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भगवंत मान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना लागू, हर परिवार को मिलेगा 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना लागू की है. यह योजना सुनिश्चित करती है कि राज्य के प्रत्येक निवासी को आर्थिक तंगी की चिंता किए बिना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपचार उपलब्ध हो. इस योजना के अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जाएगा, जो इसे देश की सबसे व्यापक स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करता है.

इस पहल के माध्यम से पंजाब ने बिना किसी आय सीमा या बहिष्करण शर्त के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान कर एक नया राष्ट्रीय मानक स्थापित किया है. यह योजना भारत में लागू किसी भी अन्य स्वास्थ्य बीमा योजना की तुलना में अधिक समावेशी और व्यापक है.

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना क्या है?

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना एक सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसे भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने राज्यभर में सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों के माध्यम से मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया है. इस योजना के तहत सभी इलाज खर्चों का भुगतान अस्पतालों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच सीधे किया जाता है, जिससे मरीजों को अपनी जेब से कोई भी खर्च नहीं करना पड़ता.

योजना के तहत पात्रता

यह योजना पंजाब के सभी मूल निवासियों पर लागू होती है. इसमें आय या श्रेणी आधारित सभी प्रतिबंधों को समाप्त कर इसे पूरी तरह सार्वभौमिक बनाया गया है. पंजाब की वैध वोटर आईडी वाले परिवार इस योजना के अंतर्गत पंजीकरण के पात्र हैं. 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को उनके माता-पिता या अभिभावक की वोटर आईडी के माध्यम से कवर किया जाएगा. सभी सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी तथा पंजाब सरकार के विभागों, निगमों, ट्रस्टों और सोसाइटियों में अनुबंध, आउटसोर्सिंग या कंसल्टेंसी आधार पर कार्यरत व्यक्ति भी इस योजना के पात्र हैं, योजना में कोई आय सीमा नहीं है.

कवरेज और लाभार्थी

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत लगभग 65 लाख परिवारों को हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे पंजाब के लगभग 3 करोड़ नागरिकों को कवरेज मिलेगा. प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. पूर्व में 5 लाख रुपये की सीमा को दोगुना कर इस योजना के तहत परिवारों के लिए स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा को और मजबूत किया गया है.

हेल्थ कार्ड जारी करना

इस योजना के अंतर्गत हेल्थ कार्ड कैशलेस इलाज प्राप्त करने का प्रमुख दस्तावेज होगा. ये कार्ड सुविधा केंद्रों, कॉमन सर्विस सेंटरों या आधार कार्ड एवं पंजाब की वोटर आईडी के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण द्वारा प्राप्त किए जा सकते हैं. अधिकतम पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए यूथ क्लब के प्रशिक्षित सदस्य राज्यभर में घर-घर जाकर परिवारों की सहायता करेंगे.

चिकित्सा उपचार और कवर की गई सेवाएं

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना में 2,300 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं. इनमें ऑर्थोपेडिक्स, जनरल मेडिसिन, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसी चिकित्सा विशेषज्ञताओं के अंतर्गत सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर की सेवाएं शामिल हैं. योजना में हृदय शल्य चिकित्सा, कैंसर उपचार, किडनी डायलिसिस एवं ट्रांसप्लांट, मस्तिष्क और रीढ़ की सर्जरी, घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण, मोतियाबिंद सर्जरी, प्रसूति एवं नवजात देखभाल, दुर्घटना एवं आपातकालीन सेवाएँ, आईसीयू देखभाल तथा अस्पताल में भर्ती से पहले और बाद की सेवाएं शामिल हैं. संबंधित डायग्नोस्टिक सेवाएं भी कवर की जाती हैं.

योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पताल

इस योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अस्पतालों और पंजाब के सभी मेडिकल कॉलेजों के मजबूत नेटवर्क के माध्यम से कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी. अब तक कुल 823 अस्पताल सूचीबद्ध किए जा चुके हैं. इनमें चार सरकारी मेडिकल कॉलेज, चार निजी मेडिकल कॉलेज और एक पीपीपी मॉडल पर संचालित मेडिकल कॉलेज शामिल हैं. इसके अलावा 23 जिला अस्पताल, 41 उप-मंडलीय अस्पताल और 151 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी योजना में शामिल हैं, जिस से जिला और उप जिला स्तर पर स्वस्थ संभाल तक पहुंच ओर बेहतर हुई है.

एमएमएसवाई के तहत सूचीबद्ध 559 निजी अस्पतालों का योगदान भी महत्वपूर्ण है. इनमें पीआईएमएस मेडिकल एंड एजुकेशन चैरिटेबल सोसाइटी जालंधर, आदेश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बठिंडा, चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज पठानकोट, रिमट मेडिकल कॉलेज फतेहगढ़ साहिब, ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज पटियाला, नीलम अस्पताल पटियाला, श्री गुरु राम दास चैरिटेबल अस्पताल अमृतसर, कैपिटल अस्पताल जालंधर, सोहाना अस्पताल एसएएस नगर और अमर अस्पताल एसएएस नगर प्रमुख हैं. पंजाब सरकार इस नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है.

इलाज कहां उपलब्ध होगा

लाभार्थी पंजाब भर के किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज प्राप्त कर सकते हैं. चंडीगढ़ स्थित सूचीबद्ध अस्पताल भी इसमें शामिल हैं, जिससे आवश्यकता पड़ने पर राज्य से बाहर इलाज की सुविधा भी उपलब्ध होगी.

कैशलेस इलाज कैसे मिलेगा

इलाज के लिए लाभार्थी को सूचीबद्ध अस्पताल में अपना मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना हेल्थ कार्ड प्रस्तुत करना होगा. मरीज से किसी प्रकार का भुगतान नहीं लिया जाएगा. इलाज पूरा होने के बाद अस्पताल द्वारा दावा प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका भुगतान 15 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा. निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार पहले ही बीमा कंपनी को अग्रिम प्रीमियम का भुगतान कर चुकी है.

कार्यान्वयन और वित्तीय प्रबंध

यह योजना एक हाइब्रिड मॉडल के तहत लागू की जा रही है. प्रति परिवार 1 लाख रुपये का बीमा कवरेज यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी द्वारा प्रदान किया जाता है, जबकि 10 लाख रुपये तक की शेष राशि पंजाब सरकार द्वारा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के माध्यम से वहन की जाती है. योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए 1,200 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है.

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना का उद्देश्य

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना यह सुनिश्चित करने की पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि कोई भी नागरिक केवल आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न रहे. बिना किसी भेदभाव के सार्वभौमिक और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर यह योजना पंजाब को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाती है. अधिक जानकारी और योजना के अंतर्गत पंजीकरण सहायता के लिए नागरिक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या सरकारी स्वास्थ्य सुविधा से संपर्क कर सकते हैं.

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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।

अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।

अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।

पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।

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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”

पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”

सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”

पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”

यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।

यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।

इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।

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