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2014 से अब तक आरबीआई से 14.29 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा लिए गए, फिर भी राज्यों को कुछ नहीं मिला: हरपाल सिंह चीमा

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शनिवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा केंद्र को लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड फंड ट्रांसफर करने के मुद्दे पर भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अपने वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए आरबीआई को एक निजी खजाने की तरह इस्तेमाल कर रही है, जबकि भारत के संघीय ढांचे के बावजूद राज्यों को उनके हक के हिस्से से वंचित रखा जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्र ने 2014 से अब तक आरबीआई से लगभग 14.29 लाख करोड़ रुपए लिए हैं, जिसमें से आधे से ज्यादा रकम अकेले पिछले तीन सालों में ट्रांसफर की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि आरबीआई के भंडारों को लगातार निकालना न सिर्फ देश के केंद्रीय बैंक और लंबे समय की वित्तीय स्थिरता को कमजोर करता है, बल्कि राज्यों को वित्तीय रूप से निचोड़कर सहकारी संघवाद की भावना पर भी चोट करता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई का यह सरप्लस सभी राज्यों में होने वाली आर्थिक गतिविधियों, लेन-देन और राजस्व इकट्ठा होने के कारण पैदा हुआ है, इसलिए केंद्र द्वारा पूरी रकम अपने पास केंद्रित रखने की बजाय राज्यों को इन फंडों में से उनका बनता हिस्सा मिलना चाहिए।

एक वीडियो बयान में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि देश का वित्तीय ढांचा संघवाद पर आधारित है। हर भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान करता है और हर राज्य राष्ट्रीय विकास और राजस्व पैदा करने में हिस्सा डालता है। फिर ऐसे असाधारण लाभों में से राज्यों को उनके हक के हिस्से से क्यों वंचित रखा जा रहा है? राज्यों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और केंद्र सरकार को राज्यों को उनके बनते हिस्से से वंचित नहीं करना चाहिए।

आरबीआई ट्रांसफर में हुई भारी वृद्धि को उजागर करते हुए, हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि आरबीआई ने 2023-24 में 2.10 लाख करोड़ रुपए, 2024-25 में 2.68 लाख करोड़ रुपए और अब 2025-26 में लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं, जिससे अकेले पिछले तीन सालों का हिस्सा 2014 के बाद हुए कुल ट्रांसफर का 53% से ज्यादा बनता है। उन्होंने कहा कि इस स्तर और बार-बार फंडों का ट्रांसफर बेमिसाल है। इससे पहले, आरबीआई के भंडारों में से ऐसी असाधारण निकासी सिर्फ विशेष हालातों या बड़े वित्तीय तनाव के समय ही देखी जाती थी। लेकिन अब, आरबीआई के सरप्लस को लगातार निकालना एक आम बात बन गई है। यह वित्तीय प्रबंधन और केंद्रीय बैंक की लंबे समय की संस्थागत मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस मुद्दे को सहकारी संघवाद के लिए एक सीधी चुनौती बताते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वैश्विक अनिश्चितताओं और आपूर्ति के झटकों के कारण वित्तीय दबाव का सामना कर रही है, तो राज्य भी उन्हीं चुनौतियों से लड़ रहे हैं और साथ ही कल्याण योजनाओं की जिम्मेदारियों, महंगाई के दबाव और बढ़ते खर्चों के बोझ को संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघवाद का मतलब यह नहीं हो सकता कि बोझ राज्य उठाएं जबकि केंद्र आरबीआई के पूरे मुनाफे को अपने पास रखे। इस तरह के असाधारण लाभों को बांटे जाने वाले पूल में लाया जाना चाहिए और सभी राज्यों के साथ बराबर साझा किया जाना चाहिए।

व्यापक आर्थिक स्थिति को लेकर भाजपा सरकार को घेरते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र का आर्थिक प्रबंधन फेल हो चुका है और देश की अर्थव्यवस्था गंभीर तनाव के तहत है। उन्होंने कहा कि आरबीआई से बार-बार मोटी रकम निकलवाने के बावजूद, भाजपा सरकार डीजल, पेट्रोल और घरेलू रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के जरिए आम नागरिकों पर बोझ डाल रही है। केंद्र सरकार बाहरी वित्तीय सहायता पर लगातार निर्भर होती जा रही है, जबकि महंगाई देशभर के लोगों को परेशान कर रही है।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह भी कहा कि केंद्र की नीतियां देश की अर्थव्यवस्था और संघीय ढांचे दोनों को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन आरबीआई की संस्थागत मजबूती, रिजर्व बफर और नीतिगत लचीलेपन को कमजोर करने की कीमत पर नहीं हो सकता। भारत एक कमजोर केंद्रीय बैंक और वित्तीय रूप से तंग राज्यों के रहते एक मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था बनाने की उम्मीद नहीं रख सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की आर्थिक स्थिति के बारे में देश को जवाब देना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि आरबीआई से बार-बार वित्तीय फंड निकालने के बावजूद तेल और रसोई गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि जब देश आर्थिक तनाव का सामना कर रहा है और नागरिक महंगाई से जूझ रहे हैं, तो प्रधानमंत्री को जवाबदेही से बचने की बजाय लोगों की चिंताओं का हल करना चाहिए।

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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