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पंजाब में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण; CM भगवंत सिंह मान ने नशों के खिलाफ साझा लड़ाई के लिए लोगों को दी बधाई
Bhagwant Singh Mann ने आज ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के एक वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर पंजाबवासियों को बधाई दी। उन्होंने इस अभियान को राज्य को नशों के खतरे से मुक्त करने की दिशा में एक निर्णायक और ऐतिहासिक कदम बताया।
नशों के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा शुरू किया गया यह जन आंदोलन राज्य में ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ड्रग व्यापार को संरक्षण दिया, जिससे कई पीढ़ियां प्रभावित हुईं। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने नशा तस्करी की सप्लाई लाइन तोड़ने और इस अपराध में शामिल बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेजने का काम किया है।
जीरो-टॉलरेंस नीति लागू
मुख्यमंत्री ने बताया कि मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक नशों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति लागू की गई। इस दौरान नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई करते हुए व्यापक और बहुआयामी रणनीति अपनाई गई, जिससे इस मुहिम को जन आंदोलन का रूप मिला।
एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियां
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
- 36,178 एफआईआर दर्ज
- 51,648 नशा तस्कर गिरफ्तार
- 2,277 किलोग्राम हेरोइन बरामद
- 49 लाख से अधिक नशीली गोलियां और कैप्सूल जब्त
- 16.70 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद
- तस्करों से संबंधित करोड़ों रुपये की संपत्तियां जब्त या ध्वस्त
मुख्यमंत्री ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत सजा दर लगभग 84 प्रतिशत रही, जो 2025 में बढ़कर करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसे मजबूत केस तैयारी और फॉरेंसिक सहयोग का परिणाम बताया गया।
युवाओं को बचाने की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार नशा तस्करों को किसी भी कीमत पर बख्शेगी नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाने के लिए है और इसे निरंतर और बिना किसी रुकावट के जारी रखा जाएगा।
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PM मोदी का आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन, महिला आरक्षण बिल पर रख सकते हैं बात
PM नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात एक बार फिर राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे. उनका संबोधन रात 8.30 बजे होगा. माना जा रहा है कि पीएम मोदी महिला आरक्षण बिल पर बोल सकते हैं और वह विपक्ष की ओर से सहयोग नहीं किए जाने को लेकर उस पर निशाना साध सकते हैं. इससे पहले 2 दिन चली बहस के बाद विपक्ष की ओर से विरोध में वोट डालने की वजह कल शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया था.
महिला आरक्षण को साल 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी बहस के बाद वोटिंग के दौरान लोकसभा में खारिज होने के अगले दिन आज शनिवार को जमकर बयानबाजी का दौर रहा. विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार की साजिश करार दिया तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला.
पक्ष-विपक्ष में बिल को लेकर घमासान
बीजेपी ने विधेयक के खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों पर महिलाओं के साथ ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया. जबकि कांग्रेस और उसके कई सहयोगियों ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को देश में तुरंत लागू किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को पूरे देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अपनी ‘विश्वसनीयता हमेशा के लिए खो दी है.’ उन्होंने कहा, “उन्हें देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा. कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक काला दाग की तरह है, जिसे वे कभी मिटा नहीं पाएंगे. यह विधेयक महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व देने के बारे में था और इसमें किसी को कैसे आपत्ति हो सकती थी?”
महिला सशक्तिकरण को कमजोर कियाः शोभा
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के कदम ने महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को कमजोर किया है. उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने फैसले से दक्षिण भारत को भी नुकसान पहुंचाया, जहां सीटों में 50 फीसदी से अधिक वृद्धि हो रही थी. महिलाओं को आरक्षण मिलने जा रहा था, लेकिन उन्हें इस सुनहरे अवसर से वंचित कर दिया गया. यह सब राहुल गांधी की अगुवाई में हुआ है.”
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर महिलाओं को धोखा देने और अपने पिछले रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया. वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है और इसके क्रियान्वयन में देरी कर रही है.
संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को मिली मातः प्रियंका
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था, इसका गिरना संविधान और विपक्षी एकजुटता की ऐतिहासिक जीत है. उन्होंने कहा कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल प्रभाव से इसे लागू कर सकती है, यदि वह ऐसा करती है तो पूरा विपक्ष इसका समर्थन करेगा. उन्होंने कहा कि कल जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जीत है, विपक्षी एकता के जरिए संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को हराया गया.
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति है. उन्होंने कहा, “हम महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करते हैं और हम शुक्रवार को ही विधेयक पारित करा देते. हमारी आपत्ति महिला आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर थी.”
समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह ऐतिहासिक विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था. फिर इसमें संशोधन लाने की क्या जरूरत थी? जब आपके पास दो-तिहाई बहुमत ही नहीं था, तो इसे लाने का क्या मतलब था? इससे साफ है कि इसके पीछे राजनीतिक मकसद था.”
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लुधियाना में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर ED की छापेमारी खत्म, मुख्यमंत्री का केंद्र पर हमला
जाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई छापेमारी की कार्रवाई समाप्त हो गई है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम शुक्रवार सुबह अचानक लुधियाना स्थित मंत्री के आवास पर पहुंची। टीम ने पहुंचते ही पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की गहन जांच शुरू की।
ईडी की तरफ से बयान नहीं हुआ जारी
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की गई। हालांकि, अभी तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जांच को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
दूसरी ओर, मंत्री संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार ने कड़ा विरोध जताया है।
सीए मान लगा चुके केंद्र पर आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की कार्रवाई से डरने वाली नहीं है।
इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
फिलहाल, छापेमारी समाप्त होने के बाद भी इस मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
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Waiver on Russian Oil Imports: रूसी तेल पर अमेरिका ने एक महीने की छूट बढ़ाई, जानें क्या है नया आदेश
कुछ दिन पहले तक अमेरिका साफ कह रहा था कि वह रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा, लेकिन अब अचानक फैसला बदल गया है। अमेरिका ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर दी गई छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है।
क्या है अमेरिकी वित्त मंत्रालय का नया आदेश?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात एक नया आदेश (जनरल लाइसेंस संख्या 134B) जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों से मिली छूट अब 16 मई 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि, इसमें एक छोटी सी शर्त है, यह छूट केवल उसी तेल पर मिलेगी जो 17 अप्रैल या उससे पहले ही समुद्र में जहाजों पर लद चुका था।
इससे पहले, अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को मार्च में विशेष छूट दी थी, जिसकी समयसीमा 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। अब इस नई मोहलत से उन देशों को राहत मिलेगी जिनके जहाज अभी रास्ते में हैं।
नया नियम क्या कहता है?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अब जनरल लाइसेंस 134A की जगह 134B लागू किया गया है। पुराना लाइसेंस 11 अप्रैल को खत्म हो गया था, जबकि नया लाइसेंस 17 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है और 16 मई तक मान्य रहेगा।
किन पर लागू नहीं होगी यह छूट?
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यह राहत हर किसी के लिए नहीं है। ईरान, उत्तर कोरिया, क्यूबा या यूक्रेन के कुछ हिस्सों से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ होने वाले लेनदेन इस छूट के दायरे में नहीं आएंगे। यानि कुछ देशों और संस्थाओं पर पाबंदियां पहले की तरह जारी रहेंगी।
स्कॉट बेसेंट के बयान के बाद आया यू-टर्न
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट बुधवार को आया था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ तौर पर कहा था कि अमेरिका अब रूसी या ईरानी तेल पर किसी भी तरह की छूट की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएगा। उनके इस सख्त बयान के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब तेल की सप्लाई कम होगी और दाम आसमान छुएंगे। लेकिन शुक्रवार रात आते-आते अमेरिकी सरकार ने नया लाइसेंस जारी कर सबको सरप्राइज दे दिया।
ईरान-इजरायल तनाव और तेल का खेल
अमेरिका के इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह मिडिल-ईस्ट में चल रहा तनाव है। ईरान और इजरायल के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी थीं। अगर अमेरिका रूसी तेल को बाजार में आने से पूरी तरह रोक देता, तो सप्लाई चेन ठप हो सकती थी।
आंकड़ों की मानें तो पिछली छूट की वजह से रूस का करीब 14 करोड़ बैरल तेल ग्लोबल मार्केट तक पहुंच सका। अगर यह तेल बाजार में नहीं आता, तो दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बेकाबू हो सकते थे। इसी खतरे को भांपते हुए अमेरिका ने फिलहाल एक महीने का ब्रीथिंग स्पेस दिया है।
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