Punjab
government की land pooling policy पर भड़के किसान, बोले – ‘पैसे से ज़मीन और पहचान नहीं खरीदी जा सकती’
पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर राज्य के कई जिलों, खासकर लुधियाना के गांवों में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ ज़मीन की नहीं बल्कि उनकी पहचान, रोज़गार और विश्वास की भी है।
मुआवज़े की रकम पर सवाल
किसानों ने सरकार द्वारा लगातार बदलते मुआवज़े के आंकड़ों पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक किसान नेता ने कहा, “शुरुआत में सरकार ने सालाना 30,000 रुपये प्रति एकड़ किराया देने की बात की थी, फिर यह बढ़ाकर 50,000 और अब 1 लाख रुपये कर दिया गया है। अगर विकास इतना तेज़ होगा, तो फिर इतनी लंबी अवधि के किराए की जरूरत ही क्यों? खुद सरकार को भी शायद पता नहीं कि प्रोजेक्ट कब पूरा होगा।”
कब मिलेगा ‘विकसित ज़मीन’?
दिदार सिंह नामक किसान ने कहा, “हमारी खेती की ज़मीन हर साल हमें आमदनी दे रही है। सरकार ने कहा था कि हमें बदले में विकसित ज़मीन दी जाएगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। हम अपनी ज़मीन दे दें, और बदले में क्या मिलेगा, वो साफ नहीं है।”
बाज़ार मूल्य से कई गुना कम ऑफर
किसानों का कहना है कि लुधियाना के कई गांवों में जमीन का बाज़ार रेट 4 से 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है, जबकि सरकार इसका मुकाबला नहीं कर पा रही। “हमारी ज़मीन अगर ली जा रही है, तो उसके बदले की रकम भी वैसी ही होनी चाहिए। लेकिन यहां सरकार खुद ही कन्फ्यूज है। हमें दी जाने वाली developed residential और commercial land की resale भी हमारे लिए एक और बड़ी परेशानी होगी,” एक और किसान ने बताया।
‘सरकार खुद कर्ज़ में डूबी है’
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने तीखा सवाल उठाया – “पंजाब सरकार तो पहले से ही भारी कर्ज़ में है। वो हजारों एकड़ की ज़मीन का किराया कहां से देगी? किसे बेवकूफ बना रही है सरकार?”
164 गांवों की ज़मीनें प्रभावित
इस लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत पंजाब के लगभग 164 गांवों की ज़मीनें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का साफ कहना है कि यह सिर्फ जमीन देने की बात नहीं है, बल्कि इससे उनकी पूरी ज़िंदगी का ताना-बाना जुड़ा है।
कोकरीकलां ने कहा, “सरकार गांवों की आवाज़ नहीं सुन रही। अब लड़ाई आर-पार की होगी। 30 जुलाई को होने वाली ट्रैक्टर मार्च सरकार को दिखा देगी कि असली पंजाब क्या है – खेत, किसान और उसकी मेहनत।”
लैंड पूलिंग पॉलिसी क्या है?
सरकार की इस पॉलिसी के तहत किसानों से जमीन लेकर उसे विकसित किया जाना है – जिसमें रोड, पार्क, शॉपिंग एरिया और रेजिडेंशियल ब्लॉक शामिल हैं। फिर किसानों को developed plots वापस देने की योजना है। इसके साथ-साथ कुछ समय तक सालाना किराया भी देने की बात हो रही है। लेकिन ये प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और भरोसेमंद होगी, यही सबसे बड़ा सवाल है।
किसानों की मांगें:
- पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए
- जमीन का असली बाजार मूल्य दिया जाए
- तय समय सीमा में developed plots दिए जाएं
- लीज़ के नाम पर किसानों को गुमराह न किया जाए
- मुआवज़े का विकल्प किसानों की इच्छा से तय हो
पंजाब में जमीन केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि किसान की जान होती है। सरकार की नीतियों को लेकर संदेह, मुआवज़े में असमानता और विकसित ज़मीन की अनिश्चितता ने किसानों को संघर्ष के रास्ते पर ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध के जवाब में कोई समाधान निकालती है या नहीं।
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O.T.S स्कीम को मिला जोरदार समर्थन: 111.16 करोड़ की वसूली, 31 मार्च के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी!
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि वैट बकाये के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान (OTS) स्कीम को व्यापारियों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस योजना के तहत अब तक करीब 7,845 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुल 298.39 करोड़ रुपये के बकाये शामिल हैं। इनमें से सरकार 111.16 करोड़ रुपये की वसूली भी कर चुकी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह स्कीम पुराने टैक्स बोझ को खत्म करने और राज्य के राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पटियाला और रोपड़ जैसे प्रमुख जिलों से इस योजना को अच्छा समर्थन मिला है, जो यह दर्शाता है कि कारोबारियों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत योजना 31 मार्च 2026 तक ही लागू है। इसके बाद सरकार सख्त रुख अपनाएगी और बकाया वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए पहले ही करीब 8,000 संपत्तियों की पहचान कर ली गई है, जिन पर जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कारोबारियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस अंतिम मौके का लाभ उठाएं और अपने लंबित वैट बकाये का निपटान कर लें। उन्होंने कहा कि OTS स्कीम के तहत ब्याज और जुर्माने में बड़ी छूट दी जा रही है, जिससे व्यापारियों को राहत मिल रही है और वे अपने वित्तीय रिकॉर्ड को साफ कर सकते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि समय सीमा खत्म होने के बाद सरकार का मौजूदा रियायती रुख समाप्त हो जाएगा और बिना किसी छूट के सख्त वसूली प्रक्रिया लागू की जाएगी। ऐसे मामलों में सामान्य कानूनी जांच और कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना को मिला समर्थन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पारदर्शी और व्यापार-समर्थक नीतियों पर लोगों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि मुकदमेबाजी को कम करना और व्यापारियों को नई शुरुआत का अवसर देना भी है।
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29 मार्च को होगी Punjab Cabinet की अहम बैठक, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर !
पंजाब में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह कैबिनेट बैठक 29 मार्च, रविवार को शाम 5 बजे मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास, कोठी नंबर 45, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री भगवंत मान करेंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार विभिन्न विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी नीतियों और प्रशासनिक सुधारों को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। इसके अलावा कुछ नई योजनाओं को मंजूरी मिलने और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा भी इस बैठक का हिस्सा हो सकती है।
यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बैठक में आम जनता से जुड़े मुद्दों—जैसे बुनियादी सुविधाएं, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाएं—पर खास ध्यान दिया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता राज्य के विकास को गति देना और लोगों को राहत पहुंचाना है, ऐसे में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।
पंजाब कैबिनेट की इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें लिए गए फैसले आने वाले समय में राज्य की नीतियों और दिशा को तय कर सकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम जनता की नजरें भी इस बैठक पर टिकी हुई हैं।
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जलालाबाद में आज 508 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान करेंगे मुख्यमंत्री; अनाज मंडी में तैयारियां पूरी
पंजाब के जलालाबाद क्षेत्र में आज विकास की बड़ी पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कुछ ही देर में जलालाबाद की अनाज मंडी पहुंचेंगे, जहां वह करीब 508 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं में लगभग 300 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण और 350 किलोमीटर पुराने मार्गों की मरम्मत शामिल है। इससे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण व शहरी इलाकों के बीच संपर्क बेहतर बनेगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने शनिवार से ही तैयारियां तेज कर दी थीं। अब अनाज मंडी को पूरी तरह कार्यक्रम के अनुरूप तैयार कर लिया गया है। मंच, टेंट, बैठने की व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था और बैरिकेडिंग समेत सभी प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग खंड बनाए गए हैं, ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
अधिकारियों से सुरक्षा व इंतजामों का लिया जायदा
डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। उनके साथ अतिरिक्त उपायुक्त डाॅ. मनदीप कौर और उपमंडल अधिकारी कंवरजीत सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा की।
सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने पूरे क्षेत्र को कड़ी निगरानी में ले लिया है। अनाज मंडी की ओर आने वाले सभी रास्तों पर नाके लगाए गए हैं और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की जांच की जा रही है। प्रवेश द्वारों पर धातु जांच उपकरण लगाए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
पैकेज इलाके के लिए बड़ी सौगात
स्थानीय विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी के अनुसार, यह पैकेज जलालाबाद के लिए अब तक की सबसे बड़ी सौगातों में से एक है। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया जाएगा, जिसके बाद वह लोगों को संबोधित भी करेंगे।
सुबह से ही अनाज मंडी में लोगों की आवाजाही बढ़ती जा रही है और हर कोई मुख्यमंत्री के आगमन का इंतजार कर रहा है। कार्यक्रम को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उम्मीद का माहौल बना हुआ है।
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