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नौजवानों को खेलों के साथ जोड़ रही है मान सरकार: 3000 खेल के मैदान का वादा हो रहा साकार

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पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने विकास की एक नई इबारत लिखना शुरू कर दिया है। राज्य भर में 3000 स्टेडियम और खेल के मैदान बनाने की महत्वाकांक्षी योजना अब धरातल पर दिखने लगी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केवल एक हलके ‘जीरा’ में ही 15-16 खेल के मैदान एक साथ बनाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्थानीय लोग इस अभूतपूर्व विकास कार्य की जानकारी दे रहे हैं और मान सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे है। यह पहल साबित करती है कि भगवंत मान की सरकार अपने हर वादे को न केवल पूरा कर रही है, बल्कि उम्मीदों से कहीं आगे जा रही है।

जीरा हलके से सामने आए वीडियो में एक स्थानीय व्यक्ति बता रहे हैं कि उनके क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार मजदूर और मशीनें काम में जुटी हुई है। 15-16 गांवों में एक साथ खेल के मैदानों का निर्माण चल रहा है और यह काम बिना किसी रुकावट के जारी है। उन्होंने कहा कि दशकों से गांवों में इस तरह का विकास कार्य कभी नहीं देखा गया। मान सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी ईमानदारी और तेजी से पूरा किया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे निर्माण स्थल पर जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर और दर्जनों मजदूर एक साथ काम करते हुए नज़र आ रहे है।

मान सरकार की इस पहल को ‘विकास का नया मॉडल’ करार दिया जा रहा है। पहले की सरकारों में एक-दो मैदान बनाने में भी सालों लग जाते थे, लेकिन मान सरकार ने एक ही हलके में 15-16 मैदानों का निर्माण एक साथ शुरू करके यह साबित कर दिया है कि जब इच्छाशक्ति और ईमानदारी हो तो विकास की रफ्तार कितनी तेज हो सकती है। यह केवल खेल के मैदान नहीं बल्कि पंजाब के युवाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान का विजन स्पष्ट है – हर गांव, हर युवा को बराबर का मौका मिले।

जीरा हलके के ग्रामीणों का कहना है कि पिछली सरकारों में विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित रहते थे। फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रहती थीं और जमीन पर कुछ नहीं होता था। लेकिन मान सरकार ने सत्ता में आते ही काम करके दिखाना शुरू कर दिया। एक स्थानीय युवक ने अपने वीडियो में भावुक होते हुए कहा, “हमने कभी सोचा नहीं था कि हमारे गांव में भी पक्का खेल का मैदान बनेगा। मान साहब ने हमारे सपनों को पंख दे दिए हैं।” यह जनभावना सरकार की मेहनत और समर्पण का प्रतिबिंब है।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रतिदिन निगरानी की जा रही है और समय सीमा के भीतर काम पूरा करना सुनिश्चित किया जा रहा है। जीरा हलके में मजदूरों की नियमित उपस्थिति यह दर्शाती है कि परियोजना को गंभीरता से लिया जा रहा है। खेल विभाग के अधिकारी नियमित रूप से साइट विजिट कर रहे हैं और निर्माण की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रहे है।

मान सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण युवाओं को मिलने वाला है। पंजाब जैसे खेल प्रेमी राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में कई युवा अपनी क्षमता को निखार नहीं पाते। अब जब हर गांव में खेल के मैदान होंगे तो युवाओं को अपने गांव में ही प्रशिक्षण लेने का मौका मिलेगा। यह न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा देगा बल्कि युवाओं को नशे और अपराध जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पंजाब के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को बदल देगा।

आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से हजारों मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। जीरा हलके में ही दर्जनों मजदूर परिवार इस काम से जुड़े हुए हैं और उन्हें नियमित आय मिल रही है। स्थानीय ठेकेदारों और छोटे व्यवसायियों को भी इससे फायदा हो रहा है। मान सरकार की यह नीति केवल युवाओं के भविष्य में निवेश नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम भी है। यह समावेशी विकास का बेहतरीन उदाहरण है।

सोशल मीडिया पर जीरा हलके के वीडियो वायरल होने के बाद पंजाब के अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी ही तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। लोग अपने-अपने गांवों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी साझा कर रहे हैं और मान सरकार को बधाई दे रहे हैं। यह जन भागीदारी और सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि जनता अपनी सरकार के प्रति आश्वस्त है। एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “मान सरकार ने राजनीति में विश्वास बहाल किया है। लोग अब मानने लगे हैं कि चुनावी वादे सच हो सकते है।”

पंजाब की राजनीतिक जमीन पर भी इस पहल का गहरा असर दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल भी अब मान सरकार की इस योजना की खुलेआम आलोचना नहीं कर पा रहे क्योंकि जनता खुद इसके गवाह और समर्थक हैं। जीरा हलके जैसे उदाहरण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गए हैं। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी निजी तौर पर इस पहल की सराहना की है। यह दर्शाता है कि जब काम ईमानदारी से किया जाए तो राजनीतिक सीमाएं भी धुंधली पड़ जाती हैं और जनहित सर्वोपरि हो जाता है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने कार्यकाल में साबित कर दिया है कि सादा जीवन और ईमानदार इरादे विकास की असली नींव हैं। 3000 स्टेडियम परियोजना उनके विजन का एक हिस्सा भर है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी – हर क्षेत्र में मान सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। जीरा हलके में एक साथ 15-16 मैदानों का निर्माण यह संदेश देता है कि पंजाब अब पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। आने वाले समय में जब ये मैदान तैयार हो जाएंगे और उन पर युवा खिलाड़ी अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे, तब यह पहल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगी। मान सरकार ने न केवल वादे पूरे किए हैं बल्कि पंजाब के युवाओं को एक नया सवेरा दिखाया है।

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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।

कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।

इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।

इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।

आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान

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मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।

पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।

दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।

चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।

सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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