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लाला लाजपत राय के जन्म स्थल ढुड्डीके को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा: CM भगवंत सिंह मान

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Punjab News:  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि लाला लाजपत राय के जन्म स्थल ढुड्डीके को पूर्ण रूप से एक मॉडल गांव में तब्दील किया जाएगा, जहां सीवरेज, तालाब, खेल मैदान सहित सभी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जाएगा। 71वें लाला लाजपत राय जन्म दिवस खेल मेले को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें केवल कागज़ी योजनाएं बनाती रहीं, जबकि उनकी सरकार ने राज्य के विकास के लिए एक वर्ष के भीतर ज़मीनी स्तर पर काम कर दिखाया है।

पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की स्मृति में आयोजित कबड्डी और हॉकी टूर्नामेंट का आनंद लिया

भगवंत सिंह मान ने वादा किया कि वे लाला जी के अगले जन्मदिवस पर इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद पुनः यहां आएंगे। सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल को एक ओर रखते हुए, जनता से अपनी गहरी जुड़ाव को दर्शाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां गांववासियों के साथ ग्रामीण खेल मेले के दौरान पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की स्मृति में आयोजित कबड्डी और हॉकी टूर्नामेंट का आनंद लिया।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के साथ सेल्फी लेते हुए और बुजुर्गों से आशीर्वाद ग्रहण करते हुए कहा, “मैं एक आम व्यक्ति हूं और अपने भाइयों तथा बुजुर्गों के साथ इस ग्रामीण खेल मेले को देखने आया हूं, जो हमारी आत्मा का हिस्सा है। अपने लोगों के साथ मिलकर मुझे अत्यंत खुशी मिलती है।”

इस दौरान रोमांचक कबड्डी मुकाबले को देखने पहुंचे दर्शकों से मिलते हुए मुख्यमंत्री ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार कर खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से हाथ मिलाया, जो जनता के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। इस अवसर पर भीड़ ने जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया।

उन्होंने कहा, “यह आयोजन पंजाब के महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के जन्मदिवस की स्मृति में आयोजित टूर्नामेंट का हिस्सा है।” उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले इस महान राष्ट्रवादी की विरासत युवाओं को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

पारंपरिक लोक संगीत और उत्सवपूर्ण माहौल के बीच जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “पंजाब की देसी खेलों को और मज़बूत करना समय की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि “कबड्डी, बैलगाड़ी दौड़ और अन्य पारंपरिक खेल केवल खेल नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति और विरासत का अभिन्न अंग हैं।” भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये खेल पंजाबियों की भावना, शक्ति और एकता को दर्शाते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते आए हैं।”

सरकार खेल क्षेत्र में पंजाब की प्राचीन शान को पुनः स्थापित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी

खेलों को बढ़ावा देने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेल क्षेत्र में पंजाब की प्राचीन शान को पुनः स्थापित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पारंपरिक खेल एक बार फिर फले-फूले और गांवों के युवाओं को आगे बढ़ने का मंच मिले। मुख्यमंत्री ने लोगों को कीला रायपुर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित मिनी ओलंपिक में भाग लेने का निमंत्रण देते हुए बताया कि ये खेल 31 जनवरी से शुरू होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 वर्षों के बाद बैलगाड़ी दौड़ों का दोबारा शुरू होना इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होगा। उन्होंने कहा कि यह हमारी समृद्ध परंपराओं को पुनर्जीवित करने और पंजाब की खेल विरासत को मनाने का सुनहरा अवसर होगा। उन्होंने घोषणा की कि गांव ढुड्डीके की पंचायत द्वारा उठाई गई सभी मांगों को तुरंत पूरा किया जा रहा है, जिनमें नई सीवरेज लाइन बिछाना, गांव के तालाब का नवीनीकरण, एक आधुनिक खेल मैदान का विकास तथा जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के रूप में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को पूरे पंजाब में लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब प्रत्येक पंजाबी परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए बनाई गई इस महत्वपूर्ण योजना से लगभग 65 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा।

आज़ादी के 70 वर्षों से अधिक समय बाद भी पंजाब अपनी स्वयं की राजधानी और हाईकोर्ट से वंचित है

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के 70 वर्षों से अधिक समय बाद भी पंजाब अपनी स्वयं की राजधानी और हाईकोर्ट से वंचित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ को पुनः प्राप्त करने के लिए लगातार और दृढ़ प्रयास कर रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब और पंजाबियों की भलाई के इस नेक कार्य के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस अपार क्षति को सहन करने की शक्ति दें।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर, देविंदर सिंह लाडी ढोस, अमृतपाल सिंह सुखानंद, अमनदीप कौर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”

पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”

सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”

पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”

यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।

यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।

इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।

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अमृतसर धमाके में पाकिस्तान का हाथ? DGP गौरव यादव का बड़ा बयान

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अमृतसर के खासा छावनी क्षेत्र में हुए धमाके को लेकर जांच तेज कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के डीजीपी गौरव यादव खुद मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि इस धमाके के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश होने का शक जताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतें पंजाब का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही हैं।

डीजीपी ने यह भी कहा कि देश इस समय “ऑपरेशन सिंधूर” की वर्षगांठ मना रहा है और ऐसे मौकों को निशाना बनाकर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जालंधर में हुए धमाकों का इस घटना से कोई संबंध नहीं है। जालंधर मामले की जिम्मेदारी एक खालिस्तानी संगठन पहले ही ले चुका है, जबकि अमृतसर धमाके की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है।

पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की हर एंगल से गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

अंत में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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