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ChandigarhPG Medical Quota में बड़ा बदलाव: High Court ने 10वीं-12वीं वाली शर्त रद्द की, अब Merit ही मुख्य आधार

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चंडीगढ़ PG मेडिकल कोटा को लेकर बड़ा फैसला आया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने UT चंडीगढ़ की वह शर्त खारिज कर दी है, जिसमें PG मेडिकल (MD/MS) की सीटों के लिए 10वीं या 12वीं कक्षा चंडीगढ़ से पास करना जरूरी बताया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि स्कूलिंग के आधार पर PG मेडिकल सीटें भरना कानूनन गलत है, क्योंकि इससे मेरिट पर असर पड़ता है।

यह मामला डॉ. तन्वी नाम की डॉक्टर द्वारा फाइल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। वह चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMCH) से MBBS कर चुकी हैं और उन्होंने UT-Pool की सीटें भरने के नियमों को चुनौती दी थी।

अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी, लेकिन तब तक के लिए कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं।

क्या था मामला?

चंडीगढ़ प्रशासन की पॉलिसी के मुताबिक, PG मेडिकल (MD/MS) की स्थानीय सीटें भरने के लिए छात्र का 10वीं या 10वीं+12वीं क्लास चंडीगढ़ से पास होना जरूरी था।

कई छात्रों ने इसे अनुचित और मेरिट के खिलाफ बताया क्योंकि NEET-PG एक ऑल-इंडिया आधार पर होने वाली परीक्षा है, जिसमें स्कोर और मेरिट मुख्य आधार होते हैं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट की डबल बेंच – जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर – ने UT की ये शर्त रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा:

  • PG मेडिकल सीटें स्कूलिंग के आधार पर नहीं भरी जा सकतीं।
  • मेरिट (eligibility और NEET-PG score) ही सबसे बड़ा आधार रहेगा।
  • यह नियम देशभर में अपनाई जा रही प्रक्रिया से मेल नहीं खाता, क्योंकि NEET-PG काउंसलिंग भी मेरिट को प्राथमिकता देती है।
  • UT प्रशासन कोर्ट को कोई भी वैध कारण या acceptable justification नहीं दे पाया कि स्कूलिंग का नियम क्यों लागू होना चाहिए।

कोर्ट ने यहाँ तक कहा कि यह नीति वैसी ही है जैसी पहले कई बार कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हैं — जैसे:

  • निवास आधारित कोटा,
  • 5 साल की स्कूलिंग,
  • 5 साल की प्रॉपर्टी ओनरशिप जैसी शर्तें।

इन सभी को अदालत पहले ही अवैध बता चुकी है।

Supreme Court का भी बड़ा फैसला — Domicile quota PG में खत्म

इसी मुद्दे पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कर दिया है कि:

  • PG मेडिकल कोर्सेज में कोई भी राज्य-आधारित या domicile quota मान्य नहीं है।
  • PG में चयन सिर्फ योग्यता (merit) और institutional preference के आधार पर ही हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि रेजिडेंट या स्कूलिंग जैसी शर्तें संविधान के खिलाफ” हैं क्योंकि ये समान अवसर (Equality) को तोड़ती हैं।

इससे हाईकोर्ट के फैसले को और मजबूती मिली है।

अब PG सीटें कैसे भरेंगी?

कोर्ट ने बताया कि जब तक नई पॉलिसी नहीं बनती:

  • 50% सीटें – All India Quota (AIQ) से भरेंगी।
  • बाकी 50% सीटें – Institutional Preference से भरेंगी।
    यानी GMCH चंडीगढ़ से MBBS करने वाले छात्रों को preference दी जा सकती है, लेकिन किसी की schooling कहां हुई यह महत्वपूर्ण नहीं होगा।

स्कूल आधारित या निवास आधारित कोई भी नियम लागू नहीं होगा।

UT प्रशासन को आदेश

हाईकोर्ट ने UT प्रशासन से कहा:

  • एक नई, वैध और मेरिट-आधारित पॉलिसी तैयार करें।
  • पिछली न्यायिक टिप्पणियों और Supreme Court के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखें।
  • अगली सुनवाई से पहले अपना हलफनामा (affidavit) दाखिल करें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

  • यह फैसला देशभर में PG मेडिकल एडमिशन को और पारदर्शी तथा न्यायसंगत बनाएगा।
  • कई राज्यों में अभी भी किसी न किसी रूप में “local preference” की चर्चा होती रहती है।
  • न्यायालय के निर्णय के बाद अब PG मेडिकल में सिर्फ merit ही सबसे बड़ा आधार रहेगा।
  • इससे deserving candidates को फायदा होगा — चाहे वह किसी भी राज्य से हों।

सारांश (Quick Summary)

  • UT चंडीगढ़ की PG मेडिकल सीटों में 10वीं-12वीं वाली शर्त रद्द
  • सीटें अब स्कूलिंग नहीं, केवल मेरिट के आधार पर भरेंगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी PG में domicile quota को अवैध बताया है।
  • प्रशासन नई पॉलिसी बनाएगा।
  • अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को।
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चंडीगढ़ के 5 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी:मेल पर मैसेज भेजा, स्कूलों में छुट्‌टी

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चंडीगढ़ और गुरुग्राम में बुधवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कई नामी प्राइवेट स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल मिले। धमकी मिलते ही पुलिस, ऑपरेशन सेल, एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और सभी स्कूलों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।


 चंडीगढ़ के स्कूलों को मिली धमकी

जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ में चार बड़े निजी स्कूलों को बम धमकी वाला ई-मेल मिला है।
इनमें प्रमुख रूप से:

  • सेक्टर-25 स्थित चितकारा इंटरनेशनल स्कूल
  • सेक्टर-45 स्थित एक निजी स्कूल

शामिल हैं। एहतियातन स्कूलों में बच्चों की एंट्री रोक दी गई है और सीनियर अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।


 गुरुग्राम में भी कई स्कूल निशाने पर

उधर, गुरुग्राम में भी बुधवार सुबह कई नामी स्कूलों को धमकी भरा ई-मेल मिलने से अफरा-तफरी मच गई। जिन चार निजी स्कूलों को धमकी मिली है, उनमें:

  • डीएलएफ फेज-1 स्थित कुंसकपालन स्कूल
  • सेक्टर-53 स्थित लैंसर्स स्कूल
  • सेक्टर-64 स्थित हेरिटेज एक्सपीरिएंशियल लर्निंग स्कूल
  • बादशाहपुर स्थित पाथवेज वर्ल्ड स्कूल

शामिल हैं।


 सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी

सूचना मिलते ही पुलिस टीमों ने तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए।

  • एसडीआरएफ की टीमें भी मौके पर तैनात
  • चारों स्कूल परिसरों में तलाशी अभियान जारी
  • छात्रों और स्टाफ को सुरक्षा के मद्देनजर बाहर निकाला गया

फिलहाल किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


 सुबह मिला धमकी भरा ई-मेल

स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हें ई-मेल के जरिए धमकी मिली।
धमकी उस समय सामने आई जब:

  • बच्चों के स्कूल पहुंचने का समय हो चुका था
  • स्कूल बसें बच्चों को लेकर परिसर तक पहुंचने लगी थीं

इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी और पेरेंट्स को मैसेज भेजकर बच्चों को स्कूल न भेजने की अपील की। जो बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे, उन्हें सुरक्षित रूप से बाहर भेज दिया गया।

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Chandigarh court को बम से उड़ाने की धमकी:ई-मेल पर लिखा- ड्रोन से हमला करेंगे, पुलिस ने चारों तरफ से एरिया सील किया

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चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलते ही पुलिस ने कोर्ट परिसर को तुरंत खाली करा लिया गया। मौके पर स्थानीय पुलिस के साथ-साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, बम स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पहुंच गईं।

किसी को भी कोर्ट के अंदर जाने की इजाजत नहीं है, फिलहाल कोर्ट परिसर के दोनों गेट बंद कर दिए गए हैं। पुलिस ने पूरे परिसर को चारों तरफ से सील कर दिया है। एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कोर्ट परिसर के अंदर भी तलाशी अभियान जारी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह धमकी ई मेल के माध्यम से आई है। मेल में धमकी देने वाले ने ड्रोन के जरिए बम ब्लास्ट कर कोर्ट को उड़ाने की बात कही है।

कोर्ट की मेल आईडी पर मिली धमकी

बम स्क्वॉड की टीम पूरे परिसर की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने कोर्ट की मेल आईडी पर मेल कर धमकी दी है। जैसे ही यह मामला सामने आया, उसके बाद तुरंत एसएसपी आफिस को सूचित किया गया। जिसके बाद बम स्क्वॉड सहित पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंची। थाना सेक्टर-36, 39 डीएसपी भी मौके पर पहुंच गए हैं।

SHO बोले- मेल में ड्रोन से बम फेंकने की बात सामने आई

थाना 39 SHO राम दयाल ने बताया कि सुबह 11:55 बजे मेल के जरिए धमकी की सूचना आई थी। इसके बाद कोर्ट में मौजूद सभी लोगों को पॉर्किंग स्थल लाया गया। सूचना मिलने के बाद कोर्ट परिसर खाली करवा दिया है। पूरा परिसर और रूम चैक करवाए गए हैं। सबोटाज टीम पूरा निरीक्षण कर रही है। अब कोई खतरा नहीं है। मेल करने वाली की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि मेल में ड्रोन के जरिए बम फेंकने की बात सामने आई है। पुलिस की टीमों ने 2 घंटे तक ऑपरेशन चलाया।

पहले भी मिल चुकी धमकी

चंडीगढ़ जिला कोर्ट ने पहले इस साल 3 बार पहले भी धमकियां मिल चुकी हैं। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को 22 मई को ईमेल के जरिए ही बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। जिसके बाद पूरा परिसर खाली करा दिया गया था। ठीक इसके एक सप्ताह बाद हरियाणा सिविल सेक्रेटेरिएट (मुख्यमंत्री कार्यालय सहित) को कॉल कर बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके बाद पूरी बिल्डिंग को खाली करा दिया गया था। उधर, चंडीगढ़ से मुंबई जाने वाली इंडिगो फ्लाइट को 6-7 मई को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। इससे मुंबई एयरपोर्ट पर अलर्ट रहा था।

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चंडीगढ़ PGI में 1.14 करोड़ का घोटाला: CBI ने की 6 कर्मी समेत 8 पर FIR, फोटोकॉपी दुकान से मरीजों की ग्रांट में खेल

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चंडीगढ़ PGI में 1.14 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है। PGI की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े 6 लोग मरीजों को मिलने वाला पैसा निजी खातों में डलवा रहे थे। इस मामले में CBI ने पीजीआई के 6 कर्मचारियों और 2 अन्य लोगों समेत 8 के खिलाफ FIR दर्ज की है। CBI जांच में सामने आया है कि यह पूरा स्कैंडल आरोपी एक फोटोकॉपी वाले की दुकान से चला रहे थे। इसमें दुकान के मालिक को भी आरोपी बनाया गया है।

एक मरीज ने इलाज के रुपए न मिलने के बाद पीजीआई प्रशासन से इसकी शिकायत की थी। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने प्रोफेसर डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की। जिसके बाद केस सीबीआई के पास गया।

आरोपी फोटोकॉपी की दुकान से मरीजों को मिलने वाली ग्रांट की रकम फर्जी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवाते थे। साथ ही मरीजों के नाम पर मिलने वाली महंगी दवाएं अवैध रूप से बाजार में बेच दी जाती थी।

पीजीआई चंडीगढ़ की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े कर्मियों को भी आरोपी बनाया गया है।

पीजीआई चंडीगढ़ की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े कर्मियों को भी आरोपी बनाया गया है।

अब पढ़िए कैसे हुआ मामले का खुलासा…

  • मरीज के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किए रुपए:
  •  घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लाभार्थी मरीज कमलेश देवी (फाइल नंबर 18796) के पति ढाई लाख रुपए की स्वीकृत ग्रांट से दवा लेने प्राइवेट ग्रांट सेल पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि उनकी फाइल नष्ट कर दी गई है और डिजिटल रिकॉर्ड भी डिलीट है। इसके बाद जांच में सामने आया कि करीब 22 लाख रुपए निवास यादव नामक के एक अकाउंट में ट्रांसफर किए गए हैं। जबकि इसका मरीज से कोई संबंध नहीं था।
  • हॉस्पिटल अटेंडेंट के अकाउंट में फर्जी ट्रांसफर:
  • कमलेश ने PGI प्रशासन से इसकी शिकायत की। इसके बाद PGI प्रशासन ने मामले में एक कमेटी का गठन किया। डा. अरुण की अध्यक्षता में बनी कमेटी को कई खामियां मिलीं, जिसमें एक अन्य मरीज अरविंद कुमार (फाइल नंबर 20404) को मिलने वाली राशि में से 90 हजार रुपए हॉस्पिटल अटेंडेंट नेहा के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद और जांच हुई तो, इनमें जांच समिति को 11 ऐसे अकाउंट मिले, जिनमें फर्जी तरीके से मरीजों खुद को मरीज का परिवार बताकर 19 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए गए थे।
  • दवा विक्रेताओं को भेजे रुपए:
  • वहीं, ग्रांट सेल ने दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित पांच मरीजों के इलाज के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि और अन्य संस्थाओं से मिले 61.75 लाख रुपए में से 38 लाख 946 रुपए बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के सीधे दवा विक्रेताओं के खातों में भेज दिए गए। हैरानी की बात यह है कि इन 5 मरीजों में से 2 की पहले ही मौत हो चुकी थी।
  • 70 मामलों में गड़बड़ी, फाइलें गायब:
  • पीजीआई की इंटरनल कमेटी की जांच में सामने आया कि 2017 से अक्टूबर 2021 तक के रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें ऐसे 70 और मामले सामने आए। इनमें 17 मामलों में दवा सप्लायरों के असली बिलों में छेड़छाड़ कर 2 बार भुगतान लिया गया। वहीं 37 मरीजों की असली फाइलें रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब पाई गईं।
  • 2 पॉइंट में पढ़िए स्कैंडल में कौन शामिल…
  • फोटोकॉपी की दुकान से चलाया स्कैंडल: 
  • PGI की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े कर्मचारी PGI के पास स्थित गोल मार्केट में एक फोटोकॉपी दुकान से अपना स्कैंडल चलाते थे। आरोपी मरीजों को मिलने वाली ग्रांट को फर्जी खातों में ट्रांसफर करा देते थे। फोटोकॉपी दुकान के मालिक दुर्लभ कुमार, साहिल सूद और उनके रिश्तेदारों के खातों में रुपए ट्रांसफर किए थे, जिसे इन्होंने आपस में बांट लिया।
  • प्राइवेट ग्रांट सेल में सामने आईं गड़बड़ी:
  •  जांच के दौरान सीबीआई ने पीजीआई, संबंधित विभागों और विभिन्न बैंकों से रिकॉर्ड जुटाए। इनमें पीजीआई की प्राइवेट ग्रांट सेल में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। यह सेल विभिन्न विभागों से मिलने वाली ग्रांट का प्रबंधन करती है। इसके बाद इसी सेल के जरिए मरीजों को आर्थिक मदद और दवाएं दी जाती हैं।
  • दवा कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
  • सीबीआई इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है। साथ ही एचएलएल लाइफ केयर, आर कुमार मेडिकोज, कुमार एंड कंपनी और मारुति मेडिकोज की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है, हालांकि अभी इन कंपनियों को आरोपी नहीं बनाया गया है।
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