Health
Health- हर समय हाथों और कंधों में दर्द होना किस बीमारी का लक्षण है?
हर समय हाथों और कंधों में दर्द होना किस बीमारी का लक्षण है?
लगातार हाथों और कंधों में दर्द होना कई बार सामान्य थकान या रोजमर्रा की गतिविधियों का असर हो सकता है। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, गलत तरीके से बैठना, भारी सामान उठाना या अचानक ज्यादा शारीरिक मेहनत करना इसके आम कारण माने जाते हैं।
लेकिन जब यह दर्द बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। यह किसी अंदरूनी बीमारी की ओर भी इशारा कर सकता है।
कई लोग ऐसे दर्द को नजरअंदाज कर पेन किलर दवाइयों से राहत पाने की कोशिश करते हैं, जिससे असली कारण छिपा रह जाता है और समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ता है दर्द?
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में कमजोरी आना सामान्य है, जिससे हाथों और कंधों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा नसों, हड्डियों या सूजन से जुड़ी बीमारियां भी लगातार दर्द का कारण बन सकती हैं।
ऐसे में जरूरी है कि दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय उसके असली कारण को समझा जाए, ताकि समय पर सही इलाज मिल सके।
हाथों और कंधों में लगातार दर्द के संभावित कारण
एम्स दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के डॉ. भावुक गर्ग के अनुसार, हाथों और कंधों में लगातार दर्द कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है:
1. सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
इस स्थिति में गर्दन की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द गर्दन से होते हुए कंधों और हाथों तक फैल सकता है।
2. आर्थराइटिस
जोड़ों में सूजन और जकड़न के कारण लगातार दर्द बना रहता है, खासकर सुबह के समय।
3. फ्रोजन शोल्डर
इसमें कंधे की मूवमेंट सीमित हो जाती है और हल्की सी हरकत पर भी तेज दर्द महसूस होता है।
4. पिन्च्ड नर्व (नस दबना)
नसों पर दबाव पड़ने से दर्द के साथ झनझनाहट और सुन्नपन महसूस हो सकता है।
5. हार्ट से जुड़ी समस्या
कभी-कभी हार्ट से जुड़ी परेशानी में बाएं हाथ और कंधे में दर्द हो सकता है। इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
हाथों और कंधों के दर्द के साथ दिखने वाले अन्य लक्षण
हाथों और कंधों के दर्द के साथ ये लक्षण भी नजर आ सकते हैं:
- गर्दन या पीठ में जकड़न
- हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट
- कमजोरी महसूस होना
- सूजन या मूवमेंट में परेशानी
- सिरदर्द, चक्कर या अत्यधिक थकान
अगर समस्या नसों से जुड़ी हो, तो उंगलियों में सनसनाहट बढ़ सकती है।
सूजन वाली बीमारियों में जोड़ों का लाल या गर्म होना भी देखा जा सकता है।
डॉक्टर की सलाह कब जरूरी है?
अगर हाथों और कंधों का दर्द:
- कुछ दिनों में ठीक न हो
- लगातार बढ़ता जाए
- रोजमर्रा के कामों में बाधा बनने लगे
तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
दर्द के साथ अगर सुन्नपन, कमजोरी, सूजन या सीने में दर्द महसूस हो, तो बिना देर किए जांच कराना बेहद जरूरी है।
पेन किलर पर निर्भर रहना क्यों है खतरनाक?
बार-बार पेन किलर दवाइयों का इस्तेमाल करने से असली बीमारी छिप जाती है और समस्या और गंभीर हो सकती है।
समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से बीमारी की सही पहचान होती है और भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से बचा जा सकता है।
Health
Bhagwant Mann सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत गंभीर हालत में जन्मी नवजात बच्ची के स्वस्थ होने से डॉक्टरों की चिंता उम्मीद में बदली
नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है। बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।
सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई। उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है। जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था। ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया। बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे। मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी—हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।
इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा। नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया। सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।
डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है।” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ।
सांस सामान्य होने लगी। प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं। जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है। थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।”
इस मामले में कोई देरी नहीं हुई। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।
17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है। हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है। नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।
एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया। उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।”
रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।
मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है। यह बहुत बड़ी बात है।”
पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।
यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है।
Blog
Sonia Gandhi की तबीयत बिगड़ी, दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती — ICU में डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है। उन्हें मंगलवार रात करीब 11:15 बजे दिल्ली के प्रसिद्ध Sir Ganga Ram Hospital में भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार, उन्हें छाती में संक्रमण (चेस्ट इंफेक्शन) की शिकायत थी, जिसके बाद परिवार और डॉक्टरों की सलाह पर तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, भर्ती के तुरंत बाद उनका प्राथमिक मेडिकल चेकअप किया गया, जिसके बाद एहतियातन उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में शिफ्ट कर दिया गया। फिलहाल विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत की लगातार निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए उन्हें निगरानी में रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, उनकी तबीयत को लेकर अस्पताल प्रशासन जल्द ही एक विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी कर सकता है, जिसमें उनकी सेहत की ताजा स्थिति, जांच रिपोर्ट और आगे के इलाज की जानकारी दी जाएगी। इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों में चिंता की लहर दौड़ गई है। देशभर से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामनाएं की जा रही हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सोनिया गांधी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। इससे पहले 19 जून को भी उन्हें पेट से जुड़ी गंभीर समस्या के कारण इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें 15 जून को पेट में संक्रमण की शिकायत के बाद एडमिट किया गया था और करीब चार दिनों तक लगातार निगरानी में रखने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी थी।
सोनिया गांधी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं और समय-समय पर उनका इलाज चलता रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए किसी भी संक्रमण को गंभीरता से लेना जरूरी होता है, इसलिए इस बार भी पूरी सावधानी बरती जा रही है।
फिलहाल देश की नजरें उनके स्वास्थ्य अपडेट पर टिकी हुई हैं और हर कोई उनके जल्द स्वस्थ होकर सार्वजनिक जीवन में वापसी की उम्मीद कर रहा है।
Blog
Punjab की सबसे कम उम्र की लाभार्थी: 1 साल की बच्ची को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मिला जीवनरक्षक इलाज!
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत नवजात और छोटे बच्चों के इलाज के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर स्थिति में मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।
श्री मुक्तसर साहिब में 1 साल की बच्ची ख्वाहिश को निमोनिया होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसे तत्काल इलाज की जरूरत थी। पहले ऐसे मामलों में परिवारों को इलाज शुरू होने से पहले पैसे जुटाने, दस्तावेज पूरे करने और मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया है।
बच्ची का स्वास्थ्य कार्ड पहले से बना होने के कारण दीप अस्पताल में डॉ. मोनिका गर्ग की देखरेख में बिना किसी अग्रिम भुगतान के तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया। परिवार को न तो पैसों की चिंता करनी पड़ी और न ही किसी तरह की औपचारिकता में समय गंवाना पड़ा। समय पर इलाज मिलने से बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
इसी तरह के कई मामले संगरूर और मानसा जिलों से भी सामने आए हैं, जहां कम वजन और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजात बच्चों को भी बिना किसी आर्थिक बाधा के इलाज मिल रहा है। यह दर्शाता है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो गई है।
योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी मरीज का इलाज पैसे या प्रक्रिया की वजह से न रुके। खासकर बच्चों के मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है और यह योजना उस जोखिम को खत्म करती है।
यह योजना प्रति परिवार सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है, जिसके तहत सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है। अब तक 26 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं और मरीज 900 से ज्यादा अस्पतालों में 2300 से अधिक मेडिकल पैकेजों के तहत इलाज करवा रहे हैं।
योजना के तहत बढ़ते बाल चिकित्सा मामलों से यह साफ है कि पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत हो रहा है, जहां बिना किसी आर्थिक बोझ के तुरंत इलाज संभव हो रहा है। सरकार लोगों को लगातार प्रेरित कर रही है कि वे इस योजना का लाभ लेने के लिए स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज प्राप्त करें।
-
Religious2 years agoकब है तुलसी विवाह? इस दिन तुलसी माता का विवाह करने से मिलेगा लाभ
-
Religious2 years agoजानिए गोवर्धन पूजा का महत्व, कौनसा समय रहेगा पूजा के लिए सही
-
Religious2 years agoआखिर क्यों लिखा जाता है घर के बाहर शुभ लाभ, जानिए क्या है इन चिह्न का मतलब
-
Religious2 years agoपैरों के निशान, बनावट, रंग, साइज से पता लागए की आप कितने है भागयशाली
-
Punjab2 years agoपंजाब में अमरूद के बगीचे के मुआवजे के घोटाले में ED ने 26 स्थानों पर छापे मारे
-
Chandigarh2 years agoChandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?
-
Punjab2 years agoLudhiana में पुलिस स्टेशन के पास शव मिला। एक आदमी सड़क के बीच में पड़ा था; पास में कपड़ों से भरा एक बोरे भी मिला था, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी
-
Religious2 years agoजानिए दीपावली में वाले दिन आखिर कितने जलाने चाहिए दीये ? और क्यों जलाने चाहिए दिये |