Haryana
हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini आज बजट पर करेंगे अंतिम चर्चा , 13 मार्च को पेश हो सकता है बजट।
हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini आज बजट पर अंतिम चर्चा करेंगे। इस बैठक के लिए उन्होंने अपने कैबिनेट के मंत्रियों और पार्टी विधायकों की दो दिवसीय मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में बजट के बारे में आने वाले सुझावों को मुख्यमंत्री अपने बजट में शामिल करेंगे। हरियाणा का आगामी बजट होली से एक दिन पहले, 13 मार्च को पेश होने की संभावना है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय बीएसी (बिजनेस एडवाइजरी कमेटी) की बैठक में लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini अपने दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्री के रूप में पहला बजट प्रस्तुत करेंगे। राज्य सरकार ने हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र का संभावित शेड्यूल भी जारी किया है।
1.95 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है बजट।
हरियाणा का आगामी वित्तीय वर्ष का बजट लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। चूंकि मुख्यमंत्री खुद वित्त मंत्री हैं, इसलिये उनके मार्गदर्शन में आगामी बजट तैयार किया जा रहा है। इस मीटिंग में विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा को भी बुलाया गया है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों को व्यक्तिगत रूप से पत्र भेजकर मीटिंग में आमंत्रित किया है।
पिछले साल 1.89 लाख करोड़ रुपये का था बजट।
पिछले साल, तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वित्त मंत्री के रूप में 1.89 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। हालांकि, 2024-25 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के कारण आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों में बाधा आई।
अब स्थानीय निकाय चुनावों के कारण आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है, जिससे बजट में निर्धारित प्रावधानों के बावजूद खर्च पूरी तरह से नहीं हो पाते हैं। इसलिए, इस बार 1.95 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश होने की उम्मीद जताई जा रही है।

लाडो लक्ष्मी योजना के लिए बजट प्रावधान।
लाडो लक्ष्मी योजना के तहत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस बजट में लाडो लक्ष्मी योजना के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत, सरकार सूबे की गरीब महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये देगी। योजना का लाभ 18 से 60 वर्ष की आयु की उन महिलाओं को मिलेगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहले ही इस योजना की घोषणा कर चुके हैं।
बजट सत्र का संभावित शेड्यूल।
हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 7 मार्च से शुरू होगा, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण होगा। सत्र की अवधि 7 मार्च से 25 मार्च तक रहेगी और इसमें कुल 9 बैठकें रखी गई हैं, जिनमें से 19 दिनों में 10 छुट्टियां होंगी। बजट सत्र की अंतिम अवधि पर फैसला बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में लिया जाएगा।
गवर्नर के अभिभाषण से होगा सत्र की शुरुआत।
7 मार्च को सुबह 11 बजे राज्यपाल का अभिभाषण होगा। इसके बाद, 8 और 9 मार्च को अवकाश रहेगा। 10 से 12 मार्च तक अभिभाषण पर चर्चा की जाएगी, जबकि 12 मार्च को अनुपूरक अनुमान की दूसरी किस्त पेश की जाएगी।
इसके बाद 13 मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 2025-26 का बजट पेश करेंगे। इसके बाद 14 से 16 मार्च तक होली की छुट्टियां होंगी। फिर 17 और 18 मार्च को बजट अनुमानों पर चर्चा होगी। 19 से 21 मार्च तक कोई बैठक नहीं होगी।
24 मार्च को CM देंगे चर्चा का जवाब।
22 और 23 मार्च को शनिवार और रविवार का अवकाश रहेगा। 24 मार्च को मुख्यमंत्री बजट अनुमानों पर हुई चर्चा का जवाब देंगे, और इसी दिन बजट पर मतदान भी होगा। 25 मार्च को अंतिम दिन विधानसभा के कार्य पूरे होंगे और सत्र समाप्त हो जाएगा।
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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान
हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।
अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।
गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।
वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।
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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल
भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।
पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक
बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।
कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।
इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।
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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम
जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।
जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।
2023 में नहीं लाया जा सका बिल
2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।
आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए
खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।
बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी
आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।
परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध
पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।
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