Health
Chaitra Navaratri 2024: उपवास के दौरान सेहतमंद भोजन – 5 स्वास्थ्यप्रद आहार
Chaitra Navaratri के आसपास आते ही, उपासना करने वाले भक्तों के बीच उपवास एक सामान्य अभ्यास बन जाता है जिसके माध्यम से आध्यात्मिक शुद्धि और नवीनीकरण प्राप्त किया जाता है। इस अवधि के दौरान कुछ स्वस्थ भोजन का सेवन करना महत्वपूर्ण है ताकि पोषण और ऊर्जा स्तर को सुनिश्चित किया जा सके। यहाँ चैत्र नवरात्रि 2024 के दौरान आपके उपवास कार्यक्रम में शामिल करने के लिए पाँच स्वास्थ्यप्रद आहार हैं:
मौसमी फल (Seasonal Fruits)
फल आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरे प्रकृति के उपहार हैं। सेब, केला, संतरा, जामुन और अनार जैसे विभिन्न प्रकार के फलों का चयन करें। ये फल न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि उपवास के दौरान त्वरित ऊर्जा को बढ़ावा भी देते हैं। आप उन्हें पूरे फल के रूप में खा सकते हैं या पूरे दिन खुद को हाइड्रेटेड और ऊर्जावान रखने के लिए उन्हें ताज़ा स्मूदी में मिला सकते हैं।
बादाम और बीज (Nuts and seeds)
नट्स और बीज प्रोटीन, स्वस्थ वसा और फाइबर से भरे पावरहाउस स्नैक्स हैं, जो उन्हें उपवास के दिनों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाते हैं। भूख लगने पर बादाम, अखरोट, पिस्ता, कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज खाने के लिए उत्कृष्ट विकल्प हैं। वे रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं, आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं, और समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
मखाना (Fox Nuts)
एक पोषण शक्ति, मखाना एक मुख्य व्रत भोजन है। ये छोटे मेवे प्रोटीन, फाइबर, जटिल कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ वसा से भरे होते हैं। इन्हें भुना जा सकता है, उबला जा सकता है या खीर (खीर) में एक संतोषजनक और पौष्टिक नाश्ते के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
कुट्टू का आटा (Buckwheat flour)
बकव्हीट आटा एक लस मुक्त विकल्प है जिसका सेवन आमतौर पर उपवास अवधि के दौरान किया जाता है। यह प्रोटीन, फाइबर और मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे आवश्यक खनिजों से भरपूर होता है। अनाज के आटे का उपयोग रोटी, पेनकेक्स और दलिया सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार करने के लिए किया जा सकता है। इसका नट स्वाद आपके भोजन में एक अनूठा स्वाद जोड़ता है और आपको भरा हुआ और संतुष्ट महसूस करने के लिए निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
साबूदाना (Tapioca pearls)
साबूदाना अपनी उच्च कार्बोहाइड्रेट सामग्री के कारण उपवास व्यंजनों में उपयोग किया जाने वाला एक लोकप्रिय घटक है, जो तत्काल ऊर्जा प्रदान करता है। यह लस मुक्त और पचाने में आसान है, जो इसे आहार प्रतिबंधों या संवेदनशील पेट वाले लोगों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनाता है। साबूदाना खीचड़ी, साबूदाना वडा और साबूदाना खीर कुछ स्वादिष्ट व्यंजन हैं जिन्हें आप नवरात्रि उपवास के दौरान टैपिओका मोतियों का उपयोग करके बना सकते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2024 के दौरान, आप अपनी उपवास अनुभव को अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए ये पोषण से भरपूर भोजनों पर ध्यान देने के लिए समर्पित रहें। जल संतुलन बनाए रखें, पर्याप्त आराम लें, और इस आध्यात्मिक पुनरावृत्ति और नवीनीकरण के शुभ समय का समर्थन करने के लिए अपने स्वास्थ्य और कल्याण को समर्थन करने के लिए सचेत चुनाव करें।
Health
पंजाब भर में मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ बनी जीवनरेखा
पंजाब में बदलते तापमान और उमसभरी गर्मी के आगमन के साथ एक बार फिर मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। रोज़मर्रा की बीमारियों से राहत पाने के लिए पहले से ही मरीज़ों की भीड़ झेल रहे सरकारी अस्पतालों में अब बुखार संबंधी बीमारियों, श्वसन संक्रमणों और पेट संबंधी विकारों के मामलों में एक नई बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, यह मौसमी लहर हर साल चिंताजनक रूप से लौटती है।
एक्यूट फेब्राइल इलनेस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि अचानक तेज़ बुखार के साथ उत्पन्न होने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसमें कई तरह की बीमारियाँ शामिल हो सकती हैं। यूएस सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, ऐसी स्थितियाँ वायरल, बैक्टीरियल या परजीवी संक्रमणों के कारण हो सकती हैं। कई बार मरीज़ बुखार को मुख्य लक्षण के रूप में लेकर अस्पताल पहुँचते हैं, जबकि संक्रमण का मूल कारण शुरुआती अवस्था में स्पष्ट नहीं हो पाता।
पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के हालिया आँकड़े बताते हैं कि पिछले चार महीनों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस कैशलेस इलाज दावों की सबसे बड़ी श्रेणियों में शामिल रहीं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, एक्यूट फेब्राइल इलनेस के 5,840 मामले दर्ज किए गए, जिन पर ₹1.31 करोड़ के दावों का भुगतान किया गया।
इसके अलावा, पानी से फैलने वाले और श्वसन संबंधी बीमारियों के भी उल्लेखनीय मामले सामने आए। एंटरिक फीवर के 1,396 मामले दर्ज हुए, जिन पर ₹30.47 लाख के दावे किए गए। निमोनिया के 377 मामलों पर ₹11.06 लाख, जबकि एक्यूट ब्रोंकाइटिस के 326 मामलों पर ₹9.24 लाख ख़र्च हुए। वहीं मानसून के दौरान अक्सर चर्चा में रहने वाली बीमारियों के मामले अपेक्षाकृत सीमित रहे। डेंगू के केवल 12 मामले दर्ज हुए, जिन पर ₹40,880 का दावा हुआ। मलेरिया के सिर्फ 3 मामले, चिकनगुनिया के 6 मामले, और हीट स्ट्रोक के 4 मामले सामने आए, जो अत्यधिक गर्मी से संबंधित अस्पताल भर्ती की तुलनात्मक रूप से कम संख्या को दर्शाते हैं।
हालाँकि, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी तरह की लापरवाही से बचने की सलाह दे रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार बारिश, मच्छरों की बढ़ती संख्या और स्थानीय स्वच्छता स्थितियों के अनुसार मौसमी प्रकोप तेज़ी से बदल सकते हैं।
सिविल अस्पताल, पटियाला के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विकास गोयल ने बताया कि यह स्थिति हर वर्ष ओपीडी में दिखाई देने वाले समान्य मौसमी दबाव को दर्शाती है I उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश मामले प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर आसानी से संभाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण एक्यूट फेब्राइल इलनेस, उल्टी,दस्त, सिरदर्द, श्वसन संक्रमण और त्वचा व आँखों से जुड़ी एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। गरम मौसम के कारण लोग अक्सर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।
डॉ. विकास गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना मरीज़ों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है क्योंकि इससे उन्हें बिना आर्थिक बोझ के अस्पताल में भर्ती होकर कैशलेस उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा,“यह योजना सुनिश्चित करती है कि मरीज़ बिना अग्रिम पैसे की चिंता किए समय पर इलाज प्राप्त कर सकें। समय पर जाँच और उपचार से कई जानें बचाई जा सकती हैं, क्योंकि आर्थिक बाधा दूर होने से लोग इलाज में देरी नहीं करते।”
बच्चे अत्यधिक गर्मी और उमस वाले मौसम में सबसे अधिक संवेदनशील बने रहते हैं। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कांत धीर ने चेतावनी दी कि शिशु और छोटे बच्चे संक्रमणों की चपेट में जल्दी आते हैं। उन्होंने बताया कि ठीक से आहार न लेना, बार-बार उल्टी होना, तेज साँस चलना, डिहाइड्रेशन, दौरे पड़ना और लगातार बुखार जैसे लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि तीन महीने से कम उम्र के शिशु में किसी भी तरह के बुखार को तत्काल चिकित्सकीय आपात स्थिति माना जाना चाहिए।
डॉ. शशि कांत धीर ने यह भी कहा कि जागरूकता अभियान, स्वच्छता शिक्षा, टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण उपायों के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को रोकने में अभिभावकों, आशा वर्करों, आँगनवाड़ी कर्मियों और स्कूलों की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण है।
फ़िलहाल, जैसे-जैसे पंजाब एक और लंबी गर्मी की तैयारी कर रहा है, अस्पतालों के भीड़भरे गलियारे यह याद दिला रहे हैं कि मौसमी बीमारियाँ आज भी परिवारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
Health
Bhagwant Mann सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत गंभीर हालत में जन्मी नवजात बच्ची के स्वस्थ होने से डॉक्टरों की चिंता उम्मीद में बदली
नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है। बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।
सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई। उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है। जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था। ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया। बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे। मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी—हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।
इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा। नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया। सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।
डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है।” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ।
सांस सामान्य होने लगी। प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं। जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है। थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।”
इस मामले में कोई देरी नहीं हुई। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।
17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है। हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है। नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।
एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया। उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।”
रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।
मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है। यह बहुत बड़ी बात है।”
पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।
यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है।
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Sonia Gandhi की तबीयत बिगड़ी, दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती — ICU में डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है। उन्हें मंगलवार रात करीब 11:15 बजे दिल्ली के प्रसिद्ध Sir Ganga Ram Hospital में भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार, उन्हें छाती में संक्रमण (चेस्ट इंफेक्शन) की शिकायत थी, जिसके बाद परिवार और डॉक्टरों की सलाह पर तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, भर्ती के तुरंत बाद उनका प्राथमिक मेडिकल चेकअप किया गया, जिसके बाद एहतियातन उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में शिफ्ट कर दिया गया। फिलहाल विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत की लगातार निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए उन्हें निगरानी में रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, उनकी तबीयत को लेकर अस्पताल प्रशासन जल्द ही एक विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी कर सकता है, जिसमें उनकी सेहत की ताजा स्थिति, जांच रिपोर्ट और आगे के इलाज की जानकारी दी जाएगी। इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों में चिंता की लहर दौड़ गई है। देशभर से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामनाएं की जा रही हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सोनिया गांधी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। इससे पहले 19 जून को भी उन्हें पेट से जुड़ी गंभीर समस्या के कारण इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें 15 जून को पेट में संक्रमण की शिकायत के बाद एडमिट किया गया था और करीब चार दिनों तक लगातार निगरानी में रखने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी थी।
सोनिया गांधी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं और समय-समय पर उनका इलाज चलता रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए किसी भी संक्रमण को गंभीरता से लेना जरूरी होता है, इसलिए इस बार भी पूरी सावधानी बरती जा रही है।
फिलहाल देश की नजरें उनके स्वास्थ्य अपडेट पर टिकी हुई हैं और हर कोई उनके जल्द स्वस्थ होकर सार्वजनिक जीवन में वापसी की उम्मीद कर रहा है।
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