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CM मान को बदनाम करने की साजिश! ‘आप’ ने जारी की दो लैब रिपोर्टें, वीडियो को बताया फर्जी

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पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann से जुड़ी कथित विवादित वीडियो को लेकर आम आदमी पार्टी ने बड़ा दावा किया है। पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दो स्वतंत्र लैब रिपोर्टें पेश करते हुए कहा कि वीडियो फर्जी है और मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए सुनियोजित साजिश के तहत इसे फैलाया गया।

पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema और पार्टी प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो बाहरी प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई गई। उनके अनुसार जांच में मुख्यमंत्री भगवंत मान के चेहरे, शारीरिक बनावट, हाव-भाव और चाल-ढाल सहित 1,191 विभिन्न बिंदुओं का विश्लेषण किया गया।

आम आदमी पार्टी का दावा है कि दोनों रिपोर्टों में वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच कोई समानता नहीं पाई गई। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह वीडियो मुख्यमंत्री की नहीं है, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति की वीडियो को उनके साथ जोड़कर वायरल किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मकसद से मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश की गई है। चीमा ने बताया कि मामले की कानूनी जांच और दोषियों की पहचान के लिए पार्टी प्रतिनिधिमंडल पंजाब के डीजीपी से भी मुलाकात कर रहा है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि फर्जी और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी तथा सच्चाई सामने लाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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पंजाब की डोरस्टेप सेवा को बड़ी सफलता, 4.18 लाख से अधिक अपॉइंटमेंट बुक

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पंजाब सरकार की ‘भगवंत मान सरकार, तुहाडे द्वार’ योजना ने सरकारी सेवाओं की डोरस्टेप डिलीवरी में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल के तहत अब तक 4.18 लाख से अधिक अपॉइंटमेंट बुक किए जा चुके हैं, जबकि 3.10 लाख से ज्यादा सरकारी सेवाएं लोगों तक उनके घरों में पहुंचाई जा चुकी हैं। विभिन्न विभागों में लंबित मामलों की दर घटकर केवल 0.33 प्रतिशत रह गई है।

इस योजना के तहत नागरिक 1076 हेल्पलाइन, व्हाट्सऐप, ऑनलाइन पोर्टल या सेवा केंद्रों के माध्यम से 437 सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। अपॉइंटमेंट तय होने के बाद प्रशिक्षित डोरस्टेप डिलीवरी ऑपरेटर नागरिकों के घर पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करते हैं, आवेदन भरने में सहायता करते हैं और उसे ऑनलाइन जमा करवाते हैं।

सरकार का कहना है कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को मिला है, जिन्हें पहले सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे और कई बार बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता था।

सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि तकनीक के उपयोग से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम के कारण देरी कम हुई है और सेवाएं लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिकों को सामान्य सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अब प्रमाणपत्र और मंजूरियां एसएमएस, व्हाट्सऐप या घर तक पहुंचाई जा रही हैं।

सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया है। पटवारी, नंबरदार, सरपंच, नगर पार्षद और अन्य अधिकारी अब ऑनलाइन सत्यापन कर रहे हैं, जिससे कागजी कार्रवाई कम हुई है और सरकारी सेवाएं अधिक सुलभ बनी हैं।

इसके अलावा, सरकार ने ‘फॉर्मलेस सर्विसेज’ भी शुरू की हैं। इसके तहत नागरिकों को लंबे आवेदन फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होती। डोरस्टेप डिलीवरी ऑपरेटर डिजिटल माध्यम से जानकारी दर्ज करते हैं और सिस्टम स्वतः आवेदन तैयार कर देता है।

सरकार के अनुसार, रियल-टाइम ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और फीडबैक तंत्र जैसी व्यवस्थाओं से पूरे राज्य में सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को और तेज, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया गया है।

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चंडीगढ़ में OLA को बड़ा झटका, 6 महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड

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चंडीगढ़ प्रशासन ने कैब एग्रीगेटर कंपनी OLA के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस 6 महीने के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह फैसला कंपनी द्वारा नियमों का पालन न करने और प्रशासन की ओर से जारी नोटिसों का संतोषजनक जवाब न देने के कारण लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर रूल्स-2025 के तहत की गई है। प्रशासन का कहना है कि कंपनी ड्राइवरों के कल्याण से जुड़े कई जरूरी नियमों का पालन नहीं कर रही थी। इसके अलावा इस संबंध में भेजे गए नोटिसों और ई-मेल का भी उचित जवाब नहीं दिया गया।

लाइसेंस निलंबित होने के बाद ट्राइसिटी क्षेत्र में OLA की कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लग गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई वाहन OLA प्लेटफॉर्म के जरिए सेवा देता पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और वाहन को जब्त भी किया जा सकता है।

स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस में बताया गया है कि ANI Technologies Private Limited, जो OLA Cab के नाम से जानी जाती है, का एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। OLA से जुड़े वाहन संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी गाड़ियां OLA प्लेटफॉर्म से न जोड़ें और न ही OLA ऐप के माध्यम से कोई बुकिंग स्वीकार करें।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए फिलहाल OLA ऐप के जरिए राइड बुक न करें और अन्य पंजीकृत कैब सेवाओं का इस्तेमाल करें।

अथॉरिटी के अनुसार, कंपनी के खिलाफ ड्राइवरों की ओर से कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ड्राइवरों के लिए स्वास्थ्य बीमा, टर्म इंश्योरेंस और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं से जुड़े नियमों को लागू नहीं कर रही थी। कई बार स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद कंपनी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया।

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ड्राइवरों के अधिकारों की सुरक्षा और एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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भगवंत मान सरकार, तुहाडे द्वार’ पहल के तहत 437 सरकारी सेवाएँ नागरिकों के घर-द्वार तक पहुँचीं, लंबित मामलों की दर घटकर 0.33 प्रतिशत हुई

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‘भगवंत मान सरकार, तुहाडे द्वार’ पहल के तहत पंजाब की 1076 हेल्पलाइन और डोरस्टेप डिलीवरी प्रणाली नागरिकों तक सरकारी सेवाएँ पहुँचाने के तरीके को बदल रही है। इस पहल ने सेवा वितरण में होने वाली देरी को कम किया है, बिचौलियों पर निर्भरता घटाई है और शासन को अधिक पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित बनाया है।

तकनीक-सक्षम इस प्रणाली के माध्यम से अब तक 3.10 लाख से अधिक सेवाएँ नागरिकों तक पहुँचाई जा चुकी हैं। विभिन्न विभागों में लंबित मामलों की दर घटकर मात्र 0.33 प्रतिशत रह गई है। अब नागरिक 1076 हेल्पलाइन पर कॉल करके या व्हाट्सऐप, ऑनलाइन पोर्टल अथवा सेवा केंद्रों के माध्यम से अपॉइंटमेंट बुक कर 437 सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। अपॉइंटमेंट तय होने के बाद प्रशिक्षित डोरस्टेप डिलीवरी ऑपरेटर नागरिकों के घर पहुँचते हैं, आवश्यक दस्तावेज़ एकत्र करते हैं, आवेदन भरने में सहायता करते हैं और ऑनलाइन आवेदन जमा करवाते हैं, जिससे सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

इस पहल का विशेष लाभ वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, महिलाओं और कामकाजी पेशेवरों को मिला है, जिन्हें पहले सरकारी सेवाएँ प्राप्त करने के लिए समय और धन ख़र्च कर कार्यालयों तक जाना पड़ता था तथा कई बार बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता था। इस पहल की शुरुआत से अब तक डोरस्टेप डिलीवरी प्रणाली के तहत 4.18 लाख से अधिक अपॉइंटमेंट बुक किए जा चुके हैं। नागरिक अब प्रमाणपत्र और स्वीकृतियाँ एसएमएस, व्हाट्सऐप तथा घर पर भौतिक डिलीवरी के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं, जिससे सरकारी सेवाएँ अधिक सुलभ और सुविधाजनक बन गई हैं।

इस पहल की मदद से वेरीफिकेशन प्रक्रिया में भी महत्त्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। पटवारियों, नंबरदारों, सरपंचों, नगर पार्षदों और विभागीय अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन वेरीफिकेशन की व्यवस्था से कागज़ी कार्यवाही में कमी आई है, भौतिक रूप से कार्यालय जाने की आवश्यकता घटी है और साथ ही पारदर्शिता तथा जवाबदेही में वृद्धि हुई है। एक अन्य महत्त्वपूर्ण सुधार ‘फॉर्मलेस सेवाओं’ की शुरुआत है, जिसके तहत नागरिकों को अब लंबे एप्लिकेशन-फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं है। डोरस्टेप डिलीवरी ऑपरेटर डिजिटल माध्यम से आवश्यक जानकारी दर्ज करते हैं और सिस्टम अपने-आप एप्लिकेशन तैयार कर देता है, जिससे प्रक्रिया सरल होती है तथा त्रुटियों में कमी आती है।

रियल-टाइम एप्लिकेशन ट्रैकिंग, विभागवार डैशबोर्ड, बीट-वार निगरानी और लाभार्थियों को किए जाने वाले फीडबैक कॉल्स ने जवाबदेही को और मज़बूत किया है तथा समय पर सेवाएँ उपलब्ध करवाना सुनिश्चित हुआ है। पंजाब के सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि शासन को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी शासन का विकल्प नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही को मज़बूत करती है। आवेदनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग से देरी कम होती है, अनिश्चितता घटती है और सेवा वितरण नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनता है।”

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को सामान्य सेवाओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा, “हाल ही में सरपंचों, नंबरदारों और नगर पार्षदों के माध्यम से प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन वेरीफिकेशन की सुविधा शुरू करना कागज़ी कार्यवाही कम करने, भौतिक रूप से कार्यालय जाने की आवश्यकता घटाने और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है।” आवेदन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से देरी और बिचौलियों की गुंजाइश लगातार कम हो रही है, जिससे शासन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनता जा रहा है।

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