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‘आप’ सरकार के दौरान शिक्षा क्षेत्र में पंजाब के स्कूलों ने बाजी मारी, राष्ट्रीय सर्वेक्षण में केरल को पछाड़कर अग्रणी बना पंजाब- CM भगवंत सिंह मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने “शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल” श्रृंखला के तहत पंजाब सरकार की “शिक्षा क्रांति” का चार सालों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इस रिपोर्ट कार्ड में बताया गया कि निरंतर सुधारों के कारण सरकारी स्कूल मॉडल संस्थानों में बदल रहे हैं, जिसके देश भर में शानदार नतीजे सामने आ रहे हैं।
‘शिक्षा क्रांति’ को पंजाब के विकास की रीढ़ की हड्डी बताते हुए मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय मूल्यांकन में शीर्ष रैंकिंग, रिकॉर्ड शैक्षणिक नतीजे, जीरो पेपर लीक और बुनियादी ढांचे तथा शिक्षक प्रशिक्षण में किए गए बेमिसाल निवेश पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक वित्तीय प्रबंध किए गए हैं। वर्ष 2021-22 में शिक्षा बजट 12,657 करोड़ रुपए था, जो 2026-27 में बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपए कर दिया गया है। यह ‘आप’ सरकार द्वारा इस क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शिक्षा रिपोर्ट कार्ड निरंतर जवाबदेही प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और कानून व्यवस्था जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी चार सालों की कार्यगुजारी संबंधी ऐसा रिपोर्ट कार्ड पेश किया गया था और ये नतीजे शासन के सभी हिस्सों में सरकार द्वारा दिए जा रहे विशेष ध्यान को दिखाते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्कूल और उच्च शिक्षा में किए गए व्यापक सुधारों की रूपरेखा पेश की, जिसमें पिछले चार सालों में किए गए ढांचागत सुधार, रिकॉर्ड निवेश और नतीजों को उजागर किया गया। उन्होंने कहा, “शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले देशों ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। हमारे देश में शिक्षा को निजी और सरकारी स्कूलों में बांट दिया गया था, जिससे शिक्षा में गहरा खाई पैदा हो गई। पिछली सरकारों ने स्कूलों को सिर्फ मिड-डे मील के केंद्रों तक सीमित कर दिया था, लेकिन हमारी सरकार ने पूरी व्यवस्था को बदल दिया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकारी स्कूलों में अब प्राइवेट स्कूलों के बराबर सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे माता-पिता को बेहतर विकल्प मिलेगा। एक अप्रैल से माता-पिता को उनके बच्चे की स्कूल से अनुपस्थिति और शिक्षकों की छुट्टी के बारे में भी सूचित किया जाएगा, जिससे हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। कई अन्य राज्यों खासकर गुजरात के उलट पिछले चार सालों में पंजाब में एक भी पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई, जो बेहद गर्व की बात है।”
प्रशासन में शिक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा किसी भी राज्य या देश की तरक्की और खुशहाली में सबसे ज्यादा योगदान देती है। पिछले चार सालों में हमने इस क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। पहले ‘स्मार्ट स्कूल’ के नाम पर लोगों और मासूम बच्चों को गुमराह किया गया था। स्कूलों को सिर्फ पेंट करके सुंदर बनाया जाता था, लेकिन उनमें उचित सुविधाएं या शिक्षकों की कमी रहती थी। आज पंजाब के सरकारी स्कूल निजी संस्थानों के बराबर खड़े हैं और हमारे शिक्षा मॉडल की चर्चा पूरे देश में हो रही है।”
शिक्षा के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 19,279 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है, जो पिछले साल से 7 प्रतिशत ज्यादा है। हम 3,500 करोड़ रुपए के साथ शिक्षा क्रांति के दूसरे चरण की शुरुआत कर रहे हैं। इसके तहत विश्व बैंक के साथ साझेदारी की गई है, जो इसे देश का सबसे बड़ा शिक्षा सुधार कार्यक्रम बनाता है।”
मुख्य उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पंजाब ने केरल को भी पछाड़कर पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि गुजरात 16वें और हरियाणा लगभग 7वें या 8वें स्थान पर है। यह उपलब्धि हमारे सरकारी स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों की है।”
उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में 740 विद्यार्थियों ने जेईई परीक्षा और 1284 ने नीट परीक्षा पास की है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने सर्वे में राष्ट्रीय औसत से 18 प्रतिशत अधिक अंक प्राप्त किए हैं।”
संस्थागत विस्तार के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 60 पहले ही कार्यशील हैं। ये स्कूल प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनकी योग्यताओं और रुचियों के अनुसार शिक्षा प्रदान करके उनके सपनों को साकार करने में मदद कर रहे हैं। पहली बार 24 लाख माता-पिता ने मेगा पी.टी.एम. में हिस्सा लिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि इन स्कूलों में 30,000 विद्यार्थियों को मुफ्त वर्दियां प्रदान की गई हैं और मेडिकल व नॉन-मेडिकल समेत हर स्ट्रीम की पढ़ाई उपलब्ध है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी, नीट, जेईई और कलैट जैसी परीक्षाओं के लिए कोचिंग भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसके अलावा स्कूल ऑफ एमिनेंस और सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त बस सेवाएं शुरू की गई हैं ताकि कोई भी लड़की शिक्षा से वंचित न रहे। लगभग 15,500 विद्यार्थी इससे लाभ उठा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अप्रैल 2022 से 14,525 शिक्षकों की भर्ती की गई है और शिक्षा विभाग के 12,316 कर्मचारियों की सेवाएं रेगुलर की गई हैं। साथ ही हम प्रिंसिपलों और शिक्षकों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण भी सुनिश्चित कर रहे हैं।
क्षमता निर्माण के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए 264 शिक्षा अधिकारियों, प्रिंसिपलों और शिक्षकों के आठ बैच सिंगापुर भेजे गए हैं। साथ ही 216 प्राइमरी शिक्षकों के तीन बैच फिनलैंड के तुर्कू में प्रशिक्षण के लिए भेजे गए। पांच बैच आई.आई.एम. अहमदाबाद भेजे गए, जहां 249 मुख्य शिक्षकों ने लीडरशिप प्रशिक्षण प्राप्त किया। अमृतसर के सैंसरा कलां के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की साइंस शिक्षिका गगनदीप कौर ने कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका में दो महीने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जो हमारे शिक्षकों के समर्पण और क्षमता को दर्शाता है।
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सरकारी स्कूलों में उचित रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए कुल 1,932 कैंपस मैनेजर, 1,323 सुरक्षा गार्ड, 7,876 सफाई कर्मचारी और 1,792 चौकीदार भर्ती किए गए हैं। साथ ही 20 करोड़ रुपए के बजट से सभी सरकारी स्कूलों में हाई-स्पीड फाइबर वाई-फाई सुविधा दी गई है, जिससे पंजाब इस पहल करने वाला देश का एकमात्र राज्य बन गया है।
उन्होंने आगे कहा कि इसके साथ ही नए क्लासरूम, साइंस लेबोरेटरी, कंप्यूटर लैब, बहुउद्देशीय कमरे, रसोइयां, मेडिकल रूम, हेड रूम, खेल के मैदान और लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं। विद्यार्थियों को अब समय पर किताबें मिल रही हैं और मुफ्त वर्दियां प्रदान की जा रही हैं। इसके अलावा 25 सरकारी स्कूलों का नाम शहीदों, आजादी के घुड़सवारों और प्रमुख व्यक्तित्वों के नाम पर रखा गया है।
नवाचार और अनुसंधान की दिशा में उठाए गए कदमों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि बिजनेस ब्लास्टर स्कीम विद्यार्थियों में उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने अपने नवीनतम विचारों के माध्यम से सामूहिक रूप से 70 करोड़ रुपए कमाए हैं। पंजाब पहला राज्य है जिसने 11वीं कक्षा में उद्यमिता को एक विषय के रूप में पेश किया है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि नौकरियां देने वाले बनाना है।
स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम (विद्यार्थियों को दिशा देने का उपक्रम) पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कार्यक्रम पहली बार शुरू किया गया है, जहां आई.ए.एस., आई.पी.एस. और सीनियर अधिकारी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को मनाने के हिस्से के रूप में विद्यार्थियों को गुरु साहिब के महान जीवन और लामिसाल कुर्बानी के बारे में जागरूक करने के लिए 15 दिनों का कार्यक्रम करवाया गया था।
उच्च शिक्षा सुधारों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश की पहली ‘डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी नीति-2026’ पेश की है। श्री आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर एक विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर ने गांवों के विद्यार्थियों के लिए पहुंच बेहतर बनाने के लिए ‘पंजाबी-फर्स्ट नीति’ लागू की है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि 10 नए डिग्री कॉलेजों की योजना बनाई गई है और अजनाला के बिकरौर में एक कॉलेज का निर्माण चल रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि भाषाई और सांस्कृतिक पहलों को मजबूती देने के लिए पंजाब भाषा एक्ट के तहत सरकारी कामकाज में पंजाबी को 100 प्रतिशत अनिवार्य बनाया गया है। पंजाबी साहित्य का डिजिटलीकरण चल रहा है और अब तक 18,550 किताबें डिजिटल की जा चुकी हैं। इसके अलावा 592 दुर्लभ हस्तलिखितों की संरक्षण के साथ-साथ उन्हें डिजिटल किया गया है और 100 से अधिक किताबें अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ‘शब्दमाला ई-डिक्शनरी’ को कई पंजाबी शब्दकोशों के साथ एंड्रॉइड एप के रूप में लॉन्च किया गया है। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली के पंजाब भवन में 60 प्रमुख पंजाबी साहित्यिक व्यक्तित्वों की तस्वीरें लगाई गई हैं और पंजाबी, हिंदी व उर्दू में सर्वोत्तम किताबों के लिए पुरस्कार भी वितरित किए गए हैं।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
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‘बेअदबी’ पार्टी (अकाली दल) अपनी प्रतिष्ठा खो चुकी है, अब वह राजनीति में वापसी के लिए भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रही है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शनिवार को कहा कि बेअदबी पार्टी (अकाली दल) और उसके प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राजनीतिक फायदे के लिए बार-बार अपने राजनीतिक स्टैंड से समझौता किया है और अब वे भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “आज सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं कि वह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए जा रहे कुछ बिलों से पूरी तरह सहमत हैं। लेकिन पंजाब के लोगों को अच्छी तरह याद है कि जब कृषि कानून लाए गए थे, तो पूरा बादल परिवार उन कानूनों के पक्ष में वीडियो बनाता हुआ नजर आया था।”
बलतेज पन्नू ने कहा कि बड़े स्तर पर लोगों के गुस्से का सामना करने के बाद ही बादलों ने अपना रुख बदला और खुद को किसानों का हमदर्द दिखाने की कोशिश में कृषि कानूनों के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।
अकाली दल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “‘बेअदबी’ अकाली दल पंजाब के लोगों के दिलों से पूरी तरह गायब हो चुका है। अब वह भाजपा के साथ समझौता करके अपनी राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।”
सुखबीर बादल के भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के बारे में पहले दिए गए बयान को याद करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “मैं सुखबीर सिंह बादल को उनकी ही बातें याद दिलाना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि जो लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि किसी को अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए, लेकिन जब सुखबीर बादल ने खुद यह बयान दिया, तो आज इसका जिक्र करना बनता है।”
उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बार-बार लिए गए यू-टर्न ने अकाली दल की राजनीति का असली चेहरा सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग उन लोगों के बीच साफ फर्क समझ सकते हैं जो अपने उसूलों पर अड़े रहते हैं और जो राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अपना रुख बदलते हैं।
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि पंजाब के लोग पहले ही अकाली दल की राजनीति को नकार चुके हैं और भाजपा के साथ राजनीतिक समझौता करने की उसकी नई कोशिशों से गुमराह नहीं होंगे।
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मुक्तसर की तियां में पहुंचीं डॉ. गुरप्रीत कौर मान, महिलाओं ने चुनाव की तारीख पूछनी शुरू कर दी
मुक्तसर विधानसभा में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं के उत्साह से सराबोर तियां का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुक्तसर की बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। बातचीत में मावा दीया योजना को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि उनके खातों में ₹4,500 और ₹3,000 की राशि पहुंचने से उन्हें काफी राहत और खुशी मिली है।
महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान सरकार की योजनाओं को लेकर उनका उत्साह इतना स्पष्ट था कि बात सिर्फ योजना के लाभ तक सीमित नहीं रही—महिलाएं चुनाव की तारीख और अगला चुनाव कब होगा, यह पूछने लगीं।
माहौल ऐसा था कि मान साहब से ज्यादा अब पंजाब की इन माताओं-बहनों को चुनाव की जल्दी दिखाई दी, क्योंकि उनका कहना था कि वे जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं, ताकि उन्हें एक बार फिर भगवंत मान जी को अपना समर्थन देकर पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने का मौका मिले।
मुक्तसर की तियां में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं की खुशियों के साथ-साथ महिलाओं के मन की राजनीतिक इच्छा भी खुलकर सामने आई—उन्हें अब चुनाव का इंतजार है।
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‘गैंगस्टरां ते वार’ ने ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता सिद्ध की; गैंगस्टरों के लिए कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं : DGP गौरव यादव
पंजाब पुलिस का प्रमुख एंटी-गैंगस्टर अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ संगठित अपराध के विरुद्ध राज्य में चलाए जा रहे सबसे व्यापक और निरंतर अभियानों में से एक के रूप में उभरते हुए अपने 200 दिन पूरे कर चुका है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने पूरे पंजाब में 1,09,087 छापेमारियाँ कीं, 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को गिरफ़्तार किया, 58,212 अपराधियों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई की, भारी मात्रा में अवैध हथियार और मादक पदार्थ बरामद किए तथा संगठित आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के मार्गदर्शन में शुरू किया गया ‘गैंगस्टरां ते वार’ एक ख़ुफ़िया सूचना-आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य लक्षित कार्रवाई, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, वित्तीय जाँच तथा तकनीक-आधारित पुलिसिंग के माध्यम से संगठित अपराध गिरोहों का पूरी तरह सफाया करना है।
इस अवसर पर, डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि यह अभियान अब बहुआयामी कार्रवाई का रूप ले चुका है, जो केवल गैंगस्टरों ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को भी निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, “‘गैंगस्टरां ते वार’ के पहले 200 दिनों ने निरंतर और ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। हमारी रणनीति केवल गिरफ़्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध को सक्षम बनाने वाले पूरे नेटवर्क—सहयोगियों, वित्तीय स्रोतों, रसद व्यवस्था, संचार माध्यमों और विदेशों में मौजूद संपर्कों—को ध्वस्त करने पर केंद्रित है। पंजाब पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश के भीतर या बाहर कहीं भी संचालित होने वाले गैंगस्टरों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना न बचे।”
इन 200 दिनों के दौरान 1,532 घोषित अपराधियों (पीओ) को गिरफ़्तार किया गया, जबकि 58,212 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिनमें 853 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 57,359 वांछित अपराधी शामिल हैं।
निवारक पुलिसिंग के तहत 28,201 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 577 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 27,624 वांछित अपराधी शामिल थे; वहीं 18,514 व्यक्तियों का वेरिफिकेशन कर उन्हें बाद में रिहा किया गया, जिनमें 1,529 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 16,985 वांछित अपराधी शामिल थे। कुल मिलाकर अभियान के दौरान 1,04,927 व्यक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई के दायरे में आए जिनमें 2,959 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 1,01,968 वांछित अपराधी शामिल हैं।
गिरफ़्तारियों के अतिरिक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों की हथियारों, मादक पदार्थों, वित्तीय संसाधनों और रसद व्यवस्था तक पहुँच को समाप्त कर उनकी अपराध करने की क्षमता को कमज़ोर करना भी रहा।
इस अभियान ने संगठित अपराध गिरोहों की मारक क्षमता को भी बड़ा झटका दिया।अभियान के दौरान पंजाब पुलिस ने 990 अवैध हथियार, 242 धारदार हथियार, 2,739 कारतूस, 315 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और 15 हैंड ग्रेनेड बरामद किए, जिससे आपराधिक गिरोहों की मारक क्षमता को गंभीर रूप से कमज़ोर किया गया।
साथ ही, पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध और नशा तस्करी के गठजोड़ के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ करते हुए 774.38 किलोग्राम हेरोइन, 480.23 किलोग्राम अफीम, 7,266.26 किलोग्राम पोस्त भूसी तथा 26,91,455 नशीली गोलियाँ बरामद कीं। पुलिस ने 1,73,41,965 रुपये की ड्रग मनी, 1,80,54,446 रुपये नकद तथा 413.85 ग्राम सोना भी ज़ब्त किया, जिससे संगठित अपराध और मादक पदार्थों के कारोबार को वित्तीय सहायता देने वाले स्रोतों पर प्रभावी प्रहार हुआ।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस प्रमोद बान ने कहा कि अब अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। उन्होंने कहा, “आज का संगठित अपराध वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल संचार और विदेशों में बैठे संचालकों के माध्यम से संचालित होता है। इसी कारण हमारी जाँच में फील्ड ऑपरेशन के साथ-साथ वित्तीय ट्रैकिंग, डिजिटल इंटेलिजेंस तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय शामिल है। इसी रणनीति के कारण पंजाब पुलिस रंगदारी गिरोहों का पर्दाफाश करने, विदेशों में बैठे संचालकों की पहचान करने तथा वांछित अपराधियों के निर्वासन (डीपोर्टेशन) और प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल रही है। साथ ही यह अभियान युवाओं को यह संदेश भी देता है कि गैंगस्टर संस्कृति का तथाकथित आकर्षण केवल एक भ्रम है, जिसका अंत अपराध और विनाश में होता है।”
अभियान को पड़ोसी राज्यों तथा केंद्रीय जाँच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय का भी भरपूर सहयोग मिला, जिससे सूचनाओं के तुरंत आदान-प्रदान और संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त अभियानों को गति मिली।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में से एक फरार गैंगस्टर भुवनेश चोपड़ा उर्फ आशीष चोपड़ा, पुत्र हीरा लाल, निवासी मकान नंबर 15, अंदरूनी दिल्ली गेट, फिरोज़पुर, को मध्य एशिया से तथा गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को जकार्ता (इंडोनेशिया) से सफलतापूर्वक भारत वापस लाना रहा। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने ओएफटीईसी पंजाब तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे यह सिद्ध हुआ कि पंजाब पुलिस अब राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर भी वांछित अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम है।
गैंगस्टरों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई के अतिरिक्त अभियान के दौरान 64,402.77 लीटर अवैध शराब, 34,840 बोतलें तथा 926 पेटियाँ बरामद कर नष्ट की गईं। इसके अलावा अपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 4,978 मोबाइल फोन, 1,781 वाहन और 61 ड्रोन भी ज़ब्त किए गए। इन कार्रवाइयों ने आपराधिक ढाँचे को कमज़ोर करने, संगठित अपराध के नेटवर्क को बाधित करने और पूरे पंजाब में सार्वजनिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 93946-93946 नंबर पर एक समर्पित टिपलाइन भी शुरू की है, जिसके माध्यम से लोग वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और उनसे संबंधित आपराधिक गतिविधियों की जानकारी गोपनीय और गुमनाम रूप से साझा कर सकते हैं। इस पहल के ज़रिए लोग अपनी पहचान उजागर होने के डर के बिना गोपनीय रूप से महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे एजीटीएफ को गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों का जल्द पता लगाकर उन्हें गिरफ़्तार करने में मदद मिलेगी।
जनसहभागिता को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एजीटीएफ ने एक इनाम नीति भी लागू की है, जिसके तहत वांछित गैंगस्टरों और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में सहायक विश्वसनीय सूचना देने वालों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा तथा उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इस पहल से पंजाब में संगठित अपराध के विरुद्ध ख़ुफ़िया-आधारित अभियानों को और अधिक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
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