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मुख्य मंत्री ने हॉलैंड के महान हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से की मुलाकात, Punjab के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने का दिया आमंत्रण

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से मुलाकात की और पंजाब में हॉकी को और मजबूत करने, विशेषकर प्रतिष्ठित एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की तैयारियों के लिए उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर चर्चा की।

विस्तृत बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब में हॉकी और खेलों के समृद्ध वातावरण पर प्रकाश डाला और राष्ट्रीय खेल की पुरानी गरिमा को पुनर्स्थापित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बोवेलैंडर के असाधारण कौशल और हॉकी में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका शानदार करियर दुनिया भर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

ओलंपियन बोवेलैंडर को पंजाब आने का निमंत्रण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अपने खिलाड़ियों की प्रतिभा को और निखारने के लिए उनकी सेवाएं लेना चाहता है। उन्होंने कहा कि पंजाब खेल प्रतिभा को विकसित करने और हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि इतिहास में पहली बार पंजाब एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा, जो राज्य के खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एशियाई खेल अक्टूबर की शुरुआत में समाप्त होंगे, जिसके बाद शीर्ष छह टीमें चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी से पंजाब की पहचान वैश्विक स्तर पर हॉकी केंद्र के रूप में और मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से भारतीय हॉकी में पंजाबियों की मजबूत उपस्थिति के बावजूद, पंजाब ने अब तक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं की थी, और अब यह एक ऐतिहासिक बदलाव है।

पंजाब और हॉकी के बीच गहरे संबंध का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाबी खिलाड़ियों के बिना भारतीय हॉकी की कल्पना करना मुश्किल है। पंजाब के 50 से अधिक खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं और 10 पंजाबी खिलाड़ियों ने ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी की है।

पंजाब की समृद्ध खेल विरासत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि संसारपुर, खुसरोपुर और मिठापुर जैसे गांवों ने मिलकर 20 से अधिक ओलंपियन दिए हैं। हाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत ने 41 वर्षों के अंतराल के बाद कांस्य पदक जीता, जिसमें मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम में नौ पंजाबी खिलाड़ी शामिल थे। उन्होंने आगे बताया कि पेरिस 2024 ओलंपिक में भी भारत ने कांस्य पदक हासिल किया, जिसमें 10 पंजाबी खिलाड़ी शामिल थे, और हरमनप्रीत सिंह ने कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व करते हुए सर्वाधिक गोल किए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीदरलैंड में ओलंपियन फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से मिलकर उन्हें अत्यंत खुशी हुई। उन्होंने कहा कि बोवेलैंडर का अनुभव और उपलब्धियां युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगी। उन्होंने बताया कि बोवेलैंडर ने पंजाब आने का निमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिया है और आगामी एशियाई हॉकी चैंपियनशिप से पहले खिलाड़ियों के साथ जुड़कर उन्हें मार्गदर्शन देंगे। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब खेल प्रतिभा को निखारने और हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

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पंजाब-नीदरलैंड्स के व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, फूड प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर CM Mann की नजर

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नीदरलैंड्स-इंडिया चैंबर आफ कामर्स एंड ट्रेड की चेयरपर्सन मिस एडिथ नार्डमैन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब और नीदरलैंड्स के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

उन्होंने वैल्यू एडिशन, निर्यात आधारित विकास और वैश्विक सप्लाई चेन के साथ तालमेल, विशेष रूप से फूड प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में पंजाब के रणनीतिक फोकस को भी रेखांकित किया। भगवंत मान ने एनआइसीसीटी से पंजाब को डच उद्योगों से जोड़ने और क्षेत्र-विशेष भागीदारी तथा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों को सक्रिय करने की अपील की।

इस दौरान हेग में हुए निवेश रोड शो में मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक ताकत और उभरते अवसरों को प्रस्तुत किया, जिसमें नीदरलैंड्स के उद्योगपतियों, व्यापार प्रतिनिधियों और साझेदारों ने भाग लिया। उन्होंने राज्य में अनुकूल औद्योगिक माहौल, कुशल कार्यबल, प्रगतिशील नीतियां और निवेशक अनुकूल प्रशासनिक ढांचे के बारे में जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की औद्योगिक व व्यापार विकास नीति 2026 देश की सबसे प्रतिस्पर्धी नीतियों में से एक है। मुख्यमंत्री ने फास्ट ट्रैक पंजाब पोर्टल के माध्यम से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व समयबद्ध स्वीकृति के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से “पंजाब आइए, निवेश कीजिए और आगे बढ़िए” की बात कह निवेश के लिए आह्वान किया।

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कलाकार रहते हुए शब्दों से सिस्टम पर चोट की, अब सिस्टम को बदल रहा हूं; CM Mann बोले- मुफ्त सेवाएं जारी रहेंगी

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देश की राजनीति में भगवंत मान एक मात्र एसे मुख्यमंत्री हैं जो स्टेज से लेकर स्टेट तक को लीड कर रहे हैं। बतौर कलाकार मुख्यमंत्री भगवंत मान की ताकत ‘पोलटिकल सटायर’ हुआ करती थी। जो राजनीतिक सिस्टम पर चोट करती थी। 2022 में भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उनके हाथों में हरा कलम आ गया।

मुख्यमंत्री कहते हैं-

“बतौर कलाकार मैं अपने शब्दों से सिस्टम पर चोट करता था। लोगों ने हाथों में हरा कलम जब से थमाया है। तब से मैं सिस्टम को बदल रहा हूं। ताकि सिस्टम में सुधार हो। विचार मंच के दौरान ‘चुनौतियां और राह’ पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि 70 साल का घाटा चार वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकता।”

आम आदमी पार्टी ने भले ही चुनाव में लोगों से किए गए गारंटियों को पूरा कर दिया हो लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस दौरान उन्होंने न अपने निजी जीवन से लेकर पंजाब के राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर खुल कर विचार रखे।

गरीबों को मिलने वाली मुफ्त योजना जारी रहेगी

मु्ख्यमंत्री ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया तो कहा गया कि ‘रेवड़ियां’ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा ‘फिर 15 लाख का पापड़ पहले किसने बेचा था। अब कह रहे हैं कि जुमला था। नेताओं का तो टोल भी फ्री है और गाड़ी भी। तेल भी फ्री हैं जो टेलीफोन का बिल भी। जब गरीबों को बिजली, राशन, ईलाज, बस सफर मिलता हैं तो इन नेताओं को दर्द क्यों होता है।

गरीब आदमी भले ही डायरेक्ट टैक्स नहीं देता लेकिन इन डायरेक्ट टैक्स तो देता ही है। गरीब आदमी के चाय से लेकर रात को सोते समय चलने वाले पंखे पर भी टैक्स है।’ उन्होंने कहा कि अंबानियों का जब कर्जा माफ हो जाता हैं तो गरीबों को सहूलियत क्यों नहीं दिया जा सकता है।

यह योजनाएं बंद नहीं होगी। क्योंकि जब आम लोगों को यह भरोसा हो जाए कि उसके द्वारा दिए जाने वाला इन-डायरेक्ट का लाभ उन्हें ही मिलेगा तो उन्हें टैक्स देने का दुख नहीं होता।

भेदभाव- बस चले तो राष्ट्रीय गान से पंजाब का नाम हटा दें

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता हैं। क्योंकि पंजाब के किसानों ने दिल्ली में धरना देकर तीन काले कानून वापस करवाए। केंद्र ने पंजाब के 9000 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास फंड रोका हुआ है।

उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर वेब-सिरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसें भी यही दिखाया गया हैं कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना हैं कि वेब सिरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।

मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि अगर इनका बस चले तो जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें उत्तर प्रदेश फिट कर लें। भगवंत मान ने कहा पंजाब में फसलें खराब हुई लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई। जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।

फसल बीमा योजना फ्लाप

पिछले वर्ष आई बाढ़ और अप्रैल माह में हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण खराब हुई फसल के बाद विपक्षी पार्टियों द्वारा फसली बीमा का मुद्दा उठाने को लेकर उठे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा ‘यह योजना फ्लाप है। जिन राज्यों में फसली बीमा लागू हैं वहां पर जाकर किसानों से पूछे तो पता चल जाएगा कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन बीमा बेचना होता हैं तो कंपनी कई प्रकार के वायदे करती हैं लेकिन बाद में मुकर जाती है। अपने एक दोस्त का उद्हारण देते हुए कहा कि वह अपने बेटे के जीवन बीमा का कवर लेने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में फसल खराबे की सबसे अच्छी भरपाई आम आदमी पार्टी ने की है।

बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान हुआ तो पंजाब सरकार ने देश में सबसे अधिक 20,000 रुपये प्रति एकड़ की भरपाई की। बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान की भी गिरदावरी हो चुकी है। किसानों की भरपाई की जाएगी।

फसली विविधिकरण संभव नहीं, धान होगा तो पराली भी होगी

किसानों को पारंपरिक खेती से मुक्ति दिलवाने के उठ रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन देने मात्र से फसली चक्र नहीं टूटने वाला है। इसके लिए किसानों को बदली हुई फसल का मूल्य देना होगा। दीवारों पर हमने बहुत लिखा कि ‘हम दो हमारे दो’ तो इससे क्या जनसंख्या नियंत्रित हो गई। पराली में लगने वाली आग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असली कारण को समझना ही होगा।

अक्टूबर-नवंबर में दशहरा-दीपावली और दशहरा एक साथ आते हैं। किसान धान की पराली में इसलिए आग लगाता हैं क्योंकि उसे 10 से 12 दिन के भीतर गेहूं की फसल लगानी होती है। जब पंजाब 185 लाख मिट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में देता हैं तो पंजाब बहुत अच्छा लेकिन इसके साथ पराली भी तो होगी। जब किसान पराली जलाते हैं तो कहा जाता हैं कि किसानों पर पर्चा दर्ज कर दो।

10 दिन से किसान अन्नदाता से अपराधी बन जाता है

दस दिन पहले जो किसान अन्नदाता होता हैं 10 दिन बाद ही वह अपराधी बन जाता है। किसानों को पराली संभालने का इंसेंटिव देना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलती भी नहीं हैं कि दिल्ली में हंगामा शुरू हो जाता है। एनजीटी के सेवानिवृत्त जज ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब को यूं ही बदनाम किया जाता है।

पंजाब के धुएं से दिल्ली को असर नहीं पड़ता। लेकिन जज साहब ने यह बात तब कहीं जब वह सेवानिवृत्त हो गए। सर्विंग में होते हुए उन्होंने यह बात नहीं कहीं। मुख्यमंत्री ने मार्डन खेती पर विशेष जोर दिया।

पंजाब के छात्र जमीन पर नहीं बैठते

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। स्कूल आफ एमिनेंस तो बने ही हैं साथ ही पंजाब का अब कोई भी ऐसा स्कूल नहीं हैं जहां पर बच्चे जमीन पर पढ़ते हो। कोई स्कूल ऐसा नहीं हैं जो बिना चाहरदिवारी के हो। स्कूलों में लैब बने हैं और सकरारी स्कूल के बच्चे जेईई और नीट की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह वहीं स्कूल जहां दो-तीन साल पहले तक बच्चों को जेईई और नीट के बारे में पता तक नहीं था।

ड्रग्स को लेकर पंजाब बदनाम किया जा रहा

ड्रग्स के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, बदनाम तो पंजाब को किसा जाता हैं लेकिन 3000 किलों ड्रग्स मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी जाती है। पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ मुहीम चला रही है। वहीं, नए इनोवेशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रति दिन 15 मौतें सड़कों पर हो रही थी।

लोग इसे कुदरती आपदा मानते थे लेकिन यह मानवीय आपदा थी। मुख्यमंत्री ने कहा जब मैंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आई। आज प्रति वर्ष 2600 कीमती जानें बचाई जा रही है।

पंजाब से हमेशा भेदभाव हुआ

मुख्यमंत्री ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर आई वेब सीरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी यही दिखाया गया है कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वेब सीरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।

सीएम ने कहा कि अगर इनका बस चले तो राष्ट्रगान जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें यूपी फिट कर लें। खराब मौसम से पंजाब में फसलें खराब हुईं लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई, जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।

पंजाब के अंतिम छोर तक पहुंचा नहरी पानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में सरकार संभालने के बाद उन्होंने पंजाब के लोगों से वादा किया था कि वह पंजाब के अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंचाएंगे, क्योंकि नहरी पानी में मिनरल्स होते हैं जो फसल के लिए अच्छे होते हैं। पहले हम 21 फीसद नहरी पानी का प्रयोग कर रहे थे, जोकि अब 74 फीसद हो चुका है। अगर इसे क्यूसिक के हिसाब से देखे तो चार वर्षों में 11,000 क्यूसिक अतिरिक्त पानी खेतों तक पहुंचा।

इसका मतलब है कि भाखड़ा नहर के बराबर पानी। इसका असर भी देखने को मिला। पंजाब में 12 ब्लाकों में पहली बार जलस्तर बढ़ गया। जब नहरी पानी खेतों में जाएगा तो किसान को ट्यूबवेल नहीं चलाना पड़ेगा। इससे भूजल भी बचेगा। पिछली सरकारों ने कभी इस पर ध्यान ही नहीं दिया। पहले तो एसी कमरों में बैठकर ही फैसले हो जाते थे। मैं जब वहां गया तो दिक्कत देखी और यह फैसला लिया।

केंद्र से काम करवाना नहीं आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को कृषि कानून वापस लेने का अब भी मलाल है। इसकी टीस भाजपा को हमेशा रहती है और इसी कारण वह पंजाब के लोगों की आवाज दबाने का प्रयास करती रहती है। इस सरकार से कोई काम निकलवाने के लिए उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है।

हमें भी पता है कि सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला, इसलिए हमने तो पूरा पंजा ही टेढ़ा किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की राह में कदम-कदम पर केंद्र सरकार बाधाएं खड़ी करती है। ग्रामीण विकास फंड का नौ हजार करोड़ रुपये अभी तक रोक रखा है।

अन्य फंड जारी करने में भी अड़चनें डाली जाती हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उड़ीसा से कोयला पंजाब लाने के लिए कहा गया कि वाया श्रीलंका, मुंद्रा पोर्ट लेकर आओ, लेकिन जब हमने यह मामला अपने तरीके से तत्कालीन कोयला मंत्री आरके सिंह के समक्ष उठाया तो उन्होंने अपना आदेश वापस लिया।

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गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी की घटनाएं 69 प्रतिशत घटीं

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पंजाब पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘गैंगस्टरां ते वार’ की सफलता केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और नशे की बरामदगी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस अभियान ने गैंगस्टर नेटवर्क की जड़ों पर प्रहार किया है, जिससे पूरे राज्य में अपराध दर में महत्वपूर्ण कमी आई है।

पंजाब पुलिस के निरंतर प्रयासों के चलते ‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के तीन महीनों के भीतर ही संगठित अपराध में भारी कमी दर्ज की गई है। राज्य में गैंगस्टरों से संबंधित हत्या के मामलों में 100 प्रतिशत कमी आई है। जहां जनवरी महीने में ऐसे चार मामले दर्ज हुए थे, वहीं मार्च में यह संख्या शून्य हो गई है।

सिर्फ हत्याएं ही नहीं, बल्कि गैंगस्टरों से जुड़ी फायरिंग की घटनाओं में भी 69 प्रतिशत की बड़ी कमी देखी गई है। वर्ष के पहले महीने में फायरिंग की 29 घटनाओं के मुकाबले 20 अप्रैल तक यह संख्या घटकर केवल 9 रह गई।

इसी तरह जबरन वसूली के मामलों में भी 10.9 प्रतिशत की कमी आई है। जनवरी में 110 मामलों के मुकाबले मार्च में यह संख्या घटकर 98 रह गई है।

टोल-फ्री एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन (93946-93946) की स्थापना के बाद, जबरन वसूली से संबंधित कॉलों की शिकायत करने के लिए अधिक नागरिक आगे आ रहे हैं। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “पंजाब पुलिस ने न केवल राज्य में अपराध दर को नियंत्रित किया है, बल्कि ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान के माध्यम से लोगों का विश्वास भी जीता है। रिकॉर्ड से पता चलता है कि अपराधी नेटवर्क को खत्म करने के लिए कितनी गंभीरता से काम किया गया है। यह तो सिर्फ शुरुआत है, क्योंकि पंजाब पुलिस गैंगस्टर कल्चर के पूर्ण उन्मूलन के लिए निरंतर कार्रवाई कर रही है।”

विश्लेषण के अनुसार, इस अवधि के दौरान जबरन वसूली के कुल मामलों में भी लगभग 11 प्रतिशत की कमी आई है। इस अभियान का प्रभाव हिंसक आपराधिक गतिविधियों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसकी सफलता केवल शहरों और जिलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में भी देखी जा रही है।

आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि संगठित अपराध में महत्वपूर्ण कमी आई है, जो पहले गैंगस्टर कल्चर के बढ़ने का एक बड़ा कारण बन रहा था।

इस संबंध में डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “यह ऑपरेशन केवल बड़े गैंगस्टरों पर नकेल कसने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब में उनके पूरे नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा रही है। छोटे अपराधों में शामिल लोगों को गैंग में भर्ती करने की संभावना अधिक होती है। ऐसे तत्वों पर सख्ती से कार्रवाई करके हमने उनके नेटवर्क को कमजोर किया है और राज्य में अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मजबूत किया है।”

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