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सुनने की क्षमता बहाल करने से लेकर जीवन बचाने तक: समय पर ईएनटी उपचार पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण

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ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार कान में संक्रमण के कारण ठीक से सुन नहीं पाने वाला बच्चा, वर्षों से नाक से साँस लेने में परेशानी झेल रहा वयस्क, या तंबाकू का सेवन करने वाला व्यक्ति जो मुँह के लगातार बने रहने वाले छाले को नज़रअंदाज़ कर देता है—ये ऐसी सामान्य समस्याएँ हैं जिनमें मरीज़ अक्सर इलाज में देरी कर देते हैं। परिणामस्वरूप, साधारण बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

ईएनटी संबंधी रोग हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करते हैं। इनमें लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण, सुनने की क्षमता में कमी, साइनस की बीमारी से लेकर मुँह और जीभ के कैंसर तक शामिल हैं। इनमें से अधिकांश बीमारियों का प्रभावी उपचार संभव है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि समय पर बीमारी की पहचान से स्थायी नुकसान से बचाव संभव है और मरीज़ के ठीक होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।

द लैंसेट में प्रकाशित शोध के अनुसार, सिर और गर्दन के कैंसर की समय पर पहचान न होने पर बीमारी गंभीर अवस्था में पहुँच जाती है। इससे इलाज मुश्किल हो जाता है और मरीज़ के ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों की समय रहते जाँच करवाना अत्यंत आवश्यक है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में पात्र मरीज़ों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में एडवांस्ड ईएनटी सर्जरी नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 2,030 मरीज़ों की ईएनटी सर्जरी की जा चुकी है, जिन पर लगभग 5.25 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए हैं।”

डॉ. निधि गुप्ता, मेडिकल ऑफिसर (ईएनटी विशेषज्ञ), सिविल अस्पताल, रूपनगर (रोपड़) ने कहा, “लोग अक्सर कान से लगातार पानी आना, सुनने में कमी, नाक बंद रहना या मुँह के छालों जैसी समस्याओं को शुरुआती दौर में दर्द न होने के कारण नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन इलाज में देरी से स्थायी बहरापन, क्रॉनिक साइनस या गंभीर ओरल कैंसर हो सकता है।”

ईएनटी रोगों में कान संबंधी बीमारियाँ सबसे अधिक देखने को मिलती हैं। कान की पुरानी इन्फेक्शन और सुनने की क्षमता में कमी, ईएनटी सर्जरी की सबसे आम वजह हैं। मरीज़ अक्सर कान से बार-बार पानी आना, कम सुनाई देना, कान में आवाज़ आना या लंबे समय से इन्फेक्शन की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास आते हैं।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े पाँच महीनों में लगभग 1,050 कान की सर्जरी की गईं, जिन पर करीब 2.9 करोड़ रुपये ख़र्च हुए। इनमें 897 टाइम्पैनोप्लास्टी, 88 रेडिकल मास्टॉयडेक्टॉमी, तथा कान की चोट और पिन्ना (बाहरी कान) के ट्यूमर की सर्जरी शामिल हैं।

डॉ. गुप्ता ने बताया, “इनमें अधिकांश ऑपरेशन फटे हुए कान के पर्दे की मरम्मत या मध्य कान में लंबे समय से मौजूद इन्फेक्शन को हटाने के लिए किए जाते हैं। समय पर सर्जरी से सुनने की क्षमता बहाल होती है और संक्रमण को मास्टॉयड हड्डी तथा आसपास के महत्त्वपूर्ण अंगों तक फैलने से रोका जा सकता है।”

साँस की समस्याओं को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

लगातार नाक बंद रहने की समस्या को अक्सर लोग सामान्य स्थिति समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि इसका सीधा असर नींद, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी साइनस इन्फेक्शन , नाक की टेढ़ी हड्डी (डीएनएस), बढ़े हुए टर्बिनेट्स और नाक के पॉलिप्स लंबे समय तक साँस लेने में कठिनाई के प्रमुख कारण हैं।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी,पंजाब ,के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य में लगभग 900 नाक और साइनस की सर्जरी की गईं, जिनकी लागत 2.1 करोड़ रुपये से अधिक रही। इनमें 395 फंक्शनल सेप्टो राइनोप्लास्टी, 354 सेप्टोप्लास्टी, 227 फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी (एफईएसएस) तथा अन्य सुधारात्मक प्रक्रियाएँ शामिल हैं।

डॉ. गुप्ता ने कहा, “कई मरीज़ वर्षों तक केवल नेज़ल स्प्रे का उपयोग करते रहते हैं, जबकि मूल कारण का इलाज नहीं करवाते। एंडोस्कोपिक सर्जरी लंबे समय तक राहत देती है, साँस लेने में सुधार करती है और बार-बार होने वाले संक्रमण को कम करती है।”

*मुँह का कैंसर: कम मामले, लेकिन गंभीरता कहीं अधिक*

हालांकि मुँह और जीभ से जुड़ी सर्जरियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि देर से पता चलने के कारण ये सबसे जटिल ईएनटी सर्जरियों में शामिल हैं। करीब 80 मरीज़ों की मुँह और जीभ की सर्जरी की गई, जिन पर लगभग 25 लाख रुपये ख़र्च हुए। इनमें शामिल हैं-

• मुँह , साइनस और गले के ट्यूमर निकालने की 47 सर्जरी

* 13 जीभ के ट्यूमर की सर्जरी, जिसमें गर्दन की लिम्फ नोड डिसेक्शन और फ्री फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन शामिल था

* 7 कम्पोजिट रिसेक्शन एवं रिकंस्ट्रक्शन

* हेमीग्लोसेक्टॉमी सहित अन्य प्रमुख ऑपरेशन

डॉ. गुप्ता ने बताया कि मुँह का कैंसर अक्सर ऐसा छाला होता है जो लंबे समय तक ठीक नहीं होता, या फिर सफेद अथवा लाल धब्बे, जीभ में दर्द अथवा निगलने में कठिनाई के रूप में शुरू होता है। तंबाकू, गुटखा, सुपारी और शराब इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।

उन्होंने बताया कि यदि मुँह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे तो उसे कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों, जिनमें द लैंसेट भी शामिल है, से स्पष्ट है कि पहचान में देरी होने पर कैंसर अधिक गंभीर अवस्था में पहुँच जाता है और उपचार के परिणाम भी प्रभावित होते हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा ,”शुरुआती अवस्था में कैंसर का इलाज अक्सर छोटे ऑपरेशन से हो जाता है, लेकिन देर से पता चलने पर बड़े ऑपरेशन, रिकंस्ट्रक्शन और अतिरिक्त इलाज की ज़रूरत पड़ती है।” गंभीर बीमारी में गर्दन की लिम्फ नोड्स निकालने की सर्जरी और शरीर के किसी दूसरे हिस्से से टिश्यू लेकर मुँह की बनावट को फिर से बनाने की सर्जरी करनी पड़ सकती है, जिससे बोलने और निगलने की क्षमता वापस लाई जाती है।

जागरूकता से रोकी जा सकती हैं गंभीर बीमारियाँ

डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश ईएनटी जटिलताओं को समय पर पहचान और उपचार के माध्यम से रोका या सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है। यदि कान से लगातार पानी आए, सुनाई कम दे, नाक लंबे समय तक बंद रहे, बार-बार साइनस का संक्रमण हो, आवाज़ बैठी रहे या मुँह का छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से जाँच करवानी चाहिए। डॉ. गुप्ता ने कहा, “समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने का मतलब है आसान उपचार, शीघ्र स्वस्थ होना और लम्बे समय तक बेहतर परिणाम।”

अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत एडवांस्ड ईएनटी सर्जरी की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बना रही है, लेकिन सबसे बड़ा लाभ तभी मिलेगा जब लोग जागरूक होंगे, समय पर जाँच करवाएँगे और शुरुआती अवस्था में उपचार शुरू करेंगे। इससे बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है और बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता भी काफी हद तक कम हो सकती है।

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पंजाब की वोटर लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए, आप के कार्यकर्ता हर नागरिक की मदद के लिए तैयार हैं: अमन अरोड़ा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने गुरुवार को पंजाब के लोगों से अपील की कि वे भारत के चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि हर योग्य वोटर को अपना वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि उनके वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहें और उन्हें पंजाब सरकार की अलग-अलग भलाई की योजनाओं का फायदा मिलता रहे।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा कि एसआईआर अभ्यास एक पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया है जिसका मकसद वोटर रोल को अपडेट करना है। उन्होंने पंजाब के हर वोटर से अपील की कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें और तय तारीख से पहले ज़रूरी फॉर्मैलिटी पूरी करें।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप वाली पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई लगभग हर भलाई की योजना लाभपात्री की राज्य के रजिस्टर्ड वोटर के तौर पर पहचान से जुड़ी है। उन्होंने कहा, “चाहे वह ‘माँ बेटी सत्कार योजना’ हो, 10 लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम हो, राशन/खाने से जुड़े भलाई के प्रोग्राम हों या अलग-अलग पेंशन स्कीम हों, इन सभी का फायदा पंजाब के उन योग्य निवासियों को मिलता है जिनकी पहचान सही तरीके से वेरिफाई हो चुकी है।”

अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी लोगों से अपील की थी कि वे पक्का करें कि उनका नाम वोटर लिस्ट में रहे। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में कई लोगों के भले के लिए योजनाएं शुरू की हैं। हम चाहते हैं कि हर सही फायदा उठाने वाले को बिना किसी रुकावट के ये फायदे मिलते रहें। इसलिए, यह बहुत ज़रूरी है कि हर असली वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करे और अपना वोट सुरक्षित करे।”

इस सुधार प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने पहले भी दूसरे राज्यों में राजनीतिक फायदे के लिए ऐसे तरीकों का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने साफ किया कि आप नहीं चाहती कि पंजाब में एक भी असली वोटर अपना वोट देने का हक खोए।

उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस काम को सिर्फ वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तौर पर न देखें, बल्कि इसे पंजाब सरकार की तरफ से दी जा रही भलाई की योजनाओं और पब्लिक सर्विस तक उनकी लगातार पहुंच पक्की करने के लिए एक ज़रूरी कदम समझें।

अमन अरोड़ा ने आगे बताया कि आप ने लोगों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करने में मदद करने के लिए पूरे पंजाब में बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-1 और बीएलए-2) तैनात किए हैं। उन्होंने कहा, “आप के कार्यकर्ता बूथ लेवल पर वोटरों की किसी भी डॉक्यूमेंट्री या प्रक्रिया से जुड़ी ज़रूरतों में मदद करने के लिए मौजूद हैं, ताकि कोई भी असली वोट न कट जाए।”

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पंजाब के बिजली उपभोक्ताओं को राहत, पावरकॉम ने स्पीड पोस्ट से भेजने शुरू किए बिजली बिल

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मीटर रीडरों की हड़ताल के कारण पिछले कई महीनों से बिजली बिल नहीं मिलने की समस्या से जूझ रहे पंजाब के लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) ने अब प्रभावित उपभोक्ताओं तक बिजली बिल पहुंचाने के लिए स्पीड पोस्ट का सहारा लिया है। विभाग ने 14 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को स्पीड पोस्ट के जरिए बिजली बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पावरकॉम के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं के बिल 1 हजार से 4 हजार रुपये के बीच हैं, उन्हें विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर भी बिल उपलब्ध करा रहे हैं। यदि किसी उपभोक्ता को अब तक बिजली बिल प्राप्त नहीं हुआ है, तो वह अपने संबंधित डिवीजन कार्यालय जाकर नया बिल बनवा सकता है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा गया औसत (एवरेज) बिल वास्तविक खपत से अधिक है, तो उपभोक्ता अपने बिजली मीटर की मौजूदा रीडिंग लेकर संबंधित डिवीजन कार्यालय पहुंचे। वहां बिल की जांच कर उसे सही कराया जा सकता है। हालांकि, स्पीड पोस्ट से जारी किए गए बिल का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

गौरतलब है कि मीटर रीडरों की हड़ताल के चलते पिछले तीन महीनों से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को बिजली बिल नहीं मिल पाए थे। इससे लोगों में यह चिंता भी बनी हुई थी कि उन्हें सरकार की 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिलेगा या नहीं।

पावरकॉम ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि बिल जमा करने के बाद उसकी रसीद सुरक्षित रखें। यदि कोई उपभोक्ता मीटर की रीडिंग लेना नहीं जानता, तो वह मीटर पर दिखाई दे रहे आंकड़ों की कम से कम एक मिनट की वीडियो बनाकर सुरक्षित रख सकता है। भविष्य में यदि औसत खपत के आधार पर गलत बिल जारी होता है, तो इसी वीडियो और पुराने बिजली बिल के आधार पर पावरकॉम कार्यालय में बिल की जांच और संशोधन कराया जा सकेगा।

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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, OTT से हटाने के फैसले को चुनौती

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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाए जाने के फैसले के खिलाफ मोहाली निवासी सरवन सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले में अदालत अगले एक-दो दिनों के भीतर सुनवाई कर सकती है।

बता दें कि दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म ‘पंजाब 95’ को ‘सतलुज’ नाम से OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था, लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद इस फैसले को चुनौती देते हुए अब अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।

इस बीच केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी फिल्म को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि लोग फिल्म को मुख्य रूप से दिलजीत दोसांझ की वजह से देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में केवल एक पक्ष की कहानी दिखाना उचित नहीं है और ऐसे संवेदनशील विषयों पर संतुलित प्रस्तुति होनी चाहिए।

उधर, जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड से जुड़े घटनाक्रम में भी नया मोड़ आया है। मामले के मुख्य दोषियों में शामिल पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह की तलाश के आदेश जारी किए गए हैं। नाभा जेल प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को पूर्व डीएसपी का पता लगाने के निर्देश दिए हैं।

अब सभी की नजर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला बरकरार रहेगा या उसे लेकर कोई नई राहत मिलती है।

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