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हॉकी वर्ल्ड कप में आज भारत-पाकिस्तान की टक्कर, अगले दौर के लिए मुकाबला बेहद अहम
हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में आज भारत और पाकिस्तान की टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी। दोनों पड़ोसी देशों के बीच होने वाला यह मुकाबला नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वेगेनर हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा। पूल-डी का यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके नतीजे से अगले दौर में पहुंचने की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत वेल्स को 3-1 से हराकर की थी, लेकिन दूसरे मुकाबले में उसे इंग्लैंड के हाथों 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। दो मैचों के बाद भारत के खाते में 3 अंक हैं और टीम पूल-डी में दूसरे स्थान पर है। वहीं पाकिस्तान के पास 1 अंक है। पाकिस्तान ने वेल्स के साथ ड्रॉ खेला था, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ उसे हार मिली थी।
इस मुकाबले की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारत को अगले दौर में पहुंचने के लिए कम से कम ड्रॉ की जरूरत है, जबकि पाकिस्तान के लिए जीत बेहद जरूरी है। पाकिस्तान अगर मुकाबला हारता या ड्रॉ करता है तो उसका विश्व कप अभियान ग्रुप स्टेज में ही खत्म हो जाएगा।
53 साल बाद फिर उसी मैदान पर भिड़ेंगे
भारत और पाकिस्तान की हॉकी प्रतिद्वंद्विता का इतिहास काफी पुराना और रोमांचक रहा है। 1973 के विश्व कप सेमीफाइनल में भारत ने इसी एम्स्टेलवीन में पाकिस्तान को 1-0 से हराया था। इसके दो साल बाद 1975 के विश्व कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर अपना एकमात्र पुरुष हॉकी विश्व कप खिताब जीता था।
अब लंबे अंतराल के बाद दोनों टीमें फिर एम्स्टेलवीन में आमने-सामने हैं। विश्व कप इतिहास में भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक पांच मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें भारत ने तीन और पाकिस्तान ने दो मैच जीते हैं।
भारतीय टीम की कमान कप्तान हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। टीम को उनके पेनल्टी कॉर्नर से गोल की उम्मीद होगी। इसके अलावा अभिषेक, दिलप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, जुगराज सिंह और सुखजीत सिंह जैसे खिलाड़ियों पर भी नजरें रहेंगी।
मुकाबला आज 19 अगस्त को शाम 6:30 बजे भारतीय समयानुसार शुरू होगा।
अब सबकी नजरें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर हैं कि क्या भारत जीत के साथ अगले दौर में जगह पक्की करेगा या पाकिस्तान अपनी विश्व कप उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए बड़ा उलटफेर करेगा।
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झारखंड में छात्रों के आंदोलन का असर, सरकार ने JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाएं रद्द कीं
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पिछले 24 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बड़ी सफलता मिली है। छात्रों के लगातार विरोध और बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने TDPL द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है।
दरअसल, JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ी संख्या में छात्र रांची के जैपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे थे। छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे थे।
छात्रों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट बैठक बुलाई। बैठक के बाद सरकार ने JSSC-CGL समेत संबंधित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया। सरकार के इस फैसले को छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद मिली बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य की परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए जाएंगे। इसके लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक सुधार समिति गठित करने का भी फैसला लिया गया है।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भर्ती परीक्षाओं को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया में नियमों को सख्त करने के साथ-साथ SOP का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो।
हालांकि, परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्रों की CBI जांच की मांग अभी भी जारी है। छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथित अनियमितताओं की पूरी जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
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रसोई गैस की e-KYC को लेकर बड़ा अपडेट, अब घर बैठे होगी KYC
रसोई गैस ग्राहकों के लिए e-KYC को लेकर अहम खबर सामने आई है। जिन ग्राहकों ने अभी तक अपनी e-KYC पूरी नहीं करवाई है, उन तक पहुंचने के लिए अब गैस एजेंसियों की ओर से घर-घर अभियान चलाया जा रहा है।
तेल कंपनियों के निर्देश के बाद गैस एजेंसियों ने e-KYC नहीं करवाने वाले ग्राहकों की सूची तैयार की है। यह सूची गैस डिलीवरी करने वाले हॉकरों को दी जा रही है। हॉकर ग्राहकों के घर पहुंचकर उनकी e-KYC की प्रक्रिया पूरी करवा रहे हैं।
e-KYC के दौरान ग्राहक का आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वास्तविक LPG ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित करना, फर्जी कनेक्शनों को हटाना और सब्सिडी का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना है।
जानकारी के मुताबिक, जिन ग्राहकों की e-KYC पूरी नहीं होगी, उनकी सब्सिडी प्रभावित हो सकती है। इसलिए LPG ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते अपनी KYC पूरी करवा लें।
अगर आप LPG ग्राहक हैं और अभी तक e-KYC नहीं करवाई है, तो अपनी गैस एजेंसी से संपर्क करें या अधिकृत हॉकर के माध्यम से घर बैठे e-KYC की प्रक्रिया पूरी करवाएं।
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मैं दिमाग़ी नक्सल हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस पर गर्व है- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की ओर से देश में सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को ‘दिमागी नक्सल’ कहने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल खुद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि हां, मैं दिमागी नक्सल हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस पर गर्व है। इस देश में जो सवाल उठाए, सड़ी-गली व्यवस्था बदला चाहे और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखे, प्रधानमंत्री के हिसाब से वह दिमागी नक्सल है। आज अगर भगत सिंह और बाबा साहब अंबेडकर जिंदा होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी नहीं छोड़ते और उनको भी दिमागी नक्सल बोलते। उन्होंने कहा कि अगर देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा या बोलेगा, तो मैं अपनी पूरी ताकत के साथ उसका मुकाबला करेगा।
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सल वह है, जो इस देश में प्रश्न उठाने की हिम्मत करता है। जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, जो अच्छे सरकारी स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी, सीवर, ड्रेनेज और अच्छी व्यवस्था चाहता है, जो भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है, वह प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सल है। जो प्रधानमंत्री और भाजपा से डरता नहीं है और एक विकसित भारत का सपना देखता है, वह प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सल है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज अगर भगत सिंह जिंदा होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी दिमागी नक्सल बोलते। आज अगर बाबा साहब अंबेडकर जिंदा होते, जिन्होंने सबकी बराबरी के लिए लड़ाई लड़ी थी, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी नहीं छोड़ते और उन्हें भी दिमागी नक्सल बोलते। मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि मैं अरविंद केजरीवाल उनके हिसाब से दिमागी नक्सल हूं क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस बात का गर्व है। अगर देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा या बोलेगा, तो केजरीवाल अपनी पूरी ताकत के साथ उसका मुकाबला करेगा।
उधर, “आप” के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी इस वक्त नौजवानों और जेन-जी के आंदोलन से बहुत परेशान हैं और अब जेन-अल्फा भी सड़कों पर आ गए हैं। वो कह रहे हैं कि पेपर लीक बंद करो, हमारे स्कूल ठीक करो और हमारी जिंदगी में सुधार लाओ। प्रधानमंत्री जी इतने परेशान हैं कि कभी रात में 12 बजे उठकर रील बनाने लगते हैं और कभी इन्हीं नौजवानों को दिमागी नक्सल कहते हैं।
संजय सिंह ने पूछा कि प्रधानमंत्री जी आप दिमागी नक्सल किसको कहते हैं? वो नौजवान जो कह रहे हैं कि देश में पेपर लीक बंद करो और हमें रोजगार दो? वो छोटे-छोटे बच्चे जो सड़कों पर उतर कर कह रहे हैं कि हमारे स्कूल की छत टूट जा रही है, बच्चों के लिए बैठने का कमरा नहीं है, मिड-डे मील में नमक-रोटी खाने को मिलती है और हमारे खाने में कीड़े मिलते हैं, इसे ठीक कर दिया जाए। क्या प्रधानमंत्री जी उनको दिमागी नक्सल कहकर संबोधित कर रहे हैं? प्रधानमंत्री जी से यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि जनता, नौजवान, छोटे-छोटे बच्चे, किसान और इस देश की माताएं-बहनें अपने लिए आवाज उठाना कैसे शुरू कर दिए।
संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नफरतों से भरे हुए व्यक्ति हैं। वह इन चीजों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि उनके खिलाफ कैसे छोटे-छोटे बच्चे और नौजवान सड़कों पर निकल रहे हैं, इसलिए उनको उन्होंने दिमागी नक्सल कहकर संबोधित किया। मैं नौजवानों से और खासतौर से उन नौजवानों से कहना चाहता हूं जो आज स्कूल ठीक करो अभियान चला रहे हैं कि सीजेपी के लोग डरना नहीं, झुकना नहीं, लड़ते रहना है और आगे बढ़ते रहना है।
संजय सिंह ने कहा कि असली दिमागी नक्सल भाजपा के वो लोग हैं जिन्होंने अब्दुल के पिता की हत्या की। दिमागी नक्सल वो लोग हैं जिन्होंने राजस्थान जाकर छोटे-छोटे बच्चों व सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। दिमागी नक्सल वो लोग हैं जो स्कूल की बात कहने पर मुकदमा लिखवाते हैं। इसलिए असल में दिमागी नक्सल झगड़ा कराने वाली भारतीय झगड़ा पार्टी है। दिमागी नक्सल इस देश का नौजवान नहीं है, वह तो अपने हक की आवाज उठा रहा है और हमेशा उठाता रहेगा।
संजय सिंह ने एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के नौजवानों को ‘दिमागी नक्सल’ कहा। क्या पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली जेन-जी ‘दिमागी नक्सल’ है? क्या अपने स्कूलों को ठीक करने की मांग करने वाले छोटे-छोटे बच्चे ‘दिमागी नक्सल’ हैं? या फिर लड़ाई कराने वाली ‘भारतीय झगड़ा पार्टी’ दिमागी नक्सल है?
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