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पंजाब में मान सरकार का ‘मिशन रोजगार’, 818 युवाओं को सौंपे गए नियुक्ति पत्र; अब तक 65264 को मिली सरकारी नौकरी

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मिशन रोजगार’ पहल के तहत आज विभिन्न विभागों में भर्ती हुए 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे, जिससे पिछले चार वर्षों में पंजाब सरकार द्वारा दी गई सरकारी नौकरियों की संख्या बढ़कर 65,264 हो गई है।

नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस उपलब्धि को पंजाब के युवाओं के लिए पारदर्शी और मेरिट के आधार पर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “आज विभिन्न विभागों में 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं।” उन्होंने बताया कि इनमें बिजली विभाग में 459, स्थानीय निकाय विभाग में 215, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 129 तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में 15 प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार अब तक पूरे राज्य में युवाओं को 65,264 सरकारी नौकरियाँ दे चुकी है।

सरकार द्वारा लगातार रोजगार सृजन पर ध्यान देने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बिजली विभाग में इस समय 1,750 और उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जो जून 2026 तक पूरी हो जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये सभी नौकरियाँ पूरी तरह योग्यता, पारदर्शिता और बिना किसी सिफारिश के दी गई हैं।” उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता के कारण कई उम्मीदवारों को विभिन्न विभागों में एक से अधिक नौकरियाँ भी मिली हैं।

साल 2022 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक से अधिक समय तक पंजाब के युवाओं को लगातार सरकारों द्वारा सरकारी नौकरियों से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लगभग एक दशक से अधिक समय तक पंजाब के युवाओं को सरकारी नौकरियाँ नहीं दी गईं। इन सरकारों ने हमारी पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद कर दिया, इसलिए वे किसी भी तरह की सहानुभूति के हकदार नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पद संभालने के बाद पंजाब सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मिशन रोजगार शुरू किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य के हर गाँव, कस्बे और शहर में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए हैं। उन्होंने नव-नियुक्त युवाओं को ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज से ये युवा सरकार के परिवार का हिस्सा बन गए हैं और मिलकर हम पंजाब को फिर से ‘रंगला पंजाब’ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

नए भर्ती हुए युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सफलता अपने भीतर कई कहानियाँ समेटे होती है, जबकि असफलता का कोई किस्सा नहीं होता। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और लगन हर व्यक्ति की सफलता की कुंजी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब में हर दिन सरकारी नौकरियों के लिए कोई न कोई परीक्षा आयोजित की जा रही है, जो युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रही है।” उन्होंने कहा कि हर सरकारी अधिकारी पंजाब की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि युवाओं को नौकरी देना कोई एहसान नहीं है, बल्कि उनकी प्रतिभा और योग्यता के आधार पर उन्हें सही अवसर देना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन युवाओं को पूरी तरह योग्यता के आधार पर नौकरियाँ मिली हैं।” उन्होंने युवाओं से सरकारी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनने और मिशनरी भावना के साथ लोगों की सेवा करने की अपील की।

भर्ती हुए युवाओं को समाज की भलाई के लिए काम करने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि वे अपने पदों का उपयोग जरूरतमंद और वंचित वर्गों की सहायता के लिए करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और कड़ी प्रतिस्पर्धा के माध्यम से की गई है। उन्होंने नए भर्ती हुए युवाओं से लोगों की अधिकतम भलाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब सरकार सरकारी खजाने के हर एक पैसे का उपयोग लोगों की भलाई के लिए कर रही है। उन्होंने बताया कि पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और किसानों को अब दिन के समय बिजली मिल रही है, जो एक मिसाल है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एक ऐसे समय में जब देश की संपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा अपने चहेतों को मामूली कीमतों पर सौंपी जा रही थीं, उस समय पंजाब सरकार ने एक निजी थर्मल प्लांट खरीदकर इतिहास रचा है।”

मुख्यमंत्री ने महिलाओं की भलाई के लिए पंजाब सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना’ के तहत सामान्य वर्ग की 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये वित्तीय सहायता के रूप में दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आम लोगों, खासकर गरीबों के लिए 1,000-1,500 रुपये बहुत महत्वपूर्ण हैं।” उन्होंने इस सहायता को माताओं और बेटियों के सम्मान का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की कि जो लोग इस योजना का मजाक उड़ा रहे हैं या बेबुनियाद सवाल उठा रहे हैं, वे आम नागरिकों के लिए 1,000 रुपये के महत्व को समझने में असफल हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जो लोग अवैध तरीके से कमाए गए पैसे से एक बार के भोजन पर 5,000 रुपये से अधिक खर्च कर देते हैं, वे 1,000 रुपये की कीमत को नहीं समझ सकते, जो उन लोगों के लिए बड़ी वित्तीय सहायता है जिन्हें त्योहारों पर भी काम करने जाना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि ऐसे अमीर नेता और उनके परिवार आम घरों के लिए इस सहायता के महत्व को नहीं समझ सकते।

समारोह स्थल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही इसे विकास भवन कहा जाता है, लेकिन यहां से बड़ी संख्या में नौकरियां मिलने के कारण इसका नाम ‘अपॉइंटमेंट लेटर भवन’ रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि 65,000 से अधिक युवाओं को केवल योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं।” उन्होंने कहा कि यह पंजाब के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि अब पंजाब में सरकारी नौकरियां पाने के लिए विदेशों से युवाओं की वापसी का रुझान देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी टिप्पणी की कि पारंपरिक पार्टियां पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए जन-केंद्रित शासन मॉडल से असहज महसूस कर रही हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये पार्टियां सत्ता के लिए कुर्सी की राजनीति करती थीं और लोगों व देश को लूटने के लिए बारी-बारी से शासन करती थीं।” उन्होंने आगे कहा कि यह राजनीति तब खत्म हुई जब पंजाब के लोगों ने मौजूदा सरकार को बड़ा जनादेश दिया, जिससे जनहितकारी पहलों की एक श्रृंखला शुरू हुई।

इस दौरान कई नए भर्ती हुए उम्मीदवारों ने पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए नौकरियां देने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। नाभा के जगजीत सिंह ने कहा कि पिछली सरकारों के ढीले रवैये के कारण उन्हें सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद खत्म हो गई थी, लेकिन ‘आप’ सरकार बनने के बाद उनमें फिर से उम्मीद जगी। फिरोजपुर के तजिंदर सिंह ने कहा कि जब उन्हें नौकरी के संबंध में फोन आया तो उनके परिवार को डर था कि उन्हें रिश्वत देनी पड़ेगी, लेकिन उन्होंने बिना एक भी पैसा खर्च किए नौकरी प्राप्त की।

मलेरकोटला की गुरप्रीत कौर, जो इस समय डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में काम कर रही हैं, ने कहा कि उन्होंने अब मेरिट के आधार पर सहकारी इंस्पेक्टर के रूप में दूसरी नौकरी प्राप्त की है। इसी तरह जालंधर के दिनेश बत्रा ने कहा कि उन्होंने पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए पीएसपीसीएल में एजेएस मैकेनिकल के रूप में अपनी दूसरी नौकरी प्राप्त की है।

तलवाड़ा के ईशान चौधरी ने कहा कि वे अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं जिन्हें पीएसपीसीएल में सेवा करने का अवसर मिला है। पटियाला के सुखमनप्रीत सिंह ने कहा कि वे आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के एक महीने बाद कनाडा से वापस आ गए थे और अब उन्होंने पीएसपीसीएल में अपनी दूसरी नौकरी प्राप्त की है।

पटियाला के गांव भूतगढ़ के धर्मिंदर सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि वे पहले ईंटों के भट्टे पर मजदूर के रूप में काम करते थे, लेकिन अब एक पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए उन्हें सरकारी नौकरी मिली है। श्री मुक्तसर साहिब के डॉ. नवजोत सिंह मान ने बताया कि दंत चिकित्सकों को 36 वर्षों के अंतराल के बाद सरकारी नौकरियां मिली हैं। इससे पहले दंत चिकित्सकों का आखिरी बैच 1990 में भर्ती किया गया था। उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया कि वे केवल मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर सरकारी नौकरियां दे रहे हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा और डॉ. बलबीर सिंह भी मौजूद थे।

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गुरुग्राम में किसने खरीदा ₹271 करोड़ का देश का सबसे महंगा पेंटहाउस!

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भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में गुरुग्राम ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। डीएलएफ के सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द डहलियास’ में करीब ₹271 करोड़ का पेंटहाउस बिकने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महंगी प्रॉपर्टी को कारोबारी मानव सरदाना ने खरीदा है, जो ‘इंपीरियल ऑटो’ से जुड़े रहे हैं। इस डील ने गुरुग्राम की प्रीमियम रियल एस्टेट मार्केट में नई चर्चा छेड़ दी है।

‘द डहलियास’ को डीएलएफ का सबसे महत्वाकांक्षी सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 29 मंजिलों वाले 8 टावरों में फैला है, जिसमें कुल 420 अपार्टमेंट्स हैं। इसकी कुल प्रोजेक्ट वैल्यू करीब ₹40,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। प्रोजेक्ट को खास तौर पर बेहद हाई-नेट-वर्थ ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹271 करोड़ में खरीदे गए इस पेंटहाउस का सुपर एरिया करीब 17,200 वर्ग फीट है, जबकि इसका कारपेट एरिया लगभग 10,500 वर्ग फीट बताया गया है। इस हिसाब से सुपर एरिया के आधार पर इसकी कीमत करीब ₹1.58 लाख प्रति वर्ग फीट और कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट बैठती है।

इतनी बड़ी कीमत के साथ यह सौदा भारत के सबसे महंगे आवासीय संपत्ति लेनदेन में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि कारपेट एरिया के हिसाब से कीमत गुरुग्राम को देश के सबसे महंगे रिहायशी बाजारों में शामिल मुंबई की प्रीमियम लोकेशनों के काफी करीब ले आती है।

मुंबई के वर्ली और अन्य प्रमुख इलाकों में भी लग्जरी घरों की कीमतें कई बार ₹2 लाख प्रति वर्ग फीट से ऊपर पहुंच जाती हैं। ऐसे में गुरुग्राम में ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट के करीब की यह डील शहर में बढ़ती लग्जरी हाउसिंग डिमांड और प्रीमियम प्रॉपर्टी की कीमतों को दर्शाती है।

गुरुग्राम पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख लग्जरी रियल एस्टेट बाजारों में तेजी से उभरा है। बड़े कॉरपोरेट हाउस, उद्योगपति और हाई-नेट-वर्थ खरीदार यहां बड़े आकार के अपार्टमेंट, पेंटहाउस और अल्ट्रा-लक्जरी घरों में निवेश कर रहे हैं। ₹271 करोड़ की यह डील इस बात का संकेत मानी जा रही है कि गुरुग्राम में प्रीमियम प्रॉपर्टी का बाजार अब देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों को टक्कर देने लगा है।

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देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।

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बेंगलुरु के 3-Star और 5-Star होटलों में बड़ी फूड सेफ्टी जांच, Expired दूध-मांस और खराब सब्जियां मिलने से मचा हड़कंप

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बेंगलुरु के बड़े और लग्जरी होटलों की रसोइयों में फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और एफएसएसएआई की टीमों ने शहर के 26 होटलों में अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, खराब मांस और मछली, सड़ी हुई सब्जियां, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।

इस कार्रवाई के लिए 30 निरीक्षण टीमें तैनात की गई थीं। अधिकारियों ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, जो खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड या इस्तेमाल के लायक नहीं पाई गई, उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया।

जांच के दौरान द ललित अशोक से करीब 76 किलो मांस, 200 किलो सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध बरामद किया गया। ताज यशवंतपुर से करीब 72 किलो मांस और मछली, जबकि फोर सीजन्स होटल से लगभग 19 किलो मांस मिला। शांगरी-ला होटल से करीब 15 किलो मांस और विवांता बेंगलुरु व्हाइटफील्ड से लगभग 3 किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद हटाए गए।

सबसे बड़ी बरामदगी में से एक रेडिसन ब्लू एट्रिया से हुई, जहां करीब 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली। इसमें लगभग 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो सब्जियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ होटलों की रसोई और स्टोरेज एरिया में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।

अधिकारियों को कुछ सब्जियों पर फंगस मिली, जबकि कई जगह खाद्य सामग्री को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने में भी लापरवाही सामने आई। कुछ उत्पादों पर जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था।

निरीक्षण के दौरान चिकन, मटन, मछली, दूध, खाना पकाने के तेल, मसाले, चीज और सॉस समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ फूड सेफ्टी मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत बड़े और लग्जरी होटलों से इसलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि होटल चाहे कितना भी बड़ा या महंगा हो, फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए समान हैं।

अब अधिकारियों की नजर उन फूड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भी है, जहां से होटलों और कैटरिंग संस्थानों को खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। बेंगलुरु में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई के बाद ही साफ होगी।

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