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CM भगवंत सिंह मान द्वारा विकास परियोजनाओं की सौगात, सनौर में 87 करोड़ की लागत से सड़कों के नवीनीकरण की शुरुआत

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  पटियाला के सनौर विधानसभा क्षेत्र में व्यापक बुनियादी ढांचे और सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत करके पंजाब के विकास में जमीनी स्तर पर तेजी लाई। इस मौके पर उन्होंने 87 करोड़ रुपये की सड़क नवीनीकरण कार्यों के साथ-साथ 27 करोड़ रुपये की नहरी लाइनिंग परियोजनाओं का ऐलान किया, जिससे 83 गांवों में 40,066 एकड़ रकबे को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।

पिछली सरकारों की तुलना में मौजूदा समय के मिसाल बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान भ्रष्टाचार के कारण कुछ ही दिनों में सड़कों की हालत खस्ता हो जाती थी, लेकिन पंजाब सरकार द्वारा ठेकेदारों के लिए सड़कों के पांच साल के अनिवार्य रखरखाव संबंधी धारा लागू की गई है, जिससे जवाबदेही में वृद्धि होगी। उन्होंने आगे कहा कि ‘आप’ सरकार ने न केवल सिंचाई अधीन रकबा पहले के 21,050 एकड़ से बढ़ा दिया है, बल्कि कानूनी लड़ाई के माध्यम से हरियाणा को दिए जाने वाले भाखड़ा नहर के पानी का पंजाब का 25 प्रतिशत हिस्सा भी प्राप्त किया है, ताकि किसानों को उनका हक मिल सके।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब की बेमिसाल तरक्की को देखकर पारंपरिक पार्टियां अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। आज, पंजाब के विकास की गाड़ी फिर से पटरी पर आ गई है और हर गुजरते दिन के साथ इसकी गति और तेज हो रही है। विपक्षी पार्टियों को यह बात हजम नहीं हो रही, जिस कारण वे रोजाना बेबुनियाद और तर्कहीन बयान जारी कर रही हैं। यह विपक्षी पार्टियों में निराशा को दर्शाता है, जो सूबे के विकास और इसके लोगों की खुशहाली से ईर्ष्या करती हैं।”

सनौर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “आज सनौर क्षेत्र में 49.60 करोड़ रुपये की लागत से कई नई लिंक सड़कें बनाई जाएंगी और कुछ मौजूदा सड़कों को नया रूप दिया जाएगा। लोग जल्द ही अपने गांवों जाने वाली सड़कों में प्रत्यक्ष बदलाव देखेंगे। मुख्य पटियाला-पिहोवा सड़क को नया रूप दिया जाएगा और दिल्ली जाने वाली आवाजाही को आसान बनाने के लिए जल्द ही इसे चार लेन का बनाया जाएगा।”

जवाबदेही में वृद्धि पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछली सरकारों की तरह सड़कें अब घटिया दर्जे की नहीं होंगी क्योंकि अब सड़कों के रखरखाव संबंधी पांच साल की जिम्मेदारी ठेकेदारों के पास है और किसी भी नुकसान के नतीजे में भुगतान रोका जा सकता है, ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और भविष्य में कोई भी ठेका न देने के साथ-साथ अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।”

सड़क बुनियादी ढांचे के विकास के स्तर पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब सरकार द्वारा सूबे के इतिहास का सबसे बड़ा सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया है, जिसके तहत कुल 16,209 करोड़ रुपये की लागत से 44,920 किलोमीटर सड़कें बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।”

उन्होंने कहा, “ये सभी सड़कें पांच साल के रखरखाव की धारा के अधीन बनाई जाएंगी, जिससे विश्व स्तरीय सड़क सुरक्षा के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सूबे में बेहतर आवागमन सुविधाएं प्रदान करना और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है, जिससे आम लोगों को बड़ा लाभ होगा।”

पानी के संरक्षण और सिंचाई के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पानी के रक्षक होने का दावा करने वालों ने कभी भी पानी की संरक्षण की ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि पंजाब सरकार द्वारा पानी की हर बूंद की बचत की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “सूबे में 6,900 किलोमीटर लंबी 18,349 खालों को बहाल किया गया है, ताकि सूबे के दूर-दराज के हिस्सों में पानी उपलब्ध करवाया जा सके, जिससे किसानों को बड़ा लाभ हुआ है। हमारी सरकार ने नहरी प्रणाली को फिर से जीवित करने के लिए 6,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, ताकि सूबे के हर क्षेत्र तक पानी पहुंच सके, और पहली बार सूबे के 1,444 गांवों को नहरी पानी मिला है।”

शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब ने नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पहला स्थान प्राप्त किया है और यह सभी पंजाबियों के लिए बेहद गर्व और संतुष्टि की बात है कि इस सर्वेक्षण में सूबे ने केरल को भी पीछे छोड़ दिया है।”

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों के दौरान 740 छात्रों ने जेईई परीक्षा और 1,284 ने नीट परीक्षा पास की है तथा 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस खोले जा रहे हैं, जिनमें से 60 पहले ही कार्यशील हो चुके हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये स्कूल प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी योग्यताओं और रुचियों के अनुसार शिक्षा प्रदान करके उनके सपनों को साकार करने में मदद कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पहली बार, 24 लाख माता-पिता ने मेगा पीटीएम में हिस्सा लिया है।”

शिक्षा सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकारी स्कूलों में छात्रों को मेडिकल और नॉन-मेडिकल समेत सभी स्ट्रीम की पेशकश की जा रही है।” उन्होंने आगे कहा, “छात्रों को आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी, नीट, जेईई और सीएलएटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के लिए कोचिंग भी प्रदान की जा रही है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केवल शिक्षा से ही सभी सामाजिक बुराइयों का समाधान किया जा सकता है, इसलिए पंजाब सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए शिक्षा क्षेत्र में बेमिसाल पहल की हैं।”

सामाजिक परिवर्तन में शिक्षा की अहम भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कोई भी मुफ्त सुविधा या रियायत सूबे में गरीबी या अन्य सामाजिक बुराइयों को खत्म नहीं कर सकती, लेकिन शिक्षा ही वह कुंजी है जो लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाकर उन्हें गरीबी से बाहर निकाल सकती है।”

उन्होंने कहा, “शिक्षा वह रोशनी है जो अंधेरे को दूर करके दुनिया में प्रकाश बिखेरती है, जिस कारण पंजाब सरकार इस पर विशेष जोर दे रही है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की गई है, जिसके तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं।”

बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना (एमएमएसवाई) के तहत हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान किया जा रहा है और 30 लाख से अधिक लाभार्थियों को पहले ही स्वास्थ्य कार्ड मिल चुके हैं। इस योजना के तहत 1.65 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिल चुका है और लोगों को इन कार्डों का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार धान के मौसम के दौरान खेतों की मोटरों के लिए आठ घंटे से अधिक निर्विघ्न बिजली आपूर्ति दी गई है।

बिजली सुधारों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को अब पहली बार सिंचाई के लिए दिन में बिजली मिल रही है, जिससे उनकी जिंदगी बदल गई है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार लोगों की भलाई के लिए सरकारी खजाने के एक-एक पैसे का उपयोग पूरी सूझ-बूझ से कर रही है।

मांवां-धीयां सत्कार योजना के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आप सरकार की यह योजना 18 वर्ष और इससे अधिक उम्र की अनुसूचित जातियों से संबंधित महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये और अन्य सभी वर्गों से संबंधित महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये प्रदान करेगी।

वित्तीय जिम्मेदारी की पुष्टि करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के टैक्स का पैसा सूबे का है और इसे लोगों की भलाई के लिए ही खर्च किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि करदाताओं का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों के पास वापस जा रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही पंजाब सरकार ने अपनी सभी गारंटियां पूरी कर ली हैं, लेकिन पंजाब की तरक्की के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हम मंच पर खड़े होकर शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और कृषि के बारे में बात करते हैं, जबकि दूसरी पार्टियां सिर्फ सत्ता हथियाने पर अपना ध्यान केंद्रित करके चल रही हैं।

विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये अवसरवादी नेता निराशा के आलम में गुजर रहे हैं और लोग उन्हें कोई हुंकार नहीं दे रहे क्योंकि उनका एजेंडा लोगों की बजाय सिर्फ अपने परिवारों की भलाई तक सीमित रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं का एकमात्र एजेंडा लोगों को गुमराह करके उनमें फूट डालने के सिवा और कुछ नहीं होता।

सड़क सुरक्षा फोर्स के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सरकार ने देश भर में समर्पित सड़क सुरक्षा फोर्स नाम की अपनी तरह की पहली पहल शुरू की है, जो राज्य और राष्ट्रीय मार्गों पर सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए लोगों की कीमती जानें बचाने के लिए हर समय तैनात है। उन्होंने आगे कहा कि विशेष रूप से प्रशिक्षित नवीन भर्ती किए गए 1,597 कर्मचारी इस फोर्स की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम कर रहे हैं, जिन्हें 144 पूर्ण रूप से सुसज्जित वाहन प्रदान किए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल फरवरी में अपनी शुरुआत के बाद से यह फोर्स सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 48 प्रतिशत तक कम करने में सफल रही है। इसके अलावा यह फोर्स दुर्घटना के पीड़ितों से संबंधित हर चीज और उनके पैसे को परिवार के सदस्यों तक सुरक्षित पहुंचाना सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह फोर्स 4,200 किलोमीटर हाईवे पर, जहां सड़क दुर्घटनाओं की संभावना अधिक है, तैनात की गई है और यह ट्रैफिक उल्लंघनों के विरुद्ध एक मजबूत रोकथाम प्रणाली के रूप में काम करती है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछली किसी भी सरकार ने ऐसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, जिस कारण पंजाब पहले सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में शीर्ष तीन राज्यों में आता था। उन्होंने आगे कहा कि इस महत्वपूर्ण फैसले की भारत सरकार और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी भरपूर सराहना की है।

प्रशासनिक सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईजी रजिस्ट्री प्रोजेक्ट को पंजाब भर में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिससे पारदर्शी और परेशानी मुक्त संपत्ति पंजीकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस पहल ने पंजीकरण प्रक्रिया को आसान और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया है।

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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