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पंजाब के मुद्दों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री से मिले CM मान; गेहूं खरीद, मुआवजा और लंबित राशि पर की चर्चा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में गेहूं की खरीद व्यवस्था, किसानों को मुआवजा, लंबित राशि और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में खाद्य सुरक्षा और पेट्रोलियम से जुड़े विषयों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पुराने गेहूं के भंडार को तेजी से उठाने के लिए अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है, जिससे भंडारण की समस्या कम होगी।
आज पंजाब का दौरा कर सकती है केंद्रीय टीम
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की और केंद्र से अपील की कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए तुरंत एक टीम पंजाब भेजी जाए। संभावना जताई जा रही है कि केंद्र की टीम आज ही राज्य का दौरा कर सकती है।
ऋण सीमा पर ब्याज दर में बढ़ोतरी से राज्य पर बोझ
वित्तीय मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नकद ऋण सीमा पर ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी राज्य पर भारी बोझ डालती है। उन्होंने बताया कि केवल 0.005 प्रतिशत की वृद्धि से ही लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है।
इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण विकास कोष की लगभग 9000 करोड़ रुपये की लंबित राशि का मुद्दा उठाया और इसे किस्तों में जारी करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में विचाराधीन है, लेकिन राज्य सरकार इसे वापस लेने पर भी विचार कर सकती है। इन दोनों मुद्दों पर केंद्र की तरफ से आश्वासन दिया गया है।
आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की मांग का समर्थन
मुख्यमंत्री ने आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वे किसानों और मंडियों के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। मंडियों में काम करने वाले मजदूरों, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आने वाले श्रमिकों से जुड़े मुद्दों और भविष्य निधि से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने जायज बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात दोहराई और स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
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पटना में बड़ा नाव हादसा, गंगा नदी में पलटी नाव; 2 की मौत, 5 लोग लापता
बिहार की राजधानी पटना से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। उमानाथ गंगा घाट पर तेज हवाओं और खराब मौसम के बीच एक नाव गंगा नदी में पलट गई, जिसमें करीब 14 से 15 लोग सवार थे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
जानकारी के मुताबिक सभी लोग नाव के जरिए गंगा नदी पार कर दियारा क्षेत्र में सब्जियों की कटाई करने जा रहे थे। इसी दौरान अचानक मौसम बिगड़ गया और तेज हवाओं के कारण नाव का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते नाव गंगा नदी में पलट गई और उसमें सवार सभी लोग पानी में डूबने लगे।
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद अन्य नाव चालकों और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इस हादसे में अब तक एक महिला और एक युवक की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि पांच लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बारह थाना के एसएचओ ब्रजकिशोर सिंह, सीडीपीओ रामकृष्ण, एसडीएम गरिमा लोहिया और सर्किल ऑफिसर डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह समेत कई अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन ने तुरंत SDRF की टीम को मौके पर बुलाया, जो गंगा नदी में लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। गोताखोर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि नदी में तेज बहाव और खराब मौसम के कारण राहत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।
हादसे के बाद उमानाथ गंगा घाट पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस द्वारा मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी किनारे भीड़ न लगाएं और बचाव कार्य में बाधा न डालें। साथ ही खराब मौसम के दौरान नाव यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई है।
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महंगे ईंधन ने बढ़ाई चिंता, Air India का बड़ा फैसला, घरेलू उड़ानों में 22% तक कटौती
देश में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और ऑपरेशन कॉस्ट के दबाव के बीच Air India ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बड़ी कटौती करने का फैसला लिया है। एयरलाइन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आने वाले महीनों में कई रूटों पर फ्लाइट्स की संख्या अस्थायी रूप से कम की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक एयर इंडिया पहले ही अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में करीब 27 प्रतिशत तक कटौती कर चुकी है। अब कंपनी ने घरेलू उड़ानों में भी 20 से 22 प्रतिशत तक कमी करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद कई रूटों पर यात्रियों को पहले के मुकाबले कम फ्लाइट विकल्प मिल सकते हैं।
वर्तमान में एयर इंडिया हर सप्ताह लगभग 4,400 उड़ानों का संचालन करती है। इनमें करीब 3,600 घरेलू और लगभग 800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। कंपनी के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में बदलाव पहले ही लागू किए जा चुके थे, जबकि अब घरेलू रूटों पर भी उड़ानों की संख्या घटाई जा रही है।
एयर इंडिया का कहना है कि यह फैसला लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों और अन्य संचालन खर्चों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कंपनी के मुताबिक मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का सीधा असर एविएशन सेक्टर पर पड़ रहा है, जिसके चलते खर्चों को नियंत्रित करना जरूरी हो गया था।
एयरलाइन ने यह भी साफ किया है कि यात्रियों की मांग और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। जैसे ही हालात सामान्य होंगे और ईंधन कीमतों में राहत मिलेगी, उड़ानों की संख्या फिर से बढ़ाई जा सकती है।
प्रभावित यात्रियों के लिए कंपनी ने कई विकल्प भी दिए हैं। जिन यात्रियों की फ्लाइट रद्द या प्रभावित होगी, उन्हें बिना अतिरिक्त शुल्क दूसरी उड़ानों में शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा यात्रा की तारीख बदलने और पूरा रिफंड लेने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन कीमतों में आगे भी बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले समय में दूसरी एयरलाइन कंपनियां भी इसी तरह के फैसले ले सकती हैं। इसका सीधा असर यात्रियों के सफर और हवाई टिकट की कीमतों पर पड़ सकता है।
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देश में किस तरह की सरकार है जो एक पेपर ठीक से नहीं करा पा रही – केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक के बाद एक पेपर लीक होने और कई तरह की गड़बड़ियां सामने आने पर युवाओं के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि हमारे देश में किस तरह की सरकार है जो एक पेपर ठीक से नहीं करा पा रही है। नीट, सीबीएसई 12वीं, एसएससी जीडी के बाद अब बीटेक परीक्षा में भी गड़बड़ियों की खबर आ रही है। पूरी शिक्षा व्यवस्था पर माफिया ने क़ब्ज़ा कर लिया है। युवाओं को अपना भविष्य सुरक्षित करना है तो कुछ करना होगा।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि नीट, सीबीएसई क्लास 12 के बाद अब एसएससी जीडी में भी कई जगहों से गड़बड़ियों की खबर आ रही है। कई जगहों से शिकायत आ रही है कि सर्वर में खराबी आ गई, कई जगह एग्जाम सेंटर पर क्षमता से ज़्यादा बच्चों को बुला लिया गया। ये किस तरह की सरकार है? जो एक पेपर ठीक से नहीं करा पा रहे?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पर माफिया ने पूरी तरह से क़ब्ज़ा कर लिया है। करोड़ों बच्चों और युवाओं के भविष्य का सौदा हो रहा है। ऐसे ही तो शिक्षा माफिया फल फूल नहीं रहा। इनको शह देने वाले टॉप पर बैठे दो लोग हैं। अपना भविष्य सुरक्षित चाहते हो तो आपको ही कुछ करना पड़ेगा।
उधर, दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और “आप” पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर कहा कि पिछले 10 दिन में एक भी दिन ऐसा नहीं बीता जब कोई पेपर लीक का मामला सामने न आया हो। किसी परीक्षा में धांधली को लेकर लोगों को गुस्सा न आया हो या किसी एग्जाम को लेकर बवाल न हुआ हो। नीट का पेपर लीक हुआ। फिर सीबीएसई की परीक्षा में मूल्यांकन का घोटाला सामने आ गया। यूपीएससी की परीक्षा को लेकर बवाल हो गया। अभी उत्तर प्रदेश में बोर्ड की परीक्षा हुई, वहां पर वीआईपी रोल नंबर को लेकर बवाल हो गया। आज पूरे दिन एसएससी के जो छात्र परीक्षा देने गए थे, वे सड़कों पर बवाल करते रहे क्योंकि उनके साथ धोखा हो गया। देश में यह चल क्या रहा है?
मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जी चुनाव जीतने पर जितना ध्यान देते हैं, अगर उसका एक फीसद भी देश में पेपर ठीक कराने पर दे दें, तो पेपर ठीक होने लगेंगे और युवाओं का भविष्य बनने लगेगा। लेकिन उन्हें तो इसकी चिंता ही नहीं है। प्रधानमंत्री पूरे देश को गुमराह कर सकते हैं, लेकिन इस देश के युवाओं को गुमराह नहीं कर सकते। यह नए दौर का युवा है, यह सबक सिखाना जानता है।
मनीष सिसोदिया ने प्रधानमंत्री से कहा कि ना आपसे शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा लिया जा रहा है, ना परीक्षाएँ ईमानदारी से करवाई जा रही हैं। देश का युवा पूछ रहा है कि जब आपसे सिस्टम ही नहीं संभल रहा, तो कुर्सी छोड़ क्यों नहीं देते?
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