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धालीवाल का बादल एंड कंपनी पर हमला, कहा- जो गुरु ग्रंथ साहिब के वफादार नहीं हो सके, वे Punjab या उसके लोगों के प्रति वफादार नहीं हो सकते
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिरोमणि अकाली दल (बादल) पर तीखा हमला किया। धालीवाल ने पूर्व आईपीएस अधिकारी परमराज सिंह उमरांनंगल की सेवानिवृति के मौके पर वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक उपस्थिति पर सवाल उठाए।
धालीवाल ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेता खुलेआम उन अधिकारियों का जश्न मना रहे हैं और उन अधिकारियों के साथ खड़े हैं जिनकी देखरेख में पंजाब के हाल के इतिहास की सबसे दर्दनाक कांड हुए। उन्होंने याद दिलाया कि अकाली दल-भाजपा सरकार के दौरान ही पंजाबभर में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं हुईं, जिसने दुनिया भर में सिख समुदाय की अंतरात्मा को हिलाकर रख दिया था। शांतमई ढंग से रोष प्रदर्शन कर रही और इंसाफ की मांग कर रही संगत पर गोलियां चलाई गईं।
उन्होंने कहा कि परमराज सिंह उमरानंगल और पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी जैसे अधिकारी उस समय महत्वपूर्ण पदों पर थे और न्याय एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय, राज्य में निर्दोष श्रद्धालुओं पर अत्याचार और गोलीबारी देखने को मिली। धालीवाल ने कहा कि मुगल काल या ब्रिटिश शासन के दौरान भी, किसी ने भी गुरु साहिब के अंगों की इस तरह से बेअदबी करने की हिम्मत नहीं की, जैसा कि अकाली दल के शासन के दौरान हुआ।
एक और गंभीर चिंता जताते हुए, धालीवाल ने जत्थेदार द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को दी गई विवादित माफ़ी पर सवाल उठाया और कहा कि सिख भावनाओं को हुए नुकसान की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय, अकाली दल ने आरोपियों को संरक्षण दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने लगातार ऐसे काम किए हैं जिनसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और फिर राजनीतिक सुविधा के लिए अपने गुनाहों को छिपाने की कोशिश की है।
धालीवाल ने आगे कहा कि एक तरफ़ अकाली दल गैंगस्टरों के परिवारों को पार्टी में शामिल कर रहा है और उन्हें पार्टी टिकट भी दे रहा है, दूसरी तरफ़, वह सिख संगत पर अत्याचार करने वाले लोगों के साथ सार्वजनिक रूप से जश्न मना रहा है। उन्होंने कहा कि वे गैंगस्टर परिवारों के समारोहों में जाते हैं, उनकी खुशियों में नाचते हैं, विवादित अधिकारियों की पार्टियों में जाते हैं, और पंथक मूल्यों की बात करने का दिखावा भी करते हैं।
बिक्रम सिंह मजीठिया पर निशाना साधते हुए, धालीवाल ने कहा कि परमराज सिंह उमरानंगल की सेवा को “बेमिसाल” बताना सिख समुदाय के साथ एक गंदे मज़ाक से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब बेअदबी की घटनाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग के निशान लोगों के मन में अभी भी ताज़ा हैं, ऐसे बयान अकाली लीडरशिप की बेपरवाही और घमंड को दिखाते हैं। धालीवाल ने कहा कि पंजाब के हाल के इतिहास के सबसे दर्दनाक दौर से जुड़े अधिकारियों की तारीफ़ करना सिखों की भावनाओं का अपमान है और अकाली दल बादल की स्वार्थी प्राथमिकताओं को साफ़ तौर पर दिखाता है।
पंजाब के लोगों को चेतावनी देते हुए, धालीवाल ने अकाली दल को जनता की भलाई के बजाय निजी हितों वाली “जीजा-साला पार्टी” करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के लिए अकाली दल को सत्ता में वापस लाने की बात भी नहीं कर रही है; इसका एकमात्र एजेंडा सुखबीर सिंह बादल को सत्ता में वापस लाना है ताकि 2007 और 2017 के बीच जो शासन का ढांचा था, वही बना रहे।
धालीवाल ने ज़ोर देकर कहा कि जो गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति वफ़ादार नहीं रह सकते, वे कभी भी पंजाब या उसके लोगों के प्रति सच्चे नहीं हो सकते। उन्होंने आगे कहा कि अकाली दल बादल हताश है और पॉलिटिकल वापसी के लिए पंजाब को मुश्किल से मिली शांति को भंग करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपराधों से जुड़े लोगों को बढ़ावा देकर और पंजाब के इतिहास की दर्दनाक घटनाओं से जुड़े लोगों का महिमामंडन करके, वे एक बार फिर राज्य को बांटने और अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
धालीवाल ने पंजाबियों से अपील की कि वे सतर्क रहें और अकाली दल के “दोहरे रवैये और सुविधा की राजनीति” का शिकार न हों। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग बेअदबी की घटनाओं, बेगुनाह प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग और अकाली राज के दौरान फैले डर और संरक्षण के माहौल को नहीं भूले हैं।
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पंजाब में मावां धीयां योजना की रजिस्ट्रेशन आज से:CM करेंगे शुभारंभ, जुलाई से मिलेंगे 1500 रुपए, कल से पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू
पंजाब में मंगलवार (14 अप्रैल) से ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ के लिए रजिस्ट्रेशन की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर दौरे के दौरान इस योजना का शुभारंभ करेंगे। 15 अप्रैल से नौ विधानसभा हलकों में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इनमें आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दीड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला देहाती शामिल हैं।
इसके बाद राज्य के बाकी 108 हलकों में 15 मई से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। योजना के तहत लाभार्थियों को जुलाई महीने से प्रतिमाह 1000 या 1500 रुपए की सम्मान राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए 9200 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है और इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
रजिस्ट्रेशन और भुगतान प्रक्रिया
पंजीकरण आंगनबाड़ी केंद्रों और सेवा केंद्रों पर किया जाएगा, जो पूरी तरह फ्री होगा। योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे भेजी जाएगी।
मौत होने पर अगली किस्त रुकेगी
योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी का गठन किया गया है। पंजीकरण और जागरूकता के लिए सरकार ‘मोबिलाइजर’ और ‘फैसिलिटेटर’ (सुविधा प्रदाता) भी तैनात कर सकती है। यदि किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो पहले से दी गई सहायता राशि की वसूली नहीं की जाएगी, लेकिन अगली किस्त जारी नहीं होगी।
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25 लाख का जुर्माना और उम्र कैद की सजा… क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक?
पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, बेअदबी के मामलों में न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान रखा गया है, जिसे 20 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसके साथ ही दोषियों पर दो लाख रुपए से लेकर दस लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साजिश के तहत सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से इस तरह का अपराध करता है, तो उसके लिए और भी कड़ी सजा तय की गई है। ऐसे मामलों में दोषी को दस साल से लेकर उम्रकैद (मृत्यु तक) जेल में रहना होगा। इसके अलावा 5 लाख से 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध में सहयोग करने या प्रयास करने वालों को भी सख्त सजा दी जाएगी। प्रयास करने पर तीन से पांच साल की सजा और एक से तीन लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी।
जानें क्या खास है इस विधेयक में-
परंपराओं के अनुरूप शब्दावली:
संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा।
संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा:
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
हर स्वरूप का रखा जाएगा रिकॉर्ड:
विधेयक के तहत एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सभी सरूपों का एक केंद्रीय रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें हर सरूप को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी छपाई, स्थान, भंडारण और संरक्षक की जानकारी दर्ज की जाएगी। यह रजिस्टर भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में रखा जाएगा और इसे निर्धारित समय के भीतर सार्वजनिक भी किया जाएगा।
बेअदबी की परिभाषा में बदलाव:
बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।
जानें क्यों नहीं राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानभा में बताया कि यह कानून 2008 के मौजूदा अधिनियम में संशोधन के रूप में लाया गया है और इसे लागू करने की तिथि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर तय की जाएगी।
पहले भी इस तरह के विधेयक लाए गए थे, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बार सरकार ने इसे और अधिक स्पष्ट, सख्त और प्रभावी बनाकर पेश किया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यह एक राज्य का कानून है और इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक नहीं है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसे लागू किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह विधेयक न केवल धार्मिक पवित्रता की रक्षा करेगा, बल्कि पंजाब में शांति, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जानें पहले कब बेअदबी कानून पर हुए प्रयास
पंजाब में पवित्र ग्रंथों के सम्मान और बेअदबी के मामलों पर सख्त कानून बनाने को लेकर पिछले डेढ़ दशक में लगातार प्रयास होते रहे हैं। अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर कानून बनाए या संशोधन लाने की कोशिश की, लेकिन कई बार इन्हें अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।
2008 अकाली-भाजपा सरकार का मूल कानून:
साल 2008 में अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम’ लागू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रुर ग्रंथ साहिब की गरिमा और सम्मान को बनाए रखना था।
इस कानून के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई और वितरण का विशेष अधिकार दिया गया। उल्लंघन पर अधिकतम 2 साल की सजा या 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान था। हालांकि, इसमें बेअदबी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान नहीं था।
2016 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किए प्रयास:
साल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में सरकार ने नए संशोधन विधेयक पेश किए। इनका उद्देश्य बेअदबी के दोषियों को उम्रकैद तक की सजा देना था।
लेकिन केंद्र सरकार ने इन्हें यह कहते हुए लौटा दिया कि प्रस्ताव में केवल एक धर्म के पवित्र ग्रंथ को ही विशेष संरक्षण देने की बात है, जो संवैधानिक संतुलन के अनुरूप नहीं है।
2018 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय भी हुए प्रयास:
साल 2018 में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार ने संशोधित विधेयक पेश किया। इसमें भगवत गीता, कुरान और बाइबल को भी शामिल किया गया। पंजाब विधानसभा ने इसे पारित कर दिया, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी न मिलने के कारण यह कानून लागू नहीं हो सका।
2023-24 में नए आपराधिक कानून से बदलाव के कारण देश में पुराने आपराधिक कानून इंडियन पीनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू हो गई। चूंकि 2018 का विधेयक पुराने कानून पर आधारित था, इसलिए वह अप्रासंगिक हो गया और आगे नहीं बढ़ पाया।
2025 में आम आदमी पार्टी का नया विधेयक पेश:
साल 2025 में आम आदमी पार्टी सरकार ने ‘पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक’ पेश किया। इसमें सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथों को शामिल करते हुए सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक रखने का प्रस्ताव दिया गया। इस विधेयक को आगे विचार के लिए चयन समिति को भेज दिया गया।
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पंजाब कल्चर और टूरिज्म डिपार्टमेंट के एडवाइजर दीपक बाली ने महान पार्श्व गायिका Asha Bhosle के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
पंजाब कल्चर और टूरिज्म डिपार्टमेंट के एडवाइजर दीपक बाली ने महान पार्श्व गायिका आशा भोंसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आज देश ने एक ऐसी महान आवाज़ खो दी है, जिसने दशकों तक अपने सुरों से लोगों के दिलों पर राज किया।
दीपक बाली ने कहा कि आशा भोंसले के निधन की खबर से मन अत्यंत दुखी है। 92 वर्ष की आयु तक उनका जीवन उपलब्धियों से भरा रहा और उन्होंने अपने लंबे संगीत सफर में अनगिनत यादगार गीतों से भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।
उन्होंने कहा कि आशा भोंसले की सुरीली आवाज़ में एक अद्भुत जादू था, जो हर वर्ग के लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता था। उनके गाए गीतों में दिल को छू लेने वाली मधुरता थी, जो उन्हें अन्य गायकों से अलग पहचान देती थीं।
दीपक बाली ने आगे कहा कि कला और भारतीय संगीत से प्रेम करने वाले करोड़ों लोगों की आंखें आज नम हैं। उनकी अनूठी संगीत यात्रा, जो कई दशकों तक फैली रही, ने न केवल भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया बल्कि दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोगों के दिलों को छुआ।
उन्होंने कहा कि आशा भोंसले भारत की सबसे प्रतिभाशाली और मशहूर आवाज़ों में से एक थीं। उनका संगीत सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और उनकी आवाज हमेशा भारतीयों के दिलों में जीवित रहेगी।
दीपक बाली ने बताया कि पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी आशा भोंसले के निधन पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
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