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Punjab में Industrial Revolution की उड़ान! ₹438 Crore का Investment, 1,250 युवाओं को रोजगार का तोहफा
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों का असर अब साफ़ नज़र आने लगा है। राज्य में निवेश की रफ्तार तेज हो रही है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है — लुधियाना की मशहूर कंपनी हैप्पी फोर्जिंग्स लिमिटेड (Happy Forgings Limited – HFL) का ₹438 करोड़ का बड़ा ग्रीनफील्ड निवेश।
इस निवेश से न केवल 1,250 से ज्यादा नौकरियाँ पैदा होंगी बल्कि यह पंजाब को देश के ऑटो पार्ट्स उद्योग के सबसे बड़े हब की दिशा में आगे ले जाएगा।
हैप्पी फोर्जिंग्स: साइकिल के पैडल से लेकर हाई-टेक ऑटो पार्ट्स तक
हैप्पी फोर्जिंग्स लिमिटेड की शुरुआत 1979 में परितोष कुमार गर्ग ने की थी। उस समय कंपनी साइकिल के पैडल बनाती थी, लेकिन अब यह भारत की चौथी सबसे बड़ी फोर्जिंग कंपनी बन चुकी है।
इसका मुख्यालय लुधियाना के कांगनवाल रोड पर है, जहाँ कंपनी फोर्जिंग, मशीनिंग, जॉइनिंग, हीट ट्रीटमेंट और क्वालिटी टेस्टिंग – सब कुछ एक ही जगह करती है।
कंपनी गाड़ियों, ट्रैक्टरों, रेलवे और इंडस्ट्रियल मशीनों के लिए क्रैंकशाफ्ट, स्टीयरिंग नकल, ट्रांसमिशन शाफ्ट, क्राउन व्हील, पिनियन और फ्रंट एक्सल बीम जैसे अहम पार्ट्स बनाती है। इसके ग्राहक अशोक लेलैंड, आइशर, जेसीबी इंडिया और महिंद्रा जैसी जानी-मानी कंपनियाँ हैं।
₹438 करोड़ का नया कारखाना – युवाओं के लिए सुनहरा मौका
HFL लुधियाना में ₹438 करोड़ की लागत से नया आधुनिक कारखाना बना रही है।
यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है यानी बिलकुल नया सेटअप, जिसमें अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएँगी — जैसे CAD/CAM टूल्स, प्लाज्मा/लेजर कटिंग और CNC मशीनिंग।
इस प्लांट में हाई-पावर डीज़ल इंजनों के क्रैंकशाफ्ट बनाए जाएँगे, जिसमें HFL भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता है।
यह प्रोजेक्ट 2019 में शुरू हुआ था और 2025–2026 तक पूरा होगा।
इससे लुधियाना के युवाओं को इंजीनियरिंग, मशीनिंग और क्वालिटी चेक जैसे क्षेत्रों में नौकरियाँ मिलेंगी, साथ ही लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सर्विसेज जैसे सेक्टर में भी काम के अवसर बढ़ेंगे।
भविष्य की बड़ी योजना – ₹1,000 करोड़ का चरणबद्ध निवेश
सितंबर 2025 में उद्योग मंत्री श्री संजीव अरोड़ा ने बताया था कि HFL आने वाले समय में ₹1,000 करोड़ का और निवेश करेगी।
इस निवेश से 2,000 से ज्यादा नई नौकरियाँ पैदा होंगी।
इसका ₹650 करोड़ वाला हिस्सा भारी और इंडस्ट्रियल पार्ट्स जैसे बड़े क्रैंकशाफ्ट, गियर, एक्सल, ऑयल और गैस वाल्व बनाने में खर्च होगा। ये पार्ट्स बिजली, रक्षा, खनन, पवन ऊर्जा और एयरोस्पेस सेक्टर में इस्तेमाल होंगे।
कंपनी का लक्ष्य है कि 2027 से विदेशी कंपनियों के लिए हर साल ₹95 करोड़ के पार्ट्स की सप्लाई शुरू की जाए।
HFL की मौजूदा स्थिति
- कुल कर्मचारी: करीब 4,000
- मौजूदा निवेश: ₹1,500 करोड़
- फोर्जिंग क्षमता: 1,07,000 टन
- मशीनिंग क्षमता: 46,100 टन
- उपयोग दर: 63% और 79%
- पिछले 5 सालों में 20% की रेवेन्यू ग्रोथ
- कर्मचारियों की रेटिंग: 3.6/5, जिसमें वर्क-लाइफ बैलेंस अच्छा बताया गया है
कंपनी पहले से अमेरिका और यूरोप में निर्यात करती है और अब USFDA जैसी क्वालिटी सर्टिफिकेशन के ज़रिए अपने एक्सपोर्ट को और बढ़ाने की तैयारी में है।
लुधियाना – पंजाब का औद्योगिक दिल
कभी सिर्फ “कृषि राज्य” कहे जाने वाले पंजाब की अब एक नई पहचान बन रही है — इंडस्ट्रियल हब के रूप में।
राज्य के उद्योगों में ऑटो पार्ट्स का योगदान 15% तक पहुँच चुका है।
लुधियाना, जिसे “भारत का मैनचेस्टर” कहा जाता है, अब ऑटो सेक्टर का गढ़ बन गया है।
यहाँ 500 से ज्यादा ऑटो सप्लाई यूनिट्स हैं और हीरो मोटोकॉर्प जैसे बड़े नामों के साथ-साथ सैकड़ों छोटे-मझोले उद्योग (MSMEs) भी काम कर रहे हैं।
2022 से अब तक पंजाब ने ₹50,000 करोड़ से ज्यादा निवेश आकर्षित किया है, जिसमें ऑटो सेक्टर का हिस्सा सबसे बड़ा है।
HFL का यह ₹438 करोड़ का प्रोजेक्ट और आने वाला ₹1,000 करोड़ का निवेश पंजाब को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार की पहलें – कारोबार आसान, निवेश आसान
पंजाब सरकार ने उद्योगों के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
- जमीन और डेवलपमेंट चार्ज में छूट
- FastTrack Punjab Portal – एक ही जगह पर सारे परमिशन
- MSME रिसर्च फंड – ₹200 करोड़
- 2025–26 के बजट में ऑटो और EV टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग के लिए ₹10 करोड़
- लुधियाना के फोकल पॉइंट और कांगनवाल जैसे इलाकों में बिजली, सड़क (NH-44), रेल और आईटीआई कॉलेज जैसी मजबूत सुविधाएँ
इन सुविधाओं के चलते पंजाब आज देश का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बनता जा रहा है।
कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं
हालांकि किसान आंदोलन और बिजली की कमी जैसी दिक्कतें अभी भी सामने आती हैं,
लेकिन फिर भी HFL जैसा बड़ा निवेश यह साबित करता है कि निवेशक पंजाब पर भरोसा कर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का बढ़ता बाजार पंजाब के लिए नया मौका है,
और HFL इस क्षेत्र में हल्के फोर्जिंग पार्ट्स बनाकर नई दिशा में कदम रख रही है।
सरकारी बयान
उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा —
“पंजाब अब सिर्फ खेती का गढ़ नहीं, बल्कि कारखानों का नया सितारा है।
हैप्पी फोर्जिंग्स का यह निवेश पंजाब को हाई-टेक इंडस्ट्रीज का केंद्र बना देगा।
इससे युवाओं को इंजीनियरिंग और मशीनिंग जैसे स्किल्स सीखने का मौका मिलेगा
और छोटे उद्योगों को भी फायदा पहुँचेगा।”
पंजाब सरकार ने भी कहा —
“हमारा मकसद है युवाओं को रोजगार देना।
हैप्पी फोर्जिंग्स जैसी बड़ी कंपनी का भरोसा दिखाता है कि पंजाब सही रास्ते पर है।
निवेशकों को हर सरकारी सुविधा समय पर दी जाएगी।”
आने वाला बड़ा इवेंट – प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट 2026
13 से 15 मार्च 2026
मोहाली
लक्ष्य: ₹20,000 करोड़ का नया निवेश
फोकस: नई तकनीक और हरी ऊर्जा (Green Energy)
यह समिट पंजाब में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने का काम करेगी।
पंजाब अब सिर्फ खेतों का राज्य नहीं रहा, बल्कि यह अब कारखानों और टेक्नोलॉजी का नया हब बन रहा है।
Happy Forgings Limited का यह बड़ा निवेश पंजाब की औद्योगिक ताकत को और मज़बूत करेगा,
युवाओं को नए रोजगार देगा और राज्य को “मेक इन इंडिया” मिशन में अहम स्थान दिलाएगा।
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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।
अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।
अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।
पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।
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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”
पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”
सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”
पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”
यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।
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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।
यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।
मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।
इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।
हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।
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