Chandigarh
BJP-Congress’ की झूठ की जुगलबंदी का पर्दाफाश, Punjab Government ने SDRF का पूरा Account जनता के सामने रखा
पंजाब में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) को लेकर चल रहे विवाद में मान सरकार ने केंद्र और विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोला है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SDRF फंड का पूरा डेटा जारी किया और बताया कि 2022 से अब तक पंजाब को सिर्फ़ 1,582 करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों जनता को गुमराह करने के लिए झूठ फैला रहे हैं और पंजाब के हक़ का पैसा रोकने की साज़िश कर रहे हैं।
क्या है विवाद?
पंजाब में जब भी बाढ़, भारी बारिश, ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदा होती है, तो केंद्र सरकार से राज्य को राहत राशि SDRF के तहत दी जाती है।
- AAP सरकार का आरोप है: केंद्र ने पंजाब को उसका पूरा हक़ नहीं दिया और जो थोड़ी बहुत राशि मिली, उसे भी देर से जारी किया।
- भाजपा का दावा है: केंद्र ने पंजाब को पर्याप्त फंड दिया, लेकिन राज्य सरकार इसका सही इस्तेमाल नहीं कर रही।
- कांग्रेस का रुख: कांग्रेस ने भी मान सरकार पर आरोप लगाए कि SDRF फंड सही तरीके से खर्च नहीं हुआ।
पंजाब सरकार का जवाब – हर पैसे का हिसाब पेश
वित्त मंत्री चीमा ने आंकड़े जारी करते हुए विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों जनता को झूठ बोलकर भ्रमित कर रहे हैं।
| वित्तीय वर्ष | प्राप्त राशि (₹ करोड़) | खर्च राशि (₹ करोड़) |
| 2022-23 | 208 | 61 |
| 2023-24 | 645 | 420 |
| 2024-25 | 488 | 27 |
| 2025-26 (10 सितंबर तक) | 241 | 140 |
| कुल | 1,582 | 649 |
- कुल 1,582 करोड़ रुपये में से अब तक 649 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
- बाकी राशि 933 करोड़ रुपये आने वाले समय में बाढ़ प्रभावित और आपदा पीड़ित लोगों की मदद के लिए रखी गई है।
चीमा ने कहा,
“भाजपा झूठा प्रचार कर रही है कि पंजाब को भारी फंड मिला है, जबकि सच यह है कि 2022 से अब तक हमें सिर्फ 1,582 करोड़ रुपये मिले। हमने हर पैसे का सही उपयोग किया और इसका पूरा हिसाब जनता के सामने रखा है।”
किसानों की मदद में मान सरकार सबसे आगे
चीमा ने यह भी बताया कि जब पंजाब में किसानों की फसलें बर्बाद हुईं, तो मान सरकार ने तुरंत राहत राशि बांटी।
- उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मुआवज़ा देने में जानबूझकर देरी की, लेकिन राज्य सरकार ने खुद अपने संसाधनों से किसानों को सहारा दिया।
- किसानों को समय पर आर्थिक मदद पहुंचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
भाजपा और कांग्रेस पर तीखा हमला
वित्त मंत्री ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ये दल सिर्फ राजनीति कर रहे हैं।
- भाजपा को घेरते हुए उन्होंने कहा:
“जो लोग कभी पंजाब और उसके अधिकारों के लिए खड़े नहीं हुए, उन्हें हमारी सरकार से सवाल करने का कोई हक़ नहीं है। वे सिर्फ़ राजनीतिक फायदा लेने के लिए झूठ फैला रहे हैं।”
- कांग्रेस पर भी उन्होंने तंज कसा और कहा कि वह बिना सबूत के आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रही है।
चीमा ने चुनौती दी कि भाजपा यह बताए कि पंजाब के हजारों करोड़ रुपये क्यों रोके गए और SDRF फंड का वितरण समय पर क्यों नहीं हुआ।
AAP का साफ संदेश
- पंजाब सरकार ने कहा कि वह हर संकट की घड़ी में जनता के साथ खड़ी है।
- SDRF की राशि का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है और इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक है।
- विपक्ष को चाहिए कि वह झूठी बयानबाजी बंद करे और केंद्र सरकार से पंजाब का रोका गया पैसा तुरंत जारी करवाए।
न्यूज़ का सार
इस पूरे विवाद का सार यह है कि पंजाब सरकार ने केंद्र पर पंजाब के हक़ का पैसा रोकने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा का कहना है कि राज्य को पर्याप्त फंड मिला है।
मान सरकार ने अब SDRF का पूरा डेटा जारी कर साफ किया कि 2022 से 2025 तक सिर्फ 1,582 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से 649 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
बाकी राशि जल्द ही बाढ़ राहत और अन्य आपदा प्रबंधन कार्यों में उपयोग की जाएगी।
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पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!
पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।
जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।
वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।
इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।
योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।
कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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चंडीगढ़ में देर रात दहशत: सेक्टर-29 के रिहायशी इलाके में दिखा तेंदुए जैसा जानवर, सीसीटीवी में कैद
चंडीगढ़ के सेक्टर-29 में बुधवार रात तेंदुआ दिखाई देने की खबर से इलाके में दहशत फैल गई। लोगों ने पूरी रात घरों से बाहर निकलने से परहेज किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिला। हालांकि, इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक तेंदुआ पीर दरगाह के पास पानी पीते हुए कैद हुआ है।
पार्क में महिला ने सबसे पहले देखा
जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच सेक्टर-29 के एक पार्क में एक महिला अपने बच्चों के साथ टहल रही थी। इसी दौरान उसकी नजर झाड़ियों के पास घूमते हुए एक तेंदुए पर पड़ी। यह देखते ही महिला घबरा गई और तुरंत बच्चों को लेकर पार्क से बाहर निकल गई।
घर पहुंचकर महिला ने इस बारे में अपने पति को बताया। इसके बाद उसके पति ने यह जानकारी पास में स्थित पीर दरगाह के लोगों को दी।
CCTV में कैद हुआ तेंदुआ
सूचना मिलने के बाद जब दरगाह परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई तो उसमें साफ दिखाई दिया कि एक तेंदुआ दरगाह के पास बने स्थान पर पानी पी रहा है। इसके बाद तुरंत पुलिस और फॉरेस्ट विभाग को सूचना दी गई।
सूचना के बाद पुलिस और फॉरेस्ट विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के इलाके में पूरी रात तलाशी अभियान चलाया। हालांकि देर रात तक चलाए गए सर्च ऑपरेशन में तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिल पाया।
फिलहाल पुलिस और फॉरेस्ट विभाग दोनों ही तेंदुए की मौजूदगी को लेकर आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद इलाके के लोग काफी दहशत में हैं और सतर्कता बरत रहे हैं।

पुलिसकर्मी हाथ में डंडा लेकर खड़ा हुआ।
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चंडीगढ़ में अगले माह से महंगी होंगी जमीनें:कलेक्टर रेट में 30 से 60% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से लागू करने की तैयारी
चंडीगढ़ में एक बार फिर प्रॉपर्टी महंगी होने जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन ने कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। डीसी निशांत यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें कलेक्टर रेट संशोधित करने के लिए एक कमेटी गठित की गई।
प्रशासन ने शहर के अलग-अलग इलाकों के अनुसार कलेक्टर रेट में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नए रेटों को लेकर अगले सप्ताह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं नए रेट
प्रशासन के अनुसार, लोगों से सुझाव लेने के बाद अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। योजना है कि नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से लागू कर दिए जाएं। पिछले साल भी कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले वर्ष 2021 और 2017 में संशोधन हुआ था।
ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्ताव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ सकते हैं। वहीं कई सेक्टरों में रेट डेढ़ गुना तक बढ़ाने की तैयारी है। कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क इन्हीं रेटों के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में रियल एस्टेट बाजार और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
संभावना है कि रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुछ संगठनों और प्रॉपर्टी मालिकों की ओर से विरोध भी किया जा सकता है।
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