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Punjab के घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में कटौती

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पंजाब भर में घरों, कारोबारों और उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में कटौती की गई है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरें प्रति यूनिट 1.5 रुपये तक, व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 79 पैसे प्रति यूनिट और औद्योगिक इकाइयों के लिए 74 पैसे प्रति यूनिट तक कम की गई हैं।

पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग द्वारा विश्वजीत खन्ना, आईएएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता और सदस्य रविंदर सिंह सैनी (सदस्य तकनीकी) तथा रवि कुमार (सदस्य कानूनी) की मौजूदगी में जारी किया गया नया टैरिफ आदेश 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक लागू हो जाएगा।

इस फैसले को बड़ा जन-हितैषी कदम करार देते हुए बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि विभिन्न श्रेणियों के टैरिफ में कटौती से घरेलू उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी, एम.एस.एम.ई. मजबूत होंगे और पंजाब में औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बल मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि ई.वी. चार्जिंग टैरिफ को 5 रुपये प्रति यूनिट तक कम किया गया है, जो देश में सबसे कम है, साथ ही पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के वित्तीय सुधारों के साथ, जिसने ए+ रेटिंग प्राप्त की है और 2634 करोड़ का मुनाफा कमाया है। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की कुशल अगुवाई के तहत पंजाब के बिजली क्षेत्र की बढ़ती दक्षता की मुखर तस्वीर है।

संशोधित टैरिफ ढांचे से बिजली क्षेत्र की वित्तीय मजबूती के साथ-साथ उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर बिजली मिलेगी। घरेलू उपभोक्ताओं को खपत स्लैब के आधार पर प्रति यूनिट 1.5 रुपये तक की कटौती, व्यावसायिक संस्थानों को प्रति यूनिट 79 पैसे तक की कटौती का लाभ और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 74 पैसे तक की कटौती की राहत मिलेगी।

मीडिया से बातचीत में बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी अगुवाई के तहत पंजाब सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि बिजली दरें उपभोक्ता-अनुकूल रहें और राज्य में औद्योगिक विकास तथा आर्थिक विकास को भी बल मिले।’’

घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाले लाभों के बारे में बताते हुए संजीव अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार की मुफ्त बिजली पहल के माध्यम से राज्य के लोगों को पहले की तरह काफी सहायता मिलती रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘प्रति माह 300 यूनिट बिजली, और जो प्रति बिलिंग साइकिल 600 यूनिट है, के माध्यम से घरों के लिए पूरी तरह मुफ्त बिजली दी जा रही है। पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घर पहले ही भगवंत सिंह मान सरकार द्वारा शुरू की गई मुफ्त बिजली योजना का लाभ ले रहे हैं।’’

उन्होंने आगे कहा कि मुफ्त कोटे से अधिक खपत करने वाले घरों के लिए भी, टैरिफ घटा दिए गए हैं। मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, “300 यूनिटों से अधिक खपत के लिए, टैरिफ में प्रति यूनिट 0.70 रुपये की कटौती की गई है, जिससे अधिक खपत वाले घरों को भी काफी राहत मिलेगी।”

पंजाब सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिक्स्ड चार्ज भी घटा दिए हैं। 2 किलोवाट से 7 किलोवाट के बीच लोड वाले घरों के लिए, फिक्स्ड चार्ज 5 रुपये प्रति किलोवाट, जबकि 7 किलोवाट से 20 किलोवाट के बीच लोड वाले घरों के लिए, फिक्स्ड चार्ज 10 रुपये प्रति किलोवाट घटा दिए गए हैं।

संशोधित टैरिफ ढांचे से व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी काफी लाभ होगा

मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, “7 किलोवाट तक लोड वाले व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए, 500 यूनिटों तक खपत के लिए टैरिफ में 0.79 रुपये प्रति यूनिट और 500 यूनिटों से अधिक खपत के लिए 0.65 रुपये प्रति यूनिट की कटौती की गई है।”

पीएसपीसीएल संचालन दक्षता और वित्तीय प्रदर्शन को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। मुख्य लक्ष्यों में वितरण घाटे को लगभग 20 प्रतिशत घटाना, बेहतर योजना और खरीद के माध्यम से बिजली खरीद लागतों को कम करना, और बिजली मिश्रण में नवीकरणीय और हरित ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ाना शामिल है। ये कदम पीएसपीसीएल की वित्तीय सेहत को और मजबूत करेंगे, समय के साथ सब्सिडी निर्भरता को घटाएंगे और पंजाब के लोगों के लिए विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।

जन कल्याण और आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि यह पंजाब में औद्योगिक विकास और निवेश का समर्थन करते हुए किफायती, विश्वसनीय और टिकाऊ बिजली प्रदान करने के लिए काम करना जारी रखेगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, पेशेवरों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से, पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल से पंजीकृत और अदालती परिसरों में स्थित वकीलों के चैंबरों में बिजली कनेक्शन अब व्यावसायिक टैरिफ के बजाय घरेलू टैरिफ के तहत लिए जाएंगे।

टैरिफ आदेश में यह भी बताया गया है कि बिजली क्षेत्र में संचालन दक्षताओं ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए कुल 7851.91 करोड़ रुपये की उपभोक्ता राहत को संभव बनाया है।

यह विकास भगवंत मान सरकार के अधीन पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के वित्तीय परिवर्तन को भी दर्शाता है। आदेश में कहा गया है कि बिजली क्षेत्र में नियामकीय ढांचे और वित्तीय अनुशासन ने पीएसपीसीएल को एक कुशल और लाभ कमाने वाली बिजली उपयोगिता बनने के योग्य बनाया है। 31 मार्च, 2025 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में ए+ रेटिंग प्राप्त की है और 2634 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है।

टैरिफ आदेश का एक अन्य बड़ा आकर्षण पंजाब में बिजली आपूर्ति की औसत लागत में कटौती है। औसत लागत पिछले साल के 7.15 रुपये प्रति यूनिट की तुलना में घटकर 6.15 रुपये प्रति यूनिट हो गई है, जिससे यह पिछले दस सालों में सबसे कम औसत बिजली लागत बन गई है।

टैरिफ आदेश ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए बिजली दर को 5 रुपये प्रति यूनिट घटाकर स्वच्छ गतिशीलता को बड़ा बल प्रदान करता है, जिससे पंजाब देश में सबसे कम ईवी चार्जिंग दरों वाले राज्यों में शामिल हो गया है।

इसके अलावा आयोग ने कारोबार करने में आसानी को प्रोत्साहित करने के लिए छोटी बिजली श्रेणी के लिए लागू सीमा को 20 किलोवाट से 50 किलोवाट तक बढ़ाने, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए विशेष रात के टैरिफ लाभों को जारी रखने, और उद्योगों द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए ग्रीन ऊर्जा दर में कमी सहित कई उपभोक्ता-अनुकूल उपाय पेश किए हैं।

उन्होंने कहा कि पीएसपीसीएल संचालन कुशलता और वित्तीय प्रदर्शन को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। मुख्य लक्ष्यों में वितरण हानि को लगभग 20 प्रतिशत तक कम करना, बेहतर योजना और खरीद के माध्यम से बिजली खरीद लागत को घटाना तथा पावर मिक्स में नवीकरणीय और हरित ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ाना शामिल है। ये कदम पीएसपीसीएल की वित्तीय संरचना को और मजबूत करेंगे, समय के साथ सब्सिडी पर निर्भरता को कम करेंगे और पंजाब के लोगों के लिए भरोसेमंद, किफायती और टिकाऊ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।

लोक कल्याण और आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि यह पंजाब में औद्योगिक विकास और निवेश का समर्थन करते हुए किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ बिजली प्रदान करने के लिए काम करना जारी रखेगा।

पंजाब के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरें

घरेलू उपभोक्ता

– 300 यूनिट/माह मुफ्त रहेगा (90% से अधिक परिवारों को लाभ)

– 300 यूनिट तक : 5.40 रुपये से घटाकर 3.85 रुपये प्रति यूनिट (1.55 रुपये राहत)

– 300 यूनिट से अधिक : 7.75 रुपये से घटाकर 7.05 रुपये प्रति यूनिट (0.70 रुपये राहत)

व्यावसायिक उपभोक्ता

– 500 यूनिट तक: 6.89 रुपये से घटाकर 6.10 रुपये प्रति यूनिट (0.79 रुपये राहत)

– 500 यूनिट से अधिक: 7.75 रुपये से घटाकर 7.10 रुपये प्रति यूनिट (0.70 रुपये राहत)

औद्योगिक उपभोक्ता

– छोटा उद्योग: 5.82 रुपये से घटाकर 5.70 रुपये प्रति यूनिट

– मध्यम उद्योग: 6.25 रुपये से घटाकर 5.83 रुपये प्रति यूनिट

– बड़ा उद्योग: 6.60 रुपये से घटाकर 5.90 रुपये प्रति यूनिट

– प्रति यूनिट 0.74 रुपये तक राहत

ई.वी. चार्जिंग स्टेशन

– 6.28 रुपये से घटाकर 5 रुपये प्रति यूनिट

– भारत में सबसे कम ई.वी. चार्जिंग टैरिफ में से एक

अन्य मुख्य लाभ

– उपभोक्ताओं को 7851 करोड़ रुपये की राहत

– औसत बिजली लागत घटाकर 6.15 रुपये /यूनिट (10 सालों में सबसे कम)

– पीएसपीसीएल का मुनाफा 2634 करोड़ रुपये ए+ रेटिंग के साथ

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कलाकार रहते हुए शब्दों से सिस्टम पर चोट की, अब सिस्टम को बदल रहा हूं; CM Mann बोले- मुफ्त सेवाएं जारी रहेंगी

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देश की राजनीति में भगवंत मान एक मात्र एसे मुख्यमंत्री हैं जो स्टेज से लेकर स्टेट तक को लीड कर रहे हैं। बतौर कलाकार मुख्यमंत्री भगवंत मान की ताकत ‘पोलटिकल सटायर’ हुआ करती थी। जो राजनीतिक सिस्टम पर चोट करती थी। 2022 में भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उनके हाथों में हरा कलम आ गया।

मुख्यमंत्री कहते हैं-

“बतौर कलाकार मैं अपने शब्दों से सिस्टम पर चोट करता था। लोगों ने हाथों में हरा कलम जब से थमाया है। तब से मैं सिस्टम को बदल रहा हूं। ताकि सिस्टम में सुधार हो। विचार मंच के दौरान ‘चुनौतियां और राह’ पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि 70 साल का घाटा चार वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकता।”

आम आदमी पार्टी ने भले ही चुनाव में लोगों से किए गए गारंटियों को पूरा कर दिया हो लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस दौरान उन्होंने न अपने निजी जीवन से लेकर पंजाब के राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर खुल कर विचार रखे।

गरीबों को मिलने वाली मुफ्त योजना जारी रहेगी

मु्ख्यमंत्री ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया तो कहा गया कि ‘रेवड़ियां’ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा ‘फिर 15 लाख का पापड़ पहले किसने बेचा था। अब कह रहे हैं कि जुमला था। नेताओं का तो टोल भी फ्री है और गाड़ी भी। तेल भी फ्री हैं जो टेलीफोन का बिल भी। जब गरीबों को बिजली, राशन, ईलाज, बस सफर मिलता हैं तो इन नेताओं को दर्द क्यों होता है।

गरीब आदमी भले ही डायरेक्ट टैक्स नहीं देता लेकिन इन डायरेक्ट टैक्स तो देता ही है। गरीब आदमी के चाय से लेकर रात को सोते समय चलने वाले पंखे पर भी टैक्स है।’ उन्होंने कहा कि अंबानियों का जब कर्जा माफ हो जाता हैं तो गरीबों को सहूलियत क्यों नहीं दिया जा सकता है।

यह योजनाएं बंद नहीं होगी। क्योंकि जब आम लोगों को यह भरोसा हो जाए कि उसके द्वारा दिए जाने वाला इन-डायरेक्ट का लाभ उन्हें ही मिलेगा तो उन्हें टैक्स देने का दुख नहीं होता।

भेदभाव- बस चले तो राष्ट्रीय गान से पंजाब का नाम हटा दें

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता हैं। क्योंकि पंजाब के किसानों ने दिल्ली में धरना देकर तीन काले कानून वापस करवाए। केंद्र ने पंजाब के 9000 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास फंड रोका हुआ है।

उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर वेब-सिरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसें भी यही दिखाया गया हैं कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना हैं कि वेब सिरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।

मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि अगर इनका बस चले तो जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें उत्तर प्रदेश फिट कर लें। भगवंत मान ने कहा पंजाब में फसलें खराब हुई लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई। जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।

फसल बीमा योजना फ्लाप

पिछले वर्ष आई बाढ़ और अप्रैल माह में हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण खराब हुई फसल के बाद विपक्षी पार्टियों द्वारा फसली बीमा का मुद्दा उठाने को लेकर उठे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा ‘यह योजना फ्लाप है। जिन राज्यों में फसली बीमा लागू हैं वहां पर जाकर किसानों से पूछे तो पता चल जाएगा कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन बीमा बेचना होता हैं तो कंपनी कई प्रकार के वायदे करती हैं लेकिन बाद में मुकर जाती है। अपने एक दोस्त का उद्हारण देते हुए कहा कि वह अपने बेटे के जीवन बीमा का कवर लेने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में फसल खराबे की सबसे अच्छी भरपाई आम आदमी पार्टी ने की है।

बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान हुआ तो पंजाब सरकार ने देश में सबसे अधिक 20,000 रुपये प्रति एकड़ की भरपाई की। बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान की भी गिरदावरी हो चुकी है। किसानों की भरपाई की जाएगी।

फसली विविधिकरण संभव नहीं, धान होगा तो पराली भी होगी

किसानों को पारंपरिक खेती से मुक्ति दिलवाने के उठ रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन देने मात्र से फसली चक्र नहीं टूटने वाला है। इसके लिए किसानों को बदली हुई फसल का मूल्य देना होगा। दीवारों पर हमने बहुत लिखा कि ‘हम दो हमारे दो’ तो इससे क्या जनसंख्या नियंत्रित हो गई। पराली में लगने वाली आग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असली कारण को समझना ही होगा।

अक्टूबर-नवंबर में दशहरा-दीपावली और दशहरा एक साथ आते हैं। किसान धान की पराली में इसलिए आग लगाता हैं क्योंकि उसे 10 से 12 दिन के भीतर गेहूं की फसल लगानी होती है। जब पंजाब 185 लाख मिट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में देता हैं तो पंजाब बहुत अच्छा लेकिन इसके साथ पराली भी तो होगी। जब किसान पराली जलाते हैं तो कहा जाता हैं कि किसानों पर पर्चा दर्ज कर दो।

10 दिन से किसान अन्नदाता से अपराधी बन जाता है

दस दिन पहले जो किसान अन्नदाता होता हैं 10 दिन बाद ही वह अपराधी बन जाता है। किसानों को पराली संभालने का इंसेंटिव देना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलती भी नहीं हैं कि दिल्ली में हंगामा शुरू हो जाता है। एनजीटी के सेवानिवृत्त जज ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब को यूं ही बदनाम किया जाता है।

पंजाब के धुएं से दिल्ली को असर नहीं पड़ता। लेकिन जज साहब ने यह बात तब कहीं जब वह सेवानिवृत्त हो गए। सर्विंग में होते हुए उन्होंने यह बात नहीं कहीं। मुख्यमंत्री ने मार्डन खेती पर विशेष जोर दिया।

पंजाब के छात्र जमीन पर नहीं बैठते

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। स्कूल आफ एमिनेंस तो बने ही हैं साथ ही पंजाब का अब कोई भी ऐसा स्कूल नहीं हैं जहां पर बच्चे जमीन पर पढ़ते हो। कोई स्कूल ऐसा नहीं हैं जो बिना चाहरदिवारी के हो। स्कूलों में लैब बने हैं और सकरारी स्कूल के बच्चे जेईई और नीट की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह वहीं स्कूल जहां दो-तीन साल पहले तक बच्चों को जेईई और नीट के बारे में पता तक नहीं था।

ड्रग्स को लेकर पंजाब बदनाम किया जा रहा

ड्रग्स के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, बदनाम तो पंजाब को किसा जाता हैं लेकिन 3000 किलों ड्रग्स मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी जाती है। पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ मुहीम चला रही है। वहीं, नए इनोवेशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रति दिन 15 मौतें सड़कों पर हो रही थी।

लोग इसे कुदरती आपदा मानते थे लेकिन यह मानवीय आपदा थी। मुख्यमंत्री ने कहा जब मैंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आई। आज प्रति वर्ष 2600 कीमती जानें बचाई जा रही है।

पंजाब से हमेशा भेदभाव हुआ

मुख्यमंत्री ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर आई वेब सीरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी यही दिखाया गया है कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वेब सीरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।

सीएम ने कहा कि अगर इनका बस चले तो राष्ट्रगान जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें यूपी फिट कर लें। खराब मौसम से पंजाब में फसलें खराब हुईं लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई, जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।

पंजाब के अंतिम छोर तक पहुंचा नहरी पानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में सरकार संभालने के बाद उन्होंने पंजाब के लोगों से वादा किया था कि वह पंजाब के अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंचाएंगे, क्योंकि नहरी पानी में मिनरल्स होते हैं जो फसल के लिए अच्छे होते हैं। पहले हम 21 फीसद नहरी पानी का प्रयोग कर रहे थे, जोकि अब 74 फीसद हो चुका है। अगर इसे क्यूसिक के हिसाब से देखे तो चार वर्षों में 11,000 क्यूसिक अतिरिक्त पानी खेतों तक पहुंचा।

इसका मतलब है कि भाखड़ा नहर के बराबर पानी। इसका असर भी देखने को मिला। पंजाब में 12 ब्लाकों में पहली बार जलस्तर बढ़ गया। जब नहरी पानी खेतों में जाएगा तो किसान को ट्यूबवेल नहीं चलाना पड़ेगा। इससे भूजल भी बचेगा। पिछली सरकारों ने कभी इस पर ध्यान ही नहीं दिया। पहले तो एसी कमरों में बैठकर ही फैसले हो जाते थे। मैं जब वहां गया तो दिक्कत देखी और यह फैसला लिया।

केंद्र से काम करवाना नहीं आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को कृषि कानून वापस लेने का अब भी मलाल है। इसकी टीस भाजपा को हमेशा रहती है और इसी कारण वह पंजाब के लोगों की आवाज दबाने का प्रयास करती रहती है। इस सरकार से कोई काम निकलवाने के लिए उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है।

हमें भी पता है कि सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला, इसलिए हमने तो पूरा पंजा ही टेढ़ा किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की राह में कदम-कदम पर केंद्र सरकार बाधाएं खड़ी करती है। ग्रामीण विकास फंड का नौ हजार करोड़ रुपये अभी तक रोक रखा है।

अन्य फंड जारी करने में भी अड़चनें डाली जाती हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उड़ीसा से कोयला पंजाब लाने के लिए कहा गया कि वाया श्रीलंका, मुंद्रा पोर्ट लेकर आओ, लेकिन जब हमने यह मामला अपने तरीके से तत्कालीन कोयला मंत्री आरके सिंह के समक्ष उठाया तो उन्होंने अपना आदेश वापस लिया।

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ईरान ने होर्मुज में कार्गो जहाज पर किया अटैक, Trump के सीजफायर बढ़ाने के प्रस्ताव से इनकार

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होर्मुज की खाड़ी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच आज खत्म हो रहे सीजफायर के बीच ईरान ने एक कार्गो जहाज पर हमला बोल दिया है। आज सुबह ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने एक कंटेनर जहाज पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही घंटों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान किया था। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है।

बिना चेतावनी दिए बोला हमला

ब्रिटिश सेना के United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) केंद्र के अनुसार, यह हमला बुधवार सुबह करीब 7:55 बजे हुआ। ईरानी बंदूकधारी नाव ने जहाज को रुकने या रेडियो पर कोई चेतावनी दिए बिना ही फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग की वजह से कंटेनर जहाज को नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह है कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। हमले से किसी तरह के तेल रिसाव या पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है।

पिछले हमलों का लिया बदला?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह कार्रवाई पिछले कुछ दिनों में अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों का नतीजा हो सकती है। आपको बता दें कि पिछले वीकेंड अमेरिका ने ईरान के एक कंटेनर जहाज को गोलीबारी के बाद जब्त कर लिया था। हिंद महासागर में ईरान के तेल व्यापार से जुड़े एक टैंकर पर भी अमेरिकी बलों ने कब्जा किया था।

इस्लामाबाद वार्ता पर संकट के बादल

पाकिस्तान की मध्यस्थता में जो शांति वार्ता होने वाली थी, वह अब और मुश्किल में पड़ती दिख रही है। ताजा हमले के बाद वार्ता की मेज पर ईरान और अमेरिका का आमने-सामने आना अब और भी अनिश्चित हो गया है। शिपिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज में इस तरह की ‘बिना चेतावनी’ वाली फायरिंग समुद्री व्यापार के लिए बहुत बड़ा खतरा है। कुल मिलाकर एक तरफ ट्रंप शांति प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान समंदर में अपनी ताकत दिखाकर यह संदेश दे रहा है कि वह नाकेबंदी को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।

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CM के प्रयासों को मिलने लगी सफलता, पंजाब सरकार वर्ल्ड हार्टी सेंटर इकोसिस्टम की तर्ज पर बागवानी अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र करेगी स्थापित

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एक रणनीतिक समझौते के तहत, जो किसानों की तकदीर बदलने में अहम साबित होगा, राज्य सरकार वर्ल्ड हार्टी सेंटर इकोसिस्टम की तर्ज पर पंजाब में एक समर्पित बागवानी अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जो फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों का हिस्सा होगा।

आज नीदरलैंड में निवेश प्रोत्साहन आउटरीच के तहत अपने दौरे के हिस्से के रूप में मुख्यमंत्री ने टिकाऊ कृषि, पुष्प खेती और उच्च-क्षमता वाली कृषि प्रणालियों में सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने के लिए वर्ल्ड हार्टी सेंटर (डब्ल्यू.एच.सी.), वेस्टलैंड और विश्व प्रसिद्ध केयूकेनहॉफ, लिसे सहित प्रमुख बागवानी संस्थानों का दौरा किया। उन्होंने पंजाब में ऐसा ही केंद्र स्थापित करने का विचार प्रस्तुत किया और कहा कि प्रस्तावित केंद्र शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और सरकारी भागीदारों को एकजुट करके राज्य में नवाचार, कौशल विकास और टिकाऊ कृषि समाधानों को अपनाने में मदद करेगा। वर्ल्ड हार्टी सेंटर, जो ग्रीनहाउस हॉर्टिकल्चर इनोवेशन के लिए एक वैश्विक केंद्र है, पर सीईओ पैक वैन होल्स्टीन और मैनेजर इंटरनेशनल बिजनेस लैनी डिज्क्शूर्न ने भगवंत सिंह मान का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री को संस्थान का व्यापक दौरा करवाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अनोखा अनुभव था क्योंकि उन्हें नीदरलैंड के ग्रीनहाउस और नियंत्रित-वातावरण कृषि के विश्व प्रसिद्ध इकोसिस्टम से परिचित करवाया गया, जहाँ प्रौद्योगिकी, शोध, शिक्षा, उद्योग और सरकार के सहयोगात्मक प्रयासों ने पारंपरिक कृषि को उच्च-उत्पादकता वाली और टिकाऊ कृषि में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य विशेषताओं में ग्रीनहाउस और उन्नत इनडोर कृषि प्रणालियों की प्रभावशीलता शामिल है, जो पानी के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करते हुए फसलों की पैदावार में महत्वपूर्ण वृद्धि करती हैं, कीटनाशकों पर निर्भरता घटाती हैं और पारंपरिक ओपन-फील्ड कृषि की तुलना में किसानों की आय में वृद्धि करती हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह राज्य के लिए फसल विविधता को बड़ा बढ़ावा देने और किसानों को पानी की अधिक खपत वाली फसलों के चक्र से बाहर निकालने के लिए अधिक मददगार साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधों के विकास और संसाधन कुशलता को और बेहतर बनाने में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों की भूमिका है। इसके साथ ही नवीन जल प्रबंधन प्रथाओं जैसे कि वर्षा जल संरक्षण, सिंचाई के पानी का पुनः उपयोग और नियंत्रित पोषक तत्व वितरण प्रणालियों की भूमिका भी जलवायु के अनुकूल कृषि उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सूचना के आदान-प्रदान और प्रौद्योगिकी साझेदारी सहित सहयोग की संभावनाओं को तलाशने और सिद्धांततः इस पर सहमति जताई। इससे पहले, भगवंत सिंह मान ने दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पुष्प खेती स्थलों में से एक, केयूकेनहॉफ का दौरा किया, जहाँ उन्हें एक अनूठे संचालन मॉडल से परिचित करवाया गया, जहाँ अक्टूबर से शुरू होने वाली पतझड़ के दौरान हर साल लगभग 70 लाख फूलों के बल्ब उगाए और लगाए जाते हैं, और मार्च के दौरान 7-8 सप्ताह के लिए खिलते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 32 हेक्टेयर में फैले और उत्पादकों एवं उद्योग भागीदारों के सहयोग से तैयार किया गया, केयूकेनहॉफ एक उच्च संरचित, निर्यात-उन्मुख बागवानी मॉडल है, जो उत्पादन, पर्यटन और वैश्विक विपणन को एकीकृत करता है। उन्होंने कहा कि इस दौरे ने पंजाब को पुष्प खेती के क्लस्टर विकसित करने, निर्यात संबंधों को मजबूत करने और एक समन्वित एवं बाजार-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से कृषि-पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि दोनों दौरों से सीखने से पंजाब के उच्च-मूल्य, प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि की ओर लौटने की उम्मीद है, जिसमें स्थिरता, उत्पादकता बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था की विविधता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और पंजाब को एक पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में प्रोत्साहित करने में बहुत मदद करेगा। राज्य की औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति (आईबीडीपी) 2026 के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों और व्यापार करने में मजबूत आसानी द्वारा समर्थित एक व्यापक और लचीला प्रोत्साहन ढांचा प्रस्तुत करता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब का उद्देश्य दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी-अगुवाई वाली साझेदारी बनाना, ज्ञान के आदान-प्रदान को आसान बनाना और टिकाऊ कृषि के लिए एक प्रगतिशील, नवाचार-आधारित और विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित होना है।

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