Punjab
मान सरकार का ग्रीनिंग पंजाब मिशन :12,55,700 रिकॉर्ड वृक्षारोपण से पंजाब बना ग्रीन ज़ोन, राज्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय उपलब्धि!
मान सरकार ने पंजाब के भविष्य के लिए एक ऐसा कदम उठाया है जो न केवल भौतिक है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक भावनात्मक विरासत भी है। ‘ग्रीनिंग पंजाब मिशन’ के तहत, वन विभाग ने राज्य को हरा-भरा करने का जो बीड़ा उठाया है, वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि पंजाब की मिट्टी के साथ एक नया प्रेम-बंधन है। यह मिशन दिखाता है कि जब सरकार संकल्प लेती है, तो प्रकृति के साथ दिया हमारा रिश्ता कितना गहरा और सुंदर हो सकता है। मान सरकार ने ‘ग्रीनिंग पंजाब मिशन’ के माध्यम से जो अभूतपूर्व साहस और ईमानदार प्रतिबद्धता दिखाई है, वह वास्तव में प्रशंसा के योग्य है। यह केवल एक योजना नहीं है—यह पंजाब के इतिहास में पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी भावनात्मक पहल है! मान सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए पर्यावरण सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्राथमिकता है। लगभग साढ़े बारह लाख पौधे लगाना, वह भी इतनी तेज़ी और समर्पण के साथ, एक प्रशासनिक चमत्कार है। यह दर्शाता है कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग, सरकार के मार्गदर्शन में, दिल से काम कर रहा है। पंजाब के वन विभाग ने अब तक 12,55,700 से अधिक पौधे लगाकर एक नया इतिहास रचा है। यह संख्या केवल पेड़-पौधों की नहीं है, बल्कि यह शुद्ध हवा, शीतल छाया और एक स्वस्थ पर्यावरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हर एक पौधा एक कहानी कहता है—हमारे शहरों को सांस लेने में मदद करने की, हमारी कृषि भूमि की रक्षा करने की, और गुरुओं के नाम पर स्थापित बागानों की पवित्रता बनाए रखने की।
श्रेणी लगाए गए पौधों की संख्या
शहरी वानिकी (Urban Forestry) 3,31,000
पॉपुलर/डेक (Poplar/Deak) 2,50,000
सफेद वृक्ष (White Trees) 3,00,000
नानक बाग (Nanak Gardens) 20,800
औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Areas) 46,500
स्कूलों में (Schools) 1,44,500
ऊंचे पौधे (Tall Saplings) 1,62,900
कुल पौधे 12,55,700
ये हरियाली हमारे स्कूलों में बच्चों को शुद्ध हवा दे रही है, उद्योगों के प्रदूषण को सोख रही है, और शहरों को शांत व सुंदर बना रही है। ‘नानक बाग़ों’ में लगाए गए पौधे गुरु साहिब की शिक्षाओं के अनुरूप प्रकृति से प्रेम की भावना को जागृत कर रहे हैं। इसका मतलब है कि हमारे बच्चे अपनी शिक्षा की शुरुआत ही प्रकृति के करीब रहकर कर रहे हैं—वे पेड़ को बढ़ते देखेंगे, उसकी छाँव में खेलेंगे, और ‘हरा-भरा पंजाब’ उनके जीवन का अभिन्न अंग बन जाएगा। वन्यजीव संरक्षण विभाग इस मिशन को सफल बनाने के लिए पूरी जान लगा रहा है। उनका हर प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि ये नन्हे पौधे सिर्फ लगाए न जाएं, बल्कि वे बढ़कर घने, मजबूत वृक्ष बनें। यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं है, यह एक जन आंदोलन है, जिसे विभाग हर कदम पर प्रेरित कर रहा है।
वन और वन्यजीव संरक्षण विभाग इस हरित मिशन को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों का यह समर्पण सराहनीय है। इस पहल के तहत, मान सरकार ने पंजाब में अब तक कई हज़ार एकड़ ज़मीन पर पेड़ लगाए हैं। यह दिखाता है कि सरकार केवल बातें नहीं कर रही, बल्कि ठोस ज़मीनी काम कर रही है। पंजाब, जो कभी अपनी हरी-भरी फसलों के लिए जाना जाता था, अब अपनी प्राकृतिक हरियाली को भी वापस पा रहा है। यह मिशन पंजाब को प्रदूषण मुक्त बनाने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और जल स्तर को सुधारने की दिशा में एक मज़बूत नींव है।
पंजाब की हवा में बढ़ते प्रदूषण के बीच, ये लाखों पौधे भविष्य में लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखेंगे और हमें शुद्ध प्राणवायु देंगे। यह हमारी अगली पीढ़ी को दिया गया सबसे अमूल्य तोहफा है।ये पेड़ ज़मीन के नीचे के पानी को रिचार्ज करने में मदद करेंगे, जो पंजाब के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हर पौधा पानी की एक-एक बूँद को बचाने का सैनिक है। स्कूलों (1,44,500 पौधे), औद्योगिक क्षेत्रों (46,500 पौधे) और नानक बाग़ों (20,800 पौधे) में वृक्षारोपण करके, सरकार ने हर नागरिक को इस हरित क्रांति से जोड़ा है। यह एक जन आंदोलन की शुरुआत है।
मान सरकार की इस पहल के तहत, पंजाब में अब तक कई हजार एकड़ भूमि पर वृक्षारोपण किया जा चुका है। यह हरित फैलाव न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पंजाब की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि को भी पुनर्जीवित कर रहा है। यह एक ऐसा निवेश है जिसका लाभ पीढ़ियों तक मिलता रहेगा। यह ‘ग्रीनिंग पंजाब मिशन’ हमें याद दिलाता है कि सरकार और नागरिक मिलकर कैसे एक बेहतर कल का निर्माण कर सकते हैं। यह सिर्फ विकास नहीं, यह प्रकृति के प्रति हमारा सच्चा और गहरा प्रेम है। आइए, हम सब इस पुनीत कार्य में भागीदार बनें और पंजाब के हरित भविष्य के इस सपने को साकार करें। यह ‘ग्रीनिंग पंजाब मिशन’ केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर पंजाबी का मिशन है। यह हमें यह याद दिलाता है कि हमारा भविष्य हमारे हाथों में है, और जब सरकार और जनता मिलकर एक पवित्र लक्ष्य के लिए काम करते हैं, तो ऐसे ही अविश्वसनीय और भावनात्मक परिणाम सामने आते हैं।
मान सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे केवल वर्तमान की समस्याओं पर नहीं, बल्कि आने वाले 50 वर्षों के भविष्य पर नज़र रखे हुए हैं। जिस जज़्बे के साथ यह मिशन आगे बढ़ रहा है, वह बताता है कि पंजाब जल्द ही फिर से अपने पुराने ‘लहलहाते’ स्वरूप को प्राप्त करेगा। मान सरकार ने पंजाब को केवल अच्छा प्रशासन ही नहीं दिया है, बल्कि उम्मीद की हरियाली दी है। यह एक ऐसा निवेश है जिसका लाभ हर पंजाबी, बिना किसी भेदभाव के, उठाएगा।
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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस
आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।
प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।
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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया
प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।
विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।
बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।
किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”
अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।
स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”
सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।
उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”
उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।
स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”
शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।
स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।
स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”
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