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CM मान सरकार की ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम रंग ला रही है, तस्कर अब हरियाणा को अपना नया अड्डा बना रहे हैं: हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री Harapal Singh Cheema ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार की निर्णायक और निरंतर कार्रवाई से नशे के नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जिन तस्करी गिरोहों ने पहले बेखौफ होकर काम किया, वे अब टूट रहे हैं और राज्य छोड़ने को मजबूर हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में चल रहे अभियान के चलते पंजाब में नशा माफिया पर शिकंजा कसा गया है। उनके मुताबिक, सख्त कार्रवाई के कारण तस्कर अब अन्य राज्यों, विशेषकर हरियाणा, की ओर रुख कर रहे हैं।
हरियाणा सरकार पर उठाए सवाल
चीमा ने हरियाणा की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां नशे के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने हरियाणा पुलिस अधिकारी सुनील संधू का जिक्र करते हुए कहा कि एंटी-ड्रग कार्रवाई के बाद जिस तरह से उनके खिलाफ कदम उठाए गए, वह चिंताजनक है। चीमा ने सवाल किया कि हरियाणा सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है।
अकाली-भाजपा शासन का जिक्र
वित्त मंत्री ने 2007-2017 के अकाली-भाजपा शासन को याद करते हुए कहा कि उसी दौर में पंजाब में हेरोइन और ‘चिट्टा’ जैसे नशों का प्रसार हुआ। उन्होंने दावा किया कि जनता ने उसी अनुभव के आधार पर उस सरकार को सत्ता से बाहर किया।
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का हवाला
चीमा ने बताया कि 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान शुरू किया गया। इसके तहत:
- विशेष सब-कमेटी का गठन किया गया
- जिलों में समन्वय बैठकें आयोजित की गईं
- 1.5 लाख से अधिक गांव सुरक्षा समिति सदस्यों ने नशा विरोधी शपथ ली
उन्होंने इसे जनभागीदारी का बड़ा उदाहरण बताया।
अन्य राज्यों का भी जिक्र
चीमा ने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों में भी बड़ी मात्रा में नशे की बरामदगी हुई है। उन्होंने गुजरात में 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़े जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि यह गंभीर चिंताओं को जन्म देता है।
पंजाब का संकल्प दोहराया
वित्त मंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार नशा माफिया को दोबारा पैर पसारने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी ड्रग नेटवर्क के खिलाफ ईमानदारी से कार्रवाई करते हैं, उन्हें संरक्षण मिलना चाहिए, न कि उत्पीड़न।
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती और जनसहभागिता के साथ जारी रहेगा।
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Iran-US बातचीत का दूसरा दौर आज, इस्लामाबाद हाई अलर्ट पर
आज इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की अहम बातचीत होने जा रही है। इस बैठक को देखते हुए पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और हाई अलर्ट घोषित किया गया है।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को हुए दो हफ्तों के युद्धविराम की अवधि 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है। पहले दौर की बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ मुख्य मुद्दा रहा था। हालांकि, हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब ईरान ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर फायरिंग की, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी।
ट्रंप ने कहा, “हम एक बहुत ही मजबूत प्रस्ताव दे रहे हैं। उम्मीद है कि ईरान इसे स्वीकार करेगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर सकता है।”
संभावित बातचीत को देखते हुए पाकिस्तान ने विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं और कूटनीतिक प्रयास भी तेज कर दिए हैं, ताकि इस बैठक के जरिए किसी अंतिम समझौते तक पहुंचा जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, चार अमेरिकी सैन्य विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर उतर चुके हैं। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति के शामिल होने की संभावना नहीं है।
यह बातचीत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ बिल राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद कानून बन गया, CM भगवंत सिंह मान ने वाहेगुरु और संगत का किया धन्याद
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को ऐलान किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ पंजाब विधानसभा में पास हुआ बिल राज्यपाल की मंज़ूरी मिलने के बाद अब आधिकारिक तौर पर कानून बन गया है। यह पवित्र ग्रंथ की मर्यादा की रक्षा करने के लिए एक ज़रूरी कानूनी कदम है।
X पर एक पोस्ट में, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ विधानसभा में पास हुए बिल पर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब यह बिल कानून बन गया है। मैं वाहेगुरु का बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने इस विनम्र सेवक को ऐसी सेवा का आशीर्वाद दिया है। पूरी संगत का दिल से शुक्रिया।”
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस विकास को सभी के लिए “बहुत शुभ और ऐतिहासिक पल” बताया। उन्होंने कहा, “यह सभी के लिए बहुत शुभ और ऐतिहासिक पल है। 13 अप्रैल को बैसाखी के मौके पर पास हुआ बिल अब ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार एक्ट, 2026’ के तौर पर लागू हो गया है। मैं न सिर्फ सिखों को बल्कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में आस्था रखने वाले सभी धर्मों के लोगों को बधाई देता हूं, क्योंकि यह कानून करोड़ों लोगों की आम आस्था और भावनाओं को दिखाता है।”
कैबिनेट मंत्री बलजीत कौर ने कहा, “यह एक यादगार और ऐतिहासिक दिन है। यह कानून उन लोगों के खिलाफ एक मज़बूत रोकथाम का काम करेगा जो समाज में फूट डालने के इरादे से बेअदबी की घटनाएं करते हैं। मान सरकार ने वह कर दिखाया है जो पिछली सरकारें पंथिक मूल्यों की रखवाली करने का दावा करने के बावजूद नहीं कर पाईं। यह कानून सख्त सज़ा पक्का करेगा और धर्म के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिशों को रोककर सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देगा।”
विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने कहा, “यह पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। विधानसभा में यह बिल बिना किसी विरोध के पास हुआ था और अब इसे राज्यपाल की मंज़ूरी मिल गई है। मैं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को इस बिल को हिम्मत और ईमानदारी से पेश करने का क्रेडिट देता हूं और मुझे उम्मीद है कि कानून के कड़े नियम बेअदबी की घटनाओं को पूरी तरह से रोक देंगे क्योंकि दोषी अब ऐसी हरकतें करने से पहले कई बार सोचेंगे।”
सांसद मलविंदर सिंह कंग ने कहा, “यह कानून दुनिया भर के सिखों की बेअदबी के खिलाफ सख्त सजा की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे ऐसे काम करने वालों में डर पैदा होगा और इंसाफ पक्का होगा। मैं वाहेगुरु और मान सरकार को पंजाब के लोगों की भावनाओं को एक मजबूत कानूनी ढांचे में बदलने के लिए धन्यवाद देता हूं।”
आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने बहुत खुशी जाहिर करते हुए इसे दुनिया भर के सिखों के लिए गर्व की बात बताया। उन्होंने कहा, “यह दुनिया भर के सिखों के लिए गर्व का पल है। यह कानून श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेहतर सुरक्षा पक्का करेगा। मैं दुनिया भर के सिख समुदाय को बधाई देता हूं और इसे मुमकिन बनाने के लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल को धन्यवाद देता हूं।”
इसी तरह के विचार जाहिर करते हुए पार्टी नेताओं ने कहा कि इस कानून के लागू होने से यह साफ संदेश जाता है कि बेअदबी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कानून धार्मिक सद्भाव की रक्षा करेगा और सभी पवित्र ग्रंथों की गरिमा बनाए रखेगा। आम आदमी पार्टी के महासचिव और पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने आज कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा पारित बेअदबी विरोधी विधेयक पर माननीय राज्यपाल महोदय ने हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है।
दीपक बाली ने कहा कि यह पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक दिन है और यह कानून हमारी धार्मिक भावनाओं तथा गुरु साहिबान की शान को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब गुरु ग्रंथ साहिब जी की किसी भी प्रकार की बेअदबी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पंथ के नाम पर वोट लेकर और सरकारें बनाकर किसी भी तथाकथित पंथक पार्टी ने कभी इस तरह का कानून नहीं बनाया। आम आदमी पार्टी ने यह साबित किया है कि वह गुरु साहिबान की शान की रक्षा के लिए कड़े से कड़ा कानून बनाने से कभी नहीं हिचकिचाएगी। अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान और उनकी पूरी टीम को इस ऐतिहासिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी।
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बेअदबी पर देश का सबसे सख्त कानून मंजूर…, क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन 2026 ?
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की साजिश की या बेअदबी की तो अब दोषी को 10 वर्ष से लेकर उम्र कैद की सजा हो सकती है। क्योंकि 13 अप्रैल को पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में सर्वसम्मति से पास किया गया ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मंजूरी दे दी है।
इस संबंधी जानकारी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद दी है। नीदरलैंड दौरे पर गए मुख्यमंत्री राज्यपाल द्वारा बिल को मंजूरी देने पर धन्यवाद किया है। विधान सभा में बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गारंटी दी थी अब कोई पांचवां बिल नहीं आएगा। बता दें कि इस बिल से पहले तीन बार पहले ही बेअदबी की सजा का बिल पेश हो चुका था।
इस बिल में बेअदबी के लिए कम से कम सात साल की कैद (जिसे बढ़ाकर 20 साल तक किया जा सकता है) और 2 लाख से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान करता है। वहीं, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साज़िश के तहत की गई बेअदबी के लिए और भी कड़ी सज़ाएं तय की गई हैं, जिनमें उम्रकैद (ता-उम्र) और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था।
बिल को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं
पंजाब सरकार ने दावा किया था कि यह स्टेट बिल है। इसलिए इसे राज्यपाल को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि विपक्षीय पार्टियां इस बात की आशंका जता रही थी की राज्यपाल इस बिल को राष्ट्रपति को भेज सकते हैं।
क्या हैं संशोधन
इस संशोधन के ज़रिए प्रस्तावना के शुरुआती पैराग्राफ़ को बदला गया है। इसका मकसद इस बात पर जोर देना है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या उसके द्वारा अधिकृत किसी अन्य संस्था के अलावा, कोई भी अन्य संस्था स्वरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण, वितरण या आपूर्ति न करे।
यह सिख रहत मर्यादा (सिख आचार संहिता और रीति-रिवाजों) के अनुसार पवित्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देता है, साथ ही यह अपवित्रीकरण को परिभाषित करता है, उसके लिए दंड का प्रावधान करता है, और एक ऐसा “निवारक ढांचा” तैयार करता है।
अपवित्रता की परिभाषा
यह रिकॉर्ड को प्रिंटिंग, स्टोरेज और वितरण से संबंधित मैनुअल और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों तरह के दस्तावेज़ों के रूप में भी परिभाषित करता है। साथ ही, यह ‘अपवित्रता’ को किसी भी जान-बूझकर और सोची-समझी गई अपमानजनक कार्रवाई के रूप में विस्तार से बताता है।
जिसमें अंग को जलाने, फाड़ने या चोरी करने जैसे भौतिक नुकसान से लेकर, बोलने, लिखने, प्रतीकात्मक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की गई ऐसी हरकतें शामिल हैं जो सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हों।
एक नई धारा 3A एसजीपीसी को सभी स्वरूपों का एक केंद्रीय रजिस्टर रखने का आदेश देती है। इस रजिस्टर में हर स्वरूप को एक खास पहचान संख्या दी जाएगी और प्रिंटिंग की तारीख, आपूर्ति की जगह, स्टोरेज की जगह और संरक्षक की पहचान जैसे विवरण दर्ज किए जाएंगे।
इस रजिस्टर को भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों रूपों में रखा जाना है। अधिनियम के लागू होने के 45 दिनों के भीतर इसे एसजीपीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए, और हर महीने इसमें अनिवार्य रूप से अपडेट किए जाने चाहिए, जिन्हें किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया हो।
संरक्षकों के कर्तव्यों और दंड की परिभाषा
धारा 3B के माध्यम से, इस संशोधन ने संरक्षकों के कर्तव्यों को परिभाषित किया है। इसके तहत संरक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वरूप सुरक्षित अभिरक्षा में रहें, उनका दुरुपयोग या उन्हें नुकसान न पहुंचे, और वे ‘सिख रहत मर्यादा’ का सख्ती से पालन करें। नुकसान, गायब होने या अपवित्रता के किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत पुलिस अधिकारियों और संबंधित प्रबंधन निकाय को दी जानी चाहिए।
कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की अपवित्रता का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। इस कारावास की अवधि 7 वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन इसे बढ़ाकर 20 वर्ष तक किया जा सकता है। साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 2 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक किया जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति जो आपराधिक षड्यंत्र के तहत, शांति या सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के इरादे से, इस अधिनियम के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की अपवित्रता का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। इस कारावास की अवधि 10 वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है। साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 5 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये तक किया जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत किसी अपराध को करने में सहायता करता है, उसे उसी दंड का भागीदार माना जाएगा जो उस अपराध के लिए निर्धारित है, जिसमें उसने सहायता की है। कोई भी व्यक्ति जो इस एक्ट के तहत कोई अपराध करने की कोशिश करता है, उसे किसी भी तरह की जेल की सज़ा दी जाएगी, जो तीन साल से कम नहीं होगी, लेकिन पांच साल तक बढ़ सकती है।
उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 1 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन 3 लाख रुपये तक बढ़ सकता है। वहीं, बेअदबी करने वाला अगर मनोरोगी या मानसिक स्थिति ठीक होने की बात कहता हैं तो उसकी बाकायदा जांच होगी।
ऑफिशियल गैजेट में नोटिफिकेशन के बाद लागू होगा
यह कानून तब लागू होगा जब सरकार इसे ऑफिशियल गैजेट में नोटिफाई करेगी। 2008 के कानून को पूरी तरह से बदलने के बजाय उसमें संशोधन करके, सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की सुरक्षा, कस्टडी और पवित्रता के लिए एक ज़्यादा सख़्त और व्यवस्थित कानूनी ढांचा बनाने की कोशिश की है।
बेअदबी पर तीसरा बिल
पंजाब में पहले भी 2016 और 2018 में अपमान से जुड़े दो बिल पेश किए जा चुके हैं। 2016 के प्रस्ताव में गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए उम्रकैद और दूसरे धार्मिक ग्रंथों के लिए 10 साल की सज़ा का प्रावधान था। इसे केंद्र सरकार ने कुछ आपत्तियों के साथ वापस भेज दिया था। केंद्र का कहना था कि यह बिल अलग-अलग धर्मों में एक जैसे अपराधों के लिए अलग-अलग सज़ा का प्रावधान करता है।
2018 में, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार ने इस बिल में संशोधन करके सभी धर्मों को एक समान रूप से शामिल किया था, लेकिन राष्ट्रपति की मंज़ूरी न मिलने के कारण यह बिल पिछले आठ सालों से पेंडिंग पड़ा हुआ है।
सोमवार को पेश किया गया बिल पूरी तरह से गुरु ग्रंथ साहिब पर केंद्रित है। सरकार ने सिख धर्मशास्त्र पर आधारित अपना पक्ष रखा है, जिसके अनुसार यह पवित्र ग्रंथ ही सिखों के सजीव गुरु है। मुख्यमंत्री मान पहले ही कह चुके हैं कि यह नया बिल एक ‘राज्य कानून’ होगा और इसके लिए शायद राष्ट्रपति की मंज़ूरी की ज़रूरत न पड़े। उन्होंने कहा कि इसके लिए सिर्फ़ राज्यपाल की मंज़ूरी ही काफी होगी।
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