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कुमारी सैलजा खेमा हार की हैट्रिक के पीछे भूपेंद्र और दीपेंद्र सिंह Hooda को ठहरा रही है जिम्मेवार

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लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस पार्टी काफी उत्साहित थी, लेकिन अब हरियाणा के नतीजों से वह असमंजस और परेशान है। उसे हार की उम्मीद नहीं थी और अब चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक पार्टी के अंदर ही अंदर घमासान मचा हुआ है। Hooda खेमा कहलाने वाला एक गुट वोटिंग मशीन को अपनी हार का जिम्मेदार ठहरा रहा है। वहीं, शैलजा खेमा Hooda पिता-पुत्र को लगातार तीन हार का जिम्मेदार ठहरा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रचार अभियान के दौरान Hooda जोड़ी पर काफी फोकस किया था, लेकिन अब लोग उनकी भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर अहम नेताओं के साथ बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि हरियाणा में कुछ लोग पार्टी के हित से ज्यादा अपने हित के बारे में सोच रहे हैं। चुनाव से पहले भूपेंद्र Hoodaऔर उनके बेटे दीपेंद्र Hooda को मीडिया से खूब तारीफ मिल रही थी और उन्हें हीरो के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन अब लोग उन्हें खलनायक के तौर पर देखने लगे हैं। जब हम चुनाव नतीजों को करीब से देखते हैं, तो ऐसा लगता है कि वे खुद पर कुछ ज़्यादा ही आश्वस्त थे। दीपेंद्र Hooda ने जीटी रोड बेल्ट नामक जगह पर मतदाताओं को जीतने के लिए प्रसिद्ध नेताओं राहुल और प्रियंका गांधी के साथ कार्यक्रम आयोजित करके ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, जो आमतौर पर भाजपा पार्टी के लिए मजबूत है। हालांकि, भाजपा ने एक चतुर रणनीति के साथ उन्हें चौंका दिया, जिससे उन्हें उम्मीद से ज़्यादा परेशानी हुई। आइए देखें कि भाजपा हरियाणा में Hooda परिवार के प्रभाव को कैसे चुनौती देने में कामयाब रही।

रोहतक, झज्जर और सोनीपत हरियाणा में तीन जगहें हैं जिन्हें देशवाली बेल्ट के रूप में जाना जाता है। इन इलाकों में Hooda परिवार काफ़ी शक्तिशाली है। इन तीनों जगहों को मिलाकर 14 सीटें हैं जहाँ लोग नेताओं को वोट देते हैं और इस बार कांग्रेस पार्टी ने उनमें से 8 सीटें जीतीं। 2019 में, उनके पास 12 सीटें थीं। अगर हम जींद, दादरी और भिवानी के आस-पास के इलाकों के बारे में भी सोचें, जहाँ बहुत सारे जाट लोग रहते हैं, तो इस पूरे इलाके को जाटलैंड कहा जाता है और यहाँ कुल 25 वोटिंग सीटें हैं। कांग्रेस पार्टी ने आमतौर पर इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है और उसे बहुत समर्थन मिला है।

उदाहरण के लिए, 2014 के चुनावों में, वे 10 साल तक प्रभारी रहे लेकिन केवल 15 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर रहे, जो मुख्य विपक्षी पार्टी होने के लिए पर्याप्त नहीं था। हरियाणा में, जिसे जाटलैंड कहा जाता है, कांग्रेस पार्टी ने पिछले चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, बहुत सारी सीटें जीतीं। उन्हें लगा कि वे 2024 के चुनावों में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे क्योंकि उनके नेता Hooda लोकप्रिय थे। लेकिन जब नतीजे सामने आए, तो वे हैरान और निराश थे क्योंकि वे पहले की सीटें हार गए थे। दूसरी ओर, भाजपा पार्टी, जो आमतौर पर उस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है, ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया और कई सीटें जीतीं। दो अन्य सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के पास गईं, एक कांग्रेस से और एक जो पहले भाजपा के साथ हुआ करता था, लेकिन वे दोनों अब भाजपा पार्टी की मदद कर रहे हैं।

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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान

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हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।

अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।

गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।

वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।

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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम

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जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।

जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।

2023 में नहीं लाया जा सका बिल

2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।

आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए

खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।

बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी

आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।

परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध

पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।

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