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‘CIC के चयन की बैठक में नहीं हुई शामिल’, MP में बोले मोदी- कांग्रेस दलित विरोधी

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नेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए हुए कहा कि वह नए मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) के चयन के लिए बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुई क्योंकि वह दलित हैं। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की अनुसूचित जाति विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर दिन उन्हें गाली देती रहती है। उन्होंने पिछले साल देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी के विरोध का हवाला देते हुए कांग्रेस पर “आदिवासी विरोधी मानसिकता” रखने का आरोप लगाया। सीधी में 17 नवंबर को मतदान होना है।

कांग्रेस पर प्रधानमंत्री का हमला मुख्य विपक्षी दल के इस दावे के दो दिन बाद आया है कि नए मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया के चयन पर उसे “अंधेरे में रखा गया”। इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले दलित हैं। स्वयं ओबीसी समुदाय से आने वाले मोदी ने कहा , ‘‘कांग्रेस का एक ही काम है :दिन-रात मोदी को गालियां देना। ऐसा करके वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अपमान कर रही है।” उन्होंने कहा, ‘‘ भाजपा दलितों, आदिवासियों और ओबीसी की आकांक्षाओं का सम्मान करती है। आप सभी ने अखबारों में पढ़ा होगा कि आज एक दलित मुख्य सूचना आयुक्त बन गया है। मैंने अपना चुनावी दौरा रद्द कर दिया और (सीआईसी के शपथ ग्रहण के लिए) दिल्ली पहुंच गया।”

मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘ हमने पहली बार राजस्थान से किसी दलित को सीआईसी बनाया है। कांग्रेस को बैठक में शामिल होना चाहिए था (जहां सीआईसी के नाम को अंतिम रूप दिया जाना था), लेकिन वह नहीं आई। उन्हें (बैठक के बारे में) पहले ही सूचित कर दिया गया था, फोन पर (उनके साथ) बात की गई थी। लेकिन यह जानते हुए कि एक दलित को इसका (सूचना आयोग) प्रमुख बनाया जा रहा है, उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास दलितों और आदिवासियों के प्रति नापसंदगी के अलावा कुछ नहीं है।

मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, ‘‘ वे दलितों से नफरत करते हैं। जब हमने एक आदिवासी को देश का राष्ट्रपति बनाया तो उन्होंने उसकी उम्मीदवारी का विरोध किया। जब दलित को सीआईसी नियुक्त किया गया तो उन्होंने उसका भी विरोध किया। इसके बाद सहानुभूति हासिल करने के लिए झूठ फैलाया।” कांग्रेस के लोकसभा सांसद और मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए चयन समिति के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखे पत्र में दावा किया है कि नए सीआईसी के रूप में सामरिया के चयन के बारे में उन्हें अंधेरे में रखा गया था। पूर्व आईएएस अधिकारी सामरिया को सोमवार को राष्ट्रपति मुर्मू ने सीआईसी पद की शपथ दिलाई।

सीआईसी और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता (इस मामले में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी – यानी कांग्रेस के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। मोदी ने कहा, “देश की पहली दलित सीआईसी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पहले से निमंत्रण मिलने के बावजूद कांग्रेस इसमें शामिल होने में विफल रही। यह उसकी दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, उनकी सरकार ने सभी घोटालों को रोक दिया और जो पैसा बचा था, उसका इस्तेमाल 80 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को मुफ्त राशन प्रदान करने और उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जा रहा है। भाजपा के स्टार प्रचारक ने कहा, “पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों पर लक्षित ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना पर 13,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।” मोदी ने एशिया में सबसे बड़ा माने जाने वाले रीवा अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार विंध्य क्षेत्र को एक प्रमुख सौर ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित कर रही है।

मोदी ने कहा, “जब कांग्रेस 10 वर्षों (2004-2014) तक सत्ता में थी, तो उसकी सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त थी, लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद, उसने उन सभी घोटालों को रोक दिया और बहुत सारा पैसा बचाया एवं इसका उपयोग कोविड-19 के अवधि के दौरान 80 करोड़ से अधिक गरीबों को मुफ्त राशन प्रदान करने के लिए किया।” उन्होंने कहा कि मुफ्त राशन योजना को अब दिसंबर से अगले पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत बिना किसी ‘लीकेज’ के किसानों के बैंक खातों में 2.07 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए और यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि भ्रष्टाचार रुका। मध्य प्रदेश में 230 सदस्यीय नई विधानसभा के चुनाव के लिए एक ही चरण में मतदान होगा और मतगणना तीनों दिसंबर को होगी।

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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”

पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”

सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”

पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”

यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।

यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।

इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।

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अमृतसर धमाके में पाकिस्तान का हाथ? DGP गौरव यादव का बड़ा बयान

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अमृतसर के खासा छावनी क्षेत्र में हुए धमाके को लेकर जांच तेज कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के डीजीपी गौरव यादव खुद मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि इस धमाके के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश होने का शक जताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतें पंजाब का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही हैं।

डीजीपी ने यह भी कहा कि देश इस समय “ऑपरेशन सिंधूर” की वर्षगांठ मना रहा है और ऐसे मौकों को निशाना बनाकर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जालंधर में हुए धमाकों का इस घटना से कोई संबंध नहीं है। जालंधर मामले की जिम्मेदारी एक खालिस्तानी संगठन पहले ही ले चुका है, जबकि अमृतसर धमाके की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है।

पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की हर एंगल से गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

अंत में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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