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पंजाब में मान सरकार की नीति से ₹1.55 लाख करोड़ का निवेश, अब औद्योगिक हब बनेगा राज्य!
पंजाब में लंबे समय से उद्योगों के पलायन, बेरोज़गारी और आर्थिक सुस्ती को लेकर जो चिंता थी, उसे अब एक नई दिशा मिलती दिख रही है. मान सरकार ने बताया है कि नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी ने राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐसा रोडमैप पेश किया है, जिसे उद्योग जगत भी गंभीरता से देख रहा है और आम लोग भी उम्मीद के साथ जोड़कर देख रहे हैं. यह सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं बल्कि पंजाब के आर्थिक पुनर्निर्माण की शुरुआत माना जा रहा है.
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में उद्योग लगाने को लेकर कई तरह की आशंकाएँ रहती थीं, भौगोलिक स्थिति, निवेश सुरक्षा और प्रतिस्पर्धी राज्यों की नीतियां, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की सरकार ने इन सभी चुनौतियों का जवाब एक व्यापक और दूरदर्शी औद्योगिक नीति के जरिए दिया है. इस नई पॉलिसी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशकों को अपनी जरूरत के हिसाब से इंसेंटिव चुनने की आज़ादी दी गई है. यानी उद्योगपति अब तय कर सकते हैं कि उनके प्रोजेक्ट के लिए कौन-कौन से प्रोत्साहन सबसे अधिक फायदेमंद होंगे.
बड़े उद्योगों के आने का रास्ता होगा आसान- सरकार
सरकार ने कहा है कि यह बदलाव पंजाब को उन राज्यों से अलग खड़ा करता है, जहां एक तयशुदा पैकेज दिया जाता है और निवेशक को उसी में काम करना पड़ता है. पंजाब ने पहली बार निवेशकों को लचीलापन दिया है, जिससे उद्योगों को अपने बिजनेस मॉडल के अनुसार प्रोत्साहन लेने का अवसर मिलेगा. मान सरकार ने इस नीति के जरिए एक और बड़ा कदम उठाया है, पूंजी निवेश पर सीधी सब्सिडी. अगर कोई उद्योग 100 करोड़ रुपये का प्लांट लगाने की योजना बनाता है, तो सरकार पूंजी निवेश में साझेदारी करके शुरुआती जोखिम को कम करती है. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बड़े उद्योगों के आने का रास्ता आसान होगा.
सरकार ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पॉलिसी केवल नए उद्योगों के लिए ही नहीं बल्कि पहले से काम कर रहे उद्योगों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए भी लागू होगी. पहले अक्सर देखा जाता था कि सरकारें सिर्फ नए निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश करती थीं, जबकि राज्य के मौजूदा उद्योग पीछे छूट जाते थे. लेकिन अब अगर कोई पुरानी फैक्ट्री अपनी मशीनरी अपग्रेड करना चाहती है, उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है या नई लाइन जोड़ना चाहती है, तो उसे भी सरकारी प्रोत्साहन मिलेगा.
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार- मान सरकार
मान सरकार का दावा है कि यह फैसला पंजाब के औद्योगिक शहरों लुधियाना, जालंधर, गोबिंदगढ़ और बटाला के हजारों छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए राहत और अवसर दोनों लेकर आया है. इन्हीं उद्योगों में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है. नई पॉलिसी का एक बड़ा संदेश सामाजिक समावेशन को लेकर भी है. अगर उद्योगों में महिलाओं, अनुसूचित जाति समुदायों या दिव्यांग कर्मचारियों को रोजगार दिया जाता है तो सरकार अधिक सब्सिडी देगी. इसका मतलब है कि रोजगार के साथ-साथ सामाजिक न्याय को भी नीति का हिस्सा बनाया गया है.
सरकार ने बताया है कि छोटे उद्योगों को भी इस नीति में पहली बार बड़े पैमाने पर जगह दी गई है. रोजगार सृजन सब्सिडी के लिए न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दी गई है और 50 कर्मचारियों की शर्त रखी गई है. इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को सरकारी प्रोत्साहन मिलने का रास्ता खुल गया है.
25 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान
पंजाब के सीमावर्ती जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है. इन इलाकों में लंबे समय से निवेश कम आता रहा है, लेकिन अब सरकार इन क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने वालों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ दे रही है. इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है.
इस नीति की सबसे बड़ी ताकत इसका दीर्घकालिक दृष्टिकोण है. कई राज्यों में औद्योगिक प्रोत्साहन 5 से 10 साल तक सीमित होते हैं, जबकि पंजाब ने इसे बढ़ाकर 15 साल तक कर दिया है. इससे बड़े और पूंजी-गहन उद्योग जैसे सेमीकंडक्टर, फार्मा, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहन को राज्य में आने के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद माहौल मिलेगा. मान सरकार का दावा है कि इस नई नीति के तहत निवेशकों को उनके फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट का 100 प्रतिशत तक इंसेंटिव मिल सकता है. इसमें जमीन, मशीनरी, भवन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और पर्यावरण से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तक शामिल हैं. इस तरह की व्यापक सहायता किसी भी उद्योग के लिए निवेश का गणित पूरी तरह बदल सकती है.
2022 के बाद राज्य में 1.55 लाख करोड़ का हुआ निवेश
पिछले कुछ समय में पंजाब में निवेश का रुझान भी जबरदस्त तेजी से बढ़ा है. आंकड़ों के अनुसार 2022 के बाद राज्य में लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है, जिसमें से करीब 55 हजार करोड़ रुपये का निवेश सिर्फ पिछले एक साल में आया. टाटा, इंफोसिस, ट्राइडेंट, वर्धमान, एचएमईएल और फोर्टिस जैसी बड़ी कंपनियों की मौजूदगी ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है.
पंजाब के युवाओं के लिए इस नीति का सबसे बड़ा असर रोजगार के रूप में दिखाई देगा. जब नए उद्योग आएंगे, पुराने उद्योग विस्तार करेंगे और छोटे उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, तो लाखों युवाओं के लिए नौकरी के नए अवसर पैदा होंगे.
राज्य के कई इलाकों में लोग अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि पंजाब एक बार फिर औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत तरीके से उभरेगा. लंबे समय तक बेरोजगारी और पलायन की चर्चा करने वाले पंजाब के युवा अब यह कह रहे हैं कि अगर उद्योग आएंगे तो उन्हें भी अपने ही राज्य में भविष्य बनाने का मौका मिलेगा.
पंजाब की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति- सरकार
आम आदमी पार्टी की सरकार इस नीति को पंजाब की आर्थिक पुनरुत्थान की आधारशिला के रूप में पेश कर रही है. सरकार का मानना है कि उद्योग, रोजगार और सामाजिक समावेशन इन तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने वाली यह नीति आने वाले वर्षों में पंजाब की अर्थव्यवस्था को नई गति देगी.
पंजाब के लोगों के बीच भी यह भावना तेजी से बन रही है कि अगर ऐसी नीतियां लगातार लागू होती रहीं तो राज्य सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उद्योग और रोजगार के मामले में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है.
भगवंत मान सरकार की नई औद्योगिक नीति को इसलिए भी एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यह केवल निवेश आकर्षित करने की कोशिश नहीं है, बल्कि पंजाब के आर्थिक भविष्य को एक स्थायी दिशा देने की कोशिश है.
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देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।
अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।
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बेंगलुरु के 3-Star और 5-Star होटलों में बड़ी फूड सेफ्टी जांच, Expired दूध-मांस और खराब सब्जियां मिलने से मचा हड़कंप
बेंगलुरु के बड़े और लग्जरी होटलों की रसोइयों में फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और एफएसएसएआई की टीमों ने शहर के 26 होटलों में अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, खराब मांस और मछली, सड़ी हुई सब्जियां, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।
इस कार्रवाई के लिए 30 निरीक्षण टीमें तैनात की गई थीं। अधिकारियों ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, जो खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड या इस्तेमाल के लायक नहीं पाई गई, उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया।
जांच के दौरान द ललित अशोक से करीब 76 किलो मांस, 200 किलो सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध बरामद किया गया। ताज यशवंतपुर से करीब 72 किलो मांस और मछली, जबकि फोर सीजन्स होटल से लगभग 19 किलो मांस मिला। शांगरी-ला होटल से करीब 15 किलो मांस और विवांता बेंगलुरु व्हाइटफील्ड से लगभग 3 किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद हटाए गए।
सबसे बड़ी बरामदगी में से एक रेडिसन ब्लू एट्रिया से हुई, जहां करीब 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली। इसमें लगभग 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो सब्जियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ होटलों की रसोई और स्टोरेज एरिया में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।
अधिकारियों को कुछ सब्जियों पर फंगस मिली, जबकि कई जगह खाद्य सामग्री को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने में भी लापरवाही सामने आई। कुछ उत्पादों पर जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था।
निरीक्षण के दौरान चिकन, मटन, मछली, दूध, खाना पकाने के तेल, मसाले, चीज और सॉस समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ फूड सेफ्टी मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत बड़े और लग्जरी होटलों से इसलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि होटल चाहे कितना भी बड़ा या महंगा हो, फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए समान हैं।
अब अधिकारियों की नजर उन फूड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भी है, जहां से होटलों और कैटरिंग संस्थानों को खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। बेंगलुरु में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई के बाद ही साफ होगी।
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शहरी सहकारी बैंकों को अमित शाह की बड़ी अपील, तकनीक और पारदर्शिता पर दिया जोर
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के शहरी सहकारी बैंकों से बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलने और आधुनिक तकनीक को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बैंकों के लिए तकनीकी रूप से मजबूत होना, अपने कामकाज में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच शहरी सहकारी बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा, ताकि वे प्रतिस्पर्धा के दौर में मजबूती से आगे बढ़ सकें।
मुंबई में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NUCFDC के नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि बैंकों को केवल अपने विकास पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने ग्राहकों की आर्थिक तरक्की को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बैंक से जुड़े ग्राहक आर्थिक रूप से मजबूत और खुशहाल होंगे, तो इसका सीधा फायदा बैंक के विकास को भी मिलेगा।
अमित शाह ने देश के सभी शहरी सहकारी बैंकों से एक साल के भीतर NUCFDC से जुड़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि NUCFDC देश के शहरी सहकारी बैंकों के लिए शीर्ष संस्था और स्व-नियामक संगठन के रूप में काम करती है। RBI से मंजूरी प्राप्त यह संस्था सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पूंजी, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और तरलता सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंक हैं, जिनमें से लगभग 690 बैंक पहले ही NUCFDC के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बैंकों को भी अगले एक साल के भीतर इस संस्था से जुड़ना चाहिए, ताकि शहरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
अमित शाह ने कहा कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए देश के आम लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल पूंजी बाजार के सहारे हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वरोजगार और आर्थिक अवसरों की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है और इसमें शहरी सहकारी बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के विचार पर जोर देते हुए कहा कि सहकारी बैंकिंग का उद्देश्य केवल बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत करना नहीं होना चाहिए। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बैंक से जुड़े ग्राहकों और आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की प्रगति से ही बैंकों के विकास को भी मजबूती मिलेगी।
RBI और शहरी सहकारी बैंकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि दोनों के बीच मौजूद धारणा के अंतर को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक और सहकारी बैंकों को एक-दूसरे की भूमिका, जरूरतों और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझना होगा। इससे बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
सहकारिता मंत्री के रूप में अपने पांच साल के अनुभव का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब भी सहकारी क्षेत्र ने भरोसे के साथ RBI के सामने अपनी समस्याएं और जरूरतें रखी हैं, तब केंद्रीय बैंक की ओर से सक्रिय सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी बेहतर समन्वय के जरिए सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है।
अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों से कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग देने, बैंकिंग सेवाओं को डिजिटल और सुविधाजनक बनाने तथा अपने कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को बेहतर और आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में भी लगातार सुधार करना होगा।
कुल मिलाकर, अमित शाह का संदेश साफ है कि तकनीक, पारदर्शिता और बेहतर ग्राहक सेवा आने वाले समय में शहरी सहकारी बैंकों की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। सरकार का जोर सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक बनाने के साथ-साथ इसे आम लोगों की आर्थिक तरक्की का मजबूत माध्यम बनाने पर है।
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