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पंजाब के हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये के टर्नओवर छिपाने का खुलासा, डेटा-आधारित जांच के माध्यम से कार्रवाई तेज: हरपाल सिंह चीमा

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पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी और कर मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां पंजाब के हॉस्पिटैलिटी (खाद्य एवं पेय व्यवसाय) क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये के टर्नओवर छिपाने के एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए ढाबों, खाने-पीने के स्थानों, रेस्टोरेंट्स और फास्ट-फूड आउटलेट्स में गहरी जड़ें जमा चुकी और व्यवस्थित तरीके से आय कम दिखाने की प्रवृत्ति का पर्दाफाश किया। वित्त मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने सार्वजनिक राजस्व की सुरक्षा के लिए तकनीक-आधारित सख्त कार्रवाई शुरू की, जिसके तहत 882 संस्थानों को जांच के घेरे में लिया गया और अब तक 2.02 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और अधिक डेटा के विश्लेषण से टर्नओवर छिपाने का यह मामला लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

इस बात का उल्लेख करते हुए कि मोहाली, जालंधर और लुधियाना जैसे प्रमुख शहरी केंद्र टैक्स चोरी के मुख्य गढ़ के रूप में उभरे हैं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जोर देकर कहा कि अधिक नकदी और हाइब्रिड भुगतान (नकद और डिजिटल दोनों) वाले क्षेत्र इस धोखाधड़ी के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स, टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट और स्टेट इंटेलिजेंस एवं प्रिवेंटिव यूनिट (सिपू) से प्राप्त जानकारी तथा ‘बिल लाओ, इनाम पाओ’ योजना की सफलता के आधार पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य के राजस्व की सुरक्षा के लिए तकनीक का पूरा उपयोग सुनिश्चित करते हुए हर उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “होटल, ढाबे, खाने-पीने के स्थान, बेकरी, मिठाई की दुकानें, रेस्टोरेंट्स, कैटरिंग सेवाएं और ऐसे अन्य संस्थानों को कवर करने वाले एक व्यापक, राज्य स्तरीय और डेटा-आधारित अभियान के माध्यम से हमने वित्त वर्ष 2025-26 से संबंधित कुल 882 संस्थानों की पहचान की है।”

वित्त मंत्री ने आगे कहा, “अधिक विश्लेषण और वित्त वर्ष 2023-24 तथा 2024-25 से संबंधित डेटा को शामिल करने के साथ टर्नओवर छिपाने का कुल आकार लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।”

चल रही जांच के परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “अब तक की गई प्रारंभिक जांच में 239 मामलों की जांच की गई है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर छिपाने का पता चला है।” उन्होंने आगे कहा, “इसमें 5 प्रतिशत की दर से 2.54 करोड़ रुपये का टैक्स शामिल है और हमारे विभाग ने अब तक 2.02 करोड़ रुपये की वसूली सुनिश्चित की है, जबकि शेष वसूली की प्रक्रिया जारी है।”

इन अनियमितताओं के स्तर को उजागर करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमने 3 करदाताओं द्वारा 2 करोड़ रुपये से अधिक, 6 द्वारा 1 करोड़ रुपये से अधिक, 18 द्वारा 50 लाख रुपये से अधिक, 26 करदाताओं द्वारा 25 लाख रुपये से अधिक और 91 करदाताओं द्वारा 5 लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर छिपाने का पता लगाया है।”

क्षेत्र-विशेष रुझानों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “हमारे आगे के विश्लेषण से यह सामने आया है कि अधिक नकदी और हाइब्रिड भुगतान वाले क्षेत्रों में व्यवस्थित रूप से आय कम दिखाने का पैटर्न मौजूद है।” उन्होंने आगे कहा, “आय छिपाने में ढाबों का हिस्सा लगभग 10 करोड़ रुपये है, इसके बाद छोटे खाने-पीने के स्थानों, कॉफी और चाय बार का हिस्सा लगभग 8 करोड़ रुपये और पिज्जा एवं फास्ट-फूड आउटलेट्स का हिस्सा 6 करोड़ रुपये से अधिक है।”

जिलावार विवरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “मोहाली में सबसे अधिक 8.16 करोड़ रुपये के टर्नओवर छिपाने का मामला सामने आया है, इसके बाद जालंधर में 6.72 करोड़ रुपये और लुधियाना में 5.48 करोड़ रुपये सामने आए हैं, जो कि पकड़ी गई टैक्स चोरी में मुख्य योगदान देने वाले जिले हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पटियाला और अमृतसर में तुलनात्मक रूप से कम अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें क्रमशः 3.83 करोड़ रुपये और 0.99 करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई है।

इस कार्रवाई के पीछे अपनाई गई कार्यप्रणाली की व्याख्या करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “स्टेट इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंटिव यूनिट द्वारा व्यावसायिक डेटा की गहन जांच के दौरान यह पाया गया कि ऐसे संस्थानों की बड़ी संख्या ऑनलाइन बिलिंग एप्लिकेशन का उपयोग कर रही थी।” उन्होंने आगे कहा, “मैं टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट, स्टेट इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंटिव यूनिट तथा हमारी ‘बिल लाओ, इनाम पाओ’ योजना की शानदार सफलता को इस बड़े स्तर की टैक्स चोरी पकड़ने का पूरा श्रेय देता हूं।”

उन्होंने आगे विस्तार से कहा, “जोखिम मानकों, डेटा एनालिटिक्स और जीएसटी रिटर्न के साथ तुलनात्मक विश्लेषण के आधार पर हमने टर्नओवर छिपाने की संभावित घटनाओं की पहचान की। हमने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को लेन-देन का विस्तृत डेटा प्रदान करने के निर्देश दिए, जिसका उपयोग अब फील्ड टीमें जमीनी जांच और रिटर्न के मिलान के लिए कर रही हैं।”

संतुलित कार्रवाई पर जोर देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह ध्यान देने योग्य है कि 52 संस्थानों में कोई अनियमितता नहीं पाई गई, जो डेटा-आधारित चयन पर आधारित संतुलित प्रवर्तन और जांच को दर्शाता है।”

आगे की कार्रवाई की रूपरेखा बताते हुए उन्होंने कहा, “शेष मामलों की सक्रिय रूप से जांच और गहन पड़ताल की जा रही है और उम्मीद है कि जांच एवं वसूली की पूरी प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।” उन्होंने आगे कहा, “जांच को और मजबूत करने के लिए विभाग यूपीआई लेन-देन और अन्य डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया में है, जिससे रिपोर्ट किए गए टर्नओवर और वास्तविक प्राप्तियों के बीच गहन मिलान संभव होगा और टैक्स चोरी पकड़ने की सटीकता बढ़ेगी।”

उल्लंघन करने वालों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भगवंत मान सरकार कर अनुपालन सुनिश्चित करने और राज्य के राजस्व की सुरक्षा के लिए तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और समन्वित फील्ड प्रवर्तन का पूरा उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

 उन्होंने जोर देकर कहा, “कर चोरी के सभी मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि कर नियमों का पालन करने वाले करदाताओं को सुविधाएं मिलती रहेंगी।”

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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