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पंजाब बजट सत्र में सीएम मान का कांग्रेस पर पलटवार; बोले- 2027 के बाद भी खाली रहेंगे विपक्ष के बेंच
पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले चार साल का एक-एक पल जनता की सेवा के लिए लगाया है, जबकि पहले की सरकारों के घोषणापत्र में धर्म, जात और लोगों को आपस में लड़ाने की बातें होती थीं।
सीएम मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवालने राजनीति में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी और इन्हें घोषणापत्र का अहम हिस्सा बनाया। सीएम मान ने सदन से कांग्रेस के बहिष्कार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता खुद 17-18 मिनट बोलकर बाहर चले गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा-
“2027 के बाद भी विपक्ष के बेंच इसी तरह खाली रहने वाले हैं।”
विधानसभा में बोलते हुए सीएम भगवंत मान।
महिलाओं के सम्मान की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले वह मां-बहनों के सम्मान की बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें आर्थिक सहायता की जरूरत नहीं होगी, लेकिन कई ऐसे भी हैं जो रोज 50 से 100 रुपये कमाते हैं। ऐसे परिवारों के लिए एक-एक रुपये का भी महत्व होता है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि चार साल में महिलाओं को 48 हजार रुपये क्यों नहीं मिले, लेकिन वही लोग यह बताएं कि उन्होंने अपने समय में नौकरी या बड़े वादों को कितना पूरा किया।
मुफ्त बिजली और स्वास्थ्य योजनाओं का जिक्र
सीएम मान ने कहा कि पंजाब में 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। 600 यूनिट बिजली मुफ्त है और किसानों को भी बिजली मुफ्त दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड का कर्ज भी खत्म किया गया और बिजली दरों में 70 पैसे से डेढ़ रुपये तक कमी की गई।
स्वास्थ्य योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 900 से ज्यादा अस्पतालों में 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी स्वास्थ्य सुविधा कई विकसित देशों में भी नहीं है।
सीएम मान ने बताया कि रसोई योजना के लिए बजट में 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जरूरतमंद परिवारों को नमक, चीनी, दाल और तेल जैसी जरूरी खाद्य सामग्री दी जाएगी ताकि उन्हें सही पोषण मिल सके।
13 से 15 मार्च तक राज्य में निवेश सम्मेलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 मार्च को लुधियाना में देश की दूसरी सबसे बड़ी साइकिल वैली का उद्घाटन किया जाएगा, जिस पर करीब 3200 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इससे करीब 2000 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि 13 से 15 मार्च तक पंजाब में बड़ा निवेश सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश और विदेश के बड़े उद्योगपति शामिल होंगे।
सीएम मान ने कहा कि राज्य में आम आदमी क्लीनिकों में अब तक 5 करोड़ से ज्यादा ओपीडी हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब अब विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम और दिखाई देंगे।
पढ़ें, सीएम भगवंत मान के भाषण की 10 मुख्य बातें
- उनकी सरकार ने पिछले चार साल का एक-एक पल पंजाब के लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया है और जनता से किए वादों को पूरा करने की दिशा में काम किया है।
पहले राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में धर्म और जाति के मुद्दे होते थे, लेकिन अरविंद केजरीवालने राजनीति में शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी।
विपक्ष के नेता कुछ मिनट बोलकर बाहर चले गए और 2027 के बाद भी उनकी बेंच इसी तरह खाली रहेंगी।
कई परिवार ऐसे हैं जिनकी आय बहुत कम है, ऐसे में आर्थिक सहायता की छोटी राशि भी उनके लिए महत्वपूर्ण होती है।
पंजाब में 90 प्रतिशत घरों को 600 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है और किसानों को भी मुफ्त बिजली की सुविधा मिल रही है।
राज्य में 900 से ज्यादा अस्पतालों में 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया गया है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है।
रसोई योजना के लिए बजट में 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत जरूरतमंद परिवारों को नमक, चीनी, दाल और तेल जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री दी जाएगी।
लुधियाना में 3200 करोड़ रुपये की लागत से देश की दूसरी सबसे बड़ी साइकिल वैली बनाई जा रही है, जिससे करीब 2000 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।
पंजाब में 13 से 15 मार्च तक बड़ा निवेश सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कई बड़े उद्योगपति हिस्सा लेंगे।
आम आदमी क्लीनिकों में अब तक 5 करोड़ से अधिक ओपीडी हो चुकी हैं और इससे लाखों लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है।
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पंजाब में 90% घरों को मुफ्त बिजली दी जा रही है, अपना एक-एक पल लोगों के खाते में लगाया — CM मान
आज पंजाब विधानसभा में बजट सत्र का तीसरा दिन है। राज्यपाल Gulab Chand Kataria के 6 मार्च को दिए गए भाषण पर तनाव और बहस जारी है। इस मौके पर मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा कि पिछले 4 सालों के दौरान सरकार ने हर एक पल की जिम्मेदारी ली और लोगों को लाभ पहुंचाया।
उन्होंने बताया कि पंजाब के 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। खेतों में कृषि करने वाले लोगों के लिए भी सी फ्री बिजली की सुविधा है। बिजली बोर्ड के कार्य खत्म कर दिए गए हैं, और अब बिजली की कीमत 70 पैसे से 1.5 रुपये प्रति यूनिट हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार ने पिछले 4 सालों से एक-एक पल का लेखा रखा है। अन्य पार्टियों के मेनिफेस्टो धर्म, जात और टकराव भड़काने पर केंद्रित थे, लेकिन हमने शिक्षा, स्वास्थ्य और लोगों की जरूरतों को मुख्य रखा।” उन्होंने बताया कि रसोई योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सरकार ने कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 900 से ज्यादा अस्पतालों में 10 लाख रुपये तक का नकद रहित इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
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पंजाब में मान सरकार की नीति से ₹1.55 लाख करोड़ का निवेश, अब औद्योगिक हब बनेगा राज्य!
पंजाब में लंबे समय से उद्योगों के पलायन, बेरोज़गारी और आर्थिक सुस्ती को लेकर जो चिंता थी, उसे अब एक नई दिशा मिलती दिख रही है. मान सरकार ने बताया है कि नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी ने राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐसा रोडमैप पेश किया है, जिसे उद्योग जगत भी गंभीरता से देख रहा है और आम लोग भी उम्मीद के साथ जोड़कर देख रहे हैं. यह सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं बल्कि पंजाब के आर्थिक पुनर्निर्माण की शुरुआत माना जा रहा है.
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में उद्योग लगाने को लेकर कई तरह की आशंकाएँ रहती थीं, भौगोलिक स्थिति, निवेश सुरक्षा और प्रतिस्पर्धी राज्यों की नीतियां, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की सरकार ने इन सभी चुनौतियों का जवाब एक व्यापक और दूरदर्शी औद्योगिक नीति के जरिए दिया है. इस नई पॉलिसी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशकों को अपनी जरूरत के हिसाब से इंसेंटिव चुनने की आज़ादी दी गई है. यानी उद्योगपति अब तय कर सकते हैं कि उनके प्रोजेक्ट के लिए कौन-कौन से प्रोत्साहन सबसे अधिक फायदेमंद होंगे.
बड़े उद्योगों के आने का रास्ता होगा आसान- सरकार
सरकार ने कहा है कि यह बदलाव पंजाब को उन राज्यों से अलग खड़ा करता है, जहां एक तयशुदा पैकेज दिया जाता है और निवेशक को उसी में काम करना पड़ता है. पंजाब ने पहली बार निवेशकों को लचीलापन दिया है, जिससे उद्योगों को अपने बिजनेस मॉडल के अनुसार प्रोत्साहन लेने का अवसर मिलेगा. मान सरकार ने इस नीति के जरिए एक और बड़ा कदम उठाया है, पूंजी निवेश पर सीधी सब्सिडी. अगर कोई उद्योग 100 करोड़ रुपये का प्लांट लगाने की योजना बनाता है, तो सरकार पूंजी निवेश में साझेदारी करके शुरुआती जोखिम को कम करती है. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बड़े उद्योगों के आने का रास्ता आसान होगा.
सरकार ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पॉलिसी केवल नए उद्योगों के लिए ही नहीं बल्कि पहले से काम कर रहे उद्योगों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए भी लागू होगी. पहले अक्सर देखा जाता था कि सरकारें सिर्फ नए निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश करती थीं, जबकि राज्य के मौजूदा उद्योग पीछे छूट जाते थे. लेकिन अब अगर कोई पुरानी फैक्ट्री अपनी मशीनरी अपग्रेड करना चाहती है, उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है या नई लाइन जोड़ना चाहती है, तो उसे भी सरकारी प्रोत्साहन मिलेगा.
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार- मान सरकार
मान सरकार का दावा है कि यह फैसला पंजाब के औद्योगिक शहरों लुधियाना, जालंधर, गोबिंदगढ़ और बटाला के हजारों छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए राहत और अवसर दोनों लेकर आया है. इन्हीं उद्योगों में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है. नई पॉलिसी का एक बड़ा संदेश सामाजिक समावेशन को लेकर भी है. अगर उद्योगों में महिलाओं, अनुसूचित जाति समुदायों या दिव्यांग कर्मचारियों को रोजगार दिया जाता है तो सरकार अधिक सब्सिडी देगी. इसका मतलब है कि रोजगार के साथ-साथ सामाजिक न्याय को भी नीति का हिस्सा बनाया गया है.
सरकार ने बताया है कि छोटे उद्योगों को भी इस नीति में पहली बार बड़े पैमाने पर जगह दी गई है. रोजगार सृजन सब्सिडी के लिए न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दी गई है और 50 कर्मचारियों की शर्त रखी गई है. इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को सरकारी प्रोत्साहन मिलने का रास्ता खुल गया है.
25 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान
पंजाब के सीमावर्ती जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है. इन इलाकों में लंबे समय से निवेश कम आता रहा है, लेकिन अब सरकार इन क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने वालों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ दे रही है. इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है.
इस नीति की सबसे बड़ी ताकत इसका दीर्घकालिक दृष्टिकोण है. कई राज्यों में औद्योगिक प्रोत्साहन 5 से 10 साल तक सीमित होते हैं, जबकि पंजाब ने इसे बढ़ाकर 15 साल तक कर दिया है. इससे बड़े और पूंजी-गहन उद्योग जैसे सेमीकंडक्टर, फार्मा, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहन को राज्य में आने के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद माहौल मिलेगा. मान सरकार का दावा है कि इस नई नीति के तहत निवेशकों को उनके फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट का 100 प्रतिशत तक इंसेंटिव मिल सकता है. इसमें जमीन, मशीनरी, भवन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और पर्यावरण से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तक शामिल हैं. इस तरह की व्यापक सहायता किसी भी उद्योग के लिए निवेश का गणित पूरी तरह बदल सकती है.
2022 के बाद राज्य में 1.55 लाख करोड़ का हुआ निवेश
पिछले कुछ समय में पंजाब में निवेश का रुझान भी जबरदस्त तेजी से बढ़ा है. आंकड़ों के अनुसार 2022 के बाद राज्य में लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है, जिसमें से करीब 55 हजार करोड़ रुपये का निवेश सिर्फ पिछले एक साल में आया. टाटा, इंफोसिस, ट्राइडेंट, वर्धमान, एचएमईएल और फोर्टिस जैसी बड़ी कंपनियों की मौजूदगी ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है.
पंजाब के युवाओं के लिए इस नीति का सबसे बड़ा असर रोजगार के रूप में दिखाई देगा. जब नए उद्योग आएंगे, पुराने उद्योग विस्तार करेंगे और छोटे उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, तो लाखों युवाओं के लिए नौकरी के नए अवसर पैदा होंगे.
राज्य के कई इलाकों में लोग अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि पंजाब एक बार फिर औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत तरीके से उभरेगा. लंबे समय तक बेरोजगारी और पलायन की चर्चा करने वाले पंजाब के युवा अब यह कह रहे हैं कि अगर उद्योग आएंगे तो उन्हें भी अपने ही राज्य में भविष्य बनाने का मौका मिलेगा.
पंजाब की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति- सरकार
आम आदमी पार्टी की सरकार इस नीति को पंजाब की आर्थिक पुनरुत्थान की आधारशिला के रूप में पेश कर रही है. सरकार का मानना है कि उद्योग, रोजगार और सामाजिक समावेशन इन तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने वाली यह नीति आने वाले वर्षों में पंजाब की अर्थव्यवस्था को नई गति देगी.
पंजाब के लोगों के बीच भी यह भावना तेजी से बन रही है कि अगर ऐसी नीतियां लगातार लागू होती रहीं तो राज्य सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उद्योग और रोजगार के मामले में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है.
भगवंत मान सरकार की नई औद्योगिक नीति को इसलिए भी एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यह केवल निवेश आकर्षित करने की कोशिश नहीं है, बल्कि पंजाब के आर्थिक भविष्य को एक स्थायी दिशा देने की कोशिश है.
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पंजाब की किन महिलाओं के खाते में आएंगे 1000 रुपये, कैसे करना होगा आवेदन?
Punjab One Thousand Rupees Scheme: राज्य सरकारें समय-समय पर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू करती हैं. इनका मकसद महिलाओं को घरेलू खर्च में मदद देना और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र बनाना होता है. इसी दिशा में पंजाब सरकार ने भी एक नई वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की है.
जिसमें महिलाओं को हर महीने तय राशि देने की बात कही गई है. इस योजना के लिए सरकार ने बड़ा बजट भी तय किया है. जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इसका फायदा उठा सकें. सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक मदद मिलने से महिलाओं की घरेलू फैसलों में भागीदारी बढ़ेगी और वह अपनी जरूरतों को लेकर ज्यादा आत्मनिर्भर बन सकेंगी. लेकिन सब महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ.
किन महिलाओं को मिलेगा इस योजना का लाभ?
इस योजना के तहत राज्य की बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरकार के अनुसार सामान्य वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये दिए जाएंगे. वहीं अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के लिए यह राशि ज्यादा रखी गई है और उन्हें हर महीने 1500 रुपये तक की मदद मिल सकती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं की उम्र कम से कम 18 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए.
अच्छी बात यह है कि जो महिलाएं पहले से वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन या दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ ले रही हैं. वह भी इस योजना के लिए पात्र मानी जा सकती हैं. हालांकि कुछ महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा.
कौन नहीं ले सकेगा फायदा?
सरकार ने इस योजना में कुछ पात्रता नियम भी तय किए हैं. जिनके तहत जो महिलाएं सरकारी कर्मचारी या पेंशन प्राप्त कर रहीं हैं. वह इस योजना के दायरे में नहीं आएंगी. इसके अलावा आयकर देने वाली महिलाएं और वर्तमान या पूर्व विधायक और सांसद भी इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सहायता उन्हीं महिलाओं तक पहुंचे जिन्हें आर्थिक मदद की ज्यादा जरूरत है.
क्या है आवेदन की प्रोसेस?
जहां तक आवेदन की बात है, सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तय की जाएगी. आम तौर पर ऐसी योजनाओं के लिए महिलाओं को रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जिसके बाद पात्रता की जांच की जाती है. दस्तावेजों के सत्यापन के बाद चयनित लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे राशि भेजी जाती है. आने वाले समय में राज्य सरकार इस योजना से जुड़ी पूरी आवेदन प्रोसेस और नियम जारी किए जा सकते हैं.
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