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मोहाली का सबसे बड़ा मॉल अचानक बंद:कंपनी ने गेट पर पब्लिक नोटिस चिपकाया; 22 एकड़ में बना, अस्पताल बनाने की चर्चा
ट्राईसिटी के प्रमुख शॉपिंग और एंटरटेनमेंट सेंटर वीआर पंजाब माॅल को 20 अप्रैल से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। प्रबंधन के अचानक लिए फैसले से माॅल में खुले मल्टीनेशनल कंपनियों के आउटलेट्स 100 से अधिक रिटेल स्टोर्स बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
माल के निर्देशों के बाद सभी दुकानदारों और ब्रांड्स को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने आउटलेट बंद करने के लिए कहा गया, जिससे पूरे माल में एकाएक सन्नाटा छा गया। इससे हजारों कर्मचारियों और स्टाफ को नौकरी जाने का संकट सताने लगा है। कारोबारियों ने भी माल प्रबंधन के इस फैसले पर नाराजगी जताई है।
माल प्रबंधन के आधिकारिक नोटिस में बताया गया है कि 3 अप्रैल को उत्तर भारत में आए भूकंप के कारण इमारत को नुकसान पहुंचा है। इस घटना के बाद भवन की संरचनात्मक मजबूती को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
इसी के मद्देनजर मैनेजमेंट ने आम जनता और कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए माॅल को तत्काल प्रभाव से बंद करने और परिसर को पूरी तरह सील करने का निर्णय लिया है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि अगली सूचना तक माल में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इन कंपनियों के आउटलेट्स
माॅल में संचालित प्रमुख ब्रांड्स में एचएंडएम, रिलायंस ट्रेंड्स, क्रोमा, स्टारबक्स), केएफसी, बर्गर किंग, लेंसकार्ट, गैप, कोस्टा काफी और हल्दीराम जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा लाइफस्टाइल, मैक्स, जाकी, सेंट्रो, रिलायंस स्मार्ट बाजार, गो कलर्स, कैफे काफी डे, टैको बेल, स्केचर्स, स्पिन्नी, डीआइवाय और पाइरेट्स ऑफ ग्रिल जैसे कई आउटलेट भी यहां चल रहे हैं। माल में 9 स्क्रीन वाला पीवीआर सिनेमा भी लोगों के मनोरंजन कर रहा है।
कभी ट्राईसिटी का नंबर-1 माॅल था
करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला और एक मिलियन वर्ग फीट से अधिक में विकसित यह माॅल एक समय ट्राईसिटी का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त माल माना जाता था। कभी 250 के करीब आउटलेट खुले हुए थे यहां। यह एलांते माॅल को भी कड़ी टक्कर देता था। वीकेंड और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती थी और यह युवाओं का पसंदीदा हैंगआउट स्पाट बन चुका था।
धीरे-धीरे कम हुई रौनक
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में माॅल की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई। माॅल के सामने फ्लाईओवर बनने के बाद यहां की पहुंच प्रभावित हुई और विजिटर्स की संख्या घटने लगी। इसके अलावा, माल प्रबंधन द्वारा समय-समय पर उचित मार्केटिंग और मेंटेनेंस पर ध्यान न देने के कारण कई बड़े ब्रांड्स यहां से अपना कारोबार समेटते चले गए।
अस्पताल बनने की भी चर्चा
इधर, सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि भविष्य में इस माॅल को किसी बड़े अस्पताल समूह को दिए जाने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में माल मैनेजमेंट के अधिकारी अभिनव राणा से बात करते की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उताया। वाट्सएप पर मैसेज भी किया गया लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
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पंजाब विधानसभा में रोजगार और औद्योगिक निवेश पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन ने रोजगार सृजन और औद्योगिक निवेश को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान सरकार की रोजगार नीतियों, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और राज्य में आए बड़े औद्योगिक निवेश की सराहना की गई।
प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि 1 अप्रैल 2022 से अब तक योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर 68,228 सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2022 से 31 जुलाई 2026 तक पंजाब को 1,83,837 करोड़ रुपये के 9,899 औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए राज्य में 6,16,436 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 16,316, गृह विभाग में 14,723, बिजली विभाग में 8,706, स्थानीय निकाय विभाग में 5,681 और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 4,758 नियुक्तियां की गई हैं।
धालीवाल ने कहा कि पहले पंजाब में सरकारी नौकरियां सिफारिश, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार का शिकार थीं, जिससे योग्य युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ चुका था। लेकिन मौजूदा सरकार ने पारदर्शी परीक्षाओं और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
उन्होंने कहा कि अब युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उन्हें उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों से बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और नीतिगत स्थिरता के माध्यम से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी है, जब ज़रूरत के समय लोगों तक उपचार पहुँच सके : डॉ. बलबीर सिंह
किसी भी स्वास्थ्य योजना की वास्तविक सफलता केवल इस बात से नहीं आँकी जा सकती कि उस पर कितना ख़र्च हुआ या कितने मामलों का निपटारा हुआ, बल्कि इस बात से तय होती है कि ज़रूरत के समय लोगों को समय पर उपचार मिल पाया या नहीं। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 8 जनवरी 2026 से अब तक 2,91,417 लाभार्थियों को उपचार का लाभ मिल चुका है, जो कि एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक लगभग ₹1,044 करोड़ मूल्य की कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा चुकी हैं। इन आंकड़ों के पीछे हज़ारों ऐसे परिवार हैं, जिन्हें चिकित्सा आपात स्थिति के दौरान इलाज के ख़र्च की चिंता किए बिना अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।
इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी मानी जाती है, जब वह ज़रूरत के समय लोगों तक पहुँचे। मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल आंकड़ों की योजना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि किसी भी मरीज़ को इलाज और आर्थिक बोझ के बीच चुनाव न करना पड़े। प्रत्येक लाभार्थी उस परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे कठिन समय में इस योजना का सहारा मिला।”
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने आगे कहा, “हम जानते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ लगातार बदल रही हैं और हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाते रहें। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम कैशलेस उपचार को अधिक सुलभ बना रहे हैं, स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत कर रहे हैं तथा यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक इस योजना का लाभ पहुँचे।”
मुख्यमंत्री सेहत योजना से लाभान्वित अनेक लोगों ने इस योजना के प्रति संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की है। सुरेशपाल कौर ने बताया कि कठिन गर्भावस्था के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना उनके परिवार के लिए संबल बनी। उन्होंने कहा, “गर्भावस्था के दौरान मुझे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो गई थी और सीज़ेरियन डिलीवरी करवाने की ज़रूरत थी। ऐसे समय में सेहत कार्ड हमारे लिए बहुत बड़ी मदद साबित हुआ। जन्म के बाद मेरे बच्चे को विशेष नवजात चिकित्सा (नीओनेटल केयर) की आवश्यकता थी, जिसका पूरा उपचार भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के पैकेज के तहत उपलब्ध करवाया गया। इस योजना ने कठिन समय में हमारा साथ दिया और मेरे बच्चे को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिली।”
सुनाम की रूपिंदर कौर ने बताया कि कई वर्षों से घुटनों के असहनीय दर्द के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो गया था। उन्होंने कहा, “मैं लंबे समय से घुटनों के गंभीर दर्द से पीड़ित थी, लेकिन ख़र्च की चिंता के कारण ऑपरेशन के बारे में सोच पाना भी मुश्किल था। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मेरा घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) नि:शुल्क हुआ। इस उपचार ने मुझे फिर से सामान्य और बेहतर जीवन जीने का अवसर दिया है।”
इसी प्रकार तरनतारन के बीर सिंह को हृदय संबंधी बीमारी का पता चलने पर मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर उपचार मिला। उनका एंजियोग्राफी के साथ पीटीसीए (परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी) किया गया।
बीर सिंह ने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि हृदय रोग के उपचार में देरी नहीं की जा सकती और इसका ख़र्च परिवार के लिए बहुत बड़ा बोझ बन सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के कारण मुझे समय पर आवश्यक उपचार मिल गया।”
मुख्यमंत्री सेहत योजना का प्रभाव अब पूरे पंजाब में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रत्येक ज़िले के लाभार्थी इस योजना के तहत उपचार प्राप्त कर रहे हैं। स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ज़िला-वार आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,91,417 लोगों को योजना का लाभ मिल चुका है। ज़िलों में पटियाला 27,892 लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद बठिंडा में 22,584 तथा लुधियाना में 21,729 लाभार्थियों ने योजना का लाभ प्राप्त किया है। यह दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब में इसकी व्यापक माँग है।
योजना के अंतर्गत जालंधर (19,312), होशियारपुर (19,075), अमृतसर (16,550), संगरूर (16,549), श्री मुक्तसर साहिब (14,800), फिरोज़पुर (13,344) तथा गुरदासपुर (12,037) में भी बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त मोगा (11,669), फाज़िल्का (11,516), मानसा (10,539), फरीदकोट (10,309), बरनाला (8,773), तरनतारन (8,714), रूपनगर (8,574), एस.ए.एस. नगर (8,085), फतेहगढ़ साहिब (7,933), शहीद भगत सिंह नगर (6,999), कपूरथला (5,928), पठानकोट (5,844) तथा मालेरकोटला (2,472) के लाभार्थियों ने भी कैशलेस उपचार प्राप्त किया है। यह व्यापक पहुँच इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों सहित प्रदेश के सभी ज़िलों में परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचा रही है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना का लगातार बढ़ता दायरा स्वास्थ्य सेवाओं में एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब लोगों को उपचार शुरू करवाने से पहले यह चिंता नहीं सताती कि वे इसका ख़र्च कैसे उठाएँगे। योजना का विस्तार लगातार जारी है और इसका उद्देश्य स्पष्ट है—पंजाब के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना।
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ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया।
अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है।”
उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, “केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद।”
विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।”
केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ई-10 पेट्रोल पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए इंजनों को व्यापक विरोध के बावजूद मनमाने ढंग से ई-20 पर तब्दील कर दिया गया। 45,000 से अधिक वाहनों के सर्वेक्षण के अनुसार, 67 फीसदी ने माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की, जबकि 45 फीसदी इंजन खराब हो गए हैं। यह आम लोगों, जो सालों की बचत और किश्तों पर वाहन खरीदते हैं, की खून-पसीने की कमाई की खुली लूट के अलावा कुछ नहीं है।”
वाहन मालिकों पर पड़ रहे बोझ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले तो आम लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं और फिर उन्हें इस नीति के कारण मरम्मत का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ता है। यह बहुत अफसोसजनक है कि केंद्र सरकार ई-20 के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया है और दो लाख से अधिक हस्ताक्षर वाली जनता की याचिका तैयार की है, जो वे प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे हैं।”
केंद्र के अपने कबूलनामे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “शुरू में केंद्र सरकार ने दावा किया था कि सिर्फ वाहन निर्माता ही माइलेज का निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन हर चालक अपने वाहन की माइलेज देख सकता है, जो आधुनिक वाहनों के डैशबोर्ड पर दिखाई देती है। केंद्र ने अब संसद में मान लिया है कि ई-20 पेट्रोल माइलेज को छह फीसदी तक घटा सकता है और यह वाहनों के इंजनों को प्रभावित करता है।”
इस नीति के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ इथेनॉल के बारे में नहीं, बल्कि इस संबंध में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से है। इस समझौते के तहत भारत अगले पाँच सालों में इथेनॉल के आयात को पाँच गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब लीटर से पाँच अरब लीटर करेगा, जो कि लगभग 20 अरब डॉलर बनता है। अमेरिका इथेनॉल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत को यह बोझ उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने और उनकी हर बात को स्वीकार करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? अमेरिकी किसान अपनी अतिरिक्त पैदावार का निपटारा कर रहे हैं, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को उसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
केंद्र सरकार की विदेश नीति की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र के फैसले बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। स्थिति अब यह बन चुकी है कि भारत को कहाँ से कच्चा तेल खरीदना है और कहाँ से नहीं, यह अमेरिका तय करता है। ऑपरेशन सिंधूर के दौरान भी, अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान से संबंधित विकास की घोषणा की थी, जिससे हमारी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।”
इसे लागू करने की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र ने असल में 2030 तक ई-20 को लागू करने की योजना बनाई थी। 2026 में इसे लागू करने की क्या जल्दी थी? उन्होंने ई-20 से शुरुआत की है और ई-25 तथा ई-50 को लागू करने से पहले विवाद के ठंडा पड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं।”
विधानसभा के रुख को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब विधानसभा ने इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। भाजपा सदस्यों ने हिस्सा न लेने का फैसला किया, लेकिन हम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट होनी चाहिए। पहले, लोग लैड और अनलेड पेट्रोल में से एक चुन सकते थे। यह फैसला लोगों की मर्जी को ताक पर रखकर जबरन उन पर थोपा गया है।”
इस नीति की तुलना टोल प्लाज़ा से करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दुनिया भर में, लोगों के पास टोल सड़कों या बिना टोल वाली सड़कों का चयन करने का विकल्प होता है। जब नागरिक पहले ही रोड टैक्स अदा करते हैं, तो उन्हें अलग से टोल टैक्स क्यों देना पड़े? पंजाब सरकार ने 19 टोल प्लाज़ा बंद कर दिए हैं, जिससे यात्रियों को हर रोज़ लगभग 67 लाख रुपये की बचत हो रही है।”
अपनी मांग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों को तुरंत पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट दी जानी चाहिए और ई-20 की कीमत घटाई जानी चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे आम लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।”
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