Haryana
Haryana के खिलाड़ियों को खुश खबरी, ग्रुप-सी के सभी पदों पर 3% आरक्षण करेगी बहाल
Haryana के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी! राज्य सरकार ग्रुप सी में खिलाड़ियों को 3% नौकरियां देने वाला विशेष नियम वापस ला सकती है। अभी खिलाड़ियों को ये नौकरियां सिर्फ 7 विभागों में ही मिल सकती हैं। वे शुरू से ही इस बात से नाखुश हैं। इससे पहले सरकार ने ग्रुप ए, बी और सी में खिलाड़ियों को मिलने वाली विशेष नौकरी को बंद कर दिया था। बाद में उन्होंने एक नियम वापस लाने का फैसला किया, जिसके अनुसार हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा ग्रुप सी की नौकरियों के लिए एक साल में चुनी गई हर 100 नौकरियों में से 3 नौकरियां कुछ खास समूहों के लोगों को मिलेंगी।
पहले यह नियम सिर्फ चार क्षेत्रों पर लागू होता था: गृह, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा और खेल। जब ज्यादा लोगों ने विरोध करना शुरू किया तो तय हुआ कि सिर्फ 7 समूहों को ही विरोध करने की अनुमति दी जाएगी। अब मुख्यमंत्री नायब सैनी खिलाड़ियों की मांगों पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने अपने मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर को इस अहम मुद्दे पर ध्यान देने को कहा है। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राजेश खुल्लर, जो मुख्यमंत्री के एक महत्वपूर्ण सहायक हैं, अब एक समस्या को ठीक करने के लिए प्रभारी हैं। उन्होंने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात करने के लिए खेल विभाग और HSSC के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने चर्चा की कि अब एथलीटों के लिए किसी भी विभाग में ग्रुप सी में नौकरी पाने का कोई विशेष मौका नहीं है।
उन्होंने ग्रुप सी में कुछ नौकरियों के पदों को वापस लाने के बारे में बात की, लेकिन केवल सात विभाग ही ऐसे होंगे जहाँ ऐसा हो सकता है। उन्होंने यह भी देखा कि इस नए नियम का उपयोग करके कितनी नौकरियाँ भरी गई हैं। लोगों ने चर्चा की कि हर विभाग में ग्रुप सी की सभी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए विशेष स्थान होने चाहिए। इस बारे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करेंगे।
आइए बात करते हैं कि खिलाड़ियों और उनके खेलने के लिए विशेष स्थानों के साथ क्या हुआ। यहाँ इसके बारे में एक सरल कहानी है!
30 अप्रैल, 2019 को, हरियाणा सरकार ने फैसला किया कि एथलीटों को नौकरी मिलने पर विशेष मदद मिलेगी। उनके लिए ग्रुप ए, बी और सी की नौकरियों में हर 100 में से 3 नौकरियां आरक्षित होंगी, जो उच्च-स्तरीय नौकरियां हैं। ग्रुप डी की नौकरियों के लिए, जो निचले स्तर की नौकरियां हैं, उनके लिए हर 100 में से 10 नौकरियां आरक्षित होंगी।
सरल शब्दों में, 14 मार्च, 2022 को सरकार ने एक नया नियम बनाया। उन्होंने फैसला किया कि वे ग्रुप ए, बी और सी में महत्वपूर्ण नौकरियों के लिए भर्ती करते समय खिलाड़ियों के लिए विशेष स्थान (जिसे आरक्षण कहा जाता है) अलग नहीं रखेंगे। लेकिन वे ग्रुप डी की नौकरियों के लिए कुछ विशेष स्थान अभी भी रखेंगे, जैसा कि उन्होंने पहले किया था।
24 नवंबर, 2022 को राज्य सरकार ने कहा कि ग्रुप सी में हर 100 में से 3 नौकरियां खिलाड़ियों के लिए होंगी। लेकिन ये नौकरियां केवल चार क्षेत्रों में हो सकती हैं: गृह, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा और खेल विभाग।
22 अप्रैल, 2023 को यह घोषणा की गई कि लोगों को तीन नए क्षेत्रों में नौकरियों के लिए भी चुना जाएगा: जेल, वन और ऊर्जा विभाग। लेकिन, केवल एक छोटा सा हिस्सा – हर सौ नौकरियों में से केवल तीन – हर साल हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा भरे जाएंगे।
खिलाड़ियों को कुछ विभागों में नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है, जहां उम्र सीमा 42 वर्ष से कम है। उन्होंने राजेश खुल्लर नामक एक बड़े अधिकारी से अनुरोध किया कि उन्हें नियमित आयु सीमा से तीन साल बाद आवेदन करने की अनुमति दी जाए। इस विचार पर एक बैठक में चर्चा हुई और ऐसा लगता है कि वे इस पर सहमत हो सकते हैं।
खेल खिलाड़ी बचाओ संघर्ष समिति हरियाणा समूह एचएसएससी द्वारा किए गए एक विकल्प से सहमत नहीं था। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर इसे बदलने के लिए कहा। उस पत्र में मुख्यमंत्री की मदद करने वाले राजेश खुल्लर ने उल्लेख किया कि इस स्थिति में भाजपा सरकार शामिल थी।
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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान
हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।
अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।
गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।
वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।
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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल
भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।
पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक
बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।
कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।
इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।
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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम
जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।
जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।
2023 में नहीं लाया जा सका बिल
2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।
आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए
खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।
बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी
आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।
परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध
पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।
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