तो वे सबसे पहले पुलिस को फ़ोन करते हैं, गाली-गलौज करने के लिए नहीं। जब पुलिस चेकिंग होती है तो ईमानदार नागरिक ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। पुलिस चेकिंग से सिर्फ़ क्रिमिनल और एंटी-सोशल एलिमेंट ही परेशान होते हैं।
बलतेज पन्नू ने विवाद शुरू होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि केंद्रीय मंत्री आप नेताओं द्वारा पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए सवालों का जवाब देने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर चिंताओं का जवाब देने के बजाय, उन्होंने पर्सनल अटैक का सहारा लिया।
रवनीत सिंह बिट्टू पर और निशाना साधते हुए, बलतेज पन्नू ने 2017 में कांग्रेस सरकार के दौरान पंजाब पुलिस में डीएसपी के तौर पर बिट्टू के भाई की भर्ती का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस नियुक्ति को मुमकिन बनाने के लिए उम्र के क्राइटेरिया, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और भर्ती प्रक्रिया समेत कई नियम बदले गए थे। बलतेज पन्नू ने सवाल किया कि अगर रवनीत सिंह बिट्टू मानते हैं कि पंजाब पुलिस इतनी खराब है और उनका दावा है कि पंजाबी इस फोर्स से नफरत करते हैं, तो उन्होंने अपने परिवार के सदस्य को उसी डिपार्टमेंट में भर्ती कराने के लिए इतनी बड़ी हद तक क्यों गए?
पिछली सरकारों की तुलना मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पंजाब सरकार से करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि 65,000 से ज़्यादा सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत, भ्रष्टाचार या सिफारिश के पूरी तरह से मेरिट के आधार पर दी गई हैं। उन्होंने विपक्ष के नेताओं को चुनौती दी कि वे मौजूदा पंजाब सरकार के समय में भ्रष्टाचार के ज़रिए भर्ती का एक भी उदाहरण पेश करें।
बिना शर्त माफ़ी की मांग करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू को पूरी पंजाब पुलिस फोर्स, खासकर सब-इंस्पेक्टर और एसएसपी नवजोत कौर से माफ़ी मांगनी चाहिए, जिनके खिलाफ उन्होंने टकराव के दौरान गलत भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब पुलिस के अधिकारी कड़ी मेहनत, पढ़ाई, कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं और अपने परिवारों के त्याग की वजह से यह मुकाम हासिल करते हैं, न कि खास नियमों में बदलाव और राजनीतिक असर से।
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भाजपा सरकार के ‘अमृत काल’ के बड़े-बड़े दावे हुए फेल, भारत दुनिया के टॉप 15 निवेश स्थानों की लिस्ट से हुआ बाहर: हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को कहा कि एफडीआई भरोसे के मामले में दुनिया की टॉप 15 इकॉनमी की लिस्ट से भारत का बाहर होना भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में निवेशकों के भरोसे के गहरे संकट को दिखाता है। ताजा एफडीआई कॉन्फिडेंस इंडेक्स रैंकिंग का हवाला देते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में भारत दुनिया के टॉप 10 निवेश स्थानों में से एक था, लेकिन अब यह 2026 में टॉप 15 लिस्ट से पूरी तरह बाहर हो गया है।
विश्वव्यापी रैंकिंग का हवाला देते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह घटनाक्रम भाजपा सरकार के प्रचार-आधारित दावों और भारतीय अर्थव्यवस्था की असली स्थिति के बीच बड़े अंतर को दिखाता है। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, उन्होंने लिखा, “भारत कभी विदेशी निवेश के लिए दुनिया के टॉप स्थानों में से एक था। 2016 में, भारत ग्लोबल एफडीआई कॉन्फिडेंस के मामले में टॉप 10 अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। आज, भारत टॉप 15 में भी नहीं है।”
वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी निवेशक तेज़ी से दूसरे ऑप्शन (दूसरे देशों) की ओर देख रहे हैं क्योंकि पिछले एक दशक में भारत के इन्वेस्टमेंट माहौल में भरोसा काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है। एग्रीमेंट सिर्फ़ कागज़ पर रह गए हैं, इन्वेस्टमेंट का माहौल कमज़ोर हो गया है, पॉलिसी में अनिश्चितता बढ़ रही है और ट्रेड एग्रीमेंट मज़बूती के बजाय समझौते की स्थिति में किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा मतलब वाले आर्थिक सुधारों के बजाय अपनी इमेज चमकाना पसंद किया है। उन्होंने दावा किया कि ‘अमृत काल’ के सभी बड़े-बड़े दावों के बावजूद, असलियत यह है कि विदेशी निवेशक दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं, जबकि भाजपा सरकार असली आर्थिक सुधारों के बजाय सिर्फ़ सुर्खियां बटोरने वाले प्रबंधों में लगी हुई है।
ग्लोबल टॉप 15 एफडीआई रैंकिंग से भारत का बाहर होना निवेशकों के भरोसे पर चिंतएं बढ़ीं
फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) कॉन्फिडेंस रैंकिंग यह दिखाती है कि ग्लोबल निवेशक किसी देश की लंबे समय की आर्थिक स्थिरता, पॉलिसी की निरंतरता और ग्रोथ की संभावनाओं को कैसे देखते हैं। 2016 में दुनिया के टॉप 10 इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन में भारत का शामिल होना उसके इकोनॉमिक भविष्य में मज़बूत ग्लोबल भरोसे का संकेत था। 2026 में टॉप 15 से इसका बाहर होना यह दिखाता है कि बड़े इंटरनेशनल निवेशकों भारत में इन्वेस्ट करने को लेकर ज़्यादा सावधान हो रहे हैं। ऐसे समय में जब यूएई, सऊदी अरब और साउथ कोरिया जैसे देश ग्लोबल कैपिटल के लिए अपनी अपील बढ़ा रहे हैं, भारत की गिरावट पॉलिसी में अनिश्चितता, कमजोर होती इंडस्ट्रियल मोमेंटम और इन्वेस्टमेंट की घोषणाओं और उनके असल में लागू होने के बीच बढ़ते अंतर की ओर इशारा करती है। अर्थशास्त्री अक्सर ऐसी गिरावट को इस बात का संकेत मानते हैं कि निवेशकों का भरोसा सिर्फ हेडलाइन वाली बातों से हटकर उन देशों की ओर जा रहा है जो ज़्यादा स्टेबल और अनुमानित आर्थिक माहौल देते हैं।
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केवल ढिल्लों के BJP प्रदेश अध्यक्ष बनने पर CM मान का तंज, सोशल मीडिया पोस्ट से साधा निशाना
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज भरी पोस्ट साझा कर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “2019 और 2024 में बरनाला के लोगों द्वारा हराए गए कांग्रेस के भाजपाई नेता केवल ढिल्लों जी को BJP का प्रधान बनने पर बधाई। सुनील जाखड़ जी के साथ दिल से हमदर्दी। परमात्मा Ravneet Singh Bittu, Manpreet Singh Badal, Fatehjang Singh Bajwa, Tarun Chugh और Ashwani Sharma को यह जिल्लत सहने की ताकत दे।”
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में वरिष्ठ नेता Kewal Singh Dhillon को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी हाईकमान ने यह फैसला मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष Sunil Jakhar का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद लिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत और प्रभावशाली सिख चेहरे की तलाश में थी। इसी रणनीति के तहत केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई है।
सुनील जाखड़ 19 मई 2022 को भाजपा में शामिल हुए थे और जुलाई 2023 में उन्हें पंजाब भाजपा की कमान सौंपी गई थी। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। भाजपा में आने से पहले वह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष, गुरदासपुर से सांसद, अबोहर से विधायक तथा पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे।
वह पंजाब के दिग्गज नेता और पूर्व लोकसभा स्पीकर Balram Jakhar के बेटे हैं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उसे स्वीकार नहीं किया था।
अब मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस टिप्पणी के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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