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मोहाली से CM Bhagwant Mann का पंजाब के युवाओं को संदेश, खुद का काम शुरू करें, सरकार हर मदद देगी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब के युवाओं को नौकरियां तलाशने वाले बनने की बजाय नौकरियां पैदा करने वाले बनने की ओर बढ़ने का आह्वान किया, यह दावा करते हुए कि उनकी सरकार सक्रिय रूप से ऐसा माहौल बना रही है जहां युवा प्रदेश सरकार के समर्थन से अपने उद्यम शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि रोजगार की तलाश में विदेशों में जाने की जरूरत खुद-ब-खुद खत्म हो रही है क्योंकि उनकी सरकार युवाओं के लिए पंजाब में ही अवसर पैदा कर रही है।
पिछली अकाली और कांग्रेस सरकारों से तीखी तुलना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जहां पिछली सरकारें खाली खजाने के बहाने मारती रहीं, वहीं उनकी सरकार साफ-सुथरे इरादों और निर्णायक शासन के जरिए अपने वादों से भी आगे बढ़कर काम कर रही है, जो साबित करता है कि सिस्टम में कोई कमी नहीं थी, बल्कि पुराने नेताओं में राजनीतिक इच्छाशक्ति की ही कमी थी।
आज यहां मोहाली के सेनेटा गांव में लोक मिलनी के दौरान सभा को संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनके खिलाफ कोई मुद्दा न होने के कारण विपक्षी दल मुझ पर झूठे और निराधार व्यक्तिगत आरोप लगाकर अपनी नीच स्तर की मानसिकता दिखा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रदेश के समग्र विकास के लिए कठोर प्रयास कर रहे हैं जिससे विपक्षी दल बौखलाहट में हैं। उन्होंने कहा कि ये नेता आम आदमी की भलाई और प्रदेश की प्रगति को हजम नहीं कर पा रहे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस कारण विपक्षी मेरे खिलाफ निराधार और तर्कहीन आरोप लगा रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से उनकी निराशा को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे लोगों की दौलत लूटने का तो कोई अनुभव नहीं, लेकिन मैं आम लोगों के दुख-दर्द को बांटने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की हिम्मत जरूर रखता हूं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे प्रदेश की भलाई और लोगों की खुशहाली के लिए समर्पित होकर काम कर रहे हैं जिससे विपक्षी दल बेचैनी में है। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक नेता इन बातों को हजम नहीं कर पा रहे, जिस कारण वे बार-बार उनके खिलाफ जहर उगल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटिया चालें उन्हें प्रदेश के लोगों की सेवा करने से नहीं रोक सकतीं और वे प्रदेश के समग्र विकास के लिए नेक कार्यों को इसी तरह जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के नेताओं ने कभी प्रदेश या इसके लोगों की परवाह नहीं की, जबकि इसके विपरीत इन अहंकारी नेताओं ने हमेशा प्रदेश के लिए काम करने की बजाय अपने पारिवारिक और निजी हितों को प्राथमिकता दी। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन नेताओं का यह रवैया पंजाब और इसके लोगों दोनों के लिए हानिकारक साबित हुआ, जिस कारण लोग उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी पार्टियां उन्हें बदनाम करने के लिए साजिशें रच रही हैं क्योंकि वे प्रदेश सरकार द्वारा जनता की भलाई के लिए किए जा रहे कामों से ईर्ष्या करती हैं। उन्होंने कहा कि ये नेता एक-दूसरे से हाथ मिलाकर चल रहे हैं और सत्ता में रहते हुए एक-दूसरे के हितों को सुरक्षित रखने के लिए सत्ता की कुर्सी का खेल खेलते रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘आप’ पार्टी ने लोगों के सहयोग से उनके गठजोड़ को बेनकाब करके सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया और आम आदमी पार्टी के राज में अब आम लोगों की समस्याएं हल हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे 5 मई को भारत के राष्ट्रपति से मिलेंगे और नेताओं की दल-बदल के खिलाफ सख्त प्रावधानों की मांग करेंगे क्योंकि यह लोगों के फैसले का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि अवसरवादी नेता अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए अपनी इच्छानुसार अपनी पार्टियां बदलते रहते हैं, जो पूरी तरह गलत है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये नेता लोगों के फैसले की पीठ में छुरा घोंपते हैं, जो पूरी तरह अनुचित है और इसे रोकने के लिए कानून बनाना समय की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद 70 से अधिक वर्षों के समय से पारंपरिक पार्टियों ने प्रदेश को खूब लूटा। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों की पिछड़ी और घटिया नीतियों के कारण प्रदेश विकास की रफ्तार से पिछड़ गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि हालांकि उनकी सरकार ने पिछले चार वर्षों में राज्य का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया है और पहली बार किसी सरकार ने इतने कम समय में लोगों से किए गए सभी वादे पूरे किए हैं।
सरकार की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि प्रदेश का विकास पटरी पर आ चुका है और अब पंजाब सरकार हर दिन अपने काम और प्रदेश के विकास की रफ्तार को लगातार बढ़ा रही है। उन्होंने आगे कहा कि 70 सालों का अंतर पाट दिया गया है और रंगला पंजाब बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप सरकार देश की पहली सरकार है जिसने अपने घोषणापत्र को शब्दशः लागू किया है और लोगों द्वारा उठाई गई सभी वैध मांगों का समाधान किया गया है।”
अकाली नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल जमीनी हकीकतों से वाकिफ नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी ऐशो-आराम और खुशहाली के साथ एक सुरक्षित व आरामदेह माहौल में बिताई है। उन्होंने आगे कहा कि सुखबीर सिंह बादल पंजाब के एक कॉन्वेंट से पढ़े-लिखे राजनीतिक नेता हैं जो प्रदेश की बुनियादी भौगोलिक स्थिति से वाकिफ नहीं हैं, लेकिन पंजाब में सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा, यदि सब कुछ छोड़कर भी देखें, तो पूर्व उपमुख्यमंत्री प्रदेश की आम फसलों में अंतर भी नहीं बता सकते क्योंकि उन्हें बुनियादी मुद्दों के बारे में भी जानकारी की काफी कमी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं के पाप माफ करने योग्य नहीं हैं और इन्हें लोगों द्वारा उनके बुरे कामों के लिए कभी भी माफ नहीं किया जा सकता। अकाली नेतृत्व पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि ये अवसरवादी नेता हैं जो गिरगिट की तरह अपने रंग और अपनी सुविधा के अनुसार अपना रुख बदलते हैं। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन नेताओं ने अपने सरकारी पदों का दुरुपयोग करके बेशुमार दौलत इकट्ठा करके अवैध रूप से बड़े महल बनाए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महलों की दीवारें ऊंची थीं और दरवाजे आम तौर पर लोगों के लिए बंद रहते थे। उन्होंने कहा कि ये नेता लोगों के लिए पहुंच से बाहर रहे, जिस कारण जनता ने उन्हें अपने दिलों से निकाल दिया। भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रदेश के लोगों ने उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जिन्होंने उन्हें बारी-बारी से लूटा। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने लंबे समय से लोगों को मूर्ख बनाया है, लेकिन अब प्रदेश के समझदार लोग इनके भ्रामक प्रचार से प्रभावित नहीं हो रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अहंकारी राजनेताओं ने हमेशा प्रदेश के लोगों को हल्के में लिया है, जिस कारण उन्हें लोगों ने ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये अवसरवादी नेता हैरान हैं क्योंकि लोग उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे। उन्होंने कहा कि उनका एजेंडा लोगों की बजाय अपने परिवारों की भलाई तक सीमित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबा डॉ. बी.आर. अंबेडकर साहब के जीवन और दर्शन के अनुसार, प्रदेश सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए शिक्षा क्षेत्र में अहम पहल की हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी मुफ्त या रियायती कार्ड प्रदेश में गरीबी या अन्य सामाजिक बुराइयों को खत्म नहीं कर सकता, लेकिन शिक्षा ही वह कुंजी है जो लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाकर इस चक्र से बाहर निकाल सकती है। दूसरी ओर, भगवंत सिंह मान ने दुख जताया कि पहले के नेताओं ने बाबा साहब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की पीठ में छुरा घोंपने और उनके सपनों को चकनाचूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का लोगों के प्रति दृष्टिकोण इस तथ्य से झलकता है कि उनके कार्यकाल में नौवीं कक्षा तक कोई भी स्कूल में फेल नहीं हुआ था, जिससे विद्यार्थी अपनी कमजोरी का अहसास नहीं कर सके और बाद में मैट्रिक में फेल हो गए, जिससे उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बादलों ने इन लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए अधिकारी बनाकर सशक्त बनाने की बजाय यह सुनिश्चित किया कि गरीबों के विद्यार्थी पढ़ाई न करें और सिर्फ आटा-दाल योजना तक सीमित रहें। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्ग की पीढ़ियां अपनी घटिया सोच वाली आटा-दाल योजना के जरिए बादलों के रहमो-करम पर निर्भर थीं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन लोगों ने बाबा साहब अंबेडकर की पीठ में छुरा मारा, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को शिक्षा से वंचित रखा गया।
अकाली नेतृत्व पर बरसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को अपनी पार्टी की कमेटी बनाने के लिए पांच सदस्य भी नहीं मिल रहे, वे प्रदेश में 117 सीटें जीतने के सपने देख रहे हैं। उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि इन नेताओं ने प्रदेश में गैंगस्टरों को पनाह दी है और नशा तस्करों को बचाकर युवाओं की नसों में नशा भर दिया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली दल राजनीतिक मुर्दा लोगों की पार्टी है जिन्हें लोगों ने बार-बार नकारा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व प्रदेश के लोगों को गुमराह करने के लिए हवा में किले बना रही है, लेकिन पंजाबी इससे प्रभावित नहीं होंगे और कहा कि लोग अकालियों को उनके पापों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और उन्हें फिर से उचित सबक सिखाएंगे। उन्होंने कहा कि लोगों ने अकालियों को बार-बार चुना, लेकिन वे गद्दार साबित हुए और हमेशा प्रदेश और इसके लोगों के साथ विश्वासघात किया। भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकालियों ने अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया है, जिस कारण लोग उन्हें माफ नहीं कर सकते।
भाजपा पर बरसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवा पार्टी का प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी साख की परख करने के लिए स्वागत है, लेकिन भाजपा को पता होना चाहिए कि प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए 117 सीटों पर उम्मीदवारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी के पास इतने नेता नहीं हैं, इसलिए वे शायद दूसरी पार्टियों से उधार लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा द्वारा चुनाव लड़ने के लिए दूसरी पार्टियों के कई नेताओं को अपने साथ शामिल किया जा रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रदेश के लोग भाजपा के संदिग्ध चरित्र से अच्छी तरह वाकिफ हैं और वे इसे जरूर सबक सिखाएंगे, यह भी कहा कि प्रदेश और इसके लोगों के साथ भगवा पार्टी के अन्याय और सौतेले मां जैसे व्यवहार की एक लंबी कहानी है।
मुख्य उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पहली बार किसानों को धान के सीजन के दौरान आठ घंटे से अधिक बिजली सप्लाई दी गई है और दिन में 95% सप्लाई दी गई है।” उन्होंने आगे कहा, “सभी घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है और लगभग 90% उपभोक्ताओं को जीरो बिजली बिल आ रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “65,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं और लोगों को 10 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज का लाभ उठाने के लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत नाम दर्ज कराना चाहिए।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह कर दाताओं का पैसा है और हर एक-एक पैसा लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ था।” उन्होंने आगे कहा कि पहले की पार्टियां संसाधनों को लूटने के लिए खेलें खेलती थीं। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के बेमिसाल कामों से हैरान होकर, विपक्षी दल निराधार और तर्कहीन बयान दे रहा है।”
सरकार की उपलब्धियों को दोहराते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रदेश के इतिहास में पहली बार धान के सीजन के दौरान खेतों के ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली सप्लाई की गई है।” उन्होंने आगे कहा कि किसानों को अब दिन में बिजली मिल रही है, जिससे उनकी जिंदगी बदल रही है। “पंजाब सरकार लोगों की भलाई के लिए सरकारी खजाने के एक-एक पैसे की समझदारी से इस्तेमाल कर रही है।”
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शहरी सहकारी बैंकों को अमित शाह की बड़ी अपील, तकनीक और पारदर्शिता पर दिया जोर
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के शहरी सहकारी बैंकों से बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलने और आधुनिक तकनीक को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बैंकों के लिए तकनीकी रूप से मजबूत होना, अपने कामकाज में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच शहरी सहकारी बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा, ताकि वे प्रतिस्पर्धा के दौर में मजबूती से आगे बढ़ सकें।
मुंबई में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NUCFDC के नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि बैंकों को केवल अपने विकास पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने ग्राहकों की आर्थिक तरक्की को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बैंक से जुड़े ग्राहक आर्थिक रूप से मजबूत और खुशहाल होंगे, तो इसका सीधा फायदा बैंक के विकास को भी मिलेगा।
अमित शाह ने देश के सभी शहरी सहकारी बैंकों से एक साल के भीतर NUCFDC से जुड़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि NUCFDC देश के शहरी सहकारी बैंकों के लिए शीर्ष संस्था और स्व-नियामक संगठन के रूप में काम करती है। RBI से मंजूरी प्राप्त यह संस्था सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पूंजी, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और तरलता सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंक हैं, जिनमें से लगभग 690 बैंक पहले ही NUCFDC के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बैंकों को भी अगले एक साल के भीतर इस संस्था से जुड़ना चाहिए, ताकि शहरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
अमित शाह ने कहा कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए देश के आम लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल पूंजी बाजार के सहारे हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वरोजगार और आर्थिक अवसरों की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है और इसमें शहरी सहकारी बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के विचार पर जोर देते हुए कहा कि सहकारी बैंकिंग का उद्देश्य केवल बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत करना नहीं होना चाहिए। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बैंक से जुड़े ग्राहकों और आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की प्रगति से ही बैंकों के विकास को भी मजबूती मिलेगी।
RBI और शहरी सहकारी बैंकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि दोनों के बीच मौजूद धारणा के अंतर को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक और सहकारी बैंकों को एक-दूसरे की भूमिका, जरूरतों और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझना होगा। इससे बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।
सहकारिता मंत्री के रूप में अपने पांच साल के अनुभव का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब भी सहकारी क्षेत्र ने भरोसे के साथ RBI के सामने अपनी समस्याएं और जरूरतें रखी हैं, तब केंद्रीय बैंक की ओर से सक्रिय सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी बेहतर समन्वय के जरिए सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है।
अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों से कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग देने, बैंकिंग सेवाओं को डिजिटल और सुविधाजनक बनाने तथा अपने कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को बेहतर और आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में भी लगातार सुधार करना होगा।
कुल मिलाकर, अमित शाह का संदेश साफ है कि तकनीक, पारदर्शिता और बेहतर ग्राहक सेवा आने वाले समय में शहरी सहकारी बैंकों की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। सरकार का जोर सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक बनाने के साथ-साथ इसे आम लोगों की आर्थिक तरक्की का मजबूत माध्यम बनाने पर है।
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कनाडा में भारतीयों पर बढ़ी सख्ती, 2026 के पहले 6 महीनों में 3,323 नागरिक डिपोर्ट
कनाडा से भारतीय नागरिकों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के पहले छह महीनों में कनाडा ने 3,323 भारतीय नागरिकों को देश से डिपोर्ट किया है। यह संख्या पूरे साल 2025 में डिपोर्ट किए गए 3,779 भारतीयों के करीब 88 प्रतिशत के बराबर है। ऐसे में अगर डिपोर्टेशन की यही रफ्तार आगे भी जारी रहती है, तो 2026 में पिछले साल का आंकड़ा पार होने की संभावना जताई जा रही है।
कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी यानी CBSA के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय नागरिकों की डिपोर्टेशन संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कनाडा सरकार अपनी इमिग्रेशन नीतियों को लगातार सख्त कर रही है। सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी विदेशी कामगारों और अन्य अस्थायी निवासियों की संख्या को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा से भारतीय नागरिकों को कई अलग-अलग कारणों से डिपोर्ट किया जाता है। इनमें इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन, शरण या रिफ्यूजी दावे का खारिज होना, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रहना और वीजा से संबंधित धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और डिपोर्टेशन संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही किया जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा से भारतीयों की डिपोर्टेशन संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। वर्ष 2020 में 1,424 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था। 2021 में यह संख्या घटकर 603 रही, जबकि 2022 में 786 और 2023 में 1,132 भारतीयों को कनाडा से वापस भेजा गया। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,004 हो गई और 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 3,779 तक पहुंच गई।
2026 के पहले छह महीनों के आंकड़े इस बढ़ती प्रवृत्ति को और स्पष्ट करते हैं। इस अवधि में भारतीय नागरिक कनाडा से डिपोर्ट किए जाने वाली सबसे बड़ी राष्ट्रीयता बनकर सामने आए हैं। जनवरी से जून के दौरान 1,573 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जिससे भारत ने मैक्सिको को पीछे छोड़ दिया। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा से डिपोर्ट किए जाने के मामले में मैक्सिको शीर्ष पर रहा था, जबकि भारत दूसरे स्थान पर था।
इसके अलावा, CBSA की ‘Removal in Progress Inventory’ में भी भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। इस सूची में करीब 7,669 भारतीय नागरिक रिमूवल प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि इन मामलों में कनाडा की संबंधित एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
कनाडा में किसी व्यक्ति को देश से बाहर भेजने के लिए अलग-अलग प्रकार के रिमूवल ऑर्डर जारी किए जा सकते हैं। डिपार्चर ऑर्डर के तहत व्यक्ति को निर्धारित समय, आम तौर पर 30 दिनों के भीतर, कनाडा छोड़ना होता है। अगर व्यक्ति तय समय के भीतर देश नहीं छोड़ता, तो यह मामला डिपोर्टेशन ऑर्डर में बदल सकता है। डिपोर्टेशन ऑर्डर के बाद कनाडा में दोबारा प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है और कुछ परिस्थितियों में वापस जाने के लिए सरकार से लिखित अनुमति की आवश्यकता पड़ सकती है।
कनाडा से भारतीयों की बढ़ती डिपोर्टेशन संख्या की तुलना अमेरिका से भी की जा रही है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी से 22 जुलाई 2026 तक अमेरिका से 1,273 भारतीय नागरिकों को भारत डिपोर्ट किया गया। इस लिहाज से 2026 के पहले छह महीनों में कनाडा से डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या काफी अधिक रही है।
कनाडा में बढ़ती डिपोर्टेशन और सख्त होती इमिग्रेशन नीति का असर वहां पढ़ाई और नौकरी के लिए जाने की योजना बना रहे भारतीयों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में छात्रों और कामगारों के लिए जरूरी है कि वे कनाडा के वीजा, इमिग्रेशन और रहने से जुड़े नियमों को अच्छी तरह समझें और उनकी शर्तों का पालन करें। नियमों की अनदेखी करने पर भविष्य में कानूनी कार्रवाई या देश से बाहर भेजे जाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, 2026 के शुरुआती महीनों में भारतीय नागरिकों की डिपोर्टेशन संख्या में हुई तेज बढ़ोतरी कनाडा की बदलती इमिग्रेशन नीति की ओर इशारा करती है। आने वाले महीनों में यह आंकड़ा किस स्तर तक पहुंचता है, इस पर भारतीय छात्रों, कामगारों और कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों की नजर बनी रहेगी।
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चंबा में बड़ा बस हादसा, 7 की मौत; 15 घायल
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। यहां एक निजी बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक लड़की, दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए तीसा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
जानकारी के अनुसार, निजी बस सुबह करीब 7 बजे बैरागढ़ से चंबा के लिए रवाना हुई थी। बैरागढ़ से कुछ दूरी पर चालुंज मोड़ के पास ‘शर्मा कोच’ बस अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद बस पलटते हुए दूसरी सड़क पर जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि बस के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई।
हादसे के समय बस में करीब 25 यात्री सवार बताए जा रहे हैं। बस पलटने के बाद कई यात्री उसके अंदर फंस गए, जबकि कुछ लोग एक-दूसरे के ऊपर जा गिरे। हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा। जेसीबी की मदद से बस को हटाया गया और उसके अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान जगदेव शर्मा, देसराज, तेज सिंह, जगदेई, हरदेई, नीलम और रूप सिंह के रूप में बताई गई है। हादसे के बाद इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हादसे की स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल हादसा किस वजह से हुआ, इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर बस के अनियंत्रित होकर पलटने की बात सामने आई है, लेकिन दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
फिलहाल सभी घायलों का तीसा अस्पताल में इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
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