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यूरोप यात्रा ने पंजाब के किसानों, उद्योग और युवाओं के लिए नए दरवाजे खोले: CM भगवंत मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज अपने नीदरलैंड-फिनलैंड दौरे का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने कृषि, उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में विश्व भर से मजबूत सहयोग हासिल किया है, जिससे किसानों, युवाओं और राज्य की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचेगा. ज़ायका कंपनी के 1300 करोड़ रुपए के निवेश, विश्वव्यापी कंपनियों की दिलचस्पी तथा केउकेनहॉफ से फिनलैंड तक उन्नत कृषि-तकनीकी सहयोग पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये रणनीतिक साझेदारियां फसल विविधीकरण को तेज करेंगी, निवेश को आकर्षित करेंगी और पंजाब को नवाचार, अनुसंधान एवं विकास तथा उच्च गुणवत्ता वाली खेती के लिए विश्व स्तरीय केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित करेंगी.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पहले दिन नीदरलैंड में भारत के राजदूत ने पंजाब के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और 19 अप्रैल को प्रतिनिधिमंडल ने विश्व प्रसिद्ध बागवानी मॉडल केउकेनहॉफ का दौरा किया, जहां रोजाना 40,000 पर्यटक आते हैं. वहां हमने प्रतिनिधियों से बातचीत की.” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “इस दौरे का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में साझेदारी के अवसरों की पड़ताल करना था. बागवानी के विकास के लिए सहयोग पर चर्चा हुई और पंजाब से गुलाब की निर्यात संभावना का पता लगाया गया.” उन्होंने कहा, “ज़ायका द्वारा किए जा रहे 1300 करोड़ रुपए के निवेश के अलावा यह समझौता फसल विविधीकरण को बड़ा प्रोत्साहन देने में मुख्य भूमिका निभाएगा.”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस दौरे का उद्देश्य औद्योगिक निवेश और साझेदारी को प्रोत्साहित करना, शिक्षा और अनुसंधान में आदान-प्रदान को मजबूत करना, प्रौद्योगिकी के पारस्परिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करना तथा पंजाब के समग्र विकास के लिए योजना बनाना भी था.” उन्होंने आगे कहा, “बातचीत के दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती में संयुक्त परियोजनाओं की संभावना की पड़ताल की गई तथा इस बात पर सहमति बनी कि उच्च मूल्य वाली फसलों और गुणवत्ता युक्त निर्यात उत्पादन के लिए सहयोग किया जाएगा. इस दौरे ने कौशल विकास और शैक्षणिक आदान-प्रदान के अवसरों के साथ-साथ नए औद्योगिक निवेशों और साझेदारियों के लिए रास्ते खोले.” उन्होंने रणनीतिक साझेदारी बनाने पर जोर देते हुए प्रौद्योगिकी और नवाचार के आदान-प्रदान पर भी समझौता किया. नीदरलैंड वर्टिकल (लंबवत) खेती के लिए प्रसिद्ध है, जिसे पंजाब में दोहराया जा सकता है.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “20 अप्रैल को प्रतिनिधिमंडल ने विश्व बागवानी केंद्र का दौरा किया और नीदरलैंड्स इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड ट्रेड के प्रतिनिधियों से मुलाकात की तथा पंजाबी समुदाय से बातचीत की.” उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि हमारे जैसी खुली खेती में एक वर्ग मीटर में 6 किलो टमाटर पैदा होते हैं, जबकि वहां पॉलीहाउस में एक वर्ग मीटर में टमाटर का उत्पादन 100 किलो है.

उन्होंने आगे कहा, “प्रतिनिधिमंडल ने विदेशी निवेश और विश्वव्यापी साझेदारी को प्रोत्साहित करने तथा सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवाचार क्षेत्रों में अवसरों की पड़ताल के उद्देश्य से निवेश रोड शो भी किया.” उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीक और बागवानी मॉडलों को अपनाने, स्टार्ट-अप्स, अनुसंधान और कौशल विकास को प्रोत्साहित करने तथा पंजाब को विश्व स्तरीय निवेश और प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार के प्रयासों ने वांछित परिणाम दिए क्योंकि मोहाली में एक अनुसंधान और विकास केंद्र तथा नवाचार हब का प्रस्ताव पेश किया गया था.” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब में एक बागवानी अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना को भी मंजूरी दे दी गई है. साथ ही उन्होंने कहा कि प्रवासी पंजाबी बेअदबी विरोधी कानून बनाने और पहली बार किसी पंजाबी प्रतिनिधिमंडल द्वारा नीदरलैंड का दौरा करने पर वे बहुत खुश हैं.

उन्होंने आगे कहा, “विदेशी कंपनियां राज्य में निवेश और साझेदारी के लिए मजबूत दिलचस्पी दिखा रही हैं, जो प्रौद्योगिकी ट्रांसफर, अनुसंधान और स्टार्ट-अप्स में सहयोग के लिए नए अवसर खोलेगी.” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह फसल विविधीकरण और उच्च तकनीकी खेती को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे पंजाब का विश्व पटल पर एक नवाचार-आधारित और निवेशक-अनुकूल राज्य के रूप में मजबूत अक्स बनेगा.”

उन्होंने आगे कहा, “20 अप्रैल को मैं महान डच हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवलैंडर से मिला और पंजाब में हॉकी व खेलों को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि वे जल्द ही हॉकी को बड़ा प्रोत्साहन देने के लिए पंजाब का दौरा करेंगे.” उन्होंने बताया कि बोवलैंडर को पंजाब आने का निमंत्रण दिया गया था और उन्हें बताया गया कि पंजाब पहली बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा, जो राज्य और हॉकी के लिए बड़ा प्रोत्साहन होगा.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस दौरे को जारी रखते हुए 21 अप्रैल को प्रतिनिधिमंडल ने एन.एक्स.पी. सेमीकंडक्टर और आल्समीर फ्लावर ऑक्शन का दौरा किया तथा एल.टी. फूड्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. साथ ही कृषि, मत्स्य पालन, फूड सिक्योरिटी और प्रकृति मंत्रालय से बातचीत की.” उन्होंने आगे कहा, “यह चर्चा व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाने, वैश्विक सप्लाई चेन में साझेदारी को मजबूत करने, कृषि और फूलों की खेती में विश्व स्तरीय मॉडलों को अपनाने, किसानों की आय बढ़ाने तथा युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर आधारित थी.”

उन्होंने कहा कि निवेश और तालमेल के लिए इन नई संभावनाओं की खोज के बाद पंजाब को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. फूलों की खेती और आधुनिक कृषि मॉडलों के बारे में जानकारी ली गई, कृषि में नवाचार और प्रौद्योगिकी पर चर्चा हुई तथा किसानों की आय बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के रास्ते तैयार किए गए.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एन.एक्स.पी. ने निवेश की अन्य संभावनाओं की पड़ताल करने के साथ-साथ राज्य में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है.” उन्होंने आगे कहा कि इन कंपनियों को बताया गया कि पंजाब में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ बुनियादी ढांचा और अनुकूल माहौल उपलब्ध है. “इससे राज्य के आर्थिक विकास और लोगों की खुशहाली को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा.”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दावत राइस ब्रांड वाली एलटी फूड्स ने भी राजपुरा में निवेश करने के लिए सहमति दे दी है.” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी दुनिया के 80 देशों को चावल निर्यात करती है और यह राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. चावलों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक विश्व भर में सराहनीय रही है और इससे राज्य को बड़ा लाभ मिलेगा. उन्होंने फ्लावर ऑक्शन का भी दौरा किया जहां एक सुचारू प्रणाली के माध्यम से रोजाना 4 करोड़ से अधिक फूलों का व्यापार किया जाता है.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस दौरान 22 अप्रैल को प्रतिनिधिमंडल फिनलैंड दौरे पर गया जहां उन्होंने पंजाबी समुदाय से बातचीत की और फिनलैंड के राजदूत हेमंत एच. कोटलवाड़ से मुलाकात की.” उन्होंने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य प्रवासी पंजाबियों से जुड़ना, लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना, शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में प्रवासियों की भूमिका पर चर्चा करना, निवेश, नवाचार और स्टार्ट-अप के अवसरों की पड़ताल करना तथा पंजाब सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों की जानकारी साझा करना था.

उन्होंने कहा कि इससे पंजाबी समुदाय के साथ संबंधों और विश्वास को और मजबूत करने में मदद मिली है, शिक्षा और कौशल विकास में सहयोग के रास्ते खुले हैं तथा निवेश और नवाचार संबंधी नए रास्ते खुल गए हैं. उन्होंने बताया कि फिनलैंड की हॉकी टीम में पांच खिलाड़ी पंजाबी हैं.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हॉकी क्लब ने फिनलैंड हॉकी क्लब द्वारा जीता गया स्वर्ण पदक प्यार और सम्मान के प्रतीक के रूप में उन्हें भेंट किया.” उन्होंने आगे कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाबी खिलाड़ी दुनिया भर में अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं. पंजाबी खिलाड़ी न केवल भारत बल्कि दुनिया भर की टीमों के लिए हॉकी खेल रहे हैं.”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब की नीतियों और उपलब्धियों की विश्व स्तर पर मान्यता के साथ-साथ स्टार्ट-अप्स और उद्यमिता में संभावित साझेदारी की भी पड़ताल की गई. उन्होंने आगे कहा, “23 अप्रैल को प्रतिनिधिमंडल ने फिनलैंड के आधुनिक शिक्षा मॉडल का अध्ययन किया और प्री-सर्विस ट्रेनिंग तथा निरंतर व्यावसायिक विकास के बारे में गहरी समझ हासिल की.” उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने क्लासरूम अभ्यासों, मूल्यांकन प्रणालियों और सीखने के माहौल संबंधी डिजाइन के अलावा बाल-केंद्रित और खेल-आधारित प्रशिक्षण प्रणालियों का भी अध्ययन किया.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अध्यापक प्रशिक्षण और ईसीसीई में साझेदारी की पड़ताल करने के साथ-साथ पंजाब में अध्यापक क्षमता, मेंटरिंग और लीडरशिप को मजबूत करने के लिए भी विचार-विमर्श किया गया. इससे फिनलैंड की उन्नत शिक्षा प्रणाली, क्लासरूम प्रबंधन तथा मूल्यांकन अभ्यासों के बारे में गहरी जानकारी प्राप्त हुई. अध्यापक प्रशिक्षण और ईसीसीई में सहयोग के अवसरों की पड़ताल के अलावा अध्यापक प्रशिक्षण और लीडरशिप को मजबूत करने के लिए भी साझेदारी की गई.”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मीटिंगों के दौरान शिक्षा क्षेत्र में नवाचार के भविष्य के अवसरों पर भी विस्तृत चर्चा की गई. प्रतिनिधिमंडल ने रकू यूनिवर्सिटी और इसके अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन एंड केयर सेंटर का भी दौरा किया. पंजाब सरकार की ओर से पहले ही तीन बैचों के माध्यम से 216 प्राइमरी अध्यापकों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जा चुका है. पहला बैच 20 अक्टूबर से 8 नवंबर, 2024 को, दूसरा बैच 17 से 28 मार्च, 2025 को, तीसरा बैच 17 से 18 नवंबर, 2025 को भेजा गया था और 72 अध्यापकों का चौथा बैच 18 मई, 2026 को भेजा जाएगा.”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने पंजाब को दुनिया भर में सबसे पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में प्रस्तुत किया है. पहले जापान और कोरिया के दौरे के सार्थक नतीजे सामने आए क्योंकि राज्य सरकार इन दोनों देशों से निवेश आकर्षित करने में सफल रही थी. मुझे उम्मीद है कि नीदरलैंड और फिनलैंड की यह यात्रा भी राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन देगी.” इस मौके पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और संजीव अरोड़ा, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे.

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अमन अरोड़ा ने शाहकोट हलके में नौकरियों के मामले में कांग्रेसी विधायक लाडी को घेरा

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पंजाब विधान सभा में विपक्ष को घेरते हुए पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं और 1,83,837 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में 6,36,636 नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं।

आज सदन में विधायक स. कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा रोजगार के अवसरों के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने सदन को बताया कि इस बड़े निवेश प्रवाह ने सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र में 6.36 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने जापान की प्रमुख स्टील कंपनी आइची स्टील का उदाहरण दिया, जिसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की सुविधाओं और कारोबार को आसान बनाने वाली नीतियों से प्रभावित होकर अपने नियोजित निवेश को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया है।

कांग्रेस के विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया द्वारा उनके शाहकोट विधानसभा हलके में किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी न मिलने के आरोप पर श्री अमन अरोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने शाहकोट हलके में सभा रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ”मैं आऊंगा और हम लोगों से पूछेंगे, क्या उन्हें नौकरियां मिली हैं। अगर मैं गलत हुआ, तो मैं मंत्री पद और विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दूंगा। अगर मैं सही हुआ तो लाडी को इस्तीफा देना होगा।” कांग्रेसी विधायक लाडी ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की और चर्चा छोड़कर बैठ गए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल योग्यता के आधार पर दी हैं।

श्री अमन अरोड़ा ने कौशल विकास के लिए राज्य सरकार के रिकॉर्ड प्रयासों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के बजट में 75 सालों में पहली बार कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 10 करोड़ रुपये थे। उन्होंने दावा किया कि 22 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार में प्लेसमेंट कैंपों और हैंडहोल्डिंग अभ्यासों के माध्यम से सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि सुनाम में हाल ही में आयोजित एक मेगा रोजगार मेले में, 61 कंपनियों ने भाग लिया और लगभग 700 नौजवानों को मौके पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए।

रोजगार सृजन मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से संगरूर जिले में विश्व स्तरीय संत अतर सिंह महाराज आर्म्ड फोर्सेज प्रेपरेटरी इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। यह विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है, जहां सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी स्तर के पदों के लिए वार्षिक 500 नौजवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि 15-29 साल आयु वर्ग में पंजाब की बेरोजगारी दर वर्ष 2022 की 19.1 प्रतिशत से घटकर 2025 में 17 प्रतिशत हो गई है। मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अब पंजाब बेहतर रोजगार मैट्रिक्स वाले राज्यों में शामिल है।

वैश्विक स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत की जीडीपी चीन से थोड़ी अधिक थी। उन्होंने कहा, ”चीन ने अपने प्रत्येक व्यक्ति को काम पर लगाया और दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनकर उभरा। चीन निकट भविष्य में अमेरिका को पछाड़ सकता है। हमारे पास वही क्षमता है, लेकिन सही वातावरण की कमी थी। पर अब हम इसे ठीक कर रहे हैं।”

कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार प्रत्येक नागरिक को नौकरी देने की गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का असल कर्तव्य उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा, ”हम यहां केवल आंकड़े पेश करने के लिए नहीं हैं। हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां हर नौजवान अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”

विपक्ष द्वारा नौकरियों के बारे में व्हाइट पेपर जारी करने की मांग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छा, सस्ता और टिकाऊ व्हाइट पेपर लोगों से सीधे तौर पर पूछना है। आरटीआई दायर करो या लोगों के साथ मीटिंग करो। लोग खुद बताने देंगे कि उन्हें नौकरियां मिली हैं या नहीं।”

श्री अमन अरोड़ा ने पिछली कांग्रेस सरकार के ‘हर घर नौकरी’ वादे पर कटाक्ष करते हुए इसे पंजाब के नौजवानों के साथ ‘सबसे बड़ा धोखा’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना किसी रिश्वत के पारदर्शी तरीके से 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब को ‘कारोबार करने में आसानी’ के लिए एक मॉडल राज्य बनाना और सम्मानजनक, कौशल-आधारित रोजगार पैदा करना है।

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सियाम ने भी माना, ई-20 में ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण खराब हो रही गाड़ियां- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 को लेकर सियाम की सौंपी गई रिपोर्ट को वापस कराने पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सियाम (सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि ई-20 में बहुत ज्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे आपकी गाड़ियां ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने सियाम पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापस करवा दी। क्यों? जब विज्ञान और इंजीनियरिंग कह रहे हैं कि ई-20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 को लेकर सियाम की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सियाम ने रिसर्च की और ऑटोमोबाइल के सभी मैन्युफैक्चरर्स ने मिलकर यह पाया कि क्लोराइड और मॉइस्चर ज्यादा होने की वजह से ई-20 गाड़ियों को खराब कर रहा है। सियाम ने 28 जुलाई को मोदी सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी थी। 4 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सियाम पर जबरदस्ती करके वह रिपोर्ट वापस करा दी। रिपोर्ट वापस करने के बाद सियाम की तरफ से कहा गया कि शायद उनकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी है और कुछ तथ्यों को दोबारा चेक करने की जरूरत है। एक तरह से मोदी सरकार जबरदस्ती करके पूरे देश पर ई-20 थोप रही है, लेकिन क्यों?

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RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट 5.25% पर रखा, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को लगातार तीसरी बार अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखने का फैसला किया। RBI के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग से आर्थिक विकास को सहारा मिल रहा है और अप्रैल-जून तिमाही का प्रदर्शन RBI के अनुमान से बेहतर रहा है।

तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मजबूती से शहरी खपत में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अल नीनो से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी प्रभावित हो रहे हैं।

संजय मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। उनका अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होगी। उन्होंने कहा कि महंगाई पर सबसे अधिक असर खाद्य और ईंधन की कीमतों का है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

गवर्नर ने बताया कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता (Liquidity) 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है और पर्याप्त तरलता उपलब्ध है।

RBI ने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव डाल सकती है।

इस बीच रुपया भी लगातार दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ता व्यापार घाटा और मजबूत होता डॉलर रुपये पर लगातार दबाव बना रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 फीसदी कमजोर हो चुका है, जबकि ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद इसमें लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

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