Connect with us

World

ईरान ने पाकिस्तान पर किया हवाई हमला, PAK को दी धमकी

Published

on

भारत के बाद अब ईरान ने भी पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरान ने मंगलवार को बलूचिस्तान में हवाई हमले कर कई आतंकी समूहों के ठिकानों को नष्ट कर दिया, जिससे पाकिस्तान बौखला गया है. इस हरकत पर पाकिस्तान ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने की धमकी दी है.

ईरान ने दावा किया है कि बलूचिस्तान स्थित आतंकी समूहों के ठिकानों पर हवाई हमले किए गए हैं. इस घटना की पुष्टि खुद पाकिस्तान ने की है. इसे लेकर पाकिस्तान का कहना है कि ईरान के हवाई हमले में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई है, जबकि तीन बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गई हैं. पाकिस्तान ने इस घटना की निंदा की है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ईरान की कार्रवाई को लेकर ट्विटर (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया है. उन्होंने इस पोस्ट में लिखा है कि पाकिस्तान इस हमले की कड़ी निंदा करता है. ईरान ने अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र नियमों का उल्लंघन किया है. देश की संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे.

हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने ट्वीट में यह नहीं बताया है कि ईरान ने किस इलाके पर हमला किया है. इससे पहले पुलवामा हमले के बाद भारत ने 2019 में पाकिस्तान के बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. बताया जा रहा है कि भारत की तरह ईरान ने भी पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मार गिराया है.

गौरतलब है कि जैश अल-अदल आतंकी संगठन लगातार ईरान में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है, जिससे ईरान को भारी नुकसान हो रहा है. खुफिया जानकारी के आधार पर ईरान ने मंगलवार रात पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की. इस सर्जिकल स्ट्राइक में जैश अल-अदल के कई आतंकी मारे गए. माना जा रहा है कि ईरान आने वाले दिनों में ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दे सकता है. इन हमलों से पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव गहरा सकता है. आपको बता दें कि पाकिस्तान और ईरान के बीच अब तक दोस्ताना रिश्ते रहे हैं.

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Blog

Donald Trump के एयर फोर्स वन में तकनीकी खराबी, दावोस यात्रा के बीच विमान की इमरजेंसी लैंडिंग

Published

on





🔴 दावोस जाते समय एयर फोर्स वन में तकनीकी खराबी, बैकअप विमान से रवाना हुए राष्ट्रपति ट्रंप

वॉशिंगटन/दावोस।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विशेष विमान एयर फोर्स वन तकनीकी खराबी के कारण स्विट्जरलैंड के दावोस जाते समय वापस लौट आया। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप अपने दल के साथ बैकअप विमान से रवाना हुए। वह आज वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में अमेरिकी नीतियों पर संबोधन देंगे।

✈️ उड़ान के दौरान आई तकनीकी समस्या

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि उड़ान भरने के लगभग एक घंटे बाद विमान में मामूली इलेक्ट्रिकल तकनीकी खराबी सामने आई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलट ने विमान को जॉइंट बेस एंड्रयूज वापस लाने का फैसला किया।

विमान में मौजूद एक पत्रकार के मुताबिक, टेकऑफ के कुछ देर बाद प्रेस केबिन की लाइट्स अस्थायी रूप से बंद हो गई थीं। हालांकि उस समय खराबी का कोई आधिकारिक कारण साझा नहीं किया गया। विमान सुरक्षित रूप से वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में लैंड कर गया।

🛫 बैकअप विमान से दावोस रवाना

एयर फोर्स वन की वापसी के बाद राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल ने बैकअप विमान से स्विट्जरलैंड के लिए उड़ान भरी। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका कार्यक्रम तय समय के अनुसार जारी रहेगा।

🌍 WEF में ट्रंप की पहली प्रत्यक्ष उपस्थिति

दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यह वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप की पहली प्रत्यक्ष भागीदारी है। दावोस रवाना होने से पहले ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कम गैस कीमतों और मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र किया।

🛩️ पुराने एयर फोर्स वन और नया बोइंग जेट

फिलहाल एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल हो रहे दोनों विमान करीब 40 साल पुराने हैं। बोइंग इनके नए संस्करण तैयार कर रहा है, लेकिन यह परियोजना लगातार देरी का सामना कर रही है।

एयर फोर्स वन विमानों में

रेडिएशन शील्डिंग

एंटी-मिसाइल सिस्टम

अत्याधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम

जैसी उच्च स्तरीय सुरक्षा सुविधाएं होती हैं, ताकि राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी हिस्से से सैन्य संपर्क बनाए रख सकें।

गौरतलब है कि पिछले साल कतर के शाही परिवार ने ट्रंप को एक लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट उपहार में दिया था। इसे एयर फोर्स वन बेड़े में शामिल करने के लिए फिलहाल सुरक्षा मानकों के अनुरूप बदला जा रहा है। इस पर मजाक करते हुए कैरोलिन लीविट ने कहा कि “इस समय कतर का जेट काफी बेहतर विकल्प लग रहा है।”

🏔️ WEF 2026: वैश्विक चुनौतियों पर मंथन

डब्ल्यूईएफ की 56वीं वार्षिक बैठक 19 से 23 जनवरी 2026 तक दावोस में हो रही है। इसमें 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 वैश्विक नेता भाग ले रहे हैं। बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और तेज़ तकनीकी बदलावों से गुजर रही है।

Continue Reading

World

Donald Trump के एयर फोर्स वन में तकनीकी खराबी, दावोस यात्रा के बीच विमान की इमरजेंसी लैंडिंग

Published

on

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान ‘एयर फोर्स वन’ में उड़ान के दौरान आई तकनीकी खराबी के कारण उसे बीच रास्ते से ही वापस वॉशिंगटन लौटना पड़ा। व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयान के अनुसार, टेकऑफ के कुछ देर बाद चालक दल को विमान में एक मामूली ‘इलेक्ट्रिकल फॉल्ट’ का पता चला, जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर विमान को अटलांटिक महासागर के ऊपर से यू-टर्न लेने का निर्देश दिया गया।

दूसरे विमान से दावोस के लिए भरी उड़ान

फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड के पास से मुड़ने के बाद विमान सुबह करीब 9:30 बजे मैरीलैंड में सुरक्षित लैंड हुआ। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के दावोस कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं हुआ। लैंडिंग के लगभग एक घंटे बाद वह दूसरे स्टैंडबाय विमान (बोइंग 747-200B) से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए।

पुराने विमानों पर उठ रहे सवाल

ट्रंप वर्तमान में जिन दो बोइंग 747-200B विमानों का उपयोग कर रहे हैं, वे लगभग 40 साल पुराने हैं। बोइंग नए विमानों पर काम कर रहा है, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी के कारण पुराने बेड़े का ही इस्तेमाल जारी है। गौरतलब है कि कतर द्वारा दिए गए लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट को भी सुरक्षा मानकों के आधार पर अपग्रेड किया जा रहा है।

दावोस में ‘ग्रीनलैंड पॉलिसी’ पर नजर

ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में शामिल होने के लिए दावोस जा रहे हैं, जहां वे बुधवार शाम अपनी महत्वाकांक्षी ‘ग्रीनलैंड पॉलिसी’ पर भाषण देंगे। इसके अलावा, वह एक विशेष उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी भी करेंगे, जिसमें भारत के 7 दिग्गज उद्योगपतियों को आमंत्रित किया गया है।

Continue Reading

World

H-1B Visa के लिए अब Social Media Accounts Public करना होगा, 15 December से New Rule लागू

Published

on

अमेरिका में H-1B वीजा लेने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों में सख्ती करते हुए आदेश दिए हैं कि अब आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी अधिकारी आपके सोशल मीडिया प्रोफाइल, पोस्ट और लाइक्स देख सकेंगे। अगर कोई भी गतिविधि अमेरिकी हितों के खिलाफ पाई गई, तो H-1B वीजा नहीं मिलेगा।

इस नियम का असर H-1B के आश्रितों यानी पत्नी, बच्चों और पेरेंट्स के लिए दिए जाने वाले H-4 वीजा पर भी पड़ेगा। यानी उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी पब्लिक करना जरूरी होगा। यह पहला मौका है जब H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच अनिवार्य की गई है। नए नियम 15 दिसंबर 2025 से लागू होंगे।

इससे पहले अगस्त 2025 से ही स्टडी वीजा (F-1, M-1, J-1) और विजिटर वीजा (B-1, B-2) के लिए भी सोशल मीडिया पब्लिक करना अनिवार्य कर दिया गया है।

H-1B वीजा क्या है?

H-1B वीजा हाई स्किल्ड प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को अमेरिका में काम करने के लिए मिलता है। यह वीजा पहली बार 1990 में अमेरिकी कांग्रेस ने शुरू किया था।

  • भारतीयों पर असर: हर साल जारी किए जाने वाले H-1B वीजा में से लगभग 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलता है, इसलिए नया नियम सबसे ज्यादा भारतीयों को प्रभावित करेगा।
  • वीज़ा फीस: पहले इसकी फीस लगभग $9,000 थी। सितंबर 2025 में इसे बढ़ाकर लगभग ₹90 लाख कर दिया गया।
  • अवधि: H-1B वीजा 3 साल के लिए जारी होता है और दो बार बढ़ाया जा सकता है, यानी कुल 6 साल। इसके बाद आवेदक ग्रीन कार्ड यानी अमेरिका की स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है।

ट्रम्प का रवैया H-1B वीजा पर

ट्रम्प का H-1B वीजा पर रवैया कभी हां और कभी ना वाला रहा है।

  • 2016 में उन्होंने कहा था कि यह वीजा अमेरिकी हितों के खिलाफ है।
  • 2019 में वीजा का एक्सटेंशन रोक दिया गया था।
  • लेकिन हाल ही में उन्होंने कहा कि अमेरिका को टैलेंट की जरूरत है।

नए वीजा कार्ड्स

H-1B वीजा में बदलाव के अलावा ट्रम्प ने तीन नए वीजा कार्ड भी लॉन्च किए हैं:

  1. Trump Gold Card – कीमत ₹8.8 करोड़, यह कार्ड धारक को अमेरिका में हमेशा रहने का अधिकार देगा।
  2. Trump Platinum Card
  3. Corporate Gold Card

भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और H-1B

भारत हर साल लाखों इंजीनियर और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट तैयार करता है। ये प्रोफेशनल्स अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं।

अब बढ़ी हुई फीस और सोशल मीडिया नियम की वजह से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट के देशों की तरफ रुख कर सकता है।

15 दिसंबर से H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया जांच अनिवार्य हो जाएगा। भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। वीजा की बढ़ी हुई फीस और नई पॉलिसी को देखते हुए अब अमेरिका में काम करने के विकल्प और चुनौतियां बदलने वाली हैं।

Continue Reading

Trending