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Dr. Raj Nehru को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का ओएसडी नियुक्त किया गया

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श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति Dr.Raj Nehru को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) नियुक्त किया गया है। Dr. Raj Nehru, जिनके पास प्रशासनिक और अकादमिक अनुभव की लंबी पृष्ठभूमि है, एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं। उनका दो दशकों से अधिक का कार्पोरेट अनुभव है, और उन्होंने आई बी एम और कॉन्सेंट्रिक्स जैसी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्य किया है।

Dr. Raj Nehru देश के पहले राजकीय कौशल विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति हैं और कौशल विकास क्षेत्र में उनका गहरा अनुभव रहा है। इससे पहले वे कौशल विकास निगम के मिशन डायरेक्टर रह चुके हैं। उनके योगदान के कारण उन्हें भारत में उच्च शिक्षा के कौशल आधारित मॉडल को विकसित करने का श्रेय जाता है। डॉ. नेहरू यूजीसी और एआईसीटीई जैसे प्रमुख संस्थानों के सदस्य भी रहे हैं।

2016 में डॉ. नेहरू को श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था, और उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय को महत्वपूर्ण सफलताएँ मिली हैं। इसके अलावा, उन्होंने दो अन्य विश्वविद्यालयों का भी अतिरिक्त प्रभार संभाला है। वह जाने-माने लेखक भी हैं, और उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें से उनकी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “अहं शिवम्” विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी है।

डॉ. राज नेहरू ने कार्पोरेट जगत को अलविदा करके कौशल विकास क्षेत्र में देश और राज्य को प्राथमिकता देते हुए नया मॉडल तैयार किया। इसके साथ ही, वे हरियाणा राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के बोर्ड में निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के कार्यान्वयन योजना पर भी उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अध्यक्ष
डॉ. नेहरू, राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) कमेटी के अध्यक्ष भी हैं और उन्होंने विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर कौशल-आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। उन्होंने एआईसीटीई, यूजीसी, एमएसडीई, और कई अन्य विश्वविद्यालयों के बोर्ड और समितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

समाज सेवा में योगदान
डॉ. राज नेहरू ने गुरुग्राम में झुग्गी बस्ती के बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उत्सव फाउंडेशन की स्थापना की, जिसके तहत 350 विद्यार्थी निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें उत्तराखंड, विशाखापत्तनम, और जम्मू-कश्मीर के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए राज्य सरकार और पीएमओ कार्यालय से विशेष पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

उन्हें कई सम्मान प्राप्त हैं, जिनमें इनोवेटिव लीडर अवार्ड, नीलकंठ सम्मान-2019, हॉल ऑफ फेम और स्किल्स लीडरशिप अवार्ड-2020 शामिल हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें गोल्डन एआईएम कॉन्फ्रेंस एवं अवार्ड्स द्वारा सर्वाधिक प्रेरणादायक कुलपति पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान

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हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।

अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।

गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।

वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।

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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम

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जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।

जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।

2023 में नहीं लाया जा सका बिल

2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।

आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए

खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।

बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी

आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।

परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध

पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।

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